एडवोकेट की 25 साल की हॉट बीवी नेहा भाभी को रगड़-रगड़ कर चोदा

Advocate ki 25 saal ki hot biwi Neha Bhabhi ko ragad ragad ke choda

मुंबई की हॉट एडवोकेट वाइफ नेहा भाभी की असली चुदाई की कहानी। 25 साल की गोरी-गुलाबी भाभी को 7 इंच मोटे लंड से पहली बार असली मज़ा दिया। घर में, बाथरूम में, बालकनी में भर-भर के चोदा। सारी रात चीखती रहीं “और ज़ोर से फाड़ दो”। पूरी देसी सेक्स स्टोरी हिंदी में।

मुंबई की भीड़-भाड़ वाली बिल्डिंग में, सातवीं मंज़िल पर हमारा फ्लैट था और ठीक सामने शर्मा अंकल का। अंकल दिन भर कोर्ट-कचहरी में रहते, उनकी दूसरी बीवी नेहा भाभी स्कूल में पढ़ाती थीं। पच्चीस साल की नेहा भाभी को देखकर लगता ही नहीं था कि वो किसी की बीवी हैं—गोरा रंग, लंबे काले घने बाल, कातिलाना काजल वाली आँखें, और वो कमर जो हर बार चलते वक़्त मटकती थी, जैसे कोई कह रही हो “पकड़ लो मुझे”। 34-28-36 का फिगर, जो भी देखता एक बार तो रुक ही जाता।

मैं इंजीनियरिंग कॉलेज का थर्ड ईयर का स्टूडेंट था—21 साल, जिम जाता था, बॉडी टाइट थी और नीचे 7 इंच का मोटा, नसों वाला लंड जिसे देखकर लड़कियाँ घबरा जाती थीं। नेहा भाभी को मैं पिछले एक साल से रोज़ देखता था। सुबह 8 बजे वो स्कूल के लिए निकलतीं, मैं कॉलेज के लिए। लिफ़्ट में या गलियारे में नज़रें मिलतीं तो वो हल्की-सी शरमाई मुस्कान देतीं, जिससे मेरे अंदर आग लग जाती।

एक सुबह मैं जल्दी में था, सिर्फ़ तौलिया लपेटकर बाहर निकला था—अंदर कुछ नहीं। गेट बंद करते वक़्त तौलिया का गाँठ खुल गया और मेरा पूरा नंगा, खड़ा हुआ लंड भाभी के सामने लहरा गया। मैं शर्मा गया, हाथ से छुपाने लगा, पर भाभी ने एक पल को भी नज़रें नहीं हटाईं। होंठों पर उंगली रखकर मुस्कुराईं, आँखों में शरारत भरी थी, फिर धीरे से बोलीं, “अरे वाह श्री… कितना बड़ा रखते हो” और चली गईं। उस दिन के बाद मेरी रातें उनके नाम हो गईं।

कुछ दिन बाद कॉलेज बंद था। सुबह दस बजे सिगरेट पीने बाहर निकला तो देखा भाभी झाड़ू लगा रही थीं—नौकरानी नहीं आई थी। छोटी-सी सफ़ेद टी-शर्ट, गुलाबी ब्रा की लेस साफ़ दिख रही थी और नीचे काली टाइट शॉर्ट्स में उनकी गोल-गोल भरी हुई गांड मटक रही थी। झुकते ही ग, मैंने पीछे से पास जाकर हल्के से कंधे पर हाथ रखा। वो चौंकीं नहीं, मुड़ीं और शरारती मुस्कान के साथ बोलीं, “कहाँ श्री जी… आज कॉलेज नहीं?” उनकी आवाज़ में मिठास थी और आँखों में न्योता।

फिर एक दोपहर मैं कॉलेज से जल्दी लौटा तो भाभी दरवाज़े पर खड़ी थीं, चेहरा परेशान।
“क्या हुआ भाभी?”
“चाबी कहीं खो गई… शर्मा जी नैनीताल गए हैं तीन दिन के लिए… ताला तुड़वाना पड़ेगा।”
मैंने तुरंत कहा, “आइए मेरे फ्लैट में बैठिए, मैं चाबी वाला बुलाता हूँ।”

