Richa ne pagal se chudai aur pati ko pata nahi
रिचा, एक 21 साल की गोरी और स्लिम लड़की, अपनी शादीशुदा जिंदगी में सेक्स की भूख से तड़प रही है। जब पति दूर होता है, तो वो एक रहस्यमयी गठीले नौजवान से मिलती है, जो म्यूट है लेकिन एक्सपीरियंस्ड लवर। पढ़िए ये कामुक हिंदी स्टोरी जहां दोनों की मर्ज़ी से होती है जोशीली चुदाई, 69 पोज़िशन, डॉगी स्टाइल और अनगिनत ऑर्गेज़म के साथ। सेक्सी, सॉफ्ट और एडिक्टिव!
मैं रिचा हूँ, सूरत से। मेरी उमर २१ साल है, रंग गोरा, बॉडी एकदम स्लिम और आकर्षक। मेरी शादी एक साल पहले मोहन से हुई थी। मोहन की उमर २३ साल थी। मोहन के अलावा घर में कोई नहीं रहता। मैं सेक्स में बहुत इंटरेस्ट रखती हूँ, हमेशा से सोचती थी कि शादी के बाद लाइफ फुल ऑफ़ एक्साइटमेंट होगी। लेकिन मोहन से शादी के बाद मेरे सारे ड्रीम्स टूट गए। मोहन का लंड बहुत छोटा था, सिर्फ़ ४ इंच का, और वो मेरी भूख को शांत नहीं कर पाता था। शादी के बाद जब मैं ससुराल पहुँची, तो मैंने देखा कि एक आदमी एकदम नंगा, पागलों की तरह हमारे घर के आस-पास घूमता रहता था। वो देखने में गठीला, सुंदर नौजवान था, लगता था किसी अच्छे फैमिली से है। उसकी उमर लगभग २६-२७ साल की होगी। मैंने मोहन से उसके बारे में पूछा, तो वो बोला, “ये तो बहुत दिनों से यहाँ घूमता रहता है, कोई हार्म नहीं करता।”
हमारे घर के आस-पास जंगली पेड़-पौधे बहुत थे, जिससे गेट के बाहर से घर आसानी से नहीं दिखता। वो जब हमारे घर के पास आता, तो मैं हमेशा छुप-छुप कर उसके लंड को देखती रहती। ढीला होने पर भी वो लगभग ८ इंच लंबा और मोटा था। मैं सोचती, काश एक बार मैं इसे हाथ से छूकर देख पाती। मोहन का लंड छोटा और पतला होने से मुझे चुदाई में मज़ा नहीं आता था। वो पागल रात को हमारे कंपाउंड में आ जाता और पूरी रात मुख्य दरवाजे के पास बैठा रहता।
ये उन दिनों की बात है जब मोहन १५ दिनों के लिए बैंगलोर चले गए। उनके जाने के दूसरे दिन रात ८ बजे के आस-पास वो पागल दरवाजे के पास आकर बैठ गया। वो रात को आता तो सुबह ही जाता। मैंने सोचा, आज इससे कुछ बात करके देखती हूँ। डरते-डरते मैंने दरवाजा खोला और पूछा, “खाना खाओगे?” उसने सिर हाँ में हिलाया। मैं खाना ले आई, वो खा चुका तो इशारे से पानी माँगा। मैंने पानी दिया। पीने के बाद वो चुपचाप बैठा रहा। मौका अच्छा था, मैं उसके बगल में बैठ गई। मैं तो उसके लंड को हाथ में लेकर देखना चाहती थी, और ये भी जानना कि खड़ा होने पर कितना बड़ा हो जाता है।
मैंने अपना हाथ उसकी जाँघों पर रखा। वो कुछ नहीं बोला, तो मैं हाथ फेरने लगी। वो फिर चुप रहा, तो मैंने धीरे-धीरे हाथ उसके लंड की तरफ़ बढ़ाया। वो अभी भी चुप। अब मेरी उँगलियाँ उसके लंड को टच कर रही थीं। मेरे बदन में सिहरन सी दौड़ गई। मैंने उँगलियाँ उसके लंड पर फेरनी शुरू कीं। वो चुप रहा, तो मैंने हाथों से पकड़ लिया। धीरे-धीरे सहलाने लगी, तो वो मुझे घूर-घूर कर देखने लगा। उसकी आँखों में सेक्स की प्यास साफ़ दिख रही थी, जैसे वो भी यही चाहता हो। थोड़ी देर में उसका लंड खड़ा होने लगा। टाइट होने पर लगभग १० इंच लंबा और बहुत मोटा हो गया। मैं उसके साइज़ को देखकर जोश में पागल सी हो गई, मेरी चूत गीली हो गई। अब मुझे ग़लत-सही का होश नहीं रहा। मैंने सोचा, अगर मैं इससे चुदवा लूँ, तो कोई कुछ नहीं कहेगा, क्योंकि वो पागल है। मैंने फैसला कर लिया कि आज मैं इससे मज़े लूँगी।
