विधवा मकान मालकिन की प्यासी चूत चोदी

फ्री आंट सेक्स स्टोरी में मैं किराये का कमरा खोज रहा था. मैंने एक कमरा पसंद कर लिया और शिफ्ट कर लिया. पहले दिन ही मकान मालकिन मेरे कमरे में आ गयी. उसके बाद क्या हुआ?

दोस्तो, आप सभी को मेरा प्यार भरा नमस्कार.

यह एक सच्ची घटना पर आधारित सेक्स कहानी है और इसमें सिर्फ नाम बदले गए हैं.

सबसे पहले मैं नीतेश, अपने बारे में बता रहा हूँ.
मेरा यह नाम बदला हुआ है और मैं औरंगाबाद जिले के एक गांव से हूँ.

औरंगाबाद में शिफ्ट हुए मुझे 5 साल हो गए हैं.
ये लॉकडाउन के पहले की Free Aunt Sex Story है.
उस वक्त मैं एक फाइनेंस कंपनी में काम करता था.

मैं सुबह 9 बजे जाता था और रात को वापस आने में मुझे करीब ग्यारह बज जाते थे.
देर से वापस आने के कारण कभी कभी मुझे ऑफिस जाने में देर होने लगी.

इसी वजह से मुझे दिक्कत हुई तो मेरे एक दोस्त ने मुझे सलाह दी कि मैं ऑफिस के पास ही किसी कमरे को किराए पर ले लूँ, तो मेरा काफी समय व धन बचने लगेगा.

मुझे खुद भी यह बात ठीक लगी और मैं जगह जगह पूछताछ करने लगा.

मगर मुझे एक महीना पूछते हुए हो गया था और कोई कमरा नहीं मिला था.

इस दौरान मेरा पुराना रुटीन चालू था.

एक दिन ऐसे ही ऑफिस के कुछ दूरी पर ही एक घर के गेट पर लिखा था कि रूम ऑन रेंट.
नीचे एक नंबर भी लिखा था.

मैंने झट से फोन लगाया और पूछताछ की.
तो उन्होंने मुझसे मिलने को कहा.

उस वक्त मुझे ऑफिस पहुंचने में देरी हो रही थी तो मैंने उनसे विनम्रता से कहा- मुझे अभी थोड़ा काम है. क्या मैं आपसे शाम को मिल सकता हूँ?
इस पर उन्होंने कहा- ठीक है.

मैं अपने ऑफिस आ गया और काम में लग गया.
उसके बाद 4 बजे मैंने फिर से कॉल लगाया और उनसे कहा- सर, मैं ऑफिस से निकल रहा हूँ, आप अभी मिल सकते हैं न!
उन्होंने हामी भर दी.

मैंने फोन रख दिया और लगभग 5 बजे तक मैं उनके घर आ गया.
उन्होंने चाय पानी के लिए पूछा.

मैंने ओके कहा और उनकी बीवी चाय लेकर आ गई.

उस दिन मैंने उनकी बीवी लता को ठीक से नहीं देखा था, बाद में क्या हुआ … वह आगे लिखूँगा.

हम दोनों में ऐसे ही सामान्य बात चली और आखिर में उन्होंने मुझे बताया कि वे इस कमरे को किसी फैमिली वाले को देना चाहते हैं.

मैं मायूस होकर जाने ही लगा था कि उनकी बीवी लता सामने आकर बोली- क्या हुआ?

मैंने कहा- सॉरी आंटी जी, मैं सिंगल ही हूँ. मेरे साथ कोई नहीं है … और वैसे भी आप यह रूम किसी फैमिली वाले के लिए देने की कह रहे हैं, तो क्या कर सकता हूँ. इसलिए मैंने निकलने की सोची!
इस पर उन्होंने कहा- ठीक है, पर हमें लड़कों को कमरा देना पसंद नहीं है.
मैं वहां से निकल गया.

ऐसे ही दिन निकलते गए.
कुछ 20 दिन बाद एक अंजान नंबर से कॉल आई.

उधर से पूछा गया- क्या तुम अभी भी रूम देख रहे हो?
मैंने हां कहा.

