पड़ोसन अंजलि भाभी की टाइट गांड पहली बार मारी

Padosan Anjali Bhabhi ki tight gaand pehli baar maari

पड़ोस की सेक्सी शादीशुदा अंजलि भाभी के साथ पहली बार ज़बरदस्त चुदाई की पूरी कहानी। 7 इंच का मोटा लंड, गीली चूत, भाभी की टाइट गांड मारना, मुंह में देना, प्रेग्नेंट करने तक की सच्ची देसी सेक्स स्टोरी हिंदी में। भाभी-देवर इनसेस्ट की सबसे गंदी कहानी पढ़ें।

मेरा नाम दीपक जैन है। मैं 28 साल का हूँ और दिल्ली के एक शांत से इलाके में रहता हूँ। ये कहानी है मेरी उस पड़ोसन अंजलि भाभी की, जिनके साथ मेरा वो पुराना ख़्वाब आख़िरकार सच हो गया—वो ख़्वाब जिसके लिए मैं सालों से तरसता रहा था।

अंजलि भाभी की उम्र कोई 32-33 के आसपास रही होगी। गेहुँआ रंग, लंबे घने काले बाल जो कमर तक लहराते थे, क़द पाँच फुट सात इंच का, और बदन ऐसा कि देखते ही मन डोल जाए—पतली कमर, भारी कूल्हे, और वो चुन्नट में छुपी हुई भरी-भरी चूचियाँ जो हर कदम पर हल्की-हल्की हिलतीं। सलवार-कमीज़ में। जब वो बालों को पीछे करतीं या दुपट्टा ठीक करतीं, मेरे अंदर आग लग जाती। रात को अकेले में उनकी याद आती तो लंड इतना सख्त हो जाता कि बिना मुठ मारे नींद नहीं आती। वो शादीशुदा थीं, एक चार साल का बेटा था, फिर भी उनकी आँखों में वो भूख थी, वो शरारत थी, जो मुझे दिन-रात बेचैन रखती थी।

एक दिन मम्मी ने कहा, “दीपक, अंजलि का कंप्यूटर ख़राब हो गया है, तू देख लेना बेटा।” मेरे तो जैसे लॉटरी लग गई। मैंने फटाक से कहा, “बुलाओ भाभी को, मैं अभी ठीक कर दूँगा।”

अगली शाम अंजलि भाभी अपना पुराना डेस्कटॉप लेकर आईं। सलवार-कमीज़ में थीं, दुपट्टा हल्का सा सरका हुआ, गले की झलक दिख रही थी। मैंने कंप्यूटर लिया, बूट किया—हार्ड डिस्क में ढेर सारे बैड सेक्टर। बोला, “भाभी, फॉर्मेट करना पड़ेगा। जो फ़ाइलें चाहिए, बता दो।” वो मुस्कुराईं, “बस माय डॉक्यूमेंट्स में कुछ वर्ड फ़ाइलें हैं।” फिर मम्मी के साथ टीवी लाउंज में बैठ गईं।

मैंने पहले उनकी ज़रूरी फ़ाइलें अपने सिस्टम पर ट्रांसफर कीं। फिर जिज्ञासा हुई। पूरा ड्राइव चेक किया तो एक हिडन फ़ोल्डर मिला—‘Pics’। अंदर सैकड़ों XXX फोटोज़, ज्यादातर देसी, और करीब बीस-पच्चीस देसीपापा की गरमागरम कहानियाँ! मेरा लंड तुरंत तन गया। मैंने सब कुछ जल्दी-जल्दी अपने पास कॉपी कर लिया, उनकी ड्राइव पर वापस डाला, और साथ में अपनी सबसे हॉट कलेक्शन—विदेशी, देसी, ग्रुप, सब कुछ—डाल दी।

काम ख़त्म करके बुलाया। भाभी मम्मी के साथ आईं। मैंने कहा, “हो गया भाभी, अब कोई दिक्कत नहीं आएगी।” फिर मम्मी को बहाना बनाकर हेयर ड्रायर लाने भेजा। जैसे ही मम्मी गईं, मैंने उनका पोर्न फ़ोल्डर खोल दिया और धीरे से मुस्कुराते हुए कहा, “भाभी, आपकी कलेक्शन कमाल का है… ख़ासकर वो स्टोरीज़। मैंने कॉपी कर लीं, बुरा तो नहीं मानेंगी ना?”

