गुलाबी चाची की गंदी बातें और चुदाई – दोस्त की माँ बनी निजी रखैल

Gulabi Chachi Ki Gandi Baatein Aur Chudai – Dost Ki Maa Bani Niji Rakhel

राहुल की नजर हमेशा पड़ोस की 52 साल की गुलाबी चाची पर थी – बड़े-बड़े स्तन, भारी कूल्हे और तीन बच्चों की माँ। एक दिन छत पर मौका मिला और चाची की गहरी नींद में शुरू हुई सहमति भरी चुदाई। ब्लाउज़ खुला, ब्रा उतरी, चूत चाटी, लंड चूसा और फिर बाथरूम में नंगे होकर पूरी रात चुदाई। गंदी-गंदी गालियाँ, पेशाब पीना, गाँड मारना – सब कुछ। अब चाची बन गईं राहुल की निजी रंडी। पूरी देसी सेक्स स्टोरी हिंदी में।


मेरा नाम राहुल है। मैं बिहार का रहने वाला हूँ, और अभी-अभी अपनी MBA की पढ़ाई पूरी की है। उस वक्त मैं साउथ इंडिया में रहता था। कॉलेज के दिनों से ही मुझे सेक्स का बहुत शौक था। खासकर शादीशुदा औरतों की तरफ़ आकर्षण था – वो औरतें जिनके बड़े-बड़े स्तन हों, भारी भरकम कूल्हे हों, और जिनके एक से ज़्यादा बच्चे हों। मैं अक्सर ऐसी औरतों को देखकर मुठ मारता था।

हमारे पड़ोस के फ्लैट में एक औरत रहती थी – गुलाबी चाची। उम्र करीब 52 साल, रंग साँवला, लेकिन शरीर ऐसा कि देखते ही लंड खड़ा हो जाए। तीन बच्चे – दो बेटे और एक बेटी। उनका बड़ा बेटा मेरा दोस्त था। गुलाबी चाची की ब्रा मैं छत पर देखता रहता था। 90 सेंटीमीटर की ब्रा, जब हवा में लहराती तो लगता जैसे मेरे लंड को बुला रही हो। मैं चुपके से उनकी ब्रा लेकर मुठ मारता था।

एक दिन कॉलेज जल्दी छूट गया। सुबह 10:30 बजे ही घर पहुँचा। मन बहुत गरम था, लंड तन गया था। सीधे उनकी छत पर गया ब्रा लेने। वहाँ पहुँचा तो देखा गुलाबी चाची धूप सेंक रही थीं। सर्दी का मौसम था, वो गहरी नींद में थीं। साड़ी थोड़ी ऊपर उठी हुई थी, ब्लाउज़ के दो बटन खुले थे, और उनके बड़े-बड़े स्तन साँस के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे। देखते ही मेरा लंड पत्थर जैसा हो गया।

मैं पास गया। पहले तो सिर्फ़ देखता रहा। फिर धीरे से उनके ब्लाउज़ पर हाथ फेरा। वो हिलीं तक नहीं। हिम्मत बढ़ी। मैंने साड़ी धीरे-धीरे ऊपर उठाई। उनकी जाँघें चिकनी और गर्म थीं। हाथ ऊपर ले गया, पैंटी के ऊपर से उनकी चूत पर उँगलियाँ फेरीं। वो हल्के से सिहर उठीं, लेकिन आँखें नहीं खोलीं। मैं समझ गया कि वो जाग रही हैं और शायद मज़ा ले रही हैं।

फिर मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। वो चौंकीं, लेकिन विरोध नहीं किया। बल्कि उनकी साँसें तेज़ हो गईं। मैंने धीरे से कहा, “चाची… आप बहुत खूबसूरत हैं… मैं आपको बहुत दिन से चाहता हूँ।” वो मुस्कुराईं, आँखें खोलीं और बोलीं, “राहुल… तू भी बहुत शरारती है… पता है मुझे सब।”

