कॉलोनी की सबसे हॉट भाभी नेहा के साथ रात भर की चुदाई

रात के ढाई बज चुके थे। सर्द हवा चल रही थी, लेकिन मेरे सीने में एक अलग ही गर्माहट थी। मैं, संदीप, चुपके से अपने घर से निकला और सीधा उसी मंज़िल की ओर बढ़ चला जहाँ कॉलोनी की सबसे मनमोहक हॉट भाभी रहती थी – नेहा भाभी।

उनका नाम सुनते ही दिल की धड़कनें तेज़ हो जाती थीं। गोरी, चमकती त्वचा, लंबे घने काले बाल जो उनकी कमर तक लहराते थे, और वो फिगर… वाह! 36-28-38 – इतना परफेक्ट कि देखते ही साँस अटक जाती। उनके स्तन इतने भरे-भरे और उभरे हुए कि कोई भी नज़र हटा नहीं पाता। कमर पतली, और पिछवाड़ा इतना गोल-मटोल व कसा हुआ कि हर कदम में लहराता हुआ लगता, जैसे कोई स्वर्ग की अप्सरा धरती पर उतर आई हो। कद सिर्फ़ 5 फुट 3 इंच, लेकिन उनकी मौजूदगी पूरे कमरे को भर देती थी।

आज उन्होंने ब्लैक सिल्की नाइट गाउन पहना था – वो पतला कपड़ा उनके हर कर्व को ऐसे चूम रहा था जैसे कोई प्रेमी अपने हाथों से सहलाए। मैंने खाना खाते वक्त ही सोच लिया था – आज उनके पास जाऊँगा। थोड़ा डर भी लग रहा था, लेकिन उनकी वो मुस्कान, वो नज़रें मिलाने का अंदाज़… सब कुछ मुझे खींचता था।

मैंने घंटी बजाई। दरवाज़ा तुरंत खुला। नेहा भाभी खुद खड़ी थीं – जैसे मेरा इंतज़ार कर रही हों। मुझे देखते ही उनकी आँखों में चमक आ गई। “आओ ना संदीप… अंदर आओ,” उन्होंने बहुत प्यार से कहा और मेरा हाथ थामकर मुझे अंदर खींच लिया। उनकी उँगलियाँ गर्म थीं, नरम थीं।

हॉल में आकर वो मुझे सोफ़े पर बिठाया। “तुम बैठो, मैं गरम दूध लेकर आती हूँ। आज ठंड बहुत है,” कहकर वो किचन की तरफ़ गईं। थोड़ी देर बाद वो दो गिलास लेकर लौटीं। एक मुझे दिया, दूसरा हाथ में रखकर मेरे ठीक बगल में बैठ गईं – इतने करीब कि उनकी जाँघ मेरी जाँघ से सटी हुई थी। उनकी बॉडी से हल्की-हल्की महक आ रही थी – वो खुशबू जो पागल कर देने वाली थी।

टीवी ऑन किया। एक रोमांटिक इंग्लिश मूवी लगाई – जिसमें सिर्फ़ प्यार भरे सीन थे, किसिंग, गले लगना। लेकिन हमारी नज़रें स्क्रीन पर नहीं, एक-दूसरे पर टिकी थीं।

नेहा भाभी ने धीरे से पूछा, “संदीप… तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है क्या?”
मैं थोड़ा शरमा गया। “नहीं भाभी…”
वो हँसीं, “अरे शरमाने की क्या बात है? बताओ ना… कभी किसी लड़की को… ऐसे करीब से देखा है? छुआ है?”

मैंने उनकी आँखों में देखा। “नहीं भाभी… लेकिन…”
“लेकिन?” उन्होंने भौंहें उठाईं और मुस्कुराईं।
“लेकिन आप जैसी खूबसूरत औरत को देखकर… मन बहुत बेकाबू हो जाता है,” मैंने हिम्मत करके कह दिया।

उनकी आँखें चमक उठीं। उन्होंने अपना हाथ मेरे गाल पर रखा, धीरे से सहलाया। “तो फिर… जो मन में है, वो कह दो ना। मुझे भी अच्छा लगता है जब कोई मुझे इतना चाहता है… इतना देखता है।”

उस पल मैंने हिम्मत जुटाई। “भाभी… मैं आपको किस करना चाहता हूँ… बहुत दिनों से।”

वो शरमाईं, लेकिन आँखें बंद करके अपना चेहरा मेरे करीब ला दियां – जैसे कह रही हों, “हाँ… कर लो।”

मैंने उनके चेहरे को दोनों हाथों में लिया और उनके नरम, गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रख दिए। वो किस इतनी गहरी, इतनी प्यासी थी कि हम दोनों भूल ही गए कि दुनिया में और कुछ भी है। उनके होंठ रस भरे थे, मीठे थे। उनकी जीभ मेरी जीभ से खेलने लगी। हाथ मेरे बालों में फंस गए। करीब 15-20 मिनट तक हम एक-दूसरे में खोए रहे।

किस खत्म हुई तो साँसें तेज़ थीं। नेहा भाभी ने मेरी आँखों में देखकर कहा, “तुम तो कह रहे थे कुछ किया नहीं… पर ये तो बहुत प्यार से किस करते हो।”

मैंने हँसते हुए उनकी नाइट गाउन के ऊपरी बटन खोल दिए। उनके भरे-भरे, गोरे स्तन बाहर आ गए – निप्पल हल्के गुलाबी, तने हुए। मैंने धीरे से उन्हें छुआ। वो सिहर उठीं, आँखें बंद कर लीं और हल्की सी सिसकारी ली – “म्म्म… संदीप… अगर अच्छा लग रहा है तो और प्यार से छूओ ना…”

Colony ki Sabse Hot Bhabhi Neha ke Saath Raat Bhar ki Wild Chudai

मैंने एक स्तन को मुँह में लिया, धीरे-धीरे चूसने लगा। दूसरा हाथ से सहलाने लगा। नेहा भाभी की पीठ पीछे झुक गई, मुँह से मधुर कराह निकली – “आआह्ह… कितना अच्छा लग रहा है… और ज़ोर से चूसो… हाँ मेरे राजा…”

धीरे-धीरे उनकी नाइट गाउन पूरी उतर गई। सिर्फ़ पैंटी बची थी। मैंने हाथ अंदर डाला, उनकी मुलायम, गोल गाँड को सहलाया, फिर आगे उनकी गीली चूत तक पहुँचा। वो पहले से ही तर थीं। उँगली से हल्के-हल्के सहलाने लगा। उनका बदन काँपने लगा – “उफ्फ्फ… संदीप… बहुत मज़ा आ रहा है… मत रुको…”

मैंने उन्हें सोफ़े पर लिटाया, पैंटी उतारी। उनकी चूत गुलाबी, चमकती हुई, पूरी गीली। मैंने पहले उनके नाभि पर किस किया, फिर धीरे-धीरे नीचे आया। जीभ से चाटना शुरू किया। नेहा भाभी ने मेरे सिर को पकड़ लिया, हल्का सा दबाया – जैसे कह रही हों, और गहराई में जाओ। मैंने 20-25 मिनट तक उन्हें जीभ और उँगलियों से प्यार किया। वो मस्ती में कराह रही थीं – “आआह्ह… उफ्फ्फ… तुम जादूगर हो संदीप… और करो… मत रुको…”

फिर उन्होंने मुझे प्यार से धक्का देकर लिटाया। मेरी पैंट खोली, लिंग बाहर निकाला। “अब मेरी बारी,” कहकर आँख मारी। पहले टिप पर जीभ घुमाई, फिर पूरा मुँह में ले लिया। जैसे कोई लॉलीपॉप चूस रही हों – धीरे-धीरे, फिर तेज़। मैं सातवें आसमान पर था। वो मुस्कुराईं – “मज़ा आ रहा है ना? और अच्छा करूँ?”

10-12 मिनट बाद वो उठीं, अपनी टाँगें फैलाकर मेरे ऊपर आईं। मेरा लिंग अपनी चूत पर रखा और धीरे से बोलीं, “अब डाल दो… धीरे से… मुझे भी बहुत इच्छा है तुम्हारी।”

मैंने धीरे से पुश किया। गीलापन होने से पूरा अंदर चला गया। पहले धीरे-धीरे, फिर रफ्तार बढ़ाई। नेहा भाभी के मुँह से सिर्फ़ मधुर आहें निकल रही थीं – “आआह्ह… ओह्ह… और तेज़… हाँ मेरे राजा… और गहरा…” उनके स्तन हर धक्के के साथ लहरा रहे थे – एक बेहद खूबसूरत नज़ारा।

फिर मैंने उन्हें घोड़ी बनाया। उनकी गोल गाँड ऊपर, स्तन लटक रहे। मैंने गाँड को प्यार से सहलाया और फिर अंदर डाला। वो पीछे मुड़कर बोलीं, “जी भर के प्यार करो मुझे… आज मैं सिर्फ़ तुम्हारी हूँ।”

पूरी रात हमने एक-दूसरे को तरह-तरह से प्यार दिया – मिशनरी, डॉगी, फिर मैंने उनके पैर अपने कंधों पर रखकर नया एंगल ट्राई किया। हर बार वो मस्ती में पागल हो रही थीं – “बहुत अच्छा लग रहा है… और करो… मत रुको…”

करीब आधे घंटे बाद मैंने कहा, “मैं आने वाला हूँ…”
वो साँसों में बोलीं, “अंदर ही… मुझे तुम्हारा एहसास चाहिए।”

मेरा सारा रस उनके अंदर चला गया। हम दोनों थककर एक-दूसरे पर गिर पड़े।

थोड़ी देर बाद नेहा ने मेरा लिंग मुँह में लेकर साफ़ किया। फिर हँसकर बोलीं, “संदीप… तुम तो बहुत प्यार करने वाले हो… पहले कितनों के साथ?”

मैंने शरमाते हुए कहा, “कुछ-कुछ किया है… लेकिन आप जैसा प्यार, आप जैसी मिठास… किसी ने नहीं दी।”

वो मुस्कुराईं, “अब भाभी मत बोलना… बस नेहा कहना। और बताओ… आज की रात पूरी मेरी है ना?”

मैंने उन्हें गले लगाया। “हाँ नेहा… पूरी रात, और जितनी बार चाहो।”

हमने फिर से शुरू किया – इस बार सिर्फ़ उनकी चूत को, बहुत प्यार से, 30-35 मिनट तक। सुबह होने तक हम थक चुके थे।

सुबह नेहा ने मुझे किस किया और बोलीं, “तुम्हारे साथ जो सुकून और मज़ा मिलता है… वो मेरे पति के साथ कभी नहीं मिला। जब भी मन करे… आ जाना। मैं हमेशा तुम्हारे लिए तैयार रहूँगी।”

उस रात के बाद हर मौका मिलते ही मैं उनके पास पहुँच जाता। हर बार नया अंदाज़, नया प्यार। नेहा हर बार मुझे पूरा देतीं, और मैं उन्हें पूरा मज़ा देता।

वो मेरी पहली सच्ची, गहरी और प्यार भरी याद है… जो आज भी दिल में ज़िंदा है।