Bhai Ne Choti Bahan Ki Seal Todi – Real Incest Chudai Story
राहुल और उसकी 21 साल की छोटी बहन रिया की सच्ची इंसेस्ट कहानी। माँ के घर से बाहर जाने पर दोनों अकेले रह गए और भाई ने अपनी गोरी, टाइट फिगर वाली बहन की वर्जिन चूत की सील तोड़ी। किचन से बेडरूम तक की पूरी जोरदार चुदाई, फोरप्ले, ओरल सेक्स और कई राउंड्स की डिटेल हिंदी में। बहुत ही हॉट और रोमांचक सेक्स स्टोरी जो आपको गरम कर देगी।
नमस्ते दोस्तों, मैं राहुल हूँ, 24 साल का एक जवान, हट्टा-कट्टा लड़का। मैं उत्तर प्रदेश के मोरादाबाद शहर से हूँ। हमारे घर में चार लोग रहते हैं – मैं, मेरी माँ, पापा और मेरी छोटी बहन रिया। पापा एक बड़ी MNC कंपनी में मैनेजर हैं और चंडीगढ़ में पोस्टेड हैं, इसलिए वो साल में सिर्फ़ दो-तीन बार ही घर आ पाते हैं। माँ पूरी तरह हाउसवाइफ़ हैं, घर संभालती हैं।
रिया… मेरी प्यारी छोटी बहन, 21 साल की, अभी M.A. कर रही है। उसका फिगर तो जैसे कोई बॉलीवुड हीरोइन हो – 34-26-36, एकदम परफेक्ट। गोरी-चिट्टी स्किन, लंबे काले घने बाल जो कमर तक आते हैं, और हमेशा टाइट सूट-सालवार या कुर्ती पहनती है। उसमें उसके खड़े-खड़े रसीले बूब्स और गोल-मटोल भरी हुई गांड इतनी सेक्सी लगती कि कोई भी देखता रह जाए।
मेरा लंड 8 इंच लंबा और 2.5 इंच मोटा है – रॉक हार्ड, हमेशा तैयार। बचपन से ही मैं रिया का दीवाना था। उसकी हर अदा, उसकी मुस्कान, उसकी वो मासूम आँखें – सब कुछ मुझे पागल कर देता। पापा के घर न होने पर सिर्फ़ हम तीन ही रहते – मैं, माँ और रिया। रिया कॉलेज जाती, मैं MBA पूरा करके कुछ दिनों की छुट्टी पर घर आया था।
घर में वो इतने टाइट कपड़े पहनती कि उसके बूब्स की शेप और गांड की गोलाई साफ़-साफ़ दिखती। उसे देखते ही मेरा लंड तंबू बना लेता। मैंने कई बार चुपके से उसे नहाते हुए नंगा देखा – बाथरूम के दरवाज़े की झिरी से। उसके गोरे बदन पर पानी की बूँदें, गुलाबी निप्पल्स, टाइट चूत – सब कुछ देखकर मैं रात भर मुठ मारता। और जानबूझकर मैंने अपना लंड भी उसे दिखाया – सोने का नाटक करते हुए, सिर्फ़ बॉक्सर में लेटकर लंड खड़ा करके।
वो मुझे देखती रहती, कभी शरमाकर मुस्कुराती, कभी आँखें फेर लेती। हमें दोनों को पता था कि हम एक-दूसरे की तरफ़ खिंचे चले जा रहे हैं, लेकिन कभी खुलकर कुछ कहा नहीं। बस नज़रों-नज़रों में इशारे होते।
फिर वो सुनहरा मौका आया, जिसका मैं सालों से इंतज़ार कर रहा था। दो महीने पहले हमारी नानी का देहांत हो गया। माँ को गांव जाना पड़ा, पूरे 10-12 दिनों के लिए। घर में सिर्फ़ मैं और रिया अकेले। मैंने मन ही मन ठान लिया – अब ये मौका हाथ से नहीं जाने दूँगा। रिया को भी शायद अहसास हो गया था, क्योंकि माँ के जाने के बाद उसकी नज़रें कुछ और ही कह रही थीं – शरमाती हुईं, लेकिन उत्साहित।
पहले दिन शाम का वक्त। रिया किचन में खाना बना रही थी। उसने पिंक कलर का टाइट सूट-सालवार पहना था – सूट इतना टाइट कि उसके बड़े-बड़े बूब्स आगे को उभरे हुए थे, जैसे बाहर आने को बेताब। सालवार उसकी मोटी जाँघों और गोल गांड पर चिपकी हुई थी।
