Bahu Ki Choot Ki Aag Bujhai Sasur Ji Ne
राजेश की शादी के बाद सुनीता हमेशा अधूरी रह जाती क्योंकि राजेश जल्दी झड़ जाता था। लेकिन ससुर जी के मोटे लंड ने सुनीता की चूत की प्यास बुझा दी। छत पर, किचन में, रात में गर्म चुदाई… अब सुनीता प्रेग्नेंट है और राजेश को शक है कि बच्चा ससुर का है। पढ़िए ये हॉट देसी फैमिली सेक्स स्टोरी पूरी डिटेल में – ससुर-बहू का पापी रिश्ता, बहू की चूत की कुत्ते स्टाइल चुदाई, ब्लोजॉब और ऑर्गेज़म की भरमार!
हाय दोस्तों, मैं हूँ आपका डॉ. जे. खतपटिया, सेक्स संबंधी समस्याओं का स्पेशलिस्ट। मेरे क्लिनिक में रोज़ ऐसे केस आते हैं जहाँ कपल्स अपनी सेक्स लाइफ से परेशान होते हैं। खासकर मर्दों की सबसे कॉमन प्रॉब्लम है शीघ्रपतन – यानी जल्दी झड़ जाना।
लड़की को पूरा मजा आने में टाइम लगता है, लेकिन लड़के कुछ ही मिनटों में खत्म हो जाते हैं। ये प्रॉब्लम दुनिया भर में 30-40% मर्दों को होती है, और भारत में भी इसी तरह। इसका इलाज आसान है, बिना ज्यादा खर्चे के। अगर आप भी परेशान हैं, तो मुझे कॉन्टैक्ट करें, मैं मदद करूँगा।
अब सुनिए एक रियल केस, जो राजेश ने मुझे ईमेल किया। राजेश एक सिंपल, शर्मीला, मेहनती मिडिल क्लास लड़का है। प्राइवेट कंपनी में जॉब करता है, बॉस का फेवरिट। घर में माँ-बाप और छोटी बहन।
एक दिन सुनीता का रिश्ता आया – अच्छे घर की लड़की। सुनीता साँवली थी, लेकिन कमाल की सेक्सी। उसके बड़े-बड़े टाइट ब्रेस्ट, पतली कमर, और वो गोल-मटोल, लचकती हुई गांड… चलती तो जैसे हवा में लहराती हो। पैरों में हमेशा घुंघरू वाली पायल, छन-छन की आवाज़ के साथ गांड ऊपर-नीचे हिलती। लोग देखते रह जाते, मर्दों का लंड तुरंत खड़ा हो जाता।
शादी हो गई। सुहागरात में राजेश घबरा रहा था – पहली बार जो था। कुछ समझ नहीं आ रहा था कि शुरू कैसे करे। सुनीता बेड पर लेटी इंतज़ार कर रही थी, लाल जोड़े में कमाल लग रही थी। उसने खुद इनिशिएटिव लिया। लाइट ऑफ की, सिर्फ नाइट लैंप जलाया। फिर राजेश से लिपट गई, उसके होंठों पर अपने नरम होंठ रखे।
धीरे-धीरे साड़ी उतारी, घाघरा जाँघों तक ऊपर किया।
बोली, “देखो ना, यहाँ कुछ खुजली हो रही है…” फिर घाघरा पूरी तरह उतार दिया, अपनी चूत को जोर-जोर से मसलने लगी। ब्लाउज़ खोला, ब्रा में उसके साँवले, बड़े-बड़े ब्रेस्ट उछलने लगे। सिर्फ छोटी सी पैंटी में उसकी मोटी, गोल गांड फँसी हुई थी। चूड़ियाँ भरे हाथ, घुंघरू वाली पायल – उफ्फ, राजेश का लंड पत्थर जैसा हो गया।
सुनीता खुद को सहलाने लगी – गांड हिलाई, कूद-कूद कर ब्रेस्ट उछाले। राजेश बर्दाश्त नहीं कर पाया। उसने सुनीता की पैंटी उतारी, उसकी गीली चूत पर उँगलियाँ फेरी। ब्रा खींची, वो बड़े साँवले ब्रेस्ट धड़ाम से बाहर आए – गुलाबी निप्पल्स कड़े हो रहे थे।
