मेरी बहू रानी को पुनः भोगने की लालसा- 3

फादर इन ला सेक्स कहानी में पढ़ें कि मेरे बेटे की पत्नी ने कैसे होटल के कमरे में मेरे लंड का मजा लिया. उसने अपने मनपसंद आसनों में चुदाई की.

कहानी के पिछले भाग
मेरी पुत्रवधू के कामुक जलवे
में आपने पढ़ा कि फटाफट चुदाई के एक दौर के बाद हम ससुर बहू आगरा में ताजमहल देखने चले गए. वहां से लौटे तो …

अब आगे फादर इन ला सेक्स कहानी:

हम दोनों ससुर बहू ने कुछ देर आराम किया फिर नहाने के इरादे से मैंने कपड़े उतार दिए.
उधर अदिति भी अपने कपड़े चेंज करने का उपक्रम करने लगी थी.

अचानक मेरे मन को कोई चाहत उमड़ आई.

“अदिति बेटा, अभी तू ये कपड़े मत उतार!” मैंने उसे रोकते हुए कहा.
“क्यों पापा जी?” उसने प्रश्नवाचक दृष्टि से मुझे देखते हुए कहा.

“अदिति बेटा, इस जीन्स टॉप में तो तू 21-22 साल की कॉलेज की स्टूडेंट सी लग रही है. तुझे इस रूप में देखकर तो किसी का दिल भी तुझे पाने को मचल उठे!” मैंने बहू को चूमते हुए कहा.

“अच्छा पापा जी! तो आप इस इक्कीस साल की कुंवारी छोरी के तन को मसलना मीड़ना चाहते हो, उसे भोग कर लड़की से औरत बनाना चाहते हो, है न?” बहूरानी बड़ी अदा से बोली.
“हां अदिति बेटा, तू इस ऑउटफिट में इतनी सेक्सी लग रही है कि कोई भी तुझे पाना चाहेगा,” मैंने बमुश्किल कहा.

“अच्छा! तो फिर मान लो पापा जी कि मैं कॉलेज में पढ़ने वाली 21 साल की स्टूडेंट हूं और आपकी गर्लफ्रेंड भी हूं. और मैं मम्मी से सहेली के यहां जाने का बहाना बना कर चोरी छिपे यहां जंगल में आपसे मिलने आ गयी हूं; हमारे पास मिलने के लिए सिर्फ एक घंटा ही है. ऐसे में आप क्या क्या करोगे मेरे साथ?” बहूरानी अपने दोनों हाथ कमर पर रख कर इठला कर बोली.

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“हम्म्म … अच्छा ऐसी बात है तो फिर देख …” मैंने कहा.
और अदिति को अपनी बांहों में समेट लिया. उसका निचला होंठ चूसते हुए मैं बहू के दोनों स्तन दबाने मसलने लगा; फिर उसके टॉप में सामने से हाथ घुसा कर ब्रा में उंगलिया घुसा दीं और नंगा स्तन मसलने लगा.

“आह … राज, मत करो ऐसे, मुझे कुछ कुछ हो रहा है. छोड़ो घर जाने दो प्लीज; देर हो रही है मेरी मम्मी डांटेंगी.” बहूरानी मुझसे चिपटते हुए कामुक स्वर में बोली.

“अदिति … मेरी जान; मत रोको मुझे … आज मैं तुझे अपना बना कर ही छोडूँगा, तू इस पेड़ का सहारा लेकर झुका जा!” मैंने कहा.
और मैंने उसकी जीन्स सामने से खोल दी और उसे घुमा कर बेड पर झुका दिया.

फिर फुर्ती से उसकी जीन्स और पैंटी घुटनों तक खिसका दी और उसके चिकने गुलाबी गोल गोल नितम्ब सहलाने लगा और उन पर चपत लगाने लगा.

“आह … उफ्फ … ऐसे मत करो मेरे राजा; कोई देख लेगा तो मैं तो डूब मरूंगी!” बहूरानी अपनी गांड हिलाती हुई बोली.
“मेरी जान … यहां कोई नहीं आता, तू टेंशन मत ले, अपने पास समय कम है और काम ज्यादा है!” मैंने कहा और अपना लंड निकाल कर उसकी चूत के खांचे में घिसने लगा और फिर धीरे से टोपा चूत में घुसेड़ दिया.

