पढ़िए अभि की सच्ची सेक्स स्टोरी जहां वो अपनी सेक्सी भाभी के साथ रात भर चुदाई करता है। भैया के विदेश जाने के बाद देवर-भाभी की उत्तेजक रिश्ता, बड़े स्तन, टाइट चूत और हॉट सेक्स सीन। हिंदी में पूरी कहानी!
नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम अभि है। मैं 24 साल का हूं और पटना, बिहार से हूं। ये कहानी मेरी जिंदगी की एक सच्ची घटना है, जो मेरे साथ घटी। सब कुछ इतना रोमांचक था कि आज भी याद करके दिल धड़क जाता है। चलिए, शुरू से बताता हूं।
मेरे भैया की शादी 2010 में हुई थी। उस वक्त भाभी ज्यादा सेक्सी नहीं लगती थीं, लेकिन उनकी आंखों में एक अजीब-सी चमक थी, जो मुझे हमेशा खींचती रहती थी। वो लंबी, गोरी और स्लिम थीं, लेकिन शादी के बाद धीरे-धीरे उनका बदन भरने लगा। मैं उस समय कॉलेज में था और सेक्स के बारे में ज्यादा नहीं जानता था। बस, कभी-कभी फिल्मों में देखकर थोड़ा-बहुत उत्सुक होता था। फिर 2017 में भाभी मां बनीं। बच्चे के जन्म के बाद उनका फिगर तो जैसे जादू से बदल गया। उनके स्तन इतने बड़े और भरे-भरे हो गए कि ब्लाउज में मुश्किल से समाते थे। कूल्हे चौड़े और गोल, कमर पतली – उफ्फ, देखकर ही मन में आग लग जाती थी।
अब मुझे सेक्स की थोड़ी समझ आ गई थी। मैं घर में मौका मिलते ही उनके करीब जाने की कोशिश करता। कभी किचन में पानी पीने के बहाने उनकी कमर से सट जाता, तो कभी सोफे पर बैठकर उनकी जांघों को हल्के से छू लेता। भाभी कुछ नहीं कहतीं, बस शरमा कर मुस्कुरा देतीं। डिनर टेबल पर मैं हमेशा उनके बगल में बैठता। प्लेट लेने के बहाने अपनी जांघ उनकी जांघ से रगड़ता, और वो चुपचाप खाना खाती रहतीं। मुझे लगता था कि शायद उन्हें भी मजा आ रहा है, लेकिन मैं डरता था कि कहीं गुस्सा न कर दें।
अब मुख्य कहानी पर आते हैं। मेरे भैया एक प्राइवेट कंपनी में इंजीनियर थे। मार्च 2017 में कंपनी ने उन्हें ट्रेनिंग के लिए विदेश भेज दिया। वो तीन महीने के लिए गए थे। घर में अब मां-पापा, दो बच्चे, भाभी और मैं थे। हमारा घर डबल स्टोरी वाला था – नीचे दो कमरे: एक मां-पापा का और दूसरा गेस्ट रूम। ऊपर दो कमरे: एक भैया-भाभी का और दूसरा मेरा। भैया के जाने की पहली रात, रात के 10 बजे भाभी मेरे कमरे में आईं। वो थोड़ी उदास लग रही थीं।
उन्होंने कहा, “अभि, क्या तुम आज मेरे साथ सोओगे? मुझे अकेले सोने की आदत नहीं है। रात में डर लगता है, और बच्चा भी छोटा है।” मेरे लिए ये जैसे स्वर्ग से उतरा मौका था! दिल जोरों से धड़क रहा था, लेकिन मैंने कूल बनकर कहा, “हां भाभी, क्यों नहीं। मैं आता हूं।” मैं उनके कमरे में चला गया। बिस्तर बड़ा था – मैं एक कोने पर लेटा, भाभी दूसरे कोने पर, और उनका छोटा बच्चा बीच में। दूसरा बच्चा नीचे दादी के साथ सो रहा था। लाइट बंद हुई, लेकिन मेरी आंखों में नींद कहां? मैं बार-बार भाभी की तरफ देखता। उनकी सांसें नियमित हो गईं, मतलब वो सो गईं।
मैं चुपके से अपना हाथ बढ़ाया और उनके स्तनों को हल्के से छुआ। उफ्फ, कितने नरम और गर्म थे! ब्रा के ऊपर से ही महसूस हो रहा था कि वो कितने भरे हुए हैं। मैंने धीरे-धीरे दबाया, लेकिन डर से ज्यादा नहीं किया। पूरी रात मैं ऐसे ही जागता रहा, और सुबह उठकर कॉलेज चला गया।
