बारिश में भीगी साड़ी वाली भाभी की चुदाई की गर्म और रोमांचक कहानी। गीली साड़ी, चिपकता शरीर और रात भर का मजेदार मिलन पढ़ें। सॉफ्ट और सेक्सी हिंदी सेक्स स्टोरी।
Barish Me Bheegi Saari Wali Bhabhi Ki Chudai
बारिश की बूंदें छत पर तेज़ी से गिर रही थीं। आसमान में काले बादल छाए हुए थे और हवा में मिट्टी की खुशबू घुल चुकी थी। घर के अंदर राहुल बैठकर खिड़की से बाहर देख रहा था। उसके बड़े भाई शहर गए हुए थे और घर में सिर्फ वह और उसकी भाभी प्रिया थी। प्रिया अभी-अभी नहाकर बाहर आई थी। उसने हल्की पीली साड़ी पहनी हुई थी, बाल खुले थे और गर्दन पर पानी की बूंदें चमक रही थीं।
अचानक बिजली गिरी और रोशनी चली गई। घर में अंधेरा छा गया। राहुल मोमबत्ती जलाने के लिए उठा तो देखा कि प्रिया रसोई से बाहर आ रही है। उसके हाथ में टॉर्च थी। “राहुल, उधर मत जाओ, फिसल जाओगे,” उसने नरम आवाज़ में कहा।
लेकिन उसी पल तेज़ हवा चली और खिड़की का शीशा खुल गया। बारिश की बूंदें कमरे के अंदर आने लगीं। प्रिया शीशा बंद करने के लिए भागी। उसकी साड़ी हवा में उड़ने लगी। राहुल ने देखा कि गीली साड़ी उसके शरीर से चिपक गई है। पतली ब्लाउज़ के नीचे गोल-गोल स्तनों की आकृति साफ़ दिखाई दे रही थी। साड़ी का पल्लू कंधे से खिसक चुका था और कमर की लचक नज़र आ रही थी।
प्रिया ने शीशा बंद किया और मुड़ी तो राहुल की नज़रें उस पर टिकी मिलीं। वह शर्मा गई लेकिन उसकी साँसें तेज़ हो गई थीं। “क्या देख रहे हो?” उसने हल्के से पूछा, आवाज़ में हल्की सी हँसी थी।
“कुछ नहीं भाभी… बस… साड़ी भीग गई है आपकी,” राहुल ने धीरे से कहा। उसकी आवाज़ में भी गला बैठा हुआ था।
प्रिया ने अपना पल्लू ठीक करने की कोशिश की लेकिन गीली साड़ी और चिपक गई। वह पास आई और मोमबत्ती की रोशनी में खड़ी हो गई। “तुम भीग गए हो क्या? आओ, तौलिया लाती हूँ।”
वह अंदर गई और तौलिया लेकर लौटी। राहुल की शर्ट भीगी हुई थी। प्रिया ने तौलिया उसके कंधों पर रखा और बाल पोंछने लगी। उसकी उँगलियाँ राहुल के बालों में घूम रही थीं। दोनों की साँसें एक-दूसरे के करीब थीं। कमरे में सिर्फ बारिश की आवाज़ और उनके दिल की धड़कनें थीं।
राहुल ने धीरे से प्रिया का हाथ पकड़ लिया। “भाभी… आपकी साड़ी इतनी चिपक गई है… लग रहा है जैसे…”
प्रिया ने उसकी बात काटते हुए मुस्कुरा दी। “जैसे क्या?” उसकी आँखों में शरारत थी। उसने खुद अपना पल्लू थोड़ा और खिसकाया। गीली साड़ी के नीचे उसकी कमर और पेट की चिकनी त्वचा चमक रही थी। “देखो तो सही, कितनी भीग गई हूँ।”
राहुल का हाथ अपने-आप उसकी कमर पर चला गया। प्रिया ने विरोध नहीं किया। उल्टे वह थोड़ा और पास खिसक आई। उसकी छाती राहुल की छाती से छू गई। दोनों की साँसें एक हो गईं। राहुल ने धीरे से उसका चेहरा अपने हाथों में लिया और होंठों को छू लिया।