राजेश उन्हें चूसने लगा, निप्पल्स काटने लगा। सुनीता सिसकारियाँ ले रही थी, “अब खुजली कम हुई क्या?” राजेश बोला, “नहीं, अब इंजेक्शन लगाना पड़ेगा।” सुनीता हँस पड़ी, “लगा दो ना…”
राजेश ऊपर चढ़ा, अपना लंड सुनीता की चूत में डाला। सुनीता से जोर की आह निकली – “आआआह्ह्ह… धीरे!” धक्के शुरू हुए। हर धक्के पर पायल छन-छन, चूड़ियाँ खन-खन। सुनीता राजेश की पीठ सहला रही थी, नाखून गड़ा रही थी।
लेकिन पहली बार था, और सुनीता इतनी हॉट – राजेश बस 8-10 धक्कों में झड़ गया। सुनीता अधूरी रह गई, उसकी चूत अभी और चाह रही थी। दोबारा ट्राई किया, लेकिन फिर 10-12 धक्के और खत्म।
शादी को दो महीने हो गए। हर बार सुनीता अधूरी रह जाती। राजेश ठीक से चोद नहीं पाता था। एक दिन सुनीता नहाकर निकली – बाल गीले, सिल्क की पतली नाइटी पहनी, अंदर कुछ नहीं। पानी से नाइटी बॉडी से चिपक गई, ब्रेस्ट और गांड के शेप साफ दिख रहे थे। चलती तो लगता नंगी ही हो।
ससुर जी (42 साल के, मजबूत बदन वाले) की नज़र पड़ी। उनकी आँखें चमक उठीं, लंड लुंगी में खड़ा हो गया। सुनीता ने शीशे में देख लिया। जानबूझकर गांड हिलाकर ठुमके लगाए – ससुर और पागल हो गए।
धीरे-धीरे सुनीता उन्हें टीज़ करने लगी। कपड़े धोते वक्त नाइटी जाँघों तक ऊपर की, झुककर ब्रेस्ट बाहर झलकाए। ससुर मुंह में पानी भरकर घूरते। एक दिन राजेश को 8 दिनों की ट्रिप पर जाना पड़ा। सुनीता सोच में पड़ गई – अब ये दिन कैसे कटेंगे? ससुर की नज़रें अब खुलकर चोदने वाली थीं।
राजेश जाते ही सुनीता मायके जाना चाहती थी, लेकिन सास ने मना कर दिया। अगली सुबह किचन में ससुर ने पीछे से सुनीता की गांड पर हाथ फेरा। सुनीता चुप रही, लेकिन अंदर से गर्म हो गई।
छत पर कपड़े सुखाते वक्त सुनीता कूद-कूद कर ब्रेस्ट उछाल रही थी। ससुर बर्दाश्त नहीं कर पाए। सुनीता ने मजाक में कहा, “पापाजी, बुढ़ापे में भी लंड खड़ा होता है?” ससुर ने लुंगी ऊपर की, अपना मोटा, लोहे जैसा लंड दिखाया – “देखो, काफी है ना?”
शाम को किचन में ससुर ने पीछे से लंड गांड के बीच टिकाया, जोर का धक्का मारा। सुनीता हिल गई – दर्द भी, मजा भी। बोली, “यहाँ से जाओ, वरना…” लेकिन अंदर से चाह रही थी। ससुर मुस्कुराकर चले गए।
सुनीता सोच में पड़ गई। राजेश से कभी पूरा मजा नहीं मिला, लेकिन ससुर का मोटा लंड एक धक्के में ही चूत गीली कर देता था। उसने फैसला किया – अब चुप रहूँगी, जो करेंगे होने दूँगी।
अगली सुबह सास और देवरानी हॉस्पिटल गए। घर में सिर्फ सुनीता और ससुर। सुनीता चाय बना रही थी, जानबूझकर गांड हिलाकर चल रही – पायल छन-छन, चूड़ियाँ खन-खन।
ससुर का सब्र टूट गया। पीछे से आए, नाइटी की चेन खोली, हाथ अंदर डाले – ब्रा नहीं थी। बोले, “बहू, कितने बड़े और कड़क हैं तेरे ब्रेस्ट, हाथ में नहीं समाते!” सुनीता चुप रही। ससुर ने पीछे से ब्रेस्ट दबाने शुरू किए, निप्पल्स खींचे। सुनीता से सिसकारी निकली – “आह्ह्ह…”
