Train Me Chudai – Chachere Bhai Ke Sath
ट्रेन की रात में चचेरे भाई परवेज़ ने रिजवाना की चूत फाड़ी। ज़रीना और अजनबी ज़ुबैर के साथ ग्रुप चुदाई की हॉट कहानी। गोरी छातियाँ, गीली चूत और जोरदार धक्कों वाली पूरी सेक्स स्टोरी हिंदी में पढ़ें।
नमस्ते दोस्तों, मैं रिजवाना हूँ। उम्र 18 साल, कराची पाकिस्तान से। मेरी बड़ी बहन रफ़त 25 साल की और शादीशुदा है। मेरा बड़ा भाई शाहिद 23 का। हमारा परिवार पुराने ख़यालों वाला है – लड़कियों को अपनी मर्ज़ी से कुछ करने की इजाज़त नहीं। जब मैंने हिल स्टेशन घूमने का प्लान बनाया तो पापा बहुत नाराज़ हो गए। मैंने कहा, “पापा, मैं ज़रीना और परवेज़ के साथ जा रही हूँ।” सुनकर पापा मान गए।
ज़रीना मेरी चचेरी बहन है, 21 साल की, बेहद ख़ूबसूरत। परवेज़ उसका छोटा भाई, 19 साल का, स्मार्ट और मस्त। तीन दिन बाद ट्रेन थी। मैं अपना सामान लेकर ज़रीना के घर पहुँची तो दोनों मेरा इंतज़ार कर रहे थे। परवेज़ आज बहुत हैंडसम लग रहा था – टाइट जींस और शर्ट में उसका बदन और भी आकर्षक। मैंने भी पूरा मेकअप किया था, गुलाबी लिपस्टिक, काजल, और टाइट सलवार-कमीज़ जो मेरी नाज़ुक कमर और गोरी छातियों को और निखार रही थी। परवेज़ मुझे देखकर बार-बार घूर रहा था, उसकी नज़रें मेरी छातियों पर अटक जाती थीं।
ऑटो से स्टेशन पहुँचे। ट्रेन अभी नहीं आई थी। रात का सफ़र था, बीच में कहीं नहीं रुकती। मैंने परवेज़ से कहा, “कोई अच्छी मैगज़ीन ले आओ, वक्त कट जाए।” वह कुछ बुक्स लेकर आया। दस मिनट बाद ट्रेन आई। हमारा केबिन चार बर्थ का था – तीन हमारी, एक किसी और की। ट्रेन चलने लगी तो एक लंबा, जवान, बेहद हैंडसम आदमी केबिन में आया। चौथी बर्थ उसी की थी। उसने दरवाज़ा लॉक कर दिया और ऊपर वाली बर्थ पर लेट गया।
केबिन में दो जवान लड़कियाँ (मैं और ज़रीना) और दो जवान मर्द (परवेज़ और वो अजनबी)। मैं और परवेज़ नीचे बर्थ पर थे, ज़रीना और वो अजनबी ऊपर। मैंने परवेज़ से मैगज़ीन माँगी तो उसने अपनी जेब से एक छोटी सी किताब निकाल दी। कवर पर एक नंगी ख़ूबसूरत लड़की की तस्वीर थी। पहले तो मैं झिझकी, लेकिन मन में एक अजीब सी लालसा जाग उठी। नंगी तस्वीर देखकर मेरे बदन में सिहरन दौड़ गई। परवेज़ मुस्कुराया और खुद भी एक किताब निकालकर पढ़ने लगा। वो अजनबी अख़बार पढ़ रहा था। ज़रीना बस उसे घूर रही थी, मानो उसका अपना भाई केबिन में है ही नहीं।
मैंने किताब खोली। अंदर बेहद हॉट कहानियाँ थीं – भाई-बहन की चुदाई वाली। पढ़ते-पढ़ते मैं बेचैन हो गई। कहानी में लड़की अपने भाई और उसके दोस्तों के साथ मज़े ले रही थी। मेरी चूत में गर्मी बढ़ने लगी। मैंने एक हाथ अपनी सलवार के अंदर डाल दिया और अपनी चूत को सहलाने लगी। उँगलियाँ क्लिटोरिस पर घुमाते हुए मैं आँखें बंद कर मस्ती लेने लगी। चूत से रस टपकने लगा था।