मैं सिर्फ़ व्हाइट बनियान और काले अंडरवियर में था, लंड पहले से ही सेमी-खड़ा। चुपके से उसके पीछे गया, कमर में हाथ डाले और उसे ज़ोर से अपनी तरफ़ खींच लिया। मेरा सीना उसके नरम बदन से चिपक गया, और मेरा खड़ा होता लंड उसकी मुलायम गांड की दरार पर टकराया।
वो थोड़ा चौंकी, लेकिन भागी नहीं। बल्कि हल्के से मुस्कुराई और बोली, “भैया… ये क्या कर रहे हो?” उसकी आवाज़ में शरम थी, लेकिन उत्सुकता भी। मैंने उसके कान में गर्म साँसें छोड़ते हुए फुसफुसाया, “अपनी प्यारी सी बहन से प्यार जो कर रहा हूँ, जान।
कितने दिन से तुझे ऐसे छूने का मन था।” वो शरमाई, बदन में सिहरन हुई, लेकिन हटी नहीं। बल्कि थोड़ा पीछे को झुक गई, जैसे मेरे लंड को और अच्छे से महसूस करना चाहती हो। मैंने उसकी गर्दन पर हल्के-हल्के किस किए, जीभ से चाटा। वो सिसकारी, “आह… भैया… कितना अच्छा लग रहा है…”
मैंने उसे धीरे से घुमाया, किचन की दीवार से सटा दिया और उसके गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहले वो हिचकिचाई, लेकिन फिर उसके होंठ खुल गए। हमारा पहला डीप, पैशनेट किस। उसकी नरम जीभ मेरी जीभ से लड़ने लगी, लार मिलने लगी। मेरे हाथ खुद-ब-खुद उसके बूब्स पर चले गए – इतने सॉफ्ट, इतने भरे हुए। मैंने उन्हें दबाया, मसलना शुरू किया। वो कराह उठी, “उम्म्म… भैया… कितना मजा आ रहा है… और दबाओ…”
किस करते-करते हम किचन से निकलकर उसके कमरे में पहुँचे। मैंने दरवाज़ा लॉक किया। वो बेड पर बैठ गई, आँखें नीची करके शरमा रही थी, लेकिन उसकी साँसें तेज़ थीं, सीना ऊपर-नीचे हो रहा था। वो पूरी तरह गरम हो चुकी थी।
मैं उसके सामने घुटनों पर बैठ गया, उसका सूट धीरे-धीरे ऊपर उठाया और उसके नरम पेट पर किस करना शुरू किया। जीभ से नाभि चाटी। वो तड़प रही थी। फिर सूट पूरा उतारा। अब वो सिर्फ़ ब्लैक ब्रा और मैचिंग पैंटी में थी। उसका गोरा बदन काली अंडरगार्मेंट्स में चमक रहा था, जैसे कोई सेक्स गॉडेस। ब्रा से उसके बूब्स ऊपर को उभरे हुए थे, निप्पल्स साफ़ दिख रहे थे।
मैंने ब्रा के ऊपर से ही उसके बूब्स दबाए, मुँह से चूसे। वो जोर-जोर से सिसकारियाँ भरने लगी, “आह… भैया… बहुत मजा आ रहा है… और जोर से… चूसो मेरे बूब्स…” मैंने ब्रा का हुक खोला। उसके गुलाबी निप्पल्स खड़े होकर सलामी दे रहे थे। मैंने एक निप्पल मुँह में लिया, जोर-जोर से चूसा, दाँतों से हल्का काटा। दूसरा उँगलियों से मसलता रहा। वो बेड पर लेट गई, कमर उछाल रही थी, “भैया… नीचे भी… मेरी चूत को छूओ ना… गीली हो गई हूँ पूरी…”
मैंने उसकी पैंटी पर हाथ फेरा – सच में पूरी तर-बतर। उसकी खुशबू मुझे पागल कर रही थी। धीरे से पैंटी उतारी। उसकी गुलाबी, टाइट वर्जिन चूत – हल्के से बाल, चमकदार और रस से भरी।
