Biwi So Rahi Thi Aur Sasu Maa Damad Se Chut Chudwa Rahi Thi
रोशन की सासू माँ सहनाज़ के साथ हुई वो अविस्मरणीय हॉट नाइट की पूरी कहानी। साइमा की माँ का सेक्सी फिगर, कार में छेड़खानी, नींद की गोली का बहाना और फिर चूत-गांड दोनों में जोरदार चुदाई। देसी फैमिली सेक्स की ये इरोटिक स्टोरी पढ़कर आप भी तड़प उठेंगे। फुल पैशनेट इंसेट सेक्स स्टोरी हिंदी में।
हाय फ्रेंड्स, मैं रोशन हूँ, मुंबई से। उम्र 32 साल, शादीशुदा हूँ और एक प्यारी सी बेटी है। मेरी शादी साइमा से हुई है, जो रिश्ते में मेरी दूर की बहन लगती है। शादी के बाद कुछ फैमिली ड्रामा हुआ था, लेकिन समय के साथ सब सेटल हो गया। मैं सेक्स को बहुत एंजॉय करता हूँ – पहली रात से ही साइमा के साथ खूब मस्ती की थी। हमारी सेक्स लाइफ शुरू से ही पैशनेट रही, और जल्दी ही साइमा प्रेग्नेंट हो गई। साइमा ने अपनी माँ, यानी मेरी सासू माँ, को मेरे बारे में काफी कुछ बताया था – कि मैं बेड में कितना हॉट और पैशनेट हूँ, कितनी देर तक कर सकता हूँ और कितना मज़ा देता हूँ।
मेरी सासू माँ का नाम सहनाज़ है, उम्र करीब 42 साल। लेकिन उनका फिगर देखकर कोई नहीं कह सकता कि वो इतनी उम्र की हैं। 36-34-38 का परफेक्ट कर्वी बॉडी, गोरी त्वचा, सेक्सी आँखें और थोड़ी छोटी हाइट जो उन्हें और भी क्यूट और अट्रैक्टिव बनाती है।
कई बार मन में ख्याल आता था कि साइमा से शादी करके शायद गलती कर दी, क्योंकि उनकी माँ तो पूरा का पूरा फटाका लगती थीं – वो हेवी ब्रेस्ट, पतली कमर और गोल-मटोल गांड जो साड़ी में भी कमाल की लगती थी। मैं ससुराल कम ही जाता था, लेकिन कभी-कभी सिर्फ उनका फिगर निहारने का मन होता तो बहाना बनाकर चला जाता।
एक बार ससुर जी ने ज़िद पकड़ ली कि पुणे चलो, कमराली दरगाह पर माथा टेकने। मैं मना नहीं कर सका। हम अपनी कार से गए – ससुर जी ड्राइव कर रहे थे, मैं उनके बगल में फ्रंट सीट पर। साइमा और सासू माँ मिडिल रो में, और मेरा साला सबसे पीछे। बेटी रास्ते में बहुत शरारतें कर रही थी, तो साइमा ने सीट चेंज की। अब सासू माँ मेरे बगल में आ बैठीं।
उनकी गर्म-गर्म जाँघें मेरी जाँघों से टच हो रही थीं – इतनी सॉफ्ट, मुलायम और हॉट कि मेरा लंड तुरंत सख्त हो गया। मैं बार-बार हाथ से उसे दबा रहा था छिपाते हुए, और वो मुझे चुपके से देख रही थीं, मुस्कुरा रही थीं और और भी करीब चिपककर बैठ गईं। उनकी साड़ी का पल्लू थोड़ा सरक गया था, और उनके ब्रेस्ट की साइड मेरे बाजू से रगड़ खा रही थी। लग रहा था जैसे वो जानबूझकर इशारे दे रही हों।
नाश्ते के ब्रेक में जब हम रुके, तो मैंने साइमा से अकेले में पूछा, “तूने मेरे सेक्स के बारे में किस-किस को बताया है?” वो शरमाते हुए बोली, “बस मम्मी को। वो पूछ रही थीं कि तुम कैसा लड़का हो, तो मैंने बता दिया।” बस, मुझे सब समझ आ गया – सासू माँ को मेरे बारे में सब पता है, और वो इंटरेस्टेड लग रही हैं।
