मेरी 18 साल की भतीजी रूपा की पहली चुदाई

18 साल की मासूम कजिन रूपा की पहली चुदाई की पूरी सच्ची कहानी। अंकल ने रात में चुपके से नन्ही चूत फाड़ी, रस निकला पर मजा इतना आया कि आज भी चुदाई जारी है। गरमागरम देसी इंसेस्ट स्टोरी हिंदी में।

नमस्ते दोस्तों, मैं समीर फिर से हाजिर हूँ एक ऐसी सच्ची, जलती हुई कहानी लेकर जो आपके बदन में आग लगा देगी। लड़कों, अपना लंड अभी निकालो, हल्के-हल्के हाथ फिराओ और महसूस करो कैसे वो सख्त होता जा रहा है। और मेरी प्यारी-प्यारी लड़कियों, अपनी गर्म चूत में दो उँगलियाँ डालो, धीरे-धीरे अंदर-बाहर करो और मेरे साथ-साथ गीली होती जाओ।

आज की कहानी है मेरी दूसरी भतीजी रूपा की – उस वक्त वो अभी-अभी 18 की हुई थी, लेकिन कसम खुदा की, इतनी मासूम और इतनी कामुक थी कि एक नजर में ही लंड पागल हो जाए। उसका गोरा-गोरा रंग दूध जैसा, छोटी-छोटी चूचियाँ नींबू जितनी कसी हुईं, पतली-पतली कमर जिसे एक हाथ में समेट लो, और वो गोल-गोल, टाइट छोटी सी गांड… बस देखते ही जी चाहता था कि अभी झपट पड़ूँ और सारी रात चोदता रहूँ।

गर्मियों की छुट्टियों में रूपा अपनी मम्मी-पापा और छोटे भाई के साथ हमारे घर आई थी। पूरा दिन हम सब बाहर घूमते रहे – पार्क, मॉल, आइसक्रीम, झूले – सब कुछ। रूपा मेरे साथ सबसे ज्यादा चिपकी रहती। कभी मेरे कंधे पर सिर टिका देती, कभी मेरे हाथ को पकड़कर हँसती। मैं भी मौका देखकर उसके नरम-नरम बदन को छूता रहता – कभी पीठ पर हाथ फेरता, कभी गाल सहलाता, कभी जानबूझकर उसकी छोटी सी चूचियों से अपना सीना टकरा देता।

हर बार वो शरमाकर आँखें नीची कर लेती और होंठों पर वो हल्की सी मुस्कान बिखेर देती – बस वही मुस्कान मेरे लंड को दिन भर खड़ा रखती थी। रात के ग्यारह बज चुके थे जब हम रेस्तराँ से खाना खाकर घर लौटे। सब थककर चूर थे, जल्दी-जल्दी सोने चले गए। मेरी बीवी तो जैसे ही बेड पर गिरी, खर्राटे लेने लगी। लेकिन मेरी आँखों में नींद कहाँ? सारा दिन रूपा की वो मादक खुशबू, उसकी गर्म साँसें, उसकी नन्ही चूचियों का स्पर्श – सब मेरे दिमाग में घूम रहा था। मेरा लंड पैंट के अंदर पत्थर जैसा हो रहा था।

रूपा के मम्मी-पापा दूसरे कमरे में सोए थे। रूपा हमारे कमरे में हमारे बेटे के बगल में लेटी थी – उसे मेरा बेटा बहुत प्यारा लगता था, इसलिए वो उसके साथ ही सोना चाहती थी। रात के दो बज रहे थे। कमरे में सिर्फ नाइट लैम्प की हल्की रोशनी थी। मैंने धीरे से बीवी को देखा – वो गहरी नींद में थी। मैं चुपके से उठा, दिल की धड़कनें तेज थीं, और रूपा के बिल्कुल पास सरक गया। उसने हल्का गुलाबी सलवार-कमीज पहना था और नीचे इलास्टिक वाली छोटी सी हाफ पैंट।

उसकी साँसें एकदम धीमी और नियमित थीं – वो गहरी नींद में थी। मैंने सबसे पहले अपना हाथ उसकी छोटी सी छाती पर रखा। उफ्फ्फ… कितने नरम, कितने गर्म थे वो नींबू जैसे boobs! मैंने बहुत प्यार से, बहुत धीरे-धीरे दबाना शुरू किया। उंगलियाँ निप्पल्स के चारों ओर घूमने लगीं। वो हल्के से सिहर उठी, लेकिन आँखें नहीं खोलीं। मैंने हिम्मत बढ़ाई – उसकी कमीज़ ऊपर सरकाई और एक चूची को मुँह में लेकर चूसने लगा। जीभ से गोल-गोल घुमाता, हल्के से दाँतों से काटता। उसका निप्पल मेरे मुँह में सख्त हो गया। दूसरी चूची को उँगलियों से मसल रहा था। मेरा लंड अब तक पैंट फाड़ने को बेताब था।