पहला चुंबन हल्का था, जैसे आजमा रहा हो। लेकिन प्रिया ने जवाब में अपने होंठ दबा दिए। उसकी जीभ धीरे से राहुल के होंठों को चाटने लगी। दोनों के शरीर एक-दूसरे से सट गए। गीली साड़ी और गीली शर्ट के बीच गर्मी बढ़ने लगी।
राहुल के हाथ उसकी पीठ पर फिसलते हुए कमर तक पहुँचे। उसने साड़ी की गाँठ को धीरे से खोला। प्रिया ने उसकी मदद की। साड़ी फर्श पर गिर पड़ी। अब सिर्फ पेटिकोट और ब्लाउज़ रह गए थे। पेटिकोट भीगी हुई थी और जाँघों से चिपक रही थी।
प्रिया ने खुद राहुल की शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए। उसकी उँगलियाँ छाती पर घूम रही थीं। “तुम्हारा शरीर कितना गरम है…” उसने फुसफुसाया। राहुल ने उसका ब्लाउज़ खोला। गोल, मुलायम स्तन बाहर आ गए। निप्पल गीले बालों की वजह से खड़े हो गए थे। राहुल ने एक स्तन को हाथ में लिया और धीरे से दबाया। प्रिया की आँखें बंद हो गईं और वह कराह उठी।
“आह… हल्के से…” उसने कहा लेकिन उसके शरीर ने और पास आने का इशारा किया। राहुल ने निप्पल को मुँह में ले लिया और जीभ से चाटा। प्रिया की उँगलियाँ उसके बालों में उलझ गईं। वह उसके सिर को और अपनी छाती पर दबा रही थी।
दोनों बिस्तर की तरफ बढ़े। राहुल ने प्रिया को धीरे से लिटा दिया। पेटिकोट को नीचे खींचा। अब वह पूरी तरह नंगी थी। उसकी जाँघों के बीच मुलायम बाल गीले थे और वहाँ से हल्की सी चमक आ रही थी। राहुल ने अपनी पैंट उतारी। उसका लंड पूरी तरह तन चुका था, नसों में खून दौड़ रहा था।
प्रिया ने खुद उसका हाथ पकड़कर अपनी जाँघों के बीच रख दिया। “यहाँ… छूओ…” उसकी आवाज़ में प्यास थी। राहुल की उँगलियाँ उसकी चूत पर फिसलीं। वह पहले से गीली थी। उसने धीरे से एक उँगली अंदर डाली। प्रिया की कमर उठ गई। “हाँ… ऐसे…”
राहुल ने दो उँगलियाँ अंदर कीं और अंगूठे से उसकी चूत के ऊपरी हिस्से को सहलाया। प्रिया की साँसें तेज़ हो गईं। वह तकिए को पकड़कर कराह रही थी। “राहुल… और अंदर…”
वह खुद उठ बैठी और राहुल को लिटा दिया। उसने उसके लंड को दोनों हाथों में लिया और धीरे से सहलाया। फिर मुँह में ले लिया। जीभ से आगे से पीछे तक चाटा। लंड के सिरे को होंठों से चूसा। राहुल की आँखें बंद हो गईं। “भाभी… बहुत अच्छा लग रहा है…”
प्रिया ने और गहराई तक लिया। गले तक छू रहा था। उसकी आँखों में पानी आ गया लेकिन उसने रोका नहीं। वह मज़े ले रही थी। फिर उसने लंड को अपनी चूत पर रखा और धीरे से बैठ गई।
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पहले सिरा अंदर गया। प्रिया ने साँस रोकी और फिर धीरे-धीरे पूरा अंदर ले लिया। दोनों एक पल के लिए रुक गए। फिर प्रिया ने कमर हिलानी शुरू की। ऊपर-नीचे, धीरे-धीरे। उसकी छाती हिल रही थी। राहुल ने दोनों हाथों से उसके स्तन पकड़ लिए और निप्पल को मसलने लगा।
