जैसलमेर के रेत के टीले- 2

Xxx कहानी भाभी की चूत की में पढ़ें कि मैं भाभी को जैसलमेर कैमल सफारी पर ले गया. वहां संगीत नृत्य का मजा लेते हुए वो मेरी गोद में बैठ गयी. मेरा लंड उसकी गांड में घुसने लगा और फिर …

आप सबने मेरी Xxx कहानी भाभी की चूत की के पिछले भाग
जैसलमेर के रेत के टीले- 1
में पढ़ा था कि प्रीति मुझसे मिलने और राजस्थान घूमने के लिए दिल्ली से जैसलमेर आयी और मैं प्रीति को स्टेशन से होटल लेकर गया. वहां जाकर हमने आराम किया और 4 बजे बाइक से जैसलमेर घूमने का प्लान किया.

अब आगे की Xxx कहानी भाभी की चूत की:

प्रीति को देखकर मुझे लग रहा था कि आज कुछ जरूर ही होने वाला है. उसने टाइट गले की हाफ टी-शर्ट और नीचे टाइट शॉर्ट्स पहन लिया जो उसकी गांड से बिल्कुल जैसे चिपक ही गयी थी. भाभी की गांड उसमें एकदम से उभर कर आ गयी थी.

सच कहूं तो दोस्तो, एक बार तो मन किया कि प्रीति को वहीं पटक कर चोद दूं लेकिन मैं अपनी भावनाओं पर कंट्रोल किये हुए था. हमारे राजस्थान में मेहमान को भगवान का दर्जा देते हैं. मैं प्रीति की मेहमान नवाजी में कोई कसर नहीं रखना चाहता था।

मैंने प्रीति को जोधपुरी प्रिंट की एक चुन्नी दी गले में डालने के लिए, उसे पहन कर वो ऐसे लग रही थी कि जैसे कोई अंग्रेजी मैडम हमारे यहाँ की बहू बनकर आयी हो.

मैं प्रीति को बाइक पर अपने पीछे बैठाकर होटल से समधोरा के लिए निकल गया जो कि जैसलमेर से 40 किलोमीटर दूर था। बीच रास्ते में प्रीति ने पीछे से मेरी पीठ पर चिपकते हए मुझे गले लगा लिया.

प्रीति का स्पर्श पाते ही मेरी पैंट के अंदर तूफान उठना शुरू हो गया और मेरा लंड विकराल रूप में आने लगा. जब भी रोड पर कोई स्पीड ब्रेकर आता तो मैं एकदम से ब्रेक लगाता जिससे प्रीति के नुकीले बड़े बड़े बूब्स मेरी पीठ पर चुभ जाते.

शायद प्रीति को भी अहसास हो गया था कि मैं यह सब जानबूझकर कर रहा हूँ तो प्रीति ने एकदम से मेरी पैंट की जिप पर हाथ रखा और मेरे तने हुए लंड को दबा दिया. मुझे ग्रीन सिग्नल मिल गया कि प्रीति भी मेरे साथ आज रात खुलकर मजे लेना चाहती है।

एक दो बार उसने मेरे लंड को बहाने से दबाया और मुझे दीवाना बना दिया. अब मैं मन बना चुका था कि आज इसकी चूत को ऐसा चोदूंगा कि ये सब कुछ भूलकर मेरे लंड का ही गुणगान करेगी.

हम शाम के 5 बजे थार के रेगिस्तान में पहुंच गए जहां पहले से ही बहुत सारे देसी और विदेशी पर्यटक घूमने आये हुए थे. जिस किसी भी आदमी की प्रीति के हुस्न पर नजर पड़ती वो बिना पलकें झपकाए प्रीति के हुस्न का चक्षुचोदन (आखों से चुदाई) करने लग जाता.

मुझे अपने आप पर बहुत गर्व हो रहा था. कामुक्ताज डॉट कॉम का हर पाठक जिसको पाना चाहता है वो खुद मेरे पास चल कर आई थी. खैर, मैं प्रीति को सबसे पहले ऊँट की सवारी (कैमल सफारी) कराने के लिए लेकर गया.

प्रीति भाभी मेरे आगे और मैं उसके पीछे बैठ गया लेकिन जैसे ही नीचे बैठा हुआ ऊँट उठने लगा तो प्रीति घबरा कर मुझसे चिपक गयी और गलती से उसका एक हाथ फिसल कर मेरे लंड पर जा लगा.