“उईई मम्मी रे, मर गयी मैं तो … राज… निकालो निकालो इसे बाहर निकालो जल्दी से; बहुत मोटा हथियार है आपका … हाय राम रे फाड़ दी मेरी तो!” बहूरानी दर्द से तड़पने की परफेक्ट एक्टिंग करती हुई बोली.

लेकिन सच में उसने अपने कूल्हे नचा कर समूचा लंड अपनी गीली चूत में लील लिया.

“बस हो गया मेरी जान … कुंवारी चूत में पहली दफा लंड जाने पर दर्द सहना ही पड़ता है.” मैंने कहा और आगे हाथ लेजाकर बहू को मम्में दबोच लिए और उन्हें चोदने लगा.
“ह्म्म्म … क्या मस्त टाइट चूत है मेरी डार्लिंग की …” मैं अब पूरे जोश में चुदाई करते हुए बोला.

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“आह मम्मी … लग रही है … बस भी करो … कितने निर्दयी हो तुम; मुझे पता होता कि तुम मेरा ये हाल करोगे तो मैं कभी नहीं आती यहां; मुझ पर दया नहीं आती तुमको … कहते थे मुझसे बहुत प्यार करते हो और मुझे कभी कष्ट नहीं दोगे. देख लिया आपका प्यार … लो कर लो अपनी मनमानी और मार ही डालो मुझे!” बहूरानी पूरी मस्ती में मेरे धक्कों से ताल में ताल मिलाती हुई कुंवारी चुदने की गजब की एक्टिंग कर रहीं थीं.

हमारा ये रोलप्ले मेरे झड़ने के बाद ख़त्म हो गया और लंड को चूत ने धकेल कर बाहर कर दिया.

फिर बहूरानी हंसते हुए बेड पर लेट गयी.

“मजा आ गया पापा जी, लग रहा था मैं सचमुच कुंवारी हूं और अपने बीएफ से चुद रही हूं.” बहूरानी बोली और जोर से हंसने लगी.
फिर उसने अपनी जीन्स ऊपर कमर तक खिसका कर बटन बंद कर लिया.

“सेम हियर बेटा … मुझे भी लग रहा था कि मैं जैसे तेरे कॉलेज में प्रोफेसर हूं और तू मेरी क्लास में कोई कमसिन सी स्टूडेंट है और मैं तुझे क्लास में मेज पर झुका कर तुझे चोद रहा हूं.” मैंने भी हँसते हुए उसे आलिंगन करते हुए कहा.

“तो अदिति बेटा अब क्या प्लान है?” कुछ देर बाद मैंने पूछा.

“पापा जी, ताजमहल घुमते घुमते थक गयी मैं तो ऊपर से आपने मुझे बेड पर झुका कर चुदाई का एक राउंड करवा दिया. अब तो थोड़ी देर रेस्ट करलेने दो. फिर शाम को नहा कर थोड़ी देर के लिए बाहर निकलेंगे और फिर आप जो चाहो …”

“ठीक है बेटा जी, एज यू विश!” मैंने कहा और मैं भी एक सोफे पर जा लेटा और ऊंघने लगा.

शाम के आठ बजे के करीब हम दोनों स्नान करके फिर से तरोताजा हो लिए थे.
बहूरानी का बाहर जाने का मन नहीं था तो हमने रूम सर्विस से डिनर का मीनू आर्डर कर दिया और डिनर साढ़े नौ तक लाने को कह दिया.

इसके साथ ही मैंने मैंगो वाली कोल्डड्रिंक, तले हुए काजू और सोडे की बोतल भी आर्डर कर दिया.
जल्दी ही वेटर ये चीजें सर्व कर गया.

“अदिति बेटा, चल आ जा … अब चुदाई का बढ़िया मूड बनाते हैं.” मैंने कहा तो वो मेरे बगल में सोफे पर आन बैठी.

उस शाम बहूरानी ने गुलाबी रंग की नाइटी पहन ली थी जो सामने से पूरी खुलती थी और मैंने सिर्फ एक लुंगी लपेट ली थी.

फिर मैंने अपने बैग से व्हिस्की की बोतल निकाल कर और बाकी चीजें भी सेंटर टेबल पर सजा दीं.

