Naukrani se Rakhel, Phir Malkin: Suhagrat ke Dard se High-Society Rani tak
एक गरीब गाँव की सोलह साल की लम्बी-पतली महाराष्ट्रीयन लड़की की असली सेक्स कहानी। सुहागरात का दर्द, सेठ का बड़ा लौड़ा, रखैल बनना, ऑफिस में चुदाई और आखिर में हाई-सोसाइटी की रानी बनने तक की गरमागरम देसी सेक्स स्टोरी। पूरी कहानी हिंदी में।
मैं एक सोलह साल की लम्बी, पतली महाराष्ट्रीयन गाँव की लड़की थी। मेरा कद 5 फुट 7 इंच था, रंग गेहुंआ सांवला – न ज्यादा गोरा, न ज्यादा काला, बल्कि वो चमकदार सांवलापन जो धूप में चमकता है। लेकिन मेरा जिस्म… ओह, वो ऐसा था कि देखने वाले की नजरें अपने आप अटक जातीं। मेरे गोल-गोल, तने हुए चुचे, जो ब्लाउज में भी उभरे हुए लगते, बड़े नुकीले निप्पल्स जो कपड़े के ऊपर से भी साफ दिखते। पतली-पतली कमर, जो एक हाथ से घेर ली जाए, और नीचे भारी, गोल-मटोल चूतड़ जो चलते वक्त लहराते।
लम्बी, सीधी टांगें जो घुटनों से नीचे और भी पतली हो जातीं। चेहरा अंडाकार, बड़ी-बड़ी तिरछी आँखें जो जैसे किसी को घूरती हों, नाक नुकीली और थोड़ी ऊपर उठी हुई, होंठ रसीले और गुलाबी, दाँत मोतियों जैसे चमकदार।
गाँव में लोग मुझे पारंपरिक सुंदरता वाली नहीं कहते थे – नाक-नक्श ठीक-ठाक, लेकिन वो जिस्म… सोलह की उम्र में ही मर्दों की नजरें मुझे चुपके-चुपके नापने लगी थीं। खेतों में काम करते वक्त, नदी किनारे नहाते वक्त, उनकी आँखें मेरे बदन पर फिसलतीं, और मैं शर्मा कर सिर झुका लेती।
हमारी हालत बहुत खराब थी। मम्मी-पापा खेतों में मजदूरी करते, दो छोटे भाई थे, पेट भर खाना भी मुश्किल से मिलता। मैं स्कूल जाती थी, पढ़ने में बहुत तेज थी। मराठी तो जैसे मुँह से फूटती थी, अंग्रेजी के कुछ शब्द भी जानती थी – स्कूल में टीचर ने सिखाए थे – लेकिन ज्यादा नहीं। मम्मी-पापा को डर था कि मेरी ऊँचाई और ये स्मार्टनेस की वजह से गाँव में अच्छा लड़का नहीं मिलेगा।
लड़कियाँ छोटी और गोरी चाहिए होती हैं यहाँ। इसलिए जल्दी से शादी ठिकाने लगा दी। दूल्हा तीस साल का विधुर था, शहर में छोटी-मोटी नौकरी करता था। पीले दाँत, गंजा सिर, मेरे ही कद का, पेट थोड़ा सा निकला हुआ। शादी की रात मैं डर के मारे काँप रही थी। कमरे में मिट्टी के तेल की लालटेन जल रही थी, हवा में घुटन। उसने शराब पी रखी थी, साँस से दारू की तेज बू आ रही थी।
उसने मुझे चूमने की कोशिश की, उसके गीले होंठ मेरे गाल पर लगे, मैं घबरा कर पीछे हटी। लेकिन चुप रही – गाँव की लड़कियाँ यही सीखती हैं। फिर उसने मेरी साड़ी उठाई, ब्लाउज के हुक खोले (ब्रा तो हम गरीबों के पास कहाँ होती थी) और मेरे नंगे चुचों को दोनों हाथों से मसलना शुरू किया। निप्पल्स को उँगलियों से मरोड़ा, फिर दाँतों से काटा। दर्द से मेरी आँखों में आँसू आ गए, लेकिन मैं चीख नहीं सकी क्योंकि उसने मुँह पर हाथ रख दिया।
फिर उसने अपना पैंट खोला, मोटा, छोटा लण्ड बाहर निकाला और मेरी चूत में ठूँस दिया। लगा जैसे कोई गर्म लोहे की रॉड अंदर घुस रही हो। मैंने कभी कुछ किया नहीं था, चूत बिलकुल कसी हुई। दर्द इतना कि साँस रुक गई, मैं बेहोश होने की कगार पर थी। थोड़ी देर धक्के मारने के बाद उसने झनझना कर मेरे अंदर अपना गरम माल छोड़ा और खर्राटे मारकर सो गया। मैं रात भर दर्द और सदमे में रोती रही, पैरों के बीच योनी रस और वीर्य का मिश्रण बहता रहा।
