पूजा की कामुक हनीमून कहानी: जंगली कार सेक्स और शिमला एडवेंचर्स

पूजा की कामुक हनीमून कहानी में डूबें, शादी की रात के बाद। घर पर, रात की ड्राइव में कार सेक्स, और शिमला गेटअवे में रोहित के साथ तीव्र जुनून का अनुभव करें। दर्द भरी पहली मुठभेड़ से लेकर जंगली डॉगी स्टाइल और ओरल प्लेजर तक, यह हिंदी सेक्स स्टोरी कच्ची इच्छा, मल्टीपल ऑर्गेज्म, और नॉन-स्टॉप एक्शन को कैद करती है। भारतीय देसी चुदाई कहानियों के फैंस के लिए परफेक्ट, विस्तृत एक्सप्लिसिट सीन के साथ।

नमस्ते दोस्तों, यहां पूजा फिर से। आप सबने मेरी पिछली स्टोरी (शादी के बाद) पढ़ी होगी। थैंक्स फॉर द रिप्लाई। आप लोग तो जानते ही हो कि मेरी शादी हो चुकी है और बाकी सब कुछ भी हो चुका है। अब मैं आगे बताती हूं कि क्या-क्या हुआ। आप सब जानते ही हैं कि मेरी फिगर 34-30-32 है, रंग गोरा है। पिछली स्टोरी में आपने पढ़ा कि कैसे मेरी सुहागरात हुई। मुझे काफी पेन था। मैं भी रेडी होकर नीचे आ गई। सब लोग बाहर जा रहे थे। मैं और रोहित घर पर अकेले थे। तब भी वो गर्म था। उसने डोर लॉक किया। हम लोग सोफे पर थे। उसने वहीं मुझे पकड़ लिया। मैंने मना किया। एक तो लास्ट नाइट 4 बार किया, मेरी चूत पर भी सूजन थी, दर्द भी। मैंने भी वन पीस ड्रेस पहनी थी। ऐसे ही ऊपर उठा दी। बोला कि मैं पेन किलर स्प्रे लगा दूं। मैं भी मान गई। वो स्प्रे ले आया और मेरी पैंटी हटा कर लगा दी। मुझे कुछ आराम मिला।

लेकिन वो रुका नहीं। उसने ऐसे ही अपनी जींस की जिप खोली और लंड बाहर निकाल लिया। मैंने मना किया, वो नहीं माना। मुझे सोफे पर सेट किया। मेरी एक लेग सोफे पर थी और एक नीचे। उसने पीछे से लंड अंदर डाल दिया। एकदम गर्म था। मेरी चूत फट गई इतना बड़ा लंड एक बार में अंदर। मैं रोने लग गई दर्द से, चिल्ला रही थी। थोड़ी टाइम ऐसे ही रहे, फिर स्लोली वो धक्का देने लगा। मुझे भी मजा आने लगा। मैं भी पीछे जोर लगा रही थी। 18 मिनट तक चला, फिर मेरी चूत में सब गर्म-गर्म गिरा दिया। मैं भी थक गई थी। मैंने ड्रेस ठीक की और रूम में चली गई।

इतने में रोहित भी रूम में आ गया। तभी उसके एक फ्रेंड का कॉल आया कि सारा इंतजाम हो गया है। मैंने पूछा किस चीज का इंतजाम हुआ है। फिर पता चला कि हमारे हनीमून का। आज शाम को हिमाचल निकलना है। उसके फ्रेंड का वहां अपना घर है शिमला में। वहां कोई नहीं रहता, सारा काम करवा दिया है। मैंने कहा ठीक है। मुझे उम्मीद नहीं थी कि मैं 24 घंटे में 6 बार चुद जाऊंगी। मेरी लेग्स भी जवाब दे रही थीं। 4 पीएम को मैंने पैकिंग स्टार्ट कर दी तो रोहित ने कहा सिर्फ 2 ड्रेस लो, मेरी भी 2 ही। मैंने कहा सिर्फ एक दिन ही रहना है। उसने कहा हम वहीं जाकर शॉपिंग कर लेंगे। हम रेडी हो गए, सबको बाय-बाय किया और चल दिए।