शायद किस्मत आज मुझ पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान थी. मैं और प्रीति ऊँट को लेकर रेगिस्तान के ऊबड़ खाबड़ रेत के टीलों पर घूमने के निकल पड़े.
प्रीति जोर जोर से चिल्ला चिल्ला कर अपने रोमांच को बयां कर रही थी- वाउऊ … अजय … इट्स सो अमेजिंग … (यह बहुत ही अद्भुत है).

हमने ऊँट पर बैठे हुए बहुत सारी तस्वीरें भी लीं. फिर मैं प्रीति को सनसेट पॉइन्ट पर लेकर गया जहां से ढलते हुए सूरज का मनोरम दृश्य देखकर प्रीति बहुत खुश हुई और मैं प्रीति को देखकर खुश होता रहा.

फिर मैं उसको कल्चर नाईट दिखाने के लिए लेकर गया. वहां हो रहे कालबेलिया डांस और फोक संगीत को देख कर वह बहुत खुश हुई और मुझे ‘थैंक यू’ बोला.

वो मेरी गोद में बैठी हुई थी. अब मुझसे तो कंट्रोल करना बहुत मुश्किल हो रहा था. मेरा लंड पूरा तना हुआ था और उसकी गांड में जाकर टकरा रहा था. प्रीति को भी शायद मेरा लंड अपनी गांड में लगवाने में मजा आ रहा था. वो बार बार हिल कर लंड को और ज्यादा महसूस करना चाह रही थी.

हम दोनों ऐसे बर्ताव कर रहे थे जैसे कि पति-पत्नी हों और जैसलमेर घूमने आये हुए हों. फिर धीरे धीरे ठंड बढ़ने लगी थी.
प्रीति ने कहा- मुझे ठंड लग रही है, यहां पर वोडका या विस्की मिल जायेगी?
मैं बोला- तुम रुको, मैं अभी लेकर आता हूं.

मैं थोड़ी ही दूर पर एक दुकान पर जाकर 2 बियर और 1 वोडका की बोतल लेकर आया और हम वहां से दूर चल दिये. वो एकदम सुनसान जगह थी जहां मेरे और प्रीति के अलावा दूर दूर तक फैला रेगिस्तान ही दिखाई दे रहा था. प्रीति यह सब देखकर बहुत खुश थी।

मैं और प्रीति चारों तरफ से घिरे हुए बड़े बड़े रेत के टीलों के बीच एक बड़े से गढ्ढे में बैठ गये ताकि हमें वहां से कोई आता जाता हुआ न देख सके. प्रीति को ठंड कुछ ज्यादा ही लग रही तो उसने मुझे जल्दी से 2 पेग बनाने के लिए बोला.

मगर मैंने सिर्फ एक ही पेग बनाकर प्रीति को दिया.
तो वो हैरान होकर बोली- अजय, यह क्या है? सिर्फ एक ही पेग क्यों?

मैं- इस शराब की बोतल में वो नशा कहाँ है जो तुम्हारें में है. मैं चाहता हूं जिस गिलास पर तुम्हारे मादक होंठों की निशानी होगी मैं भी उसी गिलास से पीना पसंद करूँगा.

प्रीति अपनी तारीफ सुन कर शर्मा गयी और उसने प्यार से मुझे किस कर दिया. ठंड कुछ ज्यादा होने की वजह से हमने 4-5 पेग लगा लिए थे. प्रीति को देख कर लग रहा था कि उस पर शराब का और मुझ पर उसका नशा छाने लगा है.

धीरे धीरे हम एक दूसरे की गिरफ्त में आ रहे थे. शायद आज मेरा सपना सच होने जा रहा था जो मैंने 2 साल पहले प्रीति को बताया था.
मैंने उससे कहा था- प्रीति मैं तुम्हें चांदनी रात में खुले आसमान के नीचे रेत के टीलों पर पूरी नंगी करके, पूरी रात तुम्हारी जमकर चुदाई करना चाहता हूं.

थोड़ी देर बाद नशा हम दोनों पर हावी होने लगा और वो पूरे रोमांटिक मूड में आ गई थी. उसकी आंखों से प्यार झलक रहा था. हम दोनों के जिस्म एक दूसरे से मिलने के लिए मचल रहे थे.

प्रीति ने मुझे अपनी आगोश में ले लिया और अपने होंठ मेरे होंठों से मिला दिए. मैं प्रीति के होंठों को काटने लगा. अपने हाथ उसकी छाती पर ले गया और धीरे से टीशर्ट के ऊपर से ही उसके बूब्स दबा दिए.