“आह… राहुल… कितना भर गया है अंदर…” प्रिया कराह रही थी। उसकी चूत लंड को कसकर पकड़े हुए थी। गीली आवाज़ें कमरे में गूँज रही थीं। बारिश बाहर और तेज़ हो गई थी।
राहुल ने उसे नीचे लिटा दिया और खुद ऊपर चढ़ गया। उसने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। लंबी, गहरी चुदाई। हर धक्के के साथ प्रिया की कराहें बढ़ रही थीं। उसकी टाँगें राहुल की कमर के चारों ओर लिपट गईं। “और तेज़… पर हल्के से…” उसने फुसफुसाया।
राहुल ने रफ़्तार बढ़ाई लेकिन दर्द नहीं होने दिया। सिर्फ मज़ा। उसकी चूत से पानी निकल रहा था और जाँघों तक फैल गया था। राहुल ने एक स्तन को मुँह में लिया और चूसने लगा। प्रिया पागल हो रही थी। उसकी नाखून राहुल की पीठ पर हल्के निशान छोड़ रहे थे।
“मैं… मैं आने वाली हूँ…” प्रिया की आवाज़ काँप रही थी। राहुल ने और गहराई तक धक्के लगाए। प्रिया का शरीर अकड़ गया। उसकी चूत जोरों से धड़कने लगी और पानी की धार निकल पड़ी। वह जोर से कराह उठी और राहुल को अपनी बाहों में जकड़ लिया।
राहुल ने रुककर नहीं। वह और तेज़ चुदाने लगा। प्रिया अभी भी काँप रही थी लेकिन उसने उसे और अंदर खींच लिया। “अंदर ही छोड़ देना… पूरा…”
राहुल की कमर अकड़ गई। उसने जोरदार धक्के लगाए और गर्म वीर्य की धार उसकी चूत के अंदर छोड़ दी। दोनों एक-दूसरे से चिपके हुए काँप रहे थे। साँसें तेज़ थीं। पसीना और बारिश की नमी मिल गई थी।
थोड़ी देर बाद राहुल उसके बगल में लेट गया। प्रिया ने सिर उसकी छाती पर रख दिया। उसकी उँगलियाँ राहुल के बालों में खेल रही थीं। “बारिश अच्छी हुई ना…” उसने मुस्कुराते हुए कहा।
राहुल ने उसके माथे पर चुंबन लिया। “बहुत अच्छी…”
बाहर बारिश अभी भी हो रही थी। कमरे में मोमबत्ती की रोशनी में दोनों नंगे शरीर एक-दूसरे से सटे हुए थे। प्रिया ने धीरे से अपना हाथ नीचे किया और राहुल के लंड को फिर से सहलाने लगी। वह फिर से तन रहा था।
“फिर से?” राहुल ने हँसते हुए पूछा।
प्रिया ने जवाब में उसके होंठ चूस लिए। “पूरी रात है… और साड़ी तो भीग ही चुकी है।”
इस बार राहुल ने उसे घोड़ी बना लिया। प्रिया चारों हाथ-पैरों पर झुक गई। उसकी गोल गांड राहुल के सामने थी। उसने लंड को फिर से उसकी गीली चूत में धकेल दिया। इस बार और गहरा। प्रिया की कराहें तकिए में दब रही थीं। राहुल ने उसकी कमर पकड़कर लंबी चुदाई शुरू की। हर धक्के के साथ उसकी गांड हिल रही थी।
प्रिया पीछे की तरफ धक्के का जवाब दे रही थी। “और अंदर… पूरा…” राहुल ने एक हाथ आगे बढ़ाकर उसकी चूत के ऊपरी हिस्से को सहलाया। प्रिया पागल हो गई। वह जोर-जोर से कराहने लगी। “हाँ… वहीं… मत छोड़ो…”
दूसरी बार भी दोनों एक साथ आए। प्रिया की चूत से वीर्य और उसका पानी मिलकर टपक रहा था। दोनों थककर बिस्तर पर गिर पड़े।