फिर मैंने अपना हाथ नीचे सरकाया – उसकी पतली कमर को सहलाते हुए पैंट के इलास्टिक के अंदर घुसा दिया। जैसे ही उँगलियाँ उसकी चूत तक पहुँचीं, मुझे लगा जैसे कोई गर्म, नरम, रेशमी चीज़ छू रहा हूँ। अरे वाह! उसकी चूत पहले से ही भीगी हुई थी – पैंटी भी नहीं पहनी थी उसने। मैंने दो उँगलियाँ उसकी टाइट, छोटी सी चूत में डालीं और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। उसकी चूत इतनी कसी हुई थी कि उँगलियाँ भी मुश्किल से जा रही थीं। तभी रूपा की आँखें खुलीं।

उसने मेरी कलाई पकड़ी – मैं डर गया कि अब चीखेगी – लेकिन उसने कलाई को नहीं रोका, बल्कि और जोर से अंदर की तरफ खींच लिया। उसकी चूत ने एकदम से गर्म रस छोड़ा, जो मेरी उँगलियों पर लिपट गया। वो मेरे गले से लिपट गई, उसकी गर्म साँसें मेरे कान को छू रही थीं। मैंने उसके गुलाबी, नरम होंठों को अपने होंठों से बंद कर दिया और उसकी जीभ को चूसने लगा। वो भी पूरी तरह मदहोश थी – अपनी छोटी सी जीभ मेरे मुँह में डालकर मेरे साथ खेल रही थी। हमारी लार मिल रही थी, होंठ चिपके हुए थे।

मैंने उसके कान में फुसफुसाया, “बेबी… डाइनिंग रूम चल… यहाँ कोई उठ जाएगा।”
वो बस हल्के से सिर हिलाकर हाँ कह गई, उसकी आँखों में शर्म और भूख दोनों थीं।

मैं पहले उठकर डाइनिंग रूम में चला गया। वहाँ अंधेरा था, सिर्फ बाहर की स्ट्रीट लाइट की हल्की रोशनी आ रही थी। दो मिनट बाद रूपा चुपके-चुपके आई – उसकी आँखें चमक रही थीं, होंठ काँप रहे थे। मैंने दरवाजा अंदर से बंद किया और उसे अपनी बाहों में खींच लिया। हम दोनों पागलों की तरह एक-दूसरे को चूमने लगे – होंठ, गाल, गर्दन, कान – हर जगह। उसकी साँसें इतनी तेज थीं कि उसकी छाती मेरे सीने से टकरा रही थी। मैंने उसकी कमीज़ ऊपर से खींचकर उतार दी – ब्रा नहीं थी, बस वो दो नन्ही, गुलाबी चूचियाँ काँप रही थीं। मैंने एक को मुँह में लिया, दूसरे को उँगलियों से मसलने लगा।

वो “उम्म्म… अंकल…” की आवाजें निकाल रही थी। फिर मैंने उसकी पैंट नीचे सरका दी। उफ्फ्फ क्या नजारा था! बिल्कुल गुलाबी, चिकनी, छोटी बच्चियों जैसी चूत – एक भी बाल नहीं, दोनों होंठ आपस में चिपके हुए, बीच में हल्की सी गीली लकीर, जैसे अभी-अभी फूल खिला हो।

मैंने उसे डाइनिंग टेबल पर लिटाया, उसकी पतली-पतली टांगें फैला दीं और घुटनों के बल बैठ गया। पहले तो मैंने उसकी चूत को नाक से सूँघा – कितनी मीठी, हल्की सी मादक खुशबू थी। फिर जीभ से एक लंबा चाटा मारा – ऊपर से नीचे तक। वो तड़प कर सिहर उठी। जैसे ही मैंने जीभ उसकी चूत के अंदर डाली, वो अपने दोनों हाथों से मेरे सिर को अपनी चूत पर दबा दिया। मैंने जीभ से चोदना शुरू किया – कभी अंदर तक, कभी क्लिट पर गोल-गोल घुमाता। वो “आह… आह… अंकल… मर गई… ओह गॉड…” की सिसकारियाँ ले रही थी। दो मिनट में ही उसकी कमर ऊपर उठी, चूत ने जोर से रस छोड़ा – मैंने सारा रस चाटकर पी लिया, एक बूंद भी नहीं छोड़ी।