एक हाथ से प्रीति की पीठ को सहलाते हुए उसकी टीशर्ट को निकाल कर मैंने अलग कर दिया। फिर मैंने उसकी शॉर्ट्स का बटन खोल दिया और नीचे करने लगा तो प्रीति ने रेत के टीले पर मुझे धकेलते हुए पीठ के बल लेटा दिया और खुद मेरे ऊपर आ गई और मेरे होंठों को जोर जोर से चूसने लगी.

इस तरह से किस करने से उसके ब्रा में कैद चूचे मेरी छाती से रगड़ खाने लगे. मेरा लंड उसकी पैंटी के ऊपर से उसकी चूत को टच करने लगा. सच में मुझे तो बहुत मजा आ रहा था.

मैंने उसकी पीठ सहलाते हुए उसकी ब्रा के हुक खोल दिए और ब्रा को खींचकर साइड में फेंक दिया। करीब 15 मिनट तक एक दूसरे को चूमने के बाद उसने मुझे नंगा कर दिया और खुद भी पूरी नंगी हो गयी.

सच कहूं दोस्तो, मैं प्रीति का साथ पाकर ही बहुत खुश था. किस्मत मुझ पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान हो रही थी. पूर्णिमा की चांदनी रात में खुले आसमान के नीचे प्रीति अपने जिस्म से कहर बरपा रही थी.

लग रहा था कि इंद्रलोक की अप्सरा मेनका ने धरती पर अवतार लेकर जन्म लिया हो और जिसकी कामुकता और सुंदरता को मैं लफ़्ज़ों में बयां करना चाहूं तो शायद मेरे लफ्ज़ कम पड़ जाएं. आज चांद भी प्रीति के हुस्न को देख कर जल रहा था।

चाँदी जैसी चूत है उसकी, उस पर सोने जैसे बाल,
एक प्रीति ही धनवान है यारो, बाकी सब कंगाल,
जिस रस्ते से वो गुजरे, सबके लण्ड खड़े हो जाएँ,
उसकी चूत की कोमल आहट, सोते लण्ड उठाये.

अब मैं प्रीति के ऊपर और वो मेरे नीचे आ गई जिससे उसके दोनों रसीले आम मेरी आँखों के सामने आ गए. मैं उनको जोर-जोर से चूसने और काटने लगा. पहली बार इतने रसीले आम चूस रहा था.

प्रीति के बूब्स की सबसे बड़ी खासियत उसके बड़े बड़े बूब्स के 2 छोटे अंगूर के दाने थे. मैंने उसके दाने को अपने दांतों से हल्का सा काटने लगा तो प्रीति के मुँह से निकला- आउच … आआहह … ऊऊह … अजय … दर्द हो रहा है मुझे।

मैंने थोड़ा और जोर से काटा और वो अब और ज्यादा मस्त होने लगी और जोर से सिसकारते हुए कहने लगी- आह्ह… आह्ह … आह्ह … अजय धीरे से काटो मेरी जान … चूस लो … आज मेरे मम्मों का पूरा रस … चूस लो आह … इन्हें निचोड़ कर रख दो।

वो मेरा सिर अपने दोनों हाथों से अपने मम्मों पर दबाने लगी. फिर मैं प्रीति की कान की लो के पास जाकर किस करने लगा. उसकी गर्दन को चूमते हुए धीरे धीरे कश्मीर घाटी (क्लीवेज) के रास्ते उसकी नाभि के पास आया और उसमें अपनी जीभ से किस करने लगा.

प्रीति और ज्यादा उतेजित होने लगी और मेरा सिर पकड़ कर अपनी जांघों के बीच ले गयी. मैं प्रीति का इशारा समझ गया था. उसे चूत चटवाना सबसे ज्यादा पसंद था.

मैंने बड़े ही प्यार से प्रीति की चूत के पास अपना मुंह ले जाकर स्वर्ग के द्वार पर किस किया और अपने दोनों हाथों से उसकी चूत की फलकों को फैलाते हुए अपनी नुकीली जीभ को चूत में डाल दिया और अंदर बाहर करने लगा.

प्रीति जोर से सिसकार उठी- आआहह … ऊऊऊ … यस … अजय … उम्म्ह … अहह … हय … याह … सक माय पुसी … और ज़ोर से चाटो … आह्ह अजय … आई लव यू जान।

मैंने अपनी जीभ को और जोर जोर से चूत के अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया. साथ ही मैंने अपनी 2 उंगलियों को भी उसकी चूत में घुसेड़ दिया जिससे वो चिल्ला उठी- आआआहह … ऊऊ … यसस्स अजय … कमॉन ओह्ह … यू आर सो अमेजिंग … कितना मजा दे रहे हो तुम … आह्हह … ऐसे ही करते रहो.