बहूरानी के लिए कोल्डड्रिंक मैंने गिलास में डाल कर उसे पेश कर दी और अपने लिए व्हिस्की का एक लार्ज पैग बना कर सोफे पर पसर गया और आहिस्ता आहिस्ता हल्के हल्के घूंट भरने लगा.

खूब मस्ती भरा माहौल बन गया था.

बहूरानी की चूचियां उनकी नाइटी के भीतर से झांक रहीं थीं; मैंने बहूरानी की कमर में हाथ डाल कर उन्हें अपने और करीब कर लिया और मैं धीरे धीरे उनकी चिकनी जांघ सहलाने लगा.
जब मेरी हथेली उनकी चूत के एरिया में पहुंची तो मैंने पाया कि बहू ने पैंटी तो पहन ही नहीं रखी थी.

मैंने खुश होकर चूत के लिप्स को छेड़ना शुरू किया.

“ऐसे मत छेड़ो पापा जी, ये सब बिस्तर में करना. अभी तो आप अपनी ड्रिंक एन्जॉय करो!” बहूरानी कोल्डड्रिंक का घूंट गटक कर बोली.

“अदिति बेटा, मत रोक मुझे. ये पल जीवन दुबारा मिलें न मिलें कौन जानता है. अभी तो जी भर कर मौज उड़ा लें!” मैंने उसे चूमते हुए कहा.
“ह्म्म्मम … ठीक है पापाजी, डू व्हाट यू लाइक!” बहूरानी बोली और मेरे कंधे से सिर टिका दिया.

फिर मैंने अदिति की नाइटी सामने से खोल दी; उनका गुलाबी चिकना नंगा जिस्म मेरे सामने था.

मैंने उनका एक पैर उठा कर अपनी गोद में रख लिया और उसे प्यार से सहलाने लगा, पंजे से लेकर पिंडली जांघ और चूत तक मेरे हाथ फिरने लगे.

बहू की चिकनी गुदगुदी जांघ को सहलाने में बहुत अच्छा लग रहा था.
बीच बीच में मैं चूत की दरार भी छेड़ देता था.

ये सब करने से बहू की आंखें आनंद से मुंद सी गयीं और इधर मेरा लंड भी तन कर खड़ा हो गया जिससे मेरी लुंगी उठ गयी और लंड उभार जैसे टेंट के पोल जैसा दिखने लगा.

“अदिति बेटा, ये देख. बेचारा तुम्हारा प्यार पाने को कब से खड़ा है. सवा साल हो गया इसे तेरे होंठों का प्यार नहीं मिला!” मैंने बहू का एक चूचा मसल कर कहा.

मेरी बात सुनकर बहूरानी ने अधखुली आंखों से मेरे लंड के उभार को निहारा फिर मेरी बगल से उठ कर नीचे कार्पेट पर मेरे पैरों के बीच बैठ गयीं और लुंगी हटा कर लंड थाम लिया.

बहू के हाथ का स्पर्श पाते ही मेरा लंड फूल के और कुप्पा हो गया और उसकी नसें भी फूल कर उभर गयीं.
उसने लंड को चार पांच बार दबा दबा कर देखा फिर नीचे की ओर झुका कर छोड़ दिया जिससे वो किसी स्प्रिंग लगे खिलौने की तरह उछल कर फिर छत की ओर मुंह उठा कर फिर से तन कर खड़ा हो गया.

फिर बहू ने फोरस्किन नीचे कर टोपा निकाल लिया.

“पापा जी, आपका लंड कितना गर्म और सख्त हो रहा है!” बहूरानी बोलीं और टोपा पर जीभ की नोक फिराने लगीं.

बहूरानी के मुंह से लंड शब्द सुनना इतना उत्तेजक लगता है कि वो खुशी वो आनंद व्यक्त करने के लिए उपयुक्त शब्द मेरे पास हैं ही नहीं.

मेरे और बहूरानी के अन्तरंग संबंधों का एक आरंभिक दौर था जब बहूरानी चूत लंड चुदाई जैसे शब्द सुनते ही अपने कान हथेलियों से ढक लेती थी. उसे लगता था कि मैं उन्हें गाली दे रहा हूं. पर धीरे धीरे मैं उन्हें सिखाता समझाता गया और आज ये सुखद स्थिति है कि वह ये सब अश्लील गंदे शब्द खूब मजे से बोलती है और स्वीकार भी करती है कि चुदाई का आनंद इन शब्दों से और बढ़ जाता है.