शादी के दो दिन बाद हम मुंबई आ गए। नागपाड़ा की एक गंदी, बदबूदार चाल में छोटा सा कमरा। फिर मालिक ने मेरे पति को लोनावला वाले बंगले का केयरटेकर बना दिया। वहाँ नौकरानी की कोठी में रहने लगे। बंगला बहुत बड़ा और शानदार था – स्विमिंग पूल, लायब्रेरी, हर कमरे में एसी। मैं घर साफ करती, बर्तन माँजती, पति बागीचा देखता। खाली समय में लायब्रेरी में जाती, मोटी-मोटी अंग्रेजी किताबें पलटती। डिक्शनरी देख-देख कर मुश्किल शब्द पढ़ने की कोशिश करती। धीरे-धीरे अंग्रेजी सुधरने लगी।
एक वीकएंड पर मालिक आए। नाम था रमेश सेठ, उम्र करीब 48-50, गोरे, थोड़े भारी, लेकिन रुतबे वाले। सूट पहने, महँगा परफ्यूम, आवाज में दबदबा। पति ने मुझे उनसे मिलवाया। उनकी नजरें मेरे जिस्म पर ऐसे टिकीं जैसे कोई भूखा शेर शिकार देखता हो। रात को डिनर परोसने गई तो पति को शराब पिला-पिला कर बेहोश कर दिया था। सेठजी ने कहा, “इसे ले जाओ, सोने दो। तुम वापस आओ।”
मैं डरते-डरते वापस गई। वो बड़े हॉल में म्यूजिक चला कर बैठे थे – धीमी, रोमांटिक वाली। मुझे देखते ही मुस्कुराए, “नाचना आता है?” मैं शरमा कर मुस्कुराई, सिर झुका लिया। वो उठे, मेरे पास आए, एक हाथ मेरी कमर पर रखा, दूसरा हाथ मेरे हाथ में लिया और धीरे-धीरे नाचने लगे। मैं अकड़ी हुई थी, दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।
उनका परफ्यूम, वो महँगी खुशबू, उनका गर्म जिस्म मेरे जिस्म से सट रहा था। मेरे चुचे उनकी चौड़ी छाती से दब रहे थे, निप्पल्स सख्त हो गए थे। धीरे-धीरे मेरे अंदर कुछ पिघलने लगा – वो गर्माहट जो पैरों के बीच तक पहुँच रही थी।
फिर अचानक उन्होंने मुझे गोद में उठा लिया – मैं हल्की थी उनके लिए – और अपने बेडरूम में ले गए। मैं डर गई, “सेठजी… नहीं… प्लीज… मैं बर्बाद हो जाऊँगी…” रोने लगी। लेकिन वो नहीं माने। बेड पर लिटाया, मेरे ऊपर झुके, गहरा किस किया। पहली बार किसी ने मेरे होंठों को ऐसे चूमा – उनकी जीभ मेरे मुँह में घुसी, मेरी जीभ से लिपट कर खेलने लगी। स्वाद मीठा, गर्म। मैं लड़ रही थी, हाथ-पैर चला रही थी, लेकिन धीरे-धीरे मेरी ताकत खत्म हो गई। मैंने हथियार डाल दिए।
उन्होंने अपने सारे कपड़े उतारे। उनका लण्ड देख कर मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं – नौ इंच लम्बा, मोटा, नसों वाला, सख्त जैसे लोहे का। सुपारा चमकदार गुलाबी। फिर उन्होंने प्यार से मेरी साड़ी खींची, ब्लाउज के बटन खोले, पेटीकोट का नाड़ा ढीला किया। मैं पूरी नंगी हो गई। उन्होंने मेरे नंगे जिस्म को सहलाया – उँगलियाँ मेरी कमर पर, चूतड़ों पर फिरीं। चुचियों को चूमा, निप्पल्स को मुँह में लेकर चूसा – जीभ से गोल-गोल घुमाया। मैं सिहर उठी। फिर नाभि पर जीभ फेरी, और नीचे… मेरी चूत पर मुँह लगा दिया।
उनकी गर्म साँसें, जीभ की चाट… ओह, वो एहसास! चूत के दानों को चूसा, जीभ अंदर तक घुसाई। मैं तो पागल हो गई। पहली बार चूत में इतनी आग लगी कि मैंने खुद कमर उठा दी और झनझना कर झड़ गई – रस की बौछार उनके मुँह पर।
वो ऊपर आए, प्यार से बोले, “रानी, डर मत, मैं तुझे स्वर्ग दिखाऊँगा।” फिर धीरे-धीरे अपना लण्ड मेरी चूत में सरकाया। दर्द था, लेकिन वो दर्द भी मीठा था – जैसे कोई खालीपन भर रहा हो। वो अंदर-बाहर करने लगे, हर धक्के में गहराई तक। मैंने पहली बार सेक्स का असली मजा चखा। मैंने खुद पैर फैलाए, उनकी कमर पर लपेट लिए।