मैंने उँगली से क्लिट पर रगड़ा तो वो चीख उठी, “आआह्ह्ह… भैया… मार डालोगे क्या… अंदर डालो उँगली…” मैंने एक उँगली अंदर की – इतनी टाइट कि मुश्किल से गई। वो दर्द और मजा दोनों से तड़प रही थी। उधर वो मेरे अंडरवियर के ऊपर से लंड पकड़कर सहला रही थी, “भैया… कितना बड़ा हो गया है… मुझे दो ना…”
मैंने अंडरवियर उतारा। मेरा 8 इंच का मोटा, नसों वाला लंड बाहर आया, टोपे पर पानी चमक रहा था। वो देखकर हैरान, लेकिन आँखों में लस्ट भरा, “भैया… इतना बड़ा और मोटा… डर लग रहा है, लेकिन चाहती हूँ…” मैंने पूछा, “चूसेगी मेरी जान?” वो शरमाई, लेकिन हाँ में सिर हिलाया।
उसने लंड हाथ में लिया, प्यार से किस किया, फिर मुँह में लिया। उसकी गर्म, गीली जीभ टोपे पर घूमने लगी। वो पूरी मेहनत से चूस रही थी – कभी गहरा मुँह में, कभी जीभ से चाटती। “उम्म्म… भैया का लंड… कितना स्वादिष्ट… मुझे और देना…”
पूरे 45 मिनट हमने फोरप्ले किया। मैंने उसकी चूत चाटी, जीभ से अंदर तक घुसाया। वो दो बार झड़ी – सिर्फ़ उँगलियों और चाटने से। उसका रस मेरे मुँह में। अब वो बिल्कुल तैयार थी, बेताब। बोली, “भैया… अब नहीं सहा जाता… अपना लंड डाल दो… अपनी बहन की चूत फाड़ दो… चोदो मुझे जोर से…”
मैंने उसे लिटाया, पैर कंधों पर रखे। पहले लंड उसकी चूत पर रगड़ा – वो तड़प रही थी, “प्लीज़ भैया… डाल दो… पूरी कर दो मुझे…” मैंने टोपे को चूत के मुँह पर रखा और धीरे से धक्का दिया। उसकी सील टूटी – रस की कुछ बूँदें निकलीं। वो दर्द से चीखी, “आआआह्ह्ह… भैया… बहुत दर्द… लेकिन रुको मत… मुझे अपनी बना लो…” मैं रुका, उसके बूब्स चूसते से उसे सहलाया, किस किया। कुछ मिनट बाद वो बोली, “अब ठीक है… धीरे-धीरे करो…”
मैंने धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर ठूंका। उसकी टाइट चूत ने मुझे पूरी तरह जकड़ लिया – जैसे वाइस में फँसा हो। फिर स्पीड बढ़ाई। चप-चप की आवाज़ें, उसके मुँह से “आह… उइ… भैया… और तेज़… फाड़ दो मेरी चूत… आह्ह्ह… मजा आ रहा है…” वो भी गांड उछालकर पूरा साथ दे रही थी।
हम पसीने से तर, एक-दूसरे से चिपके। 30 मिनट की जोरदार चुदाई के बाद मैं उसकी चूत में झड़ा – गर्म वीर्य से भर दिया। वो भी साथ में झड़ी।
उस रात हमने 5-6 राउंड मारे – अलग-अलग पोज़िशन में। सुबह वो ठीक से चल नहीं पा रही थी, चूत सूज गई थी, लेकिन चेहरे पर पूरी संतुष्टि और प्यार की चमक।
माँ के आने में अभी 10 दिन बाकी थे। हम घर में ज्यादातर नंगे ही घूमते। जब मन करता – किचन में खाना बनाते वक्त, सोफ़े पर टीवी देखते वक्त, बाथरूम में नहाते वक्त – चुदाई शुरू हो जाती। रिया अब पूरी तरह खुल चुकी थी। एक दिन बोली, “भैया, पहले डर लगता था कि गलत है, लेकिन अब तुम्हारे बिना नहीं रह सकती। तुम्हारा लंड मेरी चूत का आदी हो गया है।”
कुछ दिनों बाद उसने खुद कहा, “भैया, अब मेरी गांड भी मार लो… पूरी तरह तुम्हारी बनाओ मुझे।” लेकिन वो अलग कहानी है…
दोस्तों, ये हमारी सच्ची कहानी थी। कैसी लगी? अगर पढ़कर तुम्हारे भी बदन में आग लग गई हो, तो समझो कहानी सफल है।