आखिर स्त्री पुरुष के नंगे जिस्म जो एक दूजे में समाये हुए हों उन स्थितियों को शालीन शब्दों से कब तक बांध के रखा जा सकता है?

“अदिति बेटा, लंड जितना गर्म और कड़क होगा चूत को उतना ही ज्यादा मज़ा देता है.” मैंने बहूरानी का सिर अपने लंड पर दबाते हुए कहा.
“ह्म्म्मम् … सही है पापाजी!” बहू बोली और लंड को मुंह में भर लिया और अपनी जीभ के दबाव से चूसने लगी.

इस तरह मैंने कोई पांच सात मिनट बहूरानी से अपना लंड चुसवाया फिर उसे अपनी गोद में उठा कर बेड पर लिटा दिया और उनकी नाइटी उतार कर उसे पूरी नंगी कर दिया और मैंने अपनी लुंगी भी निकाल कर बेड पर एक तरफ डाल दी.

फिर मैंने बहूरानी का नंगा जिस्म अपनी बांहों में भर लिया और उसके ऊपर लेट गया.
बहू के दोनों अमृत कलश मेरी छाती की नीचे पिसने लगे थे.

मैं उनकी ग्रीवा चूम रहा रहा, कान के नीचे चाट चाट कर चूमे जा रहा था. साथ में उनकी चूचियों की घुंडी चुटकी में दबा कर हल्के दबाव से निचोड़ने लगा था.

“आह पापा जी … फक मी नाउ!” बहूरानी कामुक स्वर में बोली.
पर मैंने उसे चूमना जारी रखा और फिर उनका निचला होंठ चूसना शुरू किया तो उन्होंने बे बेसब्री से मेरे होंठों को चूसना काटना शुरू कर दिया.
मैं भी और उत्तेजित होकर उनके गाल काटने लगा.

“पापाजी, गाल मत काटिए, निशान पड़ जायेंगे. बस अब तो चोदो मुझे, अब नहीं रहा जाता पापा!” बहूरानी ने अपनी कमर ऊपर की ओर उठा कर मुझे अपनी चुदास दर्शाई.

फिर उसने अपने पैर ऊपर की ओर मोड़ लिए और मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत की दरार में रगड़ कर टोपा को छेद पर बैठा दिया.

“अब लंड को भीतर धकेल दो पापा जी और बेरहमी से चोद डालो अपनी बहूरानी को!” अदिति फुसफुसाती हुई बोली.

पर मैंने उनकी बात अनसुनी कर दी और नीचे की ओर खिसक कर उनके पैरों के बीच में आ गया और उनके पांव दायें बाएं फैला दिए और बहू की चूत के गीले होंठ चाटने लगा.

अदिति की चूत से झरती वो विशिष्ट गंध मुझे चुदाई के लिए व्याकुल करने लगी तो मैंने अधीरता से बहू की चूत के होंठ खोल लिए और अपनी दाढ़ी बहू की चूत के खांचे में रगड़ने लगा.

मेरी कुतरी हुई दाढ़ी के नुकीले बाल चूत में चुभने से बहू को एक नयी किस्म की सिहरन, नयी उत्तेजना का अनुभव होने लगा जो उसे बर्दाश्त नहीं हो पा रहा था.
“ऐसे मत करो पापाजी, बाल चुभ रहे हैं.” बहू बोली.

लेकिन मैं लगातार अपनी दाड़ी से उसकी चूत छेड़ता रहा.
“उफ्फ पापाजी … ऐसे मत करिए नहीं तो मैं बिना चुदे ही झड़ जाऊंगी; मुझे तो आपके लंड से चुदते हुए झड़ना ही अच्छा लगता है.” बहूरानी ने अपनी चूत को हथेली से ढकते हुए कहा.

फिर मैंने अपनी दाढ़ी से चूत रगड़ना बंद करके अपनी जीभ चूत की गहराई में उतार दी.
मेरी नाक उनकी चूत की नाक से रगड़ रही थी.