मैंने उसका हाथ पकड़ा और घर के अंदर ले गई। वो गंदा लग रहा था, जैसे कभी नहाया न हो। मैं उसे बाथरूम में ले गई, साबुन दिया और नहाने को कहा। मैं खड़ी रही, वो नहाने लगा। जोश से मेरी चूत फिर गीली हो गई। नहाने के बाद उसका गोरा बदन चमक उठा, लंड भी गोरा और क्लीन। मैं उसे बेडरूम में ले गई, बेड पर बिठाया। वो कुछ नहीं बोल रहा था।
मैंने पूछा, “तुम गूँगे हो क्या?” उसने सिर हाँ में हिलाया। मैंने सोचा, अच्छा है, किसी से कुछ नहीं कहेगा। मैं उसके बगल में बैठ गई, लंड को फिर सहलाने लगी, थोड़ी देर में टाइट हो गया। मैंने सोचा, ये पागल है, लेकिन मैं चाहती हूँ कि सब धीरे-धीरे हो, ताकि मज़ा आए।
मैंने उसे बेड पर लिटाया, अपने सारे कपड़े उतार दिए। वो मेरे गोरे बदन को घूर-घूर कर देखने लगा, जैसे पसंद आ रहा हो। मैं उसके बगल में बैठी, उसके लंड के सुपाड़े पर जीभ फेरने लगी। वो जोश में आहें भरने लगा, जैसे उसे भी अच्छा लग रहा हो।
थोड़ी देर बाद मैंने पूछा, “मेरी चूत को चाटोगे?” उसने सिर हाँ में हिलाया। मैं उसके ऊपर ६९ पोज़िशन में लेट गई, उसका लंड मुँह में लेकर चूसने लगी। वो उँगलियों से मेरी क्लिटोरिस को मसलते हुए, बड़े प्यार से मेरी चूत चाटने लगा। मैं समझ गई, ये औरतों को खुश करने का एक्सपीरियंस्ड प्लेयर है। थोड़ी देर चाटने के बाद उसने बीच की उंगली मेरी चूत में डाली, जी-स्पॉट को रगड़ने लगा। मेरे पूरे बदन में आग सी लग गई, मैंने उसके लंड को तेज़ी से चूसना शुरू किया। वो जी-स्पॉट रगड़ता रहा, मैं जोश से पागल हो गई। दो मिनट में मैं झड़ गई।
फिर मैं ऊपर से हटी, ढेर सारी क्रीम लाकर उसके लंड पर लगाई, और थोड़ी अपनी चूत में भी। क्रीम लगाने से सब स्मूथ हो जाएगा। मैं फिर ऊपर आई, उसके लंड के सुपाड़े को चूत के छेद पर रखा। उसने मेरा सिर पकड़कर अपनी तरफ़ खींचा, बड़े प्यार से किस करने लगा। उसके होंठ गर्म थे, मेरे बदन में सिहरन दौड़ गई।
थोड़ी देर मैंने चूत को उसके सुपाड़े पर रगड़ा, फिर धीरे से दबाया। मेरे मुँह से हल्की सी आह निकली, सुपाड़ा अंदर घुस गया। थोड़ा अनकम्फ़र्टेबल लगा, लेकिन मैंने रगड़ना जारी रखा। वो प्यार से मेरी पीठ सहलाता रहा, मुझे किस करता रहा। थोड़ी देर बाद मैंने फिर दबाया, सुपाड़ा अंदर गया, इस बार कम अनकम्फ़र्ट। मैंने थोड़ा और दबाया, आह निकली, अब २ इंच अंदर था। मेरी टाँगें थरथरा रही थीं, लेकिन मज़ा भी आ रहा था। मैं रुकी, फिर धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगी। जब लगा ठीक है, तो थोड़ा ज़ोर लगाया, ३ इंच अंदर, मैं आह भर उठी। फिर धीरे-धीरे अंदर-बाहर।
थोड़ी देर बाद उसने मुझे लेटने का इशारा किया। मैं जोश में थी, ऊपर से हटी, बेड पर लेट गई। उसने मेरे चूतड़ों के नीचे दो तकिए रखे, मेरी टाँगों के बीच आया, लंड का सुपाड़ा चूत पर रखा, टाँगें फैलाईं। मैं डर रही थी, लेकिन वो धीरे-धीरे दबाने लगा। लंड धीरे-धीरे अंदर घुसने लगा। ४ इंच पर मैं आह भरने लगी, वो रुक गया। होंठ मेरे होंठों पर रखे, बूब्स मसलते हुए धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। मैं समझ गई, वो ज़बरदस्ती नहीं करेगा, सब म्यूचुअल है। थोड़ी देर बाद मैं झड़ गई, उसने स्पीड बढ़ाई। फिर हल्का धक्का, आह निकली, और गहराई तक घुस गया।