उन्होंने मेरे लंड को पैंट के ऊपर से सहलाया। मैंने उनका ब्लाउज़ खोल दिया। ब्रा के हुक खोले तो वो भारी-भारी स्तन बाहर आए। पहली बार किसी औरत के नंगे स्तन देख रहा था। मैंने उन्हें मुँह में लिया, चूसा, चबाया। वो सिसकारियाँ ले रही थीं – “आह… राहुल… कितना अच्छा लग रहा है…”

मैंने साड़ी पूरी ऊपर उठा दी। उनकी चूत पर बाल थे, गीली हो चुकी थी। मैंने जीभ से चाटना शुरू किया। नमकीन स्वाद, लेकिन स्वर्ग जैसा। वो मेरे सिर को दबाते हुए बोलीं, “चाट बेटा… पूरा चाट… कितने दिन से किसी ने नहीं छुआ मुझे…”

फिर वो उठीं, मेरी पैंट खोली और मेरा 9 इंच का लंड मुँह में ले लिया। मैं स्वर्ग में था। हम 69 की पोज़िशन में आ गए। मैं उनकी चूत चाटता रहा, वो मेरा लंड चूसती रहीं। उनकी चूत से रस की बौछार हो रही थी, मैं पीता जा रहा था। थोड़ी देर में वो झड़ गईं – पूरा शरीर काँप उठा। मैंने भी उनके मुँह में झड़ दिया। वो सारा वीर्य पी गईं और लंड को चाटकर साफ कर दिया।

फिर वो बोलीं, “चल अंदर चलते हैं, कोई नहीं है घर में। मैंने नए कपड़े खरीदे हैं, ट्राई करके दिखाऊँगी।” हम उनके फ्लैट में गए। वो बोलीं, “बाथरूम में चल, फिसलन है, डर लगता है।”

बाथरूम में वो साड़ी उतारने लगीं। पहले साड़ी, फिर ब्लाउज़, फिर ब्रा। उनके बड़े-बड़े स्तन लटकते हुए बाहर आए। फिर पेटीकोट। अब वो सिर्फ़ पैंटी में थीं। मेरे लंड ने पैंट फाड़ दी थी। वो मुस्कुराईं, पैंटी भी उतार दी और मेरे ऊपर फेंकी। अब वो पूरी नंगी खड़ी थीं – मेरे सामने मेरी सपनों की रंडी।

वो बोलीं, “वाइट वाली पैंटी निकालो।” मैंने निकालकर दी। वो पहनने लगीं। पैंटी बहुत टाइट थी, उनकी चूत को पूरी तरह कवर नहीं कर पा रही थी – चूत के होंठ बाहर झाँक रहे थे। वो बोलीं, “कैसी लग रही है?” मैं बोला, “बहुत छोटी है चाची… आपकी बुर को ढँक ही नहीं पा रही।”

वो हँसकर बोलीं, “इसीलिए तो ली है हरामी… तेरी पैंट भी तो तेरे लंड को ढँक नहीं पा रही, तंबू बना हुआ है।” उनकी गंदी बातें सुनकर मेरा सारा हिचक खत्म हो गया। वो बोलीं, “अगर पसंद नहीं तो उतार देती हूँ… तू भी अपना लौड़ा आज़ाद कर।”

मैंने फटाफट पैंट उतार दी। मेरा लंड सीधा खड़ा था। वो भी पूरी नंगी हो गईं। फिर वो स्लट की तरह मुझे देखने लगीं – होंठ चबाते हुए अपने स्तन दबाने लगीं। मैं भी उनके सामने मुठ मारने लगा।

वो बोलीं, “कब से मुठ मारता है मुझे देखकर?”
मैंने कहा, “जब से ब्लू फिल्म देखी है, तब से।”
वो अपनी चूत सहलाते हुए बोलीं, “मैं कब से मुठ मारती हूँ? जब से तेरे चाचा ने मुझे छोड़ दिया। मेनोपॉज़ के बाद वो मुझे हाथ भी नहीं लगाते।”