वो मेरी आँखों में देखते हुए चोद रहे थे। मैंने कहा, “सेठजी… आँखें मत बन्द करो… मुझे देखो… और मजा आएगा।” वो हँसे, और तेज हो गए। उनका लण्ड मेरी चूत को फाड़ता हुआ अंदर-बाहर। मैं चीखी, नाखून उनकी पीठ पर गाड़ दिए और फिर से झड़ गई – इस बार और जोर से। थोड़ी देर बाद वो भी मेरे अंदर पिचकारी मार कर मेरे पास लेट गए, उनका गरम माल मेरी चूत से रिसता रहा।
रात भर वो मुझे प्यार करते रहे। कभी मैं ऊपर चढ़ कर उनका लण्ड चूसी – पहली बार मुँह में लिया, नमकीन स्वाद, नसें जीभ पर महसूस हुईं। कभी वो ऊपर, मेरे पैर कंधों पर रख कर जोर-जोर से ठोके। मुझे चूमते, सहलाते, कहते, “रानी, तू अनमोल है… तेरी चूत स्वर्ग है।” पहली बार लगा कि सेक्स सिर्फ दर्द नहीं, सुख भी है – वो सुख जो पूरे बदन में फैल जाता है। सुबह उठी तो दिल में उनके लिए प्यार उमड़ आया, और चूत में हल्का दर्द लेकिन मीठी थकान।
उसके बाद तो वो अक्सर आने लगे। मेरे पति को कभी शहर भेज देते, कभी नशे में धुत कर देते। मैं सेठजी की रखैल बन गई। उन्होंने मुझे नई-नई सिल्क की नाइटी दिलवाई, लेस वाली ब्रा-पैंटी, टाइट सलवार-कमीज जो मेरे चूतड़ों को और उभारतीं। मुझे सिखाया कि औरत अपने जिस्म से कितना कुछ हासिल कर सकती है – कैसे नजरों से बुलाए, कैसे छुअन से पागल करे।
एक दिन उन्होंने मेरे पति को शहर ट्रांसफर करवा दिया और मुझे अपने साथ मुंबई ले गए। बड़ा फ्लैट, वर्ली में सी-व्यू वाला। मुझे टाइपिंग, कम्प्यूटर, फर्राटेदार अंग्रेजी, ऑफिस मैनेजमेंट सिखवाया। मैं तेजी से सीखी – रातों को किताबें पढ़ती, दिन में प्रैक्टिस। जल्दी ही मैं उनकी पर्सनल सेक्रेटरी बन गई।
ऑफिस में सब मुझे “मैडम” कहते, कोई नहीं जानता था कि लंच ब्रेक में मैं सेठजी के केबिन में घुटनों पर बैठ कर उनका लण्ड चूसती हूँ – गले तक ले कर, आँखों में देखते हुए। या टेबल पर लेट कर पैर फैला कर चुदवाती हूँ, मेरी चीखें बाहर न जाएँ इसलिए मुँह पर उनका हाथ।
बड़े-बड़े क्लाइंट्स को मैं “एंटरटेन” करती। एक जिद्दी जापानी क्लाइंट था, मैंने उसे ताज के सुईट में ले जा कर पूरी रात चोदा – कभी डॉगी स्टाइल, कभी रिवर्स काउगर्ल, सुबह वो कॉन्ट्रैक्ट साइन करके गया और मुझे मोटा कमीशन मिला। धीरे-धीरे मेरी चूत ही कंपनी की सबसे बड़ी सेल्स टूल बन गई – मीटिंग के बाद होटल के कमरे, मेरे निप्पल्स चूसते हुए डील फाइनल।
आज मैं 28 की हूँ। सेठजी की कंपनी में टॉप एग्जीक्यूटिव हूँ, शेयरहोल्डर भी। अपना पेंटहाउस, डिजाइनर कपड़े, डायमंड्स। मेरे पति अब लोनावला में पान-सुपारी की दुकान चलाते हैं, मैं उन्हें हर महीने मोटा खर्चा भेजती हूँ। वो खुश हैं – उन्हें पता है, लेकिन चुप हैं। मम्मी-पापा को भी पैसे भेजती हूँ, गाँव में नया मकान बनवाया।
एक नया बॉयफ्रेंड है – 35 का रिच कंसल्टेंट, हैंडसम, जिम बॉडी। शादी का प्रस्ताव रखा है। सोच रही हूँ पुरानी शादी को तलाक दे दूँ या थोड़ा और मौज कर लूँ। सेठजी आज भी मुझे चोदते हैं – कभी उनके ऑफिस में, कभी उनके यॉट पर। आज भी मेरे दीवाने हैं, कहते हैं, “रानी, तेरी चूत का जादू कभी पुराना नहीं होता।”
गाँव की वो डरी-सहमी, मासूम लड़की अब सोसाइटी की क्वीन बन चुकी है। जिस्म भी मेरा, खेल भी मेरा, और सारी दुनिया की चाबी भी मेरे हाथ में। मैं जो चाहूँ, हासिल कर सकती हूँ – बस एक मुस्कान, एक छुअन, एक रात।