उसके ऐसे बोलने से मुझमें दोगुना जोश आ गया और मैंने जीभ उसकी चूत की जड़ तक घुसा दी और अंदर ही अंदर फिराने लगा. अब वो गालियां देने लगी- आह्हह … इस्स … और जोर से चूस हरामी … मेरी चूत का रस पी जा साले मादरचोद … आह्ह … चोद दे मुझे पटक पटक कर।

वो मेरा सिर अपने दोनों हाथों से अपनी चूत पर दबाने लगी. मैं उतनी ही तेजी से चूत चाटने लगा. थोड़ी देर में ही रेगिस्तान के रेतीले समुद्र में एक तेज धारा चूत से बहने लगी और वो झड़ने लगी.

रेगिस्तान में किसी प्यासे को एक बूंद भी पानी मिलना मुश्किल होता है लेकिन मेरे सामने तो आज दरिया बहने लगा. मैंने प्रीति की चूत से निकले हुए रस की एक भी बूंद को नीचे नहीं गिरने दिया और अपनी प्यास बुझाने लगा और चूत को चाट कर साफ कर दिया।

प्रीति ने मुझे अपने ऊपर खींच लिया तो मैं उसके चेहरे के करीब अपना चेहरा लाकर बोला- प्रीति, तुम बला की खूबसूरत हो, तुम मुझे पहले क्यूं नहीं मिली?
ये बोलते हुए मैंने चूत का रस लगे अपने होंठों को उसके होंठों से लगा दिया और उसको किस करने लगा।
वो अपनी चूत के रस का स्वाद मेरे मुँह को चाट कर लेने लगी.

कुछ देर बाद हम दोनों 69 की पोज़िशन में आ गए। वो मेरा लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी और मैंने उसकी चूत फिर से चाटनी शुरू कर दी. फिर से चूत चाटने की वजह से प्रीति बहुत जल्द ही गर्म हो गयी थी और मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत पर सेट करने लगी.

(दिसंबर की ठंड में भी हम दोनों बिल्कुल नंगे होकर सुनसान जगह पर एक दूसरे में इतना खो चुके थे कि सर्दी का अहसास भी नहीं हो रहा था. दोनों एक दूसरे से ऐसे चिपके हुए थे जैसे दो जिस्म एक ही जान हों.

मैंने चुटकी लेते हुए कहा- प्रीति, आज मैं तुम्हारी चूत में भारत पाक के बीच की सुरंग खोदने वाला हूँ.
मेरी बात सुनकर प्रीति ज़ोर से हँसने लगी जैसे मैंने कोई संता-बंता का जोक सुनाया हो- हाह हाहा … यू आर सो फनी अजय। (बहुत मज़ाकिया हो तुम)

मैं भी गर्म लोहे पर हथौड़ा मारने से कहाँ चूकने वाला था. मैंने अपना लंड उसकी चूत के मुँह पर अच्छे से रखा और एक ही झटके में तोप के गोले की तरह उसकी चूत की सुरंग में पेल दिया.

प्रीति दर्द के मारे चिल्लाने लगी क्योंकि वो मेरे रॉकेट के एकदम होने वाले हमले से अनजान थी. उसकी आँखों में आंसू आ गए तो मैं थोड़ी देर के लिए रुक गया.

अपना लंड चूत से बाहर निकाले बिना ही प्रीति के बूब्स और निप्पल को चूसने लगा. जब प्रीति का दर्द कम हुआ तो उसने अपनी गांड उठाकर मुझे इशारा किया. अब मैं उसकी चूत में अपना लंड आगे-पीछे करने लगा.

अब उसको अच्छा लगने लगा और वो अपनी गांड उछाल-उछाल कर लंड को चूत में अपने अन्दर लेने लगी और जोर जोर से सिसकारने लगी- आह्हह … अजय … क्या लंड है तुम्हारा! आह्ह … तुम तो सच में कमाल हो … अच्छी मेहमाननवाजी है … आह्ह चोदो … यार … और जोर से चोदो … आईई … आह्ह और तेज।

मैंने धीरे धीरे अपनी स्पीड बढ़ाते हुए अब जोर-जोर से उसकी चूत में लंड अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया. मेरा लंड ऐसे काम कर रहा था जैसे किसी गुफा को खोदते टाइम ड्रिल मशीन को अन्दर-बाहर करते हैं.