सुनीता पलटी, आँखों में देखकर बोली, “पापाजी, क्या आप मुझे चोदना चाहते हो?” ससुर बोले, “इतने दिनों से तेरी गांड घूर रहा हूँ, चुदवाएगी?” सुनीता ने नाइटी नीचे की, बड़े ब्रेस्ट बाहर आए। ससुर मुंह में पानी भरकर चूसने लगे – मूंछें चुभ रही थीं, सुनीता को दर्द और गुदगुदी दोनों। “आह्ह्ह… ओउउह्ह्ह… धीरे पापाजी, दर्द हो रहा है, खून निकल आया।”
ससुर बोले, “मेरा बेटा दबाता है तो दर्द नहीं होता?” सुनीता शर्मा गई, “वो तो ठीक से छूता भी नहीं, चोदता भी नहीं। किस करना भी नहीं आता।”
ससुर ने अपने मूंछों वाले होंठ उसके नरम होंठों पर रखे, गहरी फ्रेंच किस की। जीभ अंदर डाली, सुनीता ने भी चूसी। ससुर का हाथ गांड पर गया, नाइटी ऊपर की – अंदर कुछ नहीं। “आज पूरी नंगी तैयार हुई है?” सुनीता ने उन्हें बाहों में कस लिया, “कल रात से सोच लिया था, आज तुमसे चुदवाऊँगी।”
ससुर ने गांड पर जोर से थप्पड़ मारे, सुनीता चिल्लाई – “आह्ह्ह, जलन हो रही है!” फिर गांड के छेद पर उँगलियाँ फेरीं, सुनीता गुदगुदा कर हँस पड़ी, लाड़ में उछलने लगी। “अब और मत तड़पाओ पापाजी, बरसों से चूत भूखी है।”
ससुर बोले, “चल, कुत्ते स्टाइल में गांड मारूँगा।” सुनीता ने कुर्सी पकड़ी, गांड ऊपर की – नरम, गोल, तकिये जैसी। ससुर ने अपना मोटा लंड चूत में डाला – “आआआह्ह्ह… उई माँ!” ससुर ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगे। पोक्पोक की आवाज़ें, गांड हिलती, थप्पड़ मारते। पायल छन-छन, चूड़ियाँ खन-खन।
लंड पेट तक जा रहा था। सुनीता दर्द से चिल्ला रही थी, लेकिन मजा इतना कि सब सह रही। आखिर उसकी चूत से झरना फूटा, ऑर्गेज़म आया। ससुर ने भी चूत में ही गर्म वीर्य की झड़ी लगा दी। दोनों साँसें भरते लिपट गए।
फिर ससुर बोले, “मेरा लंड मुँह में लेगी?” सुनीता ने हाँ कहा। पहली बार ब्लोजॉब दिया – दोनों का रस मिला स्वाद कमाल का। “पापाजी, अब कब चोदोगे?” “रात को।”
रात ठंडी थी। ससुर कमरे में आए, सुनीता कंबल हटाकर नंगी लिपट गई। एक कंबल में दोनों। सुनीता ने खूब लंड चूसा, गोटियाँ चाटीं। फिर पैर फैलाए। ससुर ब्रेस्ट कसकर पकड़कर चढ़े, ज़ोर के धक्के। सुनीता बोली, “तुम्हारा बेटा चोदता है तो पायल नहीं बोलती। तुम्हारा हर धक्का पेट तक जाता है… और अंदर ले जाओ!” टांगें ससुर की कमर पर लपेटकर खुद ऊपर-नीचे हो रही थी। ससुर हमेशा चूत में ही झड़ते।
अब मौका मिलते ही चुदाई – किचन में, छत पर, कुत्ते स्टाइल में। सुनीता पूरा साथ देती। एक दिन छत पर चुदाई कर रहे थे कि राजेश अचानक आ गया। सब देख लिया। टूट गया, रोने लगा। सुनीता भागकर कमरे में गई। राजेश ने पूछा, “कब से?” सुनीता ने सब सच बता दिया।
अब सुनीता प्रेग्नेंट है। राजेश को यकीन है – बच्चा उसका नहीं, ससुर का। दो बार ज़हर खाने की कोशिश की। न बच्चा गिरवा सकता है, न तलाक – समाज क्या कहेगा?
दोस्तों, अब राजेश क्या करे? मैं भी कन्फ्यूज़ हूँ… आप बताओ।