भाभी का चेहरा एकदम लाल हो गया। नज़रें झुक गईं, हाथ-पाँव फूल गए। काँपती आवाज़ में बोलीं, “प्लीज़ दीपक… किसी को मत बताना…” मैं उनके बिल्कुल पास गया, उनकी खुशबू सूँघते हुए कान में फुसफुसाया, “अरे भाभी, मैं भी तो ठीक वैसा ही हूँ। मेरे पास हज़ारों फोटो-वीडियो हैं। आपके लिए भी कुछ बेहतरीन चीज़ें डाल दी हैं उसी फ़ोल्डर में।” वो और घबरा गईं, “मम्मी आ रही हैं… बंद करो…”

फिर कंप्यूटर लेकर चली गईं, लेकिन जाते-जाते मैंने दरवाज़े पर धीरे से कहा, “भाभी, आगे भी एक्सचेंज करते रहें? मुझे आपकी स्टोरीज़ चाहिए, आपको मेरी फोटोज़ दूँगा।” वो कुछ नहीं बोलीं, बस शरमाते हुए सिर झुकाकर चली गईं।

पूरे एक हफ़्ते नहीं आईं। फिर एक दिन मम्मी ने कहा, “अंजलि VGA ड्राइवर माँग रही है, फ़्लॉपी में डाल दे।” मैं समझ गया। फ़्लॉपी में पाँच बिल्कुल नई, ताज़ा-ताज़ा देसी कहानियाँ थीं—इनसेस्ट, भाभी-देवर, सब कुछ। मैंने कॉपी कीं और अपनी सबसे हॉट फोटोज़ डाल दीं। साथ में एक टेक्स्ट फ़ाइल लिखा: “Thank you भाभी! आपकी स्टोरीज़ पढ़कर रात भर मुठ मारी… मेरी फोटोज़ कैसी लगीं? सच बताना।”

जब फ़्लॉपी लौटाई तो भाभी ने नज़रें नहीं मिलाईं, पर होंठों पर हल्की सी शरमाई मुस्कान थी।

फिर कई दिन नहीं आईं। पता चला बुखार था। एक सुबह अचानक बैंगलोर से रिश्तेदार के मरने की ख़बर आई। मम्मी अकेले चली गईं। मैं उन्हें एयरपोर्ट छोड़कर लौटा तो देखा भाभी मेरी कार देखते ही दौड़ी चली आईं। दुपट्टा सिर पर डाला हुआ था, चेहरा लाल, साँसें तेज़।

दरवाज़ा खोला तो वो शरमाते हुए अंदर आईं। मैंने कहा, “अंदर आ जाओ भाभी, कोई नहीं है।” लंड तो पहले से ही खड़ा था—घर में अकेली भाभी! वो घबराईं, “मम्मी कहाँ हैं?” मैंने सारी बात बताई। वो और घबरा गईं, “अच्छा मैं बाद में…” कहकर फ़्लॉपी थमाई और दरवाज़ा खोलने लगीं।

मैंने फटाक से दरवाज़ा बंद कर दिया और चाबी अंदर घुमा दी। “डर क्यों रही हो भाभी?” वो बोलीं, “नहीं वो… घर में काम है।” मैं हँसकर पास गया, “झूठ मत बोलो। कोई नहीं है ना घर पर… चाय पी लो, तब तक फ़्लॉपी में डाल देता हूँ।”

वो कुछ नहीं बोलीं, बस मेरे पीछे-पीछे कमरे में चली आईं। मैंने कंप्यूटर ऑन किया, उनकी फ़्लॉपी डाली, और अपना पूरा XXX फ़ोल्डर खोल दिया। “चाय लाता हूँ, तब तक जो पसंद आए कॉपी कर लो।” वो शरमाते हुए सिर हिलाईं।

जब चाय लेकर लौटा तो स्क्रीन पर एक बेहद हॉट फोटो खुली थी—दो लोग ज़ोरों से चुदाई कर रहे थे—और कॉपी चल रही थी। भाभी मुझे देखते ही घबरा गईं, माउस पकड़ा, बंद करने की कोशिश की, पर कॉपी की वजह से नहीं हुआ। फिर दोनों हाथों से मुँह ढककर कुर्सी पर ही घुटनों में सिर छुपा लिया।

मैं उनके पास गया, कंधों से पकड़कर धीरे से खींचा। पहले तो विरोध किया, फिर खड़ी हो गईं। मैंने उन्हें अपनी बाहों में पूरी ताकत से खींच लिया। उनका बदन काँप रहा था, साँसें इतनी तेज़ कि उनकी चूचियाँ मेरी छाती से टकरा रही थीं। मैंने उनकी गर्दन पर गीले किस किए, कान में फुसफुसाया, “अंजलि… तुम्हें मैं पागलपन की हद तक चाहता हूँ… सालों से।”

वो और ज़ोर से काँपने लगीं। मैंने उनका चेहरा ऊपर किया—आँखें बंद, होंठ हल्के खुले, गाल आग जैसे। मैंने अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिए। पहले तो सकपकाईं, फिर अचानक उनकी जीभ मेरी जीभ से लिपट गई। वो खुद बाहें मेरी कमर पर लपेट दीं और इतने जोश से चूमा कि मेरी साँसें फूल गईं।

मेरा लंड पत्थर जैसा होकर उनकी जाँघों से रगड़ रहा था। मैंने उनकी चुन्नट में हाथ डाला, ब्रा के ऊपर से भरी हुई चूचियाँ मसलने लगा। वो सिहर उठीं, मुँह से हल्की सी सिसकारी निकली। मैंने धीरे से पूछा, “भाभी… मैं तुम्हें पूरा-पूरा चाहता हूँ… दोगी ना?”