अब ५ इंच अंदर, वो धीरे-धीरे धक्के लगाने लगा। दर्द कम हो गया, मज़ा आने लगा। ५ मिनट बाद मैं फिर झड़ी। उसके बाद उसने स्पीड तेज़ की, मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। मैं चूतड़ उठा-उठा कर साथ दे रही थी। वो रुक गया, धीरे-धीरे और गहरा घुसाने लगा। लंड चूत को फैलाते हुए अंदर जा रहा था। ७ इंच पर मैं तड़प उठी, लेकिन चीख नहीं निकली, होंठ काट लिए। वो रुका, फिर धीरे-धीरे चुदाई शुरू। थोड़ी देर बाद स्पीड बढ़ाई, मुझे तेज़ी से चोदने लगा। मैं जोश में पागल, पूरा लंड लेना चाहती थी। १० मिनट बाद मैं फिर झड़ी।
उसके बाद उसने फिर धीरे-धीरे घुसाया। चूत गीली थी, आसानी से ९ इंच तक घुस गया। मैं तड़पी, आह निकली। इस बार वो रुका नहीं, आधा बाहर खींचा, फिर जोरदार धक्का, लेकिन कंट्रोल्ड। मेरे मुँह से आह निकली। ४-५ धक्कों में पूरा लंड अंदर। पूरा घुसने के बाद चुदाई शुरू। मैं दर्द से आह भर रही थी, लेकिन रुकने को नहीं कहा। थोड़ी देर बाद दर्द गया, मैं चूतड़ उठा कर साथ देने लगी। उसने स्पीड तेज़ की। १० मिनट बाद मैं फिर झड़ी। उसने और तेज़ किया, मैं मस्त होकर चुदवा रही थी।
अब उसके धक्के इतने जोरदार थे कि मेरा बदन हिल रहा था, लेकिन मज़ा इतना कि दर्द कुछ नहीं लग रहा। पहली बार ऐसा प्लेज़र मिल रहा था। १५ मिनट बाद मैं फिर झड़ी, उसने लंड बाहर निकाला। मैंने पूछा, “अब क्या?” उसने इशारे से डॉगी स्टाइल कहा। मैं हो गई। वो पीछे आया, धीरे-धीरे पूरा लंड घुसाया, इस बार कम अनकम्फ़र्ट। फिर कमर पकड़ कर चुदाई शुरू, तेज़ स्पीड। बेड हिल रहा था, मेरी सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं। थोड़ी देर बाद कमर छोड़, दोनों हाथों से निप्पल्स मसलते हुए चोदने लगा।
मैं पूरी मस्त हो चुकी थी। अब तक ४५ मिनट हो चुके थे, वो झड़ने का नाम नहीं ले रहा। वो आंधी की तरह चोदता रहा। लगभग १ घंटे बाद रुक-रुक कर जोरदार धक्के लगाने लगा, मैं समझ गई वो झड़ने वाला है। मैं भी बस झड़ने वाली थी। २ मिनट में मैं झड़ी, और उसके साथ वो भी। उसके लंड से ढेर सारा जूस निकला, जैसे बहुत दिनों बाद। सारा जूस चूत में निकाल कर वो हट गया, लेट गया। मैंने उसके लंड को चाट-चाट कर क्लीन किया। आज ज़िंदगी में पहली बार इतना मज़ा आया, मैं मस्त होकर चुदवाई। वो भी खुश लग रहा था, जैसे उसकी प्यास बुझी हो।
लगभग १ घंटे हम लेटे रहे, एक-दूसरे के बदन को सहलाते, होंठ चूमते। फिर मैंने उसका लंड चूसना शुरू किया, २ मिनट में खड़ा हो गया। इस बार डॉगी स्टाइल में ही चुदवाई। चूत थोड़ी सूजी थी, लेकिन थोड़ी देर बाद ज़्यादा मज़ा आया। उसने जमकर चुदाई की, लगभग १.५ घंटे तक। इस बार मैं ४ बार झड़ी। झड़ने के बाद उसने लंड बाहर निकाला, मेरी चूत चाट-चाट कर क्लीन की। फिर लंड मेरे मुँह के पास किया, मैंने प्यार से चाट कर साफ़ किया।
मैंने कहा, “आज तुमसे इतना मज़ा आया, कभी नहीं भूलूँगी। थोड़ा अनकम्फ़र्ट था, लेकिन प्लेज़र के आगे कुछ नहीं।” वो चुपचाप उठा, किचन में गया, पानी गर्म करके लाया, बड़े प्यार से मेरी चूत की सिकाई की। १५-२० मिनट बाद सब ठीक हो गया। उसके बाद वो मेरे बगल में लेट गया, हम रात भर एक-दूसरे को गले लगाए सोए। सुबह वो चला गया, लेकिन उस रात की यादें हमेशा मेरे साथ रहीं। अब मैं जानती हूँ कि असली प्लेज़र क्या होता है, और वो भी हम दोनों की मर्ज़ी से।