बीच बीच में मैं उसके मम्मों को भी दबा देता था जिससे प्रीति की सिसकारियां निकल जाती थीं. प्रीति की मादक सिसकारियाँ सुन कर मुझे और ज्यादा जोश आ रहा था.

जैसे जैसे मैं चुदाई की रफ़्तार बढ़ाता गया, प्रीति जोर जोर से सिसकारियां लेने लगी- अह्ह्ह … उम्म … बहुत मजा आ रहा है अजय … हाये … चोद दो … मेरी चूत को खोल दो अजय … आह्ह अजय … ओह्ह अजय … फक मी … आह्ह … फक मी … जोर से।

चुदते हुए वो बोली- अजय, लगता है तुमने तो सेक्स में पीएचडी कर रखी है. आज तो तुम सच में मेरी चूत और गांड के बीच में सुरंग खोद कर ही दम लोगे. आह्ह … इतना मजा … आ रहा है … चोदते रहो बस।

मैं भी दोगुने जोश के साथ चूत में अपना लंड आगे-पीछे करने लगा. प्रीति नीचे से अपनी गांड उछाल उछाल कर मेरा लंड ले रही थी. हम दोनों सातवें आसमान में उड़ रहे थे.

ऐसा लग रहा था जैसे पास में ही भारत पाकिस्तान के बॉर्डर पर जंग हो रही हो और बॉर्डर से 100 किमी दूर ही विशालकाय थार मरुस्थल के बड़े बड़े रेत के टीलों के बीच मे चांदनी रात में खुले आसमान के नीचे प्रीति की चूत और मेरे लंड के बीच में एक घमासान युद्ध हो रहा हो।

हम दोनों दो जिस्म एक जान बन कर एक दूसरे से में समा जाना चाहते थे।
(अगर किसी ने राधिका आप्टे की फ़िल्म ‘पार्च्ड’ देखी होगी तो उसे मेरी कहानी पढ़ने में और ज्यादा मजा आएगा.)

मैं प्रीति की ताबड़तोड़ चुदाई कर रहा था और वो उतने ही जोर से मेरा हौसला बड़ा रही थी. बहुत लंबे चल रहे इस युद्ध में प्रीति जोर-जोर से चिल्लाने लगी- आआआहह … ऊऊऊऊ … यस्स … अजय … फक मी हार्डर … फ़क मी हार्डर … फाड़ डाल साले … आज इस चूत को … ओह्ह या … ऊऊऊईईई … मैं आने वाली हूं!!

मैंने अपनी स्पीड दोगुनी कर दी और एक भीषण गर्जना के साथ दोनों एक ही साथ झड़ गए- आआह … ओह्ह याह … ऊईईईई … आआह … ओह्ह।

3 साल से मेरे अंदर दबी ज्वालामुखी का पूरा लावा निकलकर प्रीति की चूत में बहने लगा और प्रीति का कामरस मुझे मेरे लंड पर महसूस होने लगा. दोनों ही एक दूसरे से चिपके हुए पीठ के बल रेत के टीले पर लेट गए और ऊपर आसमान में तारों को देखने लगे.

क्या असीम आनन्द मिला उस वक़्त दोस्तो! मैं उस अहसास को यहां शब्दों में बयां नहीं कर सकता हूं. जिसने साथ में झड़ कर इस चरमसुख की प्राप्ति की हो, वो ही इस आनन्द को समझ सकता है।

हम दोनों तो जैसे ज़न्नत में थे. काफी देर तक मैं प्रीति के बदन को सहलाता रहा तो प्रीति फिर से गर्म हो गयी और मैंने एक बार फिर से प्रीति को वहीं रेत में जमकर चोद डाला. दो बार उसकी चूत चुदाई की और एक बार गांड भी चोद ली.

रात भर मैं उसकी चूत-गांड और चूचियों के साथ खेलता रहा. लगभग सुबह ही होने को हो गयी लेकिन हमारा चोदा-चुदाई से मन नहीं भरा. फिर हम उठकर वहां से निकल लिये और सवेरा होने से पहले ही होटल में आ गये.

होटल में आने के बाद थकान इतनी ज्यादा हुई कि नंगे ही पड़ गये और एक दूसरे के साथ चिपक कर पूरा दिन सोते रहे.
दोस्तो, प्रीति भाभी की चुदाई का सपना जो मैंने दो साल पहले देखा था वो पूरा हो गया था.

उसके बाद हम दोनों के बीच में और क्या क्या हुआ, वो सब मैं आपको फिर कभी बताऊंगा. फिलहाल इस कहानी को यहीं पर खत्म कर रहा हूं.

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