अंदर आते ही वो सोफे पर बैठ गईं। मैं कोल्ड ड्रिंक लाया। बाथरूम गया, लौटा तो टीवी पर ब्लू फिल्म चल रही थी—मैंने सुबह ही सीडी लगाकर छोड़ दी थी। भाभी फिल्म देख रही थीं, होंठ हल्के खुले थे, साँसें तेज़। मुझे देखकर शरमाईं नहीं, बस मुस्कुराकर बोलीं, “वाह श्री… 7 इंच तो तुम्हारा भी होगा ना?” मैं हकलाया, टीवी बंद किया। चाबी वाला आया, ताला खुलवाया और वो चली गईं।

शाम सात बजे डोरबेल बजी। भाभी खड़ी थीं—लाल रंग की साड़ी, ब्लाउज़ टाइट, मंगलसूत्र लहरा रहा था।
“श्री, आज अकेले हो ना? मैं भी अकेली हूँ… डिनर साथ कर लो, कंपनी हो जाएगी।”
मैंने तुरंत हाँ कहा।

उनके फ्लैट में पहुँचा तो खुशबू ही मदहोश करने वाली थी। वो किचन में थीं, मैं ड्रॉइंग रूम में। चुपके से देख रहा था—पतली कमर, साड़ी में लिपटी भरी हुई गांड। वो पलटीं और आँखों ही आँखों में बोलीं, “इतना ध्यान से क्या देख रहे हो?”

मैंने हिम्मत करके कहा, “आपको भाभी… बहुत ख़ूबसूरत हो आप।”
वो हँस पड़ीं, फिर बोलीं, “खाने से पहले कुछ पी लें?”
शर्मा अंकल की चाइल्ड बीयर निकाली। हम सोफे पर पास-पास बैठे। दो ग्लास के बाद मैंने हल्के से उनका कंधा छुआ। वो सिहर गईं, पर हटी नहीं। मैंने कान में फुसफुसाया, “भाभी… तुम बहुत हॉट हो।”
वो शरमा कर बोलीं, “श्री… ये गलत है…” पर आवाज़ में मना बिल्कुल नहीं था।

मैंने उनका हाथ लिया, उंगलियाँ आपस में लिपट गईं। फिर गाल पर किस किया। वो साँसें तेज़ लेने लगीं। मैंने होंठ उनके होंठों पर रख दिए। पहले हिचकिचाईं, फिर खुद ही मेरी गर्दन पकड़कर पागलों की तरह चूसने लगीं। जीभ अंदर, लार मिल रही थी। मैंने साड़ी का पल्लू सरकाया, ब्लाउज़ के हुक खोले—गुलाबी ब्रा में कैद 34 साइज़ के सख़्त बूब्स बाहर आए। गुलाबी निप्पल्स तने हुए थे। मैंने मुँह में लिया, चूसा, काटा। वो सिसकियाँ ले रही थीं, “उफ्फ्फ श्री… कितने दिन से तरस रही थी…”

फिर वो खुद मेरी जीन्स की ज़िप खोलकर लंड बाहर निकालीं। देखते ही आँखें चौड़ी हो गईं, “हाय अल्लाह… इतना मोटा… इतना लंबा…” घुटनों पर बैठीं और पागल होकर चूसने लगीं। गले तक ले जा रही थीं, आँखों में आँसू, गाल फूल रहे थे, फिर भी नहीं रुकीं। मैंने बाल पकड़कर मुँह चोदा। 20 मिनट बाद मैं उनके मुँह में झड़ गया—गाढ़ा, गरम माल। वो एक बूंद नहीं गिरने दी, सब पी गईं और लंड चाटकर साफ़ किया।