एक हफ्ता ऐसे ही बीता। मैंने सोचा कि अब कुछ प्लान करना चाहिए, ताकि भाभी भी मुझसे आकर्षित हों। मैं घर में अब हाफ पैंट पहनने लगा, जिसमें मेरा लंड साफ नजर आता था। और वो हमेशा तना हुआ रहता, क्योंकि भाभी के बारे में सोचते ही खड़ा हो जाता। शाम को मैं जिम से आता, पसीने से तर, और हाफ पैंट में घूमता। भाभी की नजरें कभी-कभी मेरी पैंट पर टिक जातीं, लेकिन वो कुछ नहीं कहतीं।
रात को सोने का समय होता, मैं भाभी के कमरे में जाता। सोने का नाटक करता, लेकिन आधे घंटे बाद जब मेरा लंड पूरा तन जाता, तो मैं उठकर बाथरूम जाता। जानबूझकर लाइट ऑन करता, ताकि भाभी देख सकें। एक रात ऐसा ही हुआ। मैं उठा, और भाभी की आंखें खुली हुई थीं। वो मुस्कुराकर बोलीं, “अभि, नींद नहीं आ रही?” मैंने कहा, “नहीं भाभी, कुछ अजीब-सी फीलिंग हो रही है।” वो हंस दीं। धीरे-धीरे हमारी बातें बढ़ने लगीं। हम रात में देर तक गप्पें मारते। मैं बच्चे को बिस्तर के कोने पर सुलाता और खुद भाभी के बिल्कुल पास आ जाता। मेरी जांघ उनकी जांघ से छूती, और मेरा लंड पैंट में तंबू बना रहता।
एक रात बातों-बातों में मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। भाभी की नजर उस पर पड़ी। वो शरमाते हुए बोलीं, “अरे अभि, ये क्या हो गया? इतना उभरा हुआ क्यों है?” मैंने शर्मा कर कहा, “पता नहीं भाभी, कभी-कभी ऐसे हो जाता है। अजीब-सी खुजली और उत्तेजना होती है।” वो हंसकर बोलीं, “मुझे पहले क्यों नहीं बताया? मैं इसका इलाज जानती हूं। जरा दिखाओ तो, देखूं कितना बड़ा है।” मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा। मैंने तुरंत अपनी हाफ पैंट उतार दी। मेरा 7 इंच का लंड पूरा तना हुआ, हवा में लहरा रहा था। भाभी ने देखा तो उनकी आंखें फैल गईं, “अरे वाह, अभि! ये तो बहुत बड़ा और मोटा है।
तुम्हारे भैया का भी इतना नहीं है। कैसे इतना बड़ा हो गया?” मैंने शरमाते हुए कहा, “ये एक राज है, भाभी।” वो जोर देकर बोलीं, “बताओ ना, मैं किसी को नहीं बताऊंगी।” मैंने बताया, “असल में मैं आपसे बहुत आकर्षित हूं। आपके बारे में सोचता हूं – आपके स्तनों, कूल्हों के बारे में – तो ये खड़ा हो जाता है। फिर मैं इसे हाथ से रगड़ता हूं। बहुत मजा आता है, और 2-3 मिनट में सफेद माल निकल जाता है। इसी से ये बड़ा और मजबूत हो गया।” भाभी की आंखों में एक चमक आ गई। वो बोलीं, “तो क्या मैं भी तुम्हारे लंड के साथ खेल सकती हूं? रगड़ सकती हूं?” मैंने उत्साहित होकर कहा, “बिल्कुल भाभी, इसमें पूछने की क्या बात है! आपका हक है।”
भाभी ने तुरंत मेरा लंड अपने नरम हाथों में पकड़ लिया। उफ्फ, वो स्पर्श! जैसे बिजली दौड़ गई पूरे शरीर में। वो धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगीं। मैं आंखें बंद करके मजा ले रहा था। उनकी उंगलियां लंड के सुपारे पर घूम रही थीं, और मैं सिसकारियां भर रहा था। 2-3 मिनट में ही मेरा माल फव्वारे की तरह छूट गया – उनके हाथों पर, बिस्तर पर।