तभी मुझे महसूस हुआ कि कोई मेरी जंपर के ऊपर से मेरी छातियों को चूस रहा है। आँखें खोलीं तो परवेज़! वह घुटनों के बल बैठकर मेरी एक चूची मुंह में लेकर चूस रहा था, दूसरी हाथ से दबा रहा था। उसे ज़रा भी डर नहीं था कि उसकी बड़ी बहन ऊपर है और एक अजनबी भी। मैं खुद इतनी मस्त थी कि उसकी गर्दन में हाथ डालकर उसे अपने चेहरे की तरफ़ खींच लिया। उसके गर्म होंठ मेरे होंठों से चिपक गए। क्या मज़ेदार किस था! उसकी ज़बान मेरे मुंह में घुस गई, मैंने अपनी गुलाबी ज़बान उसकी ज़बान से लिपटा दी। चूमने की आवाज़ें केबिन में गूँज रही थीं, लेकिन हमें किसी की परवाह नहीं थी।
परवेज़ ने मेरी जंपर के बटन खोल दिए। मेरी नरम, गोरी छातियाँ बाहर आ गईं। उसने एक छाती दोनों हाथों से दबाकर मुँह में ले लिया और चूसने लगा। मैंने उसके सिर को अपनी छातियों पर दबा दिया। वह मेरे गुलाबी निप्पल को चूस-चूसकर लाल कर रहा था। मेरी चूत पूरी तरह भीग चुकी थी।
मेरी नज़र ऊपर गई। ज़रीना उस अजनबी के साथ लिपटी हुई थी! वह खुद उसकी बर्थ पर चली गई थी। उसने अपनी जंपर उतार दी थी। वो अजनबी उसके गोरे बदन पर हाथ फेर रहा था। ज़रीना अपनी टाइट छातियाँ उसके चौड़े सीने पर रगड़ रही थी। दोनों एक-दूसरे के होंठ चूस रहे थे। ज़रीना ने अपनी एक छाती उसके मुँह पर रख दी, वह उसके गुलाबी निप्पल को चूसने लगा।
इधर परवेज़ मेरी दोनों छातियों को बारी-बारी चूस रहा था। मैंने उसका हाथ नीचे खींचा। उसने मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया। मैं नीचे से पूरी नंगी हो गई। उसने मेरी घनी जाँघों के बीच उग आए बालों को सहलाया, फिर उँगली मेरी चूत में डाल दी। मैं सिसक पड़ी, “ओह परवेज़ डार्लिंग… बहुत मज़ा आ रहा है।”
वह मुस्कुराया। उसने अपने कपड़े उतारे। उसका मोटा, लंबा लंड फड़क रहा था। मैंने उसे हाथ में लिया, सहलाया। उसका प्रीकम मेरी उँगलियों पर चिपक गया। मैंने कहा, “मैं इसे मुँह में लेना चाहती हूँ।” वह अपना लंड मेरे गालों पर रगड़ने लगा। मैंने होंठ खोल दिए, वह धीरे-धीरे अपना लंड मेरे मुंह में डालने लगा। मैं उसका स्वाद लेती हुई चूसने लगी।
कुछ देर बाद वह मेरी जाँघों के बीच आ गया। मेरे पैर अपने कंधों पर रखे और अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ने लगा। फिर धीरे से दबाया। उसका सुपाड़ा मेरी गीली चूत में घुस गया। मैंने अपनी टाँगों से उसकी कमर कस ली और कूल्हे ऊपर उठाए। वह धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर डालने लगा। हर धक्के के साथ अनोखा सुख मिल रहा था। मैं चीख़ रही थी, “हाँ डार्लिंग… और गहरा… बहुत अच्छा लग रहा है!”