वापसी के रास्ते में तो हद हो गई। सासू माँ ने अपने नंगे पैरों से मेरे पैर सहलाने शुरू कर दिए, कभी जाँघ पर छूते हुए। उनके ब्रेस्ट मेरे बाजू से बार-बार दब रहे थे। मैंने मन ही मन सोचा, ये तो मुझे पूरी तरह चाहती हैं। पुणे पहुँचते ही पता चला कि ससुर जी की माँ अचानक बीमार पड़ गई हैं, तो वो वहीं रुक गए।
मुझे सोमवार को ऑफिस था, इसलिए हम तीनों – मैं, साइमा और सासू माँ – मुंबई वापस आ गए। सासू माँ ने तबीयत का बहाना बनाकर हमारे साथ आना चाहा। ससुर जी बोले, “ठीक है, कल शाम तक मैं भी आ जाऊँगा।”
रात के 9:30 बजे हम घर पहुँचे। रास्ते की थकान से बेटी बहुत परेशान कर रही थी, साइमा भी पूरी तरह थक चुकी थी। सासू माँ ने किचन में जाकर साइमा के लिए कॉफ़ी बनाई और बोलीं, “पी लो बेटी, अच्छी नींद आएगी।” बेटी भी जल्दी सो गई। अब घर में सिर्फ मैं और सासू माँ जाग रहे थे।
मैं ड्रॉइंग रूम में टीवी देख रहा था। सासू माँ बोलीं, “मैं नहा कर आती हूँ।” वो बाथरूम गईं। मैं किचन में पानी पीने गया तो दरवाजा थोड़ा खुला था – मैंने झाँका और देखा वो नहा कर नंगी ही बाहर निकल रही थीं, टॉवल लपेटे बिना दूसरे रूम की तरफ जा रही थीं।
उनका वो नंगा फिगर देखकर मेरा दिमाग घूम गया – परफेक्ट गोल ब्रेस्ट जो अभी भी टाइट थे, पतली कमर, और वो गोल-मटोल गांड जो हिल रही थी। मेरा लंड लुंगी में पूरी तरह टाइट हो गया। मैं वापस सोफे पर आकर बैठ गया, दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।
सोने का समय हो गया। गर्मी की वजह से हम सब ड्रॉइंग रूम में ही फर्श पर बिस्तर लगा कर सोते हैं। मैंने बेटी और साइमा को एक साइड में सुलाया, खुद उनके पास लेट गया। सासू माँ बेड पर थीं।
आधी रात को अचानक मुझे लगा कोई मेरे पास आकर लेट रहा है। मैं गहरी नींद में था, सोचा साइमा है, तो मैंने हाथ डाल दिया। लेकिन वो मेरा हाथ लेकर अपने ब्रेस्ट पर रख दिया और सहलाने लगीं। दूसरे हाथ से मेरी लुंगी के अंदर हाथ डालकर मेरा लंड मसलने लगीं – धीरे-धीरे, लेकिन बड़े प्यार से।
मैं अचानक जागा तो देखा – सासू माँ! मैं चौंक कर बोला, “सहनाज़ आपा, ये क्या कर रही हैं?” वो मेरे कान में फुसफुसाईं, “रोशन, मैं तुमसे बहुत दिनों से तड़प रही हूँ। साइमा ने जो बताया, वो सुनकर मैं पागल हो गई। अब और बर्दाश्त नहीं होता। मुझे चाहिए तुम – पूरा का पूरा।”
मैंने सोचा, जो मन में सालों से चल रहा था, वो खुद माँग रही हैं। फिर भी डरते हुए पूछा, “साइमा जाग गई तो?” वो शरारती मुस्कान के साथ बोलीं, “उसकी कॉफ़ी में मैंने नींद की गोली डाल दी थी। वो सुबह तक नहीं जागेगी, और बेटी भी गहरी नींद में है।”