रात भर बारिश होती रही। कभी धीरे, कभी तेज़। दोनों कई बार एक-दूसरे के शरीर में खोए। कभी प्रिया ऊपर बैठकर अपना मज़ा लेती, कभी राहुल उसे गोद में बिठाकर चुदाई करता। हर बार प्रिया खुद आगे बढ़कर मांगती। उसकी आँखों में सिर्फ चाहत थी, कोई झिझक नहीं।
सुबह जब बारिश थमी तो दोनों अभी भी एक-दूसरे की बाँहों में थे। प्रिया की साड़ी कोने में गीली पड़ी थी। उसने राहुल के गाल पर हल्के से चुंबन लिया। “अब से जब भी बारिश आए… याद रखना।”
राहुल ने उसे और कस लिया। कमरे में अभी भी उनकी मिली-जुली खुशबू फैली हुई थी। बाहर धूप निकल रही थी लेकिन अंदर की गर्मी अभी बाकी थी।
कहानी यहीं खत्म नहीं हुई थी। दोपहर तक दोनों फिर से एक-दूसरे में उलझ गए। इस बार नहाने के बहाने। बाथरूम में पानी की धार के नीचे प्रिया की पीठ राहुल की छाती से सट गई। उसने खुद उसका लंड पकड़कर अपनी गांड के बीच रख दिया। राहुल ने धीरे से अंदर धकेला। पानी और उनकी कराहें मिलकर एक संगीत बना रही थीं।
प्रिया ने दीवार पकड़ रखी थी। उसकी छाती दीवार से रगड़ खा रही थी। राहुल के हाथ उसके स्तनों पर थे, निप्पल को मसल रहे थे। “इतना गहरा… आज पहली बार…” उसने साँस भरते हुए कहा।
राहुल ने जवाब में और जोर के धक्के लगाए। पानी की बूंदें उनके शरीर पर फिसल रही थीं। प्रिया की टाँगें काँपने लगीं। वह फिर से चरम पर पहुँची। उसकी आवाज़ बाथरूम में गूँज उठी। राहुल ने भी उसी पल अंदर छोड़ दिया।
बाद में दोनों तौलिए में लिपटे बिस्तर पर लेटे। प्रिया की उँगलियाँ राहुल की छाती पर घूम रही थीं। “तुम जानते हो… मैं कब से सोच रही थी…” उसने धीरे से कहा।
राहुल ने उसकी ठोड़ी उठाई और होंठ चूस लिए। “मैं भी…”
दोनों मुस्कुराए। बाहर धूप चमक रही थी लेकिन उनके अंदर अभी भी बारिश की नमी बसी हुई थी। साड़ी अब सूख चुकी थी लेकिन यादें गीली ही रह गईं।
रात फिर आई। इस बार बिना बारिश के। लेकिन प्रिया ने खुद वही पीली साड़ी पहन ली। गीला करने के लिए पानी का छिड़काव किया। राहुल के सामने खड़ी होकर पल्लू गिरा दिया। “आज फिर से भीगो दो मुझे…”
राहुल ने उसे उठाया और दीवार से सटा दिया। साड़ी फिर से उतर गई। इस बार खड़े-खड़े लंबी चुदाई हुई। प्रिया की एक टाँग राहुल की कमर पर टिकी थी। हर धक्के के साथ उसकी कराहें बढ़ रही थीं। “इतना अच्छा… कभी नहीं लगा…”
रात भर दोनों ने एक-दूसरे को चखा। कभी धीरे, कभी जोश में। लेकिन हर बार प्रिया खुद रुकने नहीं देती थी। उसकी चाहत साफ़ थी। शरीर बोल रहा था। आँखें बोल रही थीं।
सुबह जब सूरज निकला तो दोनों थके लेकिन संतुष्ट थे। प्रिया ने राहुल के माथे पर बाल ठीक करते हुए कहा, “अब जब भी बादल छाएँ… याद आएगी ये रात।”
राहुल ने उसकी कमर में हाथ डालकर खींच लिया। “हर बारिश में…”
कहानी यहीं पूरी हुई। बारिश में भीगी साड़ी, चिपकता शरीर, और दो दिलों की बिना बोले हुई चाहत। कोई जबरदस्ती नहीं, सिर्फ मिलन। सिर्फ गर्मी। सिर्फ मज़ा।