फिर मैंने उन्हें खड़ा किया, साड़ी-ब्लाउज़-पेटीकोट सब उतारा। एकदम नंगा जिस्म—दूध जैसा गोरा, गुलाबी निप्पल्स, पेट एकदम फ्लैट, और चूत बिल्कुल क्लीन शेव्ड, गुलाबी फाँकें चमक रही थीं। मैंने बेड पर लिटाया, पैर फैलाए और जीभ से चूत चाटने लगा। रस से भरी हुई थीं। दो उँगलियाँ अंदर, जीभ क्लिट पर—10 मिनट में दो बार झड़ीं, कमर ऊपर उठाकर मेरे मुँह पर चूत रगड़ रही थीं, “श्री… मैं मर जाऊँगी… आह्ह्ह…”

अब मेरा लंड फिर तना हुआ था। मैंने लंड उनकी चूत पर रगड़ा, सुपारा अंदर किया। बहुत टाइट थीं। वो दर्द से सिसक रही थीं। मैंने होंठ उनके होंठों पर रखे और एक ज़ोर का धक्का मारा—पूरा 7 इंच अंदर। उनकी चीख मेरे मुँह में दब गई। मैं रुका रहा, बूब्स दबाता रहा, निप्पल्स चूसता रहा। थोड़ी देर बाद वो खुद कमर हिलाने लगीं। फिर मैंने स्पीड पकड़ी—ज़ोर-ज़ोर के धक्के। बेड हिल रहा था। वो चिल्ला रही थीं, “फाड़ दो मुझे… आज तुमने मुझे औरत बनाया… रोज़ चोदना मुझे… आआआह्ह्ह… तुम्हारा लंड सबसे बेस्ट है…”

25 मिनट तक लगातार ठोका, फिर सारा माल उनकी गर्म, रसीली चूत में छोड़ दिया। वो काँप रही थीं, चूत से वीर्य और उनका रस बह रहा था। हम नंगे ही लिपट कर सो गए। सुबह 5 बजे फिर उठे—इस बार घोड़ी बनाकर पीछे से मारा। उनकी गांड पर थप्पड़ मार-मारकर लाल कर दिया। फिर 8 बजे जल्दी-जल्दी नहाए, कपड़े पहने और वादा किया—शाम को फिर।

अगली शाम बाथरूम में मिले। वो पहले गईं, मैं पीछे-पीछे। दरवाज़ा बंद किया और पीछे से पकड़ लिया। कैप्री नीचे की, पैंटी साइड की, दो उँगलियाँ चूत में घुसेड़कर तेज़-तेज़ उँगली करने लगा। वो दीवार पर हाथ टेककर सिसकियाँ ले रही थीं। फिर खुद मेरी पैंट खींची, घुटनों पर बैठी और कुतिया की तरह लंड चूसने लगीं। मैंने बाल पकड़कर गले तक ठूँसा। आँखों में आँसू, फिर भी बोलीं, “और गहरा…”

फिर उन्हें घोड़ी बनाया, गांड ऊपर उठवाई और एक झटके में पूरा लंड चूत में उतार दिया। बाथरूम में आवाज़ गूँज रही थी—पच-पच-पच। मैं बूब्स पकड़कर ठोक रहा था। वो बोलीं, “तुम्हारे अंकल में दम ही नहीं… कभी ऐसा नहीं चोदा… आज मेरी सारी प्यास बुझा दो…” मैंने और तेज़ किया। 25 मिनट बाद फिर चूत में फव्वारे छोड़े और लंड मुँह में देकर साफ़ करवाया। उस रात तीन बार और चोदा—एक बार किचन स्लैब पर, एक बार सोफे पर, एक बार बालकनी में अंधेरे में।

तब से जब भी मौका मिलता, हम एक-दूसरे को खा जाते। कभी लिफ़्ट में चुपके से चूत में उंगली, कभी सीढ़ियों पर मुँह में लंड। आज भी जब शर्मा अंकल बाहर होते हैं, मैं उनके घर जाता हूँ और नेहा भाभी को प्यार से, कभी रूखेपन से, कभी गंदी-गंदी गालियाँ देकर चोदता हूँ। वो भी पूरी कुतिया बनकर मज़े लेती हैं। उनकी चूत का रस, उनकी सिसकियाँ, उनकी वो “और ज़ोर से श्री” वाली आवाज़—इनका मज़ा आज तक किसी में नहीं आया।