हम चुपके से दूसरे बेडरूम में चले गए और बेड पर आ गए। मैं उन पर टूट पड़ा – उनके गुलाबी, मुलायम होठों को किस करने लगा। किस इतना गहरा और पैशनेट कि उनकी साँसें तेज़ हो गईं। उनके भारी ब्रेस्ट मेरी छाती से दब रहे थे।
मैंने लगातार 10 मिनट तक किस किया – लिप्स, गाल, कान, नेक सब जगह। वो सिसकारियाँ भर रही थीं। बोलीं, “रोशन, नीचे भी किस करो ना… होठ सूज जाएँगे।” मैंने हँसकर कहा, “जो मेरा मन करेगा, वैसा ही करूँगा। आज तुम मेरी हो।”
फिर मैंने उनकी नेक को चाटते हुए एक हाथ से ब्रेस्ट मसलना शुरू किया। वो मेरी लुंगी के ऊपर से लंड सहला रही थीं और बोलीं, “वाह, कितना बड़ा और सख्त लग रहा है… धीरे करना प्लीज़।”
मैंने धीरे-धीरे उनके कपड़े उतारे – पहले साड़ी, फिर ब्लाउज़, ब्रा। उनके ब्रेस्ट बाहर आए – गुलाबी निप्पल्स, टाइट और भारी। मैंने उन्हें मुँह में लेकर चूसने लगा, कभी हल्के से काटते हुए। वो आहें भरने लगीं – “आआह… रोशन… कितना अच्छा लग रहा है…” फिर पेटीकोट और पैंटी। पैंटी पूरी गीली थी, खासकर चूत के हिस्से में। उतारते वक्त टाइट लगी क्योंकि इतना रस बह रहा था।
उनकी चूत एकदम क्लीन शेव थी, गोरी त्वचा पर डार्क ब्राउन लिप्स और पिंक होल से रस टपक रहा था। खुशबू इतनी मदहोश करने वाली कि मैं पागल हो गया।
मैं नीचे गया, चूत के रस को जीभ से चाटकर पिया – थोड़ा नमकीन, लेकिन उनकी बॉडी की स्मेल ने मुझे और उत्तेजित कर दिया। जीभ अंदर डालकर चाटने लगा, क्लिटोरिस को मुँह में लेकर चूसने और हल्के काटने लगा। वो अपने ब्रेस्ट खुद मसल रही थीं, कमर उछाल रही थीं, मेरे सिर को अपनी जाँघों से दबा रही थीं।
उनकी सिसकारियाँ तेज़ हो गईं – “आआआह… येस बेटा… और जोर से… वाओओओ…”
फिर मैंने 69 पोज़िशन बनाई। कहा, “अब मेरा लंड चूसो।” पहले वो शरमाईं, बोलीं, “कभी नहीं किया।” लेकिन फिर मान गईं। मैंने उनकी चूत में दो उंगलियाँ डालीं – टाइट, गर्म और पूरी गीली।
हम दोनों एक-दूसरे को चाटने-चूसने लगे। वो मेरे लंड को मुँह में लेकर चूस रही थीं, कभी गलती से दाँत लग जाते लेकिन फिर बेहतर करती गईं। उनकी आवाज़ें दबी हुई थीं – “मम्म्म… आआह… कितना मजा आ रहा है…”
वो पहले झड़ गईं, उनका रस मेरे मुँह में आया। मैंने सब पी लिया। वो हाँफते हुए बोलीं, “आज तक कभी इतना ऑर्गेज़म नहीं हुआ। तुम कमाल हो।”
मेरा लंड फिर पूरी तरह कड़क। मैंने तीन उंगलियाँ ट्राई कीं, लेकिन अभी भी टाइट थी। बोला, “रेडी हो जाओ सहनाज़, अब असली मजा।” वो लंड हाथ में लेकर बोलीं, “इतना मोटा और लंबा… कैसे जाएगा?” मैंने कहा, “डरो मत, धीरे-धीरे मज़ा आएगा।”
उनके पैर फोल्ड करके फैलाए, तकिया गांड के नीचे रखा। लंड का सुपारा चूत पर रगड़ा – वो तड़प उठीं, “अब मत तड़पाओ रोशन… डाल दो… जोर से चोदो मुझे… फाड़ दो मेरी चूत को!”