भाभी खुश होकर बोलीं, “वाह अभि, कितना गर्म और गाढ़ा माल है! मजा आ गया।” मैंने उन्हें गले लगा लिया और किस करने लगा। उनके होंठ इतने रसीले और नरम थे, जैसे शहद में डूबे हों। मैं उनके होंठ चूस रहा था, जीभ अंदर डालकर खेल रहा था। भाभी बोलीं, “अरे इतनी जल्दी मत करो, धीरे-धीरे सवोर करो।” लेकिन मैं कहां रुकने वाला था। मैंने उनकी नाइटी ऊपर की और कमीज उतार दी। अंदर काली ब्रा थी, जो उनके बड़े-बड़े स्तनों को मुश्किल से काबू में रख रही थी। स्तन इतने भरे हुए कि ब्रा से बाहर निकलने को बेताब लग रहे थे।
मैंने ब्रा का हुक खोला और उतार दिया।
वाह, क्या नजारा! दो बड़े-बड़े गोल-मटोल स्तन, गोरे और नरम। गुलाबी निप्पल्स तने हुए, जैसे मुझे बुला रहे हों। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और चूसने लगा। भाभी की सिसकारियां निकलने लगीं, “आह अभि, धीरे… उफ्फ, कितना अच्छा लग रहा है!” मैं दूसरे स्तन को हाथ से दबा रहा था, निप्पल को उंगलियों से मसल रहा था। दूध की बूंदें निकल रही थीं, जो और उत्तेजना बढ़ा रही थीं।
फिर मैंने उनकी सलवार का नाड़ा खोला और नीचे सरका दिया। पैंटी गीली हो चुकी थी। मैंने पैंटी भी उतार दी। अब भाभी मेरे सामने पूरी नंगी थीं। क्या खूबसूरत बदन! गोरी चमड़ी चमक रही थी, चौड़े कूल्हे, पतली कमर, और नीचे वो गुलाबी चूत – हल्के बालों वाली, गीली और फूली हुई। मैंने अपना मुंह वहां लगाया और चाटने लगा।
भाभी की आहें तेज हो गईं, “अभि, क्या कर रहे हो… आह, मत रुको!” उनकी चूत का रस इतना मीठा था कि मैं पागल हो गया। मैं जीभ से अंदर-बाहर कर रहा था, क्लिटोरिस को चूस रहा था। भाभी का शरीर कांप रहा था। फिर भाभी ने मेरे लंड पर कंडोम चढ़ाया। बोलीं, “सुरक्षित रहना चाहिए, अभि। अब आओ, डालो इसे मेरी चूत में।” ये मेरा पहला अनुभव था, तो मैं थोड़ा नर्वस था। मैंने अपना लंड उनकी चूत के मुंह पर रखा और धीरे से दबाया। आधा घुसा, तो भाभी बोलीं, “और जोर से, पूरा डालो!” मैंने कमर हिलाई और पूरा लंड अंदर ठूंस दिया। उफ्फ, कितनी गर्म और टाइट चूत थी! जैसे मखमल में लिपटा हुआ।
मैं धक्के मारने लगा – धीरे-धीरे, फिर तेज। भाभी की आहें कमरे में गूंज रही थीं, “आह अभि, और तेज… फाड़ दो मुझे! उफ्फ, कितना मजा आ रहा है!” हम दोनों पसीने से तर हो गए। मैं उनके स्तनों को दबाता, होंठ चूसता, और धक्के मारता रहा। थोड़ी देर बाद मेरा माल कंडोम में छूट गया। मैं थककर उनकी छाती पर लेट गया। भाभी ने मुझे चूमा और बोला, “तुम्हारे भैया के साथ कभी इतना मजा नहीं आया। तुम्हारा लंड तो जादुई है!” मैंने हंसकर कहा, “भाभी, आप जब चाहें, मैं आपका गुलाम हूं।”
उस रात हमने 3-4 बार और सेक्स किया। हर बार कुछ नया। एक बार मैंने उन्हें डॉगी स्टाइल में लिया – उनके चौड़े कूल्हों को पकड़कर पीछे से धक्के मारे। भाभी चीख रही थीं मजा से। दूसरी बार उन्होंने मुझे ऊपर बिठाया और खुद नीचे से कमर हिलाई। वो नरम स्पर्श, वो गर्माहट, वो सिसकारियां – सब कुछ अविस्मरणीय था। अगले तीन महीनों में हम रोज रात को ऐसे ही मिलते। भैया के आने तक हमारा ये रिश्ता गहरा हो गया। उम्मीद है आपको मेरी ये सच्ची और उत्तेजक कहानी पसंद आई।