कार के सब मिरर ब्लैक थे। रास्ते में अंधेरा हो गया। रात के करीब 9 पीएम थे। रोड पर भी कोई नहीं था। रोहित का एक हाथ मेरी जांघ सहला रहा था। ठंड भी लग रही थी। रोहित ने हीटर ऑन किया। मैंने ड्रेस भी शॉर्ट पहनी थी जो मेरी हाफ लेग्स कवर करती थी। उसका हाथ धीरे-धीरे ऊपर सरक रहा था, मेरी जांघों को सहलाते हुए पैंटी तक पहुंच गया। मैंने कहा थोड़ा तो वेट करो, लेकिन वो नहीं माना। मैंने सीट पीछे की और पैंटी उतार दी। लेग्स फैला कर बैठ गई। मैंने सोचा ऐसे ही काम चल जाएगा। मुझे नहीं पता था ये मेरी प्रॉब्लम बड़ा देगा। वो मेरी पुसी में उंगली डाल रहा था। मैं भी मस्ती में आ रही थी। मेरे मुंह से आह… आह… की आवाजें आ रही थीं। मैंने भी उसकी जिप खोली और उसका लंड हाथ में लेकर हिलाने लगी। वो भी गर्म हो रहा था। थोड़ी टाइम बाद लंड पूरा टाइट हो गया। कार एक साइड खाली रास्ते में लगा दी और कहा चलो करते हैं। मैं भी रोक न पाई। हम दोनों ने वहीं कार की सीट प्लेन कर बेड बना दिया और वहीं स्टार्ट हो गए। कार में सॉन्ग लगे थे। मैंने भी ड्रेस उतार दी। वो हाथ से मेरे बूब्स मसल रहा था। मैं भी उसका साथ दे रही थी। उसने पीछे से अपना लंड मेरी चूत में डाला। मुझे पेन भी हो रहा था और मजा भी आ रहा था। मैं मस्त हुई थी। कार भी पूरी हिल रही थी। कार में फुच-फुच की आवाजें आ रही थीं। 25 मिनट बाद जाकर उसका काम हुआ और मैं भी 3 बार झड़ चुकी थी। मैं मस्त चुदवा रही थी। फिर मैंने एक टॉवल लपेट लिया और निकल दिए। हम लोग रात 12:30 जाकर शिमला पहुंचे। मैं ऐसी ही टॉवल में निकली और घर में एंटर हो गई। घर काफी साफ और सजाया गया था। मैंने पूछा ये कैसे, उसने बोला कि उसके फ्रेंड्स ने गिफ्ट दिया है।

मेरी ड्रेस भी खराब हो चुकी थी, काफी सिलवटें थीं उस पर। मैंने दूसरी ड्रेस निकाली जो टॉप और शॉर्ट था। मैं ब्रा भी नहीं लेकर आई, पैंटी भी गंदी हो गई थी। मैंने वॉश लिया और रोहित भी आ गया। उसने ओनली अंडरवियर पहना था। मैं भी रूम में आ गई। नींद आ रही थी। हम दोनों आराम से सो गए। मॉर्निंग 11 एएम को नींद खुली तो देखा मैं किचन में गई। वहां सारा सामान था। चाय बनाई और हम दोनों ने चाय पी। मैंने अपनी ड्रेस और रोहित के कपड़े भी वॉशिंग मशीन में साफ किए। रोहित ने कहा चलो मार्केट से शॉपिंग और लंच कर आते हैं। हम दोनों मार्केट में निकल गए। वहां मैंने कुछ ड्रेस और कुछ लिंगरी ली। रोहित ने भी अपनी ड्रेस ली और कुछ मेरे लिए गिफ्ट्स लिए। मैंने भी कुछ गिफ्ट लिया। हम दोनों लंच कर घर आ गए। 4 पीएम का टाइम था। हम टीवी पर मूवी देख रहे थे।