एक जोरदार झटके में पूरा 7 इंच अंदर घुसा दिया। वो चीख पड़ीं, “आआआह… निकालो… दर्द हो रहा है!” लेकिन मैं रुका नहीं। ब्रेस्ट मसलते हुए धीरे-धीरे आगे-पीछे करने लगा। कुछ मिनट बाद दर्द मज़े में बदल गया। वो खुद गांड उछालकर साथ देने लगीं – “हाँ… और जोर से… फाड़ दो… रगड़ो अंदर तक!”
मैंने स्पीड बढ़ा दी। रूम में फच-फच-फच की आवाज़ें गूँज रही थीं। वो दो बार और झड़ चुकी थीं। मैंने पूछा, “कहाँ झड़ूँ?” वो बोलीं, “अंदर ही… पूरी भर दो… मुझे तुम्हारा माल चाहिए।”
फिर डॉगी स्टाइल में घुसाया। उनकी गांड पकड़कर जोर-जोर के धक्के मारने लगा। आखिरी 15-20 ठोकें इतने तेज़ थे कि बेड हिल रहा था। वो चीख रही थीं मज़े से। आखिरकार मैं उनकी चूत के सबसे अंदर पूरी पिचकारी मार दी। वो तड़प उठीं, “आआह… जलन हो रही है… लेकिन कितना मज़ा आया!”
लंड निकाला तो उस पर खून की हल्की लकीरें, स्पर्म और उनका रस मिला हुआ था। हम दोनों नहाने गए, एक-दूसरे को साबुन से धोया, किस किया। फिर बेड पर चिपककर लेट गए। वो बोलीं, “देखो, कितनी सूज गई है मेरी चूत… तुमने तो बर्बाद कर दिया।”
बस 20 मिनट बाद मेरा लंड फिर खड़ा। मैंने कहा, “अब गांड मारने का मन है।” पहले वो मना करती रहीं, लेकिन मेरे किस और चाटने से मान गईं। पहले उन्होंने मेरा लंड चूसकर पूरी तरह कड़क किया। मैंने उनकी गांड चाटी, चूत का रस लगाकर लुब्रिकेशन बनाया। फिर डॉगी में धीरे से घुसाया – पहले सिर्फ सुपारा, फिर पूरा। वो दर्द से चीखीं, लेकिन जल्दी ही मज़ा लेने लगीं – “हाँ… मारो… पूरी घुसाओ… आआह… कितना अच्छा लग रहा है!”
पोज़िशन बदल-बदल कर 25 मिनट तक गांड मारी। आखिर में मैं उनकी गांड में ही झड़ गया।
उस रात मैंने उन्हें कुल तीन बार चूत में और दो बार गांड में चोदा। हर बार वो और भूखी होती गईं। सुबह वो ठीक से चल नहीं पा रही थीं। साइमा ने पूछा तो बोलीं, “रास्ते में फोड़ा हो गया है, दर्द हो रहा है।”
बस यही थी हमारी वो अविस्मरणीय हॉट नाइट – जो आज भी याद करके लंड खड़ा हो जाता है।