आधे मिनिट बाद ही बहू की चूत खूब रसीली हो उठी और उसने बेकरार होकर मेरे सिर के बाल अपनी मुट्ठी में जकड़ कर सिर को अपनी चूत में दबा लिया.
मैंने भी अपने हाथ ऊपर की तरफ लेजाकर उसकी चूचियां फिर से पकड़ लीं और मसलने लगा और चूत को लपलप करते हुए चाटने लगा.

“उफ्फ … अब और मत सताओ पापा; प्लीज … मेरे भीतर समा जाओ न अब तो!” बहूरानी ने अपनी एड़ियां मेरी पीठ पर ऊपर की ओर रगड़ते हुए कहा जैसे वो अपने पैरों से ही मुझे ऊपर की ओर खींच लेंगी.
फिर उन्होंने मेरे दोनों हाथ पकड़ लिए और खींचती हुई मुझे अपने ऊपर चढ़ाने लगी.

मैं भी उनकी चुदने की अधीरता को भांपते हुए उनके ऊपर छा गया.

बहूरानी ने पुनः मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत की दरार में किसी चुदक्कड़ औरत की तरह बेशर्मी से रगड़ा और टोपे को चूत के ठीये पर रख कर कमर जोर से उछाल दी.

उनका प्रयास सफल रहा और टोपा सटाक से उनकी चूत में घुस गया.

फिर बहूरानी ने अपने पांव मेरी कमर में लपेट कर मुझे अपनी बांहों के घेरे में बांध लिया जैसे उसे डर था कि मैं कहीं लंड को उनकी चूत से बाहर न निकाल लूं.

“अरे अदिति बेटा, मेरे ऊपर से अपने पांव तो हटा तभी तो मैं तुझे चोद पाऊंगा न!” मैंने कहा.
“पहले आप प्रॉमिस करो कि आप अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाल कर मुझे सताओगे तो नहीं?” अदिति ने झिझकते हुए कहा.

“अरे प्रॉमिस है बेटा, पक्का वादा. अब तो अदिति बिटिया की चुदाई और सिर्फ चुदाई होगी बस!” मैंने बहू को आश्वस्त किया.

फिर बहूरानी ने अपने पांव मेरी कमर के ऊपर से हटा लिए और अपनी कमर उठा कर चोदने का संकेत किया.

इस बार मैंने भी रेल सी चला दी और उन्हें फुल स्पीड में चोदने लगा.

बहू ने भी अपने घुटने मोड़ कर ऊपर कर लिए जिससे उनकी चूत और भी अच्छे से उठ गयी.

अब मेरे पैर के पंजे और हथेलियां बिस्तर पर थीं, लंड बहूरानी की चूत में अन्दर बाहर हो रहा था इसके अलावा मेरे शरीर का कोई भी अन्य अंग बहू को टच नहीं कर रहा था.

चूत-लंड का भीषण युद्ध जारी था, चूत से बहते रस के कारण चुदाई की फचफच फचाफाच आवाजें बहू की चूत से आने लगीं थीं.

“आह पापा जी रुको, अब मुझे ऊपर आने दो!” बहूरानी बोली.

मैंने धक्के मारना रोक कर बहू को फिर से बांहों में जकड़ लिया और पलटी मार कर बहूरानी को अपने ऊपर कर लिया, मैंने लंड को चूत में से बाहर नहीं निकलने दिया था.

बहू ने मेरे ऊपर आकर चुदाई की कमान संभाल ली और बे अपने हिसाब से अपनी पसंद के अनुसार चूत को मेरी झांटों पर रगड़ रगड़ कर घिस्से लगाने लगीं, धक्के मारने लगीं.
उसकी उछलती झूलती चूचियां बेहद मस्त नज़ारा पेश कर रहीं थीं.

मैंने उन उछलते कबूतरों को मुट्ठियों में दबोच लिया और अपना सिर उठा कर उन्हें बारी बारी से चूसने लगा.
बहू ने भी धक्के लगाना बंद करके मुझे अपने दूध पिलाने लगी, नीचे उनकी चूत से रिसता दूध भी मेरे लंड को नहलाता हुआ झांटों को भी नहला रहा था.