अब स्टोरी को और बड़ा करते हैं, सेक्सीनेस पर फोकस। शाम हो रही थी, और हम दोनों घर में अकेले थे। रोहित की आंखों में फिर वही शरारत थी। मैं शॉर्ट टॉप और शॉर्ट्स में थी, ब्रा नहीं पहनी थी तो मेरे निप्पल्स हल्के से उभरे हुए थे। वो मुझे देखकर मुस्कुराया और बोला, “पूजा, तुम कितनी हॉट लग रही हो।” मैं शर्मा गई लेकिन मन ही मन खुश हुई। वो सोफे पर बैठा था, मैं उसके पास गई तो उसने मुझे अपनी गोद में खींच लिया। उसके हाथ मेरी जांघों पर फिरने लगे, धीरे-धीरे ऊपर की तरफ। मेरी सांसें तेज हो गईं। “रोहित, अभी तो लंच किया है,” मैंने कहा, लेकिन मेरी आवाज में वो मना नहीं था। वो हंसकर बोला, “तुम्हारी बॉडी देखकर भूख फिर लग गई है।” उसने मेरे टॉप को ऊपर किया और मेरे बूब्स को सहलाने लगा। उसके हाथ इतने गर्म थे, मेरी बॉडी में current दौड़ने लगे। मैंने आंखें बंद कर लीं और आह भर ली।

फिर वो मुझे किस करने लगा, पहले लिप्स पर, फिर नेक पर। उसके होंठ मेरी स्किन पर ऐसे लग रहे थे जैसे आग लगा रहे हों। मैं भी उसके बालों में उंगलियां फेर रही थी। धीरे-धीरे उसने मेरे शॉर्ट्स उतार दिए। मैं नंगी उसके सामने थी, मेरी चूत फिर गीली हो रही थी। वो नीचे झुका और मेरी चूत को चाटने लगा। उसकी जीभ का टच… ओह गॉड, इतना मजा! मैं चिल्लाई, “आह… रोहित… और…” वो और जोर से चाट रहा था, उंगली भी अंदर-बाहर कर रहा था। मैं झड़ गई, लेकिन वो नहीं रुका। फिर उसने अपना अंडरवियर उतारा, उसका लंड एकदम हार्ड था, बड़ा और मोटा। मैंने उसे हाथ में लिया और हिलाया। वो बोला, “चूसो ना…” मैंने मुंह में लिया, उसका स्वाद नमकीन था, गर्म। मैं चूस रही थी जैसे आइसक्रीम हो। वो सिसकारियां ले रहा था।

फिर उसने मुझे सोफे पर लिटाया, लेग्स फैलाए। उसका लंड मेरी चूत पर रगड़ रहा था। मैं तड़प रही थी, “डालो ना… प्लीज…” उसने एक झटके में अंदर डाल दिया। दर्द हुआ लेकिन मजा ज्यादा। वो धक्के मारने लगा, तेज-तेज। मेरे बूब्स उछल रहे थे, वो उन्हें मसल रहा था। “फक मी हार्डर…” मैं चिल्लाई। कार की तरह ही, यहां भी आवाजें गूंज रही थीं – थप-थप, फुच-फुच। 20 मिनट तक चला, मैं दो बार झड़ी। आखिर में उसने मेरी चूत में अपना गर्म माल गिरा दिया। हम दोनों पसीने से तर थे, थककर एक-दूसरे से लिपट गए।

रात को हमने डिनर किया, फिर बेड पर। वो फिर शुरू हो गया। इस बार डॉगी स्टाइल में। उसका लंड पीछे से अंदर, मेरी गांड पर थप्पड़ मारते हुए। मैं चिल्ला रही थी मजा से। पूरी रात हमने 3 बार और किया। अगली मॉर्निंग हम वापस जाने लगे, लेकिन मेरी बॉडी में अभी भी वो गर्माहट थी। दोस्तों, ये थी मेरी हनीमून की शुरुआत। बाकी स्टोरी नेक्स्ट पार्ट में।