फिर वो और बोल्ड हो गईं। मैंने उनके स्तन दबाते हुए पूछा, “कितनों से चुद चुकी हो?”
वो हँसकर बोलीं, “13 साल की उम्र में गाँव के एक लड़के ने खेत में चोदा था। फिर चाचा ने। फिर पति के दोस्त ने। मेरी बेटी उसी की है, पति को पता नहीं।”

मैंने कहा, “तो तेरी चूत तो फट चुकी होगी।”
वो बोलीं, “हाँ मादरचोद… अब तेरा लंड डालकर देख… बहुत दिन हो गए।”

हम बाथरूम में ही चुदाई करने लगे। पहले उन्होंने मेरा लंड चूसा। फिर बोलीं, “पेशाब करनी है।” मैंने कहा, “मेरे मुँह में करो।” वो मेरे मुँह पर चूत रखकर पेशाब करने लगीं। मैंने सारा पी लिया। फिर मैंने उनके मुँह में लंड डालकर पेशाब किया। वो भी पी गईं।

फिर वो बोलीं, “अब मत तड़ा, चोद मुझे।” मैंने उन्हें दीवार से सटा दिया। पहले उनका मुँह चूमा, स्तन चूसे, चूत में दो उँगलियाँ डालकर चुसकी ली। वो चिल्ला रही थीं – “आह… राहुल… मेरा रस निकल रहा है… पी ले…”

मैंने उनके मुँह में झड़ दिया। थोड़ा उनके स्तनों और चेहरे पर भी गिरा। वो बोलीं, “तेरा वीर्य तो मेरे पति के से कहीं गाढ़ा है।”

फिर मैंने उन्हें पोर्न मैगज़ीन दिखाई। वो हर फोटो देखकर बताने लगीं – “ये लंड चूत में घुस रहा है… ये औरत लंड चूस रही है…” और मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया।

उन्होंने पैर बेसिन पर रखे, मैंने लंड उनकी चूत पर रगड़ा और एक झटके में पूरा अंदर घुसा दिया। वो चिल्लाईं, “आह… मादरचोद… फाड़ दे मेरी चूत… कितने दिन की प्यासी है…”

मैं ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा। उनकी चूत पूरी गीली थी, आवाज़ें हो रही थीं – चप-चप-चप। वो बोलीं, “और ज़ोर से… अपने दोस्त की माँ को चोद… फाड़ दे…”

फिर उन्होंने गाँड करने को कहा। मैंने उनकी गाँड में भी घुसाया। दोनों जगह चोदा। आखिर में बोलीं, “वीर्य चूत में डालने से फायदा नहीं, मैं प्रेग्नेंट नहीं होऊँगी। मुँह में डाल, प्रोटीन चाहिए मुझे।”

मैंने उनके मुँह में डाल दिया। वो सारा पी गईं। फिर हम साथ नहाए।

उसके बाद दो दिन तक मैं उनके घर ही रहा। स्कूल नहीं गया। दिन-रात चुदाई। नहाते वक्त, खाना बनाते वक्त, यहाँ तक कि पेशाब करते वक्त भी चोदते। घर में हमेशा नंगे रहते। कोई आता तो कपड़े पहन लेते।

एक दिन वो बोलीं, “मेरी बेटी कमला को भी तुझसे चुदवाना है। वो 30 साल की है, तीन बच्चों की माँ। मैं प्रेग्नेंट नहीं हो सकती, तू उसे प्रेग्नेंट कर दे।”

लेकिन वो अगली कहानी के लिए…

अब गुलाबी चाची मेरी असली रंडी बन चुकी थीं। रोज़ चुदाई, हर तरह से। मैंने उन्हें हर पोज़ में चोदा। वो खुश थीं, मैं खुश था।


छत पर धूप में सोई थी गुलाबी चाची,
ब्लाउज़ के बटन खुले, स्तन उठते-गिरते साथी।
राहुल ने छुआ, सहमति मिली आँखों से,
फिर चूत में लंड घुसा, बन गई रातें सुहानी साथी।