“अदिति बेटा, एक बात बता तुझे चुदाई में सबसे प्रिय आसन कौन सा लगता है जिसमें तेरी चूत को सबसे बेस्ट मज़ा आता हो?” मैंने पूछा.
“धत्त पापा जी … मुझे नहीं पता. मुझे तो आप के संग सब तरह से खूब मज़ा आ जाता है.” बहूरानी शालीन स्वर में बोली.

“फिर भी, बेटा कोई तो ऐसी चॉइस होगी. कभी कभी दिल करता तो होगा कि वैसे करना है?” मैंने उसे और कुरेदा.
“पापा जी मुझे तो सब तरह से मज़ा आता है आपके साथ; बस आपका ये लंड मेरी चूत में दंगा कर रहा हो इतना काफी है.” बहूरानी इतरा कर बोली.

“अरे फिर भी, तेरी कोई ख़ास पसंद तो होगी वो बता ना?” मैंने जिद सी की.
“पापा जी, मुझे रिवर्स काऊगर्ल पोज़ में करने से बहुत अच्छा लगता है.” वो थोड़ी सकुचाती शर्माती हुई बोली.

“बेटा ये रिवर्स काउगर्ल पोज़ क्या होता है, ठीक से समझा कर बता ना? मैंने इस आसन का नाम तो सुना है पर कभी किया नहीं!” मैंने पूछा.

“पापा जी इस आसन में आपको कुछ नहीं करना है, बस लेटे रहना है. बाकी काम आपके साथी का है.” वो सिर झुका कर बोली.

“अरे बेटा, पहेलियां मत बुझा … अभी तो तू ही मेरी संगिनी है, चल करके दिखा कैसे करती है!” मैंने उसका दायां चूचा दबा कर कहा.
“चलो ठीक है पापा जी. आप सीधे लेट जाइए पहले. फिर मैं करती हूं.” बहूरानी मेरा लंड हिला कर बोली.

उसने मुझे बेड पर लिटा दिया और फिर लंड को कुछ देर पूरी तन्मयता से चाट चाट कर चूसा जिससे मेरा लंड तमतमा कर छत की ओर मुण्डी उठा कर खड़ा हो गया.

फिर बहूरानी मेरे लंड पर अपनी चूत रख कर बैठती गई और पूर लंड लील गई फिर वो मुझे देख कर मुस्कुराई और फिर अपनी एड़ियों के सहारे बेड पर उल्टा घूम गयी जिससे उसकी पीठ मेरी तरफ हो गयी, लंड अभी भी उसकी चूत में धंसा हुआ था.

फिर उसने अपने दोनों हाथ मेरे पैरों के बीच बेड पर टिका दिए और कमर को उठा उठा कर आगे पीछे करते हुए चुदाई करने लगी.

वाओ … क्या मस्त नज़ारा मेरे सामने था!
बहूरानी जब अपनी कमर आगे की ओर करतीं तो मेरा लंड उनकी चूत से बाहर तक निकल आता फिर जब वो कमर को वापिस लंड पर धकेलतीं तो लंड फक्क से चूत में गुम हो जाता.

ऐसे लंड का बारबार अन्दर बाहर होना देखकर बहुत अच्छा लग रहा था और मज़ा भी आ रहा था.

फिर बहूरानी ने चूत सिकोड़ कर लंड को चांप लिया और अपनी स्पीड बढ़ा दी.
अब उसकी चूत से सरसराहट जैसी चपर चपर चुदाई की ध्वनि आने लगी थी.
अदिति की चूत ने इतना मज़ा मुझे पहले कभी नहीं दिया था.

ऐसे ही कुछ देर खेलने के बाद बहूरानी ने लंड निकाल कर अपनी पैंटी से पौंछ दिया और फिर पूरी पैंटी अपनी चूत में घुसा ली और चूत को अन्दर से भी सुखा लिया.
पैंटी को वापिस बाहर निकाल कर के फिर से उसी रिवर्स काउगर्ल पोजीशन में लंड को घुसेड़ने लगी.

इस बार चूत में गीलापन नाम मात्र का था तो लंड अन्दर जाते टाइम मुझे हल्का दर्द महसूस हुआ और बहूरानी की चूत की मांसपेशियां भी खिंच गयी जिससे उनके मुंह से एक हल्की सी आह निकल गयी.
पर वो धीरे धीरे मैनेज करते हुए पूरा लंड घुसा ही ले गयी.

फिर उन्होंने चूत