ऊपर देखा तो ज़रीना भी उस अजनबी के लंड पर सवार थी। वह कूल्हे हिला-हिलाकर चुदवा रही थी। उसकी बड़ी-बड़ी छातियाँ उसके मुँह में जा रही थीं। दोनों पूरी तरह मस्त थे।
अचानक वो अजनबी नीचे उतरा। उसका नाम ज़ुबैर था। वह परवेज़ के पीछे गया और उसकी गांड़ को सहलाने लगा। फिर धीरे से अपनी उँगली डाली। परवेज़ थोड़ा सिहरा, लेकिन मज़ा भी आने लगा। ज़रीना मेरे पास आई, मेरी छातियों को चूसने लगी। अब केबिन में चारों एक-दूसरे से उलझे हुए थे।
ज़ुबैर परवेज़ की गांड़ में अपना मोटा लंड डालने लगा। परवेज़ का लंड मेरी चूत में और तेज़ी से घुस-बाहर होने लगा। ज़रीना मेरी छातियों को चूस रही थी, मैं उसकी चूत से निकला रस अपनी उँगली पर लेकर चाट रही थी।
कुछ देर बाद परवेज़ ने अपनी सारी मलाई मेरी चूत में उड़ेल दी। मैं भी झड़ गई। ज़ुबैर ने परवेज़ की गांड़ में अपना रस भर दिया। हम सब थककर एक-दूसरे से चिपके पड़े रहे।
रात के दो बजे थे। अब हमने पार्टनर बदलने का फैसला किया। मैंने ज़ुबैर को देखा और मुस्कुराते हुए कहा, “अब मेरे साथ?” ज़ुबैर ने मुझे अपनी बाहों में खींच लिया। उसका किस मुझे पागल कर गया। उसने मुझे नंगी कर दिया, मेरी छातियों को पीछे से दबाते हुए अपना लंड मेरी गांड़ पर रगड़ने लगा।
मैंने ज़रीना और परवेज़ को देखा। वे अभी भी हिचकिचा रहे थे। मैंने ज़रीना से कहा, “अरे दीदी, हम दोनों को ब्लू फिल्म की तरह देख रही हो? आजकल बहनें पहले अपने भाई से ही मज़ा लेती हैं। परवेज़ को अपनी बहन की चूत का स्वाद दो ना।”
मेरी बात सुनकर दोनों एक-दूसरे की तरफ़ बढ़े। परवेज़ ने ज़रीना को चूम लिया। ज़रीना ने भी अपना भाई को कसकर पकड़ लिया। कुछ ही देर में दोनों नंगे हो गए। परवेज़ अपनी बड़ी बहन की चूत चाटने लगा। ज़रीना आहें भर रही थी।
ज़ुबैर ने मुझे लिटाया और अपनी ज़बान मेरी चूत में घुसा दी। वह मेरी क्लिटोरिस चूस रहा था। मैं पागल हो गई, “ज़ुबैर डार्लिंग… अब अपना लंड डाल दो… मैं मर जा रही हूँ!”
उसने अपना मोटा, लोहे जैसा लंड मेरी चूत पर रखा और धीरे से धक्का दिया। पूरा लंड अंदर चला गया। मुझे अनोखा सुख मिला। वह तेज़-तेज़ धक्के लगाने लगा। मैं चीख़ रही थी, “हाँ… और ज़ोर से… तुम बहुत मर्द हो!”
दूसरी बर्थ पर परवेज़ अपनी बहन को चोद रहा था। ज़रीना चिल्ला रही थी, “हाँ भैया… और तेज़… अपनी बहन की चूत फाड़ दो!” दोनों पूरी तरह मस्त थे।
कुछ देर बाद ज़ुबैर ने मेरी चूत में अपनी गर्म मलाई उड़ेल दी। मैं भी झड़ गई। उसी वक्त परवेज़ भी ज़रीना की चूत में झड़ गया। हम चारों थककर लेट गए।
सुबह श्रीनगर पहुँचे। ज़ुबैर चला गया, लेकिन हम तीनों एक ही होटल के कमरे में रुके। वहाँ परवेज़ हमें दोनों को रोज़ चोदता। एक रात चुदाई के बाद ज़रीना ने पूछा, “पहली बार ट्रेन में ही चुदवाई थी?”
मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ दीदी, परवेज़ भाई ने ही पहली बार चोदा। लेकिन उँगली का मज़ा तो महीनों से ले रही थी – घर के किराएदार की दो जवान बेटियों के साथ।”
फिर मैंने अपनी सारी कहानी उन्हें सुनाई। अब हम तीनों मिलकर और भी हॉट प्लान बना रहे हैं। शाहिद भाई जब वापस आएंगे तो उन्हें भी फँसा लेंगे।
क्या कहते हो? मज़ा आया ना?