Devar Ne Bhabhi Ki Chut Bhari – Bhabhi Ne Anadi Ko Banaya Mard
पढ़िए भाभी की खुशी – एक सच्ची और हॉट हिंदी सेक्स स्टोरी। आईआईटी स्टूडेंट शेखर की छोटी भाभी की चूत के साथ रातों की चुदाई, मूली वाली मस्ती से लेकर जोरदार चुदाई तक। पहली बार की चुदाई, गर्मागर्म किसिंग, 69 पोजीशन और चूत में पानी डालने की कहानी। पूरी तरह असली और उत्तेजक हिंदी कहानी। अगर आप हॉट भाभी चुदाई स्टोरी पसंद करते हैं तो जरूर पढ़ें!
दोस्तों, मेरा नाम शेखर है (नाम बदला हुआ)। लुधियाना का रहने वाला। मैं आईआईटी रुड़की से बी.टेक कर रहा हूँ। पेपर्स के बाद डेढ़ महीने की छुट्टी मिली तो घर आ गया। हमारे घर के ठीक सामने पंजाबी परिवार रहता है। अंकल-आंटी के दो बेटे हैं, दोनों की शादी हो चुकी है। छोटा बेटा इंग्लैंड में है, बड़ा यहीं लुधियाना में। हमारा उनके परिवार से बहुत अच्छा रिश्ता है।
आंटी की बड़ी बहू (किरनजीत कौर) और छोटी बहू (करमजीत कौर) – दोनों बहुत अच्छी हैं। उनका स्वभाव इतना प्यारा कि मेरी इज्जत हमेशा करते हैं। मैं कभी-कभी उनके घर जाता तो दोनों मिलकर मुझसे मजाक करतीं। खासकर छोटी भाभी – वो कभी-कभी ऐसे-ऐसे मजाक करतीं कि थोड़ा अजीब लगता। कभी अपनी बॉडी को मेरे से छू देतीं, लेकिन मैं नजरअंदाज कर देता।
तीसरे सेमेस्टर के बाद छुट्टी में घर आया। उस वक्त सिर्फ छोटी भाभी घर पर थीं। बड़ी भाभी के पापा भी थे, पर वो अपने घर में ही रहते थे। एक दिन मैं उनके घर गया। भाभी बाथरूम में कपड़े धो रही थीं। अकेली थीं। मुझे देखकर बोलीं,
“शेखर, कुर्सी लाकर यहीं बैठ जाओ, मैं अकेली बोर हो रही हूँ।”
मैं कुर्सी लेकर बाथरूम के बाहर बैठ गया। दूप आ रही थी। भाभी के कपड़े गीले हो गए थे, इसलिए उनके बदन से पूरी तरह चिपक गए। पंजाबी लड़कियों का फिगर तो आप जानते ही हैं – देखते ही मन में ख्याल आ जाता है। भाभी का बदन एकदम मस्त – गोरा, भरा-भरा, कर्व्स सही जगह पर।
मैंने पूछा,
“भाभी, कैसी हो?”
“मैं ठीक हूँ, तुम बताओ कब आए हो? कब तक रहोगे?”
“कल ही आया हूँ, रात हो चुकी है। अब पूरे डेढ़ महीने रहूँगा।”
बातों-बातों में भाभी ने मजाक शुरू कर दिया। ठंड में मेरे ऊपर पानी फेंक दिया। मैं भी मस्ती में उनके पास गया, सर्फ का झाग उनके मुँह पर लगा दिया। वो भी लगाने की कोशिश करने लगीं। इसी बीच उनके मस्त बोब्स मेरे हाथ से छू गए। मैं तो घबरा गया, लेकिन भाभी ने कुछ नहीं कहा। बस मुस्कुराईं।
रात को भाभी ने खाना बनाकर मुझे बुलाया। मैं गया तो वो अकेली थीं। सास-ससुर अपने घर सोने चले गए थे। भाभी बेड पर बैठी थीं।
“क्या हुआ भाभी, क्यों बुलाया?”
“क्या, मैं तुम्हें बुला नहीं सकती?”
“अरे नहीं-नहीं, आप तो बुरा मान गईं!”
फिर बातों में पूछा,
“भाभी, क्या आप अकेली सोती हो? इतने बड़े घर में रात को?”
वो मजाक में बोलीं, “क्यों, तुम मेरे साथ सोना चाहते हो क्या?”
मैंने भी हँसकर टाल दिया।
फिर वो बोलीं,
“तुम्हें ठंड नहीं लग रही पैरों में?”
“हाँ, लग रही है।”
“तो आओ, मेरी रजाई में पैर डालो।”
मैं उनके सामने बैठ गया, रजाई में पैर डाले। काफी देर बातें कीं। मुझे महसूस हुआ – भाभी अपने पैरों से मेरे पैरों को सहला रही हैं। उनका बदन गर्म हो रहा था। मैं थोड़ा घबरा कर बहाना बनाकर चला गया।
अगले दिन ससुर जी कहीं गए। माँ से बोला कि शेखर को आज हमारे घर सोने भेज दो, बहू अकेली है। शाम को मैं गया। भाभी खुश हो गईं।
“तुम बैठो, मैं चाय बनाकर लाती हूँ।”
चाय पीते हुए बातें हुईं। मैंने पूछा,
“भैया कैसे हैं?”
भाभी उदास हो गईं।
“जो होंगे, वो तो खुश ही होंगे।”
फिर मेरी तरफ देखकर बोलीं, “तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है?”
“नहीं भाभी।”
“झूठ मत बोलो!”
“सच में नहीं है।”
“मतलब तुमने कभी वो किया ही नहीं? तुम अभी अनाड़ी हो?”
मैं समझा नहीं। वो हँसकर बोलीं, “कोई बात नहीं, ज्यादा मत सोचो।”
रात हुई। भाभी बोलीं,
“आज मेरे साथ ही सो जाओ।”
मैंने मजाक समझा। बाहर बरामदे में सो गया।
रात करीब 1 बजे नींद खुली। भाभी के कमरे की लाइट जल रही थी। मैं चुपके से खिड़की के पास गया। थोड़ा सा खोला तो देखा – भाभी पूरी नंगी बेड पर लेटी हैं। एक हाथ से अपने बोब्स दबा रही हैं, दूसरे हाथ में मूली – जिसे वो अपनी चूत में डालकर खुद को चोद रही थीं।
मेरा लंड खड़ा हो गया। मन किया अभी जाकर भाभी की चूत में अपना लंड डाल दूँ। लेकिन डर लगा। वापस अपने बेड पर आया और उसी तरह मुठ मारकर सो गया।
अगली शाम मैं फिर गया। भाभी सोच में डूबी थीं। मैंने पूछा,
“क्या हुआ?”
वो मुस्कुराईं, “कुछ नहीं, आओ बैठो।”
फिर चाय बनाकर आईं। बातों में मैंने देखा – ड्रॉअर में वही मूली पड़ी है। मैंने निकाल ली। भाभी ने देखा तो घबरा गईं। जल्दी से छीनकर किचन ले गईं।
रात को फिर बातें हुईं। भाभी बोलीं,
“तुम्हें बरामदे में ठंड नहीं लगती?”
मैंने झूठ बोला, “नहीं।”
वो समझ गईं। बोलीं, “आज अंदर मेरे बेड पर सो जाओ। डरो मत, मैं कुछ नहीं करूँगी।”
मैं अपनी रजाई लेकर आया। दोनों अलग-अलग रजाई में सोए। रात को मेरी रजाई नीचे गिर गई। ठंड लगी तो मैंने भाभी की रजाई खींच ली। भाभी ने मुझे अपनी रजाई में खींच लिया। उनका मुँह मेरी तरफ।
अचानक नींद खुली। भाभी नाइटि में सोई थीं। उनके मस्त बोब्स रजाई से बाहर। गुलाबी होंठ मेरे होंठों के इतने पास। मैंने धीरे से उन्हें छुआ। भाभी की साँसें गर्म थीं। मैं उत्तेजित हो गया।
धीरे-धीरे मैंने उनकी नाइटि के ऊपर से बोब्स सहलाए, होंठों को छुआ। भाभी की आँखें खुल गईं। वो दूर हट गईं।
“ये क्या कर रहे हो?”
मैं चुप रहा।
फिर मैंने उन पर चढ़कर कहा,
“भाभी, आप भी कमाल करती हो। एक तरफ मूली से अपनी प्यास बुझाती हो, दूसरी तरफ लंड मिला तो नखरे?”
भाभी चौंकीं।
“क्या बकवास कर रहे हो?”
“कल रात मैंने देख लिया था। आप खुद को चोद रही थीं।”
फिर मैंने कहा,
“आप जवान हो, इतनी खूबसूरत। भैया डेढ़ साल से इंग्लैंड में हैं। वो तो वहाँ किसी को चोदते ही होंगे। आप अपनी जवानी बेकार कर रही हो। मैं भी आज तक किसी को नहीं चोदा। दोनों की प्यास बुझा लें?”
भाभी कुछ बोलतीं उससे पहले मैंने उनके होंठ चूम लिए। पहले थोड़ा विरोध किया, फिर वो भी साथ देने लगीं। हम दोनों एक-दूसरे को जोर-जोर से चूमने लगे।
भाभी ने मेरी शर्ट उतारी। मैंने उनकी नाइटि। वो ब्रा-पैंटी में। मैंने ब्रा खोला, पैंटी उतारी। भाभी पूरी नंगी। उनकी चूत शेव की हुई, गुलाबी, गीली।
लाइट ऑन की। उनका बदन दूध जैसा। बोब्स परफेक्ट। मैं उन्हें देखता रह गया।
“क्या कभी नंगी औरत नहीं देखी?”
“नहीं भाभी, आप पहली हो। लगता है कोई अप्सरा चुदने आई है।”
भाभी हँसीं। मेरी निक्कर उतारी। मेरा लंड खड़ा।
“मैंने कभी सेक्स नहीं किया।”
“टेंशन मत लो, आज मैं तुम्हें सब सिखाती हूँ।”
भाभी ने मुझे लेटाया। अपने बोब्स मेरे मुँह में दिए। मैंने चूसे, दबाए। भाभी उफ्फ-आह्ह कर रही थीं।
फिर 69 पोजीशन में। मैं उनकी चूत चाट रहा था, वो मेरा लंड चूस रही थीं। स्वर्ग जैसा लग रहा था। भाभी का रस निकला – थोड़ा नमकीन। मैंने सब चाट लिया।
फिर भाभी ऊपर आईं। मेरे लंड पर बैठीं। धीरे-धीरे अंदर लिया। पहले दर्द हुआ, लेकिन फिर मजा आने लगा।
मैंने उन्हें नीचे लिटाया। पैर फैलाए। एक जोर का धक्का। भाभी चीखीं, आँसू आ गए। मैं रुक गया।
“डरो मत, चुदाई में ऐसा होता है।”
थोड़ी देर बाद फिर धक्का। पूरा लंड अंदर। भाभी दर्द से कराहीं, फिर मजा लेने लगीं।
“आह्ह… ओह्ह… और जोर से… चोदो मुझे… रजा… बड़ा मजा आ रहा है!”
मैंने रफ्तार बढ़ाई। करीब 10 मिनट बाद मैंने कहा,
“भाभी, मैं झड़ने वाला हूँ।”
“रुको… पहले किस करो।”
फिर फिर शुरू। भाभी भी झड़ने वाली थीं।
“जोर से धक्के मारो… मेरी चूत में ही डालो अपना पानी!”
मैंने जोर-जोर से पेला। भाभी झड़ गईं। मैंने भी उनकी चूत में झड़ दिया। दोनों थककर लेट गए।
उस रात मैंने भाभी को दो बार और चोदा। नंगे ही सो गए।
उस रात के बाद जब तक उनका परिवार नहीं आया, मैं रोज भाभी को नंगा करता, उनकी चूत को अपने लंड से भरता। एक बार बड़ी भाभी डॉक्टर के पास गईं। छोटी भाभी ने प्लान बनाया। लेकिन वो जल्दी वापस आ गईं और हमें नंगा देख लिया। उसके बाद क्या हुआ – अगली कहानी में।
ये मेरी पहली और सच्ची कहानी है। पसंद आई तो बताना।