अब मेरी बारी थी। मैं खड़ा हुआ, पैंट-अंडरवियर नीचे किया और अपना 7 इंच का मोटा, तनकर लाल हो चुका लंड उसके मुँह के पास ले गया। वो बिना कुछ कहे, बिना शरमाए मुँह खोलकर उसे अंदर ले लिया। पहली बार था उसने किसी लंड को चूसा था, फिर भी वो इतनी भूखी थी कि आधा लंड एक झटके में गले तक ले गई। मैंने उसके सिर को पकड़कर धीरे-धीरे चोदना शुरू किया। वो खाँस रही थी, आँखों में पानी आ गया था, फिर भी नहीं छोड़ रही थी। एक हाथ से मैं उसकी चूचियाँ मसल रहा था, दूसरी उँगली उसकी चूत में डालकर चोद रहा था।

अब मैं और बर्दाश्त नहीं कर पाया। मैंने उसे फिर टेबल पर लिटाया, अपनी अलमारी से तेल की छोटी शीशी निकाली और अपने लंड पर अच्छी तरह मला। फिर उसकी चूत पर भी तेल लगाया – उंगलियों से अंदर तक। वो खुद अपनी टांगें चौड़ी करके, कमर ऊपर उठाकर कह रही थी, “अंकल… जल्दी… डाल दो… सह नहीं पा रही…”

मैंने लंड का सुपारा उसकी चूत पर रखा और पहला धक्का मारा। सिर्फ सुपारा अंदर गया और रूपा “आssssss… माँँँ…” करके सिसक उठी। उसकी आँखों में आँसू आ गए। मैंने उसके होंठ चूमकर बंद कर दिए और धीरे-धीरे, प्यार से ५-६ धक्कों में अपना पूरा ७ इंच का मोटा लंड उसकी नन्ही चूत में उतार दिया। थोड़ा सा रस निकला, लेकिन वो दर्द से ज्यादा मजे में थी। उसकी चूत इतनी टाइट थी कि मुझे लगा जैसे कोई गर्म, नरम मखमल का हाथ मेरे लंड को जोर से पकड़े हुए है।

मैंने धीरे-धीरे चोदना शुरू किया। पहले 10-15 धीमे धक्के, फिर स्पीड बढ़ाई। वो भी अपनी पतली कमर ऊपर उठा-उठाकर पूरा साथ दे रही थी। उसकी छोटी-छोटी चूचियाँ उछल रही थीं, उसकी सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं – “आह… अंकल… और जोर से… फाड़ दो मेरी चूत… उफ्फ्फ… मर गई… आह आह आह… मजा आ रहा है… और तेज…”

ये सुनकर मैं पागल हो गया। मैंने उसकी दोनों टांगें अपने कंधों पर रखीं और पूरी ताकत से चोदने लगा। टेबल हिल रही थी, मेरे अंडकोष उसकी गांड से टकरा रहे थे – थप-थप-थप की आवाजें आ रही थीं। करीब 20-25 मिनट की खतरनाक चुदाई के बाद मैं झड़ने वाला था। मैंने पूछा, “बेबी… कहाँ निकालूँ?”

वो हाँफते हुए बोली, “अंदर… पूरा अंदर… मुझे अपना बना लो अंकल…”

मैंने आखिरी 8-10  जोरदार धक्के मारे और सारा गर्म, गाढ़ा माल उसकी नन्ही चूत के सबसे अंदर उड़ेल दिया। उसी वक्त उसकी चूत ने भी तीसरी बार रस छोड़ा – हम दोनों एक साथ झड़े। मैं उसके ऊपर ढेर हो गया, हमारी साँसें एक-दूसरे में मिल रही थीं।

थोड़ी देर बाद वो मेरे कान में फुसफुसाई, “अंकल… जिंदगी में पहली बार इतना मजा आया… अब जब भी बुलाओगे, मैं भागी चली आऊँगी।”

उस रात के बाद जब भी मौका मिला, मैंने रूपा की चुदाई की – कभी बाथरूम में, कभी रात को छत पर, कभी कार में। आज उसकी शादी हो चुकी है, बच्चा भी है, लेकिन जब भी वो हमारे घर आती है, कोई न कोई बहाना बना लेती है कि रात अंकल के साथ बिताए। और मैं आज भी उसकी अब भी टाइट, गर्म चूत में अपना लंड डालकर उन पुरानी यादों को ताजा कर लेता हूँ।

बोलो यार… मजा आया ना? लंड फट गया क्या? चूत भीग गई क्या? कमेंट करके बताओ…