उन्होंने कहा कि आज शाम घर पर आ जाओ.
मैंने हां कह कर कॉल कट कर दिया.

वह कॉल उस अंकल के बीवी की थी.
मैं सोच में पड़ गया कि ऐसा कैसे हो सकता है कि अंकल की जगह आंटी फोन करके बुला रही है.

मैंने तय किया कि चलो मिल कर तो आते हैं.
अगर काम बना तो अच्छी बात है.

मैं फिर से 5 बजे वहां पहुंचा और डोरबेल बजा दी.

कुछ पल बाद दरवाजा खुला, तो देखा कि सामने आंटी गजब माल लग रही थीं.
एकदम कातिलाना आंखें, स्लिम फिट बॉडी … एकदम पटाखा बॉम्ब थी.

पहले मैंने उस आंटी को ठीक से नहीं देखा था.
तभी आंटी ने आवाज लगायी- अन्दर भी आओगे … या बाहर से ही बात करोगे?

मैं अपने होश में आया और अन्दर चल दिया.
उन्होंने मुझे सोफे पर बैठने को बोला.
मैं बैठ गया.

चाय पानी ली और मुख्य बात पर आ गए.

मैंने कहा- आंटी पहले तो आपके पति ने कहा था कि उन्हें रूम फैमिली को देना है, तो अब क्या हुआ?
उन्होंने बताया कि हमें अब तक कोई सही रिस्पॉन्स ही नहीं मिला तो तय किया कि किसी अच्छे लड़के को कमरा दे दिया जाए. इसी लिए फिर से आपको कॉल किया.
मैंने कहा- ओके वह सब ठीक है, पर आपको मेरा नंबर कैसे मिला?

उन्होंने कहा कि वह सब बात मैं बाद में बताऊंगी.
तो मैंने भी ज्यादा उचित नहीं समझा और किराया आदि तय कर लिया.

मैंने उनसे कहा- मैं संडे को शिफ्ट हो जाऊंगा क्योंकि मेरा संडे को ऑफ रहता है.
उन्होंने ओके कहा और मैं अपने घर पर आ गया.

रात को मैं उस आंटी के बारे में सोचने लगा.
आंटी के हुस्न को याद किया तो मेरे टॉवर ने सिग्नल देना शुरू कर दिया.

बस फिर क्या … मैं उस आंटी की ही याद में लंड हिलाने लगा.
झड़ने के बाद कब नींद लगी, कुछ पता ही नहीं चला.

जैसे तैसे दिन गुजर गए और संडे आ गया.
मैं अपना सामान पैक करके आंटी के कमरे की तरफ निकल गया.

वहां पहुंच कर बेल बजायी और आंटी ने ही दरवाजा खोला.
आंटी ने रूम की चाबी दी और मैंने कमरे का ताला खोल कर सामान रख दिया.

मैं फ्रेश होकर ऐसे ही टाईमपास करता रहा.
उस वक्त मैंने शॉर्ट और बनियान पहनी थी क्योंकि कमरे में मेरे अलावा कोई नहीं था.

कुछ देर बाद आंटी दरवाजा खोलकर अन्दर आईं और कहने लगीं- तुम ऐसे अकेले अकेले बोर नहीं होते क्या?
मैंने कहा- क्या करूँ आंटी जी, अब तो अकेले रहने की आदत सी हो गयी है.

उन्होंने मुझसे बात करना शुरू किया और मेरे बारे में सब पूछताछ की- क्या करते हो, घर में और कौन कौन रहता है.

बाद में मैंने उनसे पूछा- आंटी अगर आपको बुरा ना लगे, तो मैं भी एक बात पूछ सकता हूँ?
उन्होंने मुस्कुरा कर कहा- हां पूछो तो सही, यह मैं बाद में तय करूँगी कि मुझे बुरा लगा या नहीं!

मैंने पूछा- जब मैं पहली बार आया था तो घर में आपके पति थे और अब दूसरी बार आया हूँ तो वे नहीं दिखे. आज आपके माथे पर सिंदूर भी नहीं है.

इस बात पर उन्होंने नजर झुका ली और शांत बैठ गईं.
मुझे लगा कि शायद उनको मेरी बात पसंद नहीं आयी.

मैंने उन्हें सॉरी कहा और उनसे माफी मांगने लगा.
उन्होंने कहा- कोई बात नहीं, बताती हूँ.

उन्होंने बताया कि उस दिन तुम आए थे, तब वे मेरे पति नहीं बल्कि मेरे देवर थे. वे अक्सर आते जाते रहते हैं और कभी कभार यहीं रुक भी जाते हैं. मेरे पति अभी पिछले साल ही दुनिया से चल बसे हैं, तब से मैं अकेली रहती हूँ. मेरे देवर मेरी देखभाल करने आते हैं. वे दोनों पति पत्नी हैं और मेरा एक बेटा भी उन्हीं के साथ रहता है. मेरी मांग में सिंदूर उस दिन भी नहीं था, शायद तुमने ठीक से देखा नहीं होगा.

ऐसे ही बातें करते करते अचानक आंटी जी कब और कैसे मुझसे चिपक कर बैठ गईं, इस बात का अहसास ना उनको हुआ और ना मुझे.

उनके इतने करीब आकर स्पर्श मिलने के कारण मेरा टॉवर भी अन्दर सिग्नल देने लगा.
मुझे भी मजा आने लगा था.

तभी उनके फोन की घंटी बजी और वे उठ कर चली गईं.
मुझसे रहा नहीं गया तो मैं भी झट से बाथरूम की तरफ गया और लंड हिला कर वापस आ गया.

मैंने देखा कि आंटी फिर से आकर बैठ गई थीं.

हम दोनों वापस ऐसे ही आपस में बातें करने में खो गए.
कुछ हंसी मजाक भी करने लगे.

तभी आंटी ने कहा- चलो, कोई अच्छी सी मूवी लगाते हैं.
मैंने टीवी चालू किया तब उसमें एक चैनल पर हंटर मूवी चल रही थी.

उसमें वह किचन में रोमान्स वाला सीन आया तो अचानक पता नहीं चला कि आंटी जी ने अपना हाथ मेरे लंड पर रख दिया.
मेरे लौड़े में तनाव आना शुरू हो गया.

वैसे बता दूँ कि मेरा लंड ज्यादा बड़ा नहीं है, यह सिर्फ 5 इंच लंबा है.
यह मैंने इसलिए बताया कि अब तक आपने जो पढ़ा, सब एक सच पढ़ा था.

उन्होंने मेरे लौड़े को सहलाना शुरू कर दिया.
मैं खुद आगे नहीं बढ़ना चाहता था क्योंकि अब तक जो हो रहा था, सब आंटी जी की मर्जी से ही हो रहा था.

आंटी ने जब देखा कि लंड में कड़कपन आने लगा है तो वे समझ गईं कि कबूतर फड़फड़ा रहा है.

उन्होंने कहा- नीतेश, प्लीज कुछ भी करके मुझे शांत कर दो. मैं एक साल से बहुत प्यासी हूँ. मुझे एक साल से किसी ने छुआ तक नहीं है. जब से मैंने तुमको देखा है, तब से मैं तुमसे चुदना चाहती हूँ क्योंकि पहली बार जब मैंने तुमको देखा था, तब मुझे कुछ अलग ही अहसास हुआ कि तुम एक नेकदिल इन्सान हो. इसी लिए मैंने तुम्हें फिर से कॉल करके बुलाया है. प्लीज करोगे ना मेरी तमन्ना पूरी?

मैंने आंटी से कहा- पर किसी को पता चला, तो आपकी बदनामी होगी!
आंटी बोलीं- ना मैं किसी को बताऊंगी और ना ही तुम … तो कैसे पता चलेगा?

मैंने भी हामी भर दी और आगे बढ़ कर उन्हें मैंने उन्हें अपनी बांहों में भर लिया.

आंटी इतना अच्छा रोमान्स कर रही थीं कि मुझे आज भी उनके साथ बिताए वे पल याद आते हैं, तो मुठ मारे बिना चैन नहीं मिलता.

अब मैंने आगे बढ़ कर उनका ब्लॉउज खोला, तो वह एक पिंक कलर की ब्रा में थीं.
उस गुलाबी ब्रा में कैद उनके दूध एकदम कसे हुए दिख रहे थे.

मैंने आंटी की ब्रा निकाली और एक एक करके उनके दोनों आम चूसना चालू कर दिए.
वह मस्ती में आहें भर रही थीं- इस इस्स्स आह आह … कितना अच्छा चूसते हो नीतेश … बहुत मजा आ रहा है.
मैंने भी निप्पल चूसते हुए कहा कि अब आगे आगे देखो मेरी जान … कितना मजा आएगा तुमको.

वे मेरे मुँह से खुद के लिए मेरी जान सुनकर हंसने लगीं.
मैंने कहा- आंटी मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर प्यार करो ना!

आंटी बोलीं- नहीं, मुझे ये नहीं पसंद नहीं. मैं यह सब कुछ नहीं कर पाऊंगी.
मैंने कहा- ओके मेरी जान, पर मुझे तो चूसने दो. मैं तुम्हारी प्यारी चूत को खूब प्यार करना चाहता हूँ.

वे राजी हो गईं.

मैंने उनको खड़ा किया और उनकी चूत को चूसने लगा.
आंटी को भी चूत चुसवाने में मजा आने लगा.

उनकी कामुक आहें निकलने लगीं- आहह आह इस्स्स इस्स्स ओह नीतेश … बस करो अब डाल भी दो ना … मुझे रहा नहीं जा रहा ओह नीतेश प्लीज.

मैं खड़ा हुआ और उनकी साड़ी को कमर तक ऊपर करके चुदाई की पोजीशन में लाकर लंड सैट करने लगा.
आंटी ने कहा- रुको, साड़ी तो निकाल दो.

मैं आपको बता दूँ कि मुझे बिना साड़ी निकाले ही चोदना पसंद है.
मैंने कहा- नहीं आंटी, मुझे ऐसे ही पसंद है.
वे मुस्कुरा कर बोलीं- ठीक है … जैसा तुम चाहो, पर मुझे जल्दी शांत करो.

मैंने झट से लंड को हाथ में लिया और गप से डाल दिया.
आंटी एकदम से अपनी गांड उचका कर साथ देने लगीं और कराहने लगीं- आहह आहह … अस्श उम्म्म यस्स नीतेश … चोदो चोदो और जोर से अह आहह ह हम्म् इस्स … कितना मस्त चोदते हो … आहह काश तुम मेरे पति होते तो मैं रोज तुमसे चुदवाती अहह हह ओहह और जोर से नीतेश!

मैंने जवाब में कहा- अरे मेरी जान, पति नहीं हुआ तो क्या, अब तो रोज ही चोदा करूँगा … आह क्या मस्त चूत है तुम्हारी आह आह यस्स्स बहुत दिनों बाद चोद रहा हूँ … बहुत मजा आ रहा है आंटी अहह ओह.

आंटी ने भी कहा- मैं भी एक साल बाद चुद रही हूँ नीतेश … आहह आहह यस यस्स्स आहह ओहह चोद डालो मुझे आहह!

ऐसे ही चोदते चोदते 20 मिनट तक आंट सेक्स का खेल चालू रहा.
बाद में दोनों ने साथ में पानी निकाला और मैं आंटी ऊपर ही पड़ा रहा.
कब नींद लगी, कुछ पता ही नहीं चला.

जब आंटी उठीं तो उन्होंने मुझे उठाया.
मैंने घड़ी देखी, तो दोपहर के 3 बजे थे.

हम दोनों ने अपने अपने कपड़े पहने और फ्रेश होकर आंटी भी अपना काम करने चली गईं.
मैं फिर से एक बार सो गया.

तो दोस्तो, आपको मेरी सच्ची सेक्स कहानी कैसी लगी?
प्लीज कमेंट जरूर करना.

इस फ्री आंट सेक्स स्टोरी में आगे क्या हुआ, जानने के लिए मेरे साथ बने रहें, जल्द ही अगला भाग लिखूँगा
मेरी मेल आईडी है
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