वो मेरी छाती में मुँह छुपाकर काँपती आवाज़ में बोलीं, “तुम्हारी वजह से मैं भी पागल हो रही हूँ दीपक… पर डर लगता है।” मैंने उनकी चूची को हल्के से मसलते हुए कहा, “कोई नहीं जानेगा… सिर्फ़ तुम और मैं… हमेशा के लिए।”

बस फिर क्या था। वो खुद मेरी शर्ट के बटन खोलने लगीं। मैंने उनकी कमीज ऊपर की, ब्रा का हुक खोला—दो बड़े-बड़े गोल-गोल दूध जैसे स्तन बाहर आए, गुलाबी निप्पल पूरी तरह तने हुए। मैंने सलवार का नाड़ा खींचा, सलवार-पैंटी एक साथ नीचे। उनकी चूत पर हल्के मुलायम बाल, फांक पूरी गीली चमक रही थी। मैंने अपना पैंट उतारा, 7 इंच का मोटा लंड बाहर निकाला। जैसे ही भाभी ने उसे हाथ में लिया, सिहरकर बोलीं, “उफ़्फ़… इतना बड़ा… इतना मोटा… कभी देखा ही नहीं… मुझे ये चाहिए दीपक… अभी!”

वो बिस्तर पर लेट गईं, टाँगें चौड़ी फैलाईं। मैंने उनकी चूत को करीब से देखा—रस से लबालब, फूलों सी फांक। मैं उनके ऊपर चढ़ गया, लंड को चूत पर रगड़ा। वो बेसब्री से कमर ऊपर उठाने लगीं। मैंने एक ज़ोरदार झटका मारा—पूरा लंड एक ही बार में अंदर।

“आआआह्ह्ह… दीपक… मार डाला… कितना मोटा है… आह्ह्ह… ज़ोर-ज़ोर से चोदो मुझे!” वो चिल्लाईं। मैंने स्पीड बढ़ा दी। उनकी चूचियाँ उछल-उछल कर मेरे मुँह से टकरा रही थीं। मैंने उन्हें मुँह में लिया, चूसने लगा। दस-पंद्रह मिनट की तेज़ चुदाई के बाद मैं झड़ने वाला था। बोला, “कहाँ निकालूँ भाभी?” वो टाँगें मेरी कमर पर कसकर लपेटकर बोलीं, “अंदर ही… मैं पिल्स पर हूँ… अपनी भाभी की चूत को अपने गर्म रस से भर दो!”

मैंने आख़िरी ज़ोरदार झटके मारे और उनकी चूत के सबसे अंदर झड़ गया। वो भी मेरे साथ-साथ झड़ीं—उनकी चूत ने मेरा लंड इतनी ज़ोर से निचोड़ा कि लगा सारा रस निचोड़ लेगी।

हम नंगे ही लेटे रहे, पसीने से तर। थोड़ी देर बाद भाभी फिर बेचैन हो गईं। मेरे कान चाटते हुए बोलीं, “दीपक… मेरी गांड मारोगे? तुम्हारा लंड देखकर मन कर रहा है… मैंने कभी नहीं करवाया।” मैं चौंका पर लंड तुरंत फिर तन गया।

वो घोड़ी बन गईं, गांड ऊपर उठाई। मैंने चूत का रस और अपना वीर्य लंड पर अच्छे से लगाया, गांड के टाइट छेद पर रगड़ा। फिर एक झटका—सुपारा सुपारा अंदर। वो चीखीं, “आआयीईई… मर गई… धीरे दीपक!” पर मैं रुका नहीं, धीरे-धीरे फिर पूरा लंड उनकी गांड में उतार दिया।

पहले दर्द से रोईं, फिर मज़ा आने लगा। बोलीं, “चोदो… अपनी भाभी की गांड चोदो… कितना मज़ा आ रहा है… भाभी बोलकर चोदो मुझे!” मैंने उनकी चूचियाँ मसलते हुए कहा, “हाँ भाभी… ले तेरी टाइट गांड… कितना मज़ा आ रहा है भाभी… आज तेरी गांड फाड़ दूँगा!”

दस मिनट की ज़ोरदार चुदाई के बाद मैं उनकी गांड में झड़ गया। वो भी चरम पर पहुँचकर काँप गईं।

उस दिन दोपहर ढाई बजे तक भाभी मेरे साथ रही। दो बार और चुदाई की—एक बार बाथरूम में खड़े-खड़े, एक बार सोफ़े पर ऊपर चढ़कर खुद झूलते हुए। उसके बाद जब भी मौका मिला, हम चुदाई करते रहे। कभी उनके घर, कभी मेरे घर, कभी कार में। आज अंजलि भाभी प्रेग्नेंट हैं और हर बार प्यार से मेरे कान में फुसफुसाती हैं, “तेरा बच्चा है दीपक… तूने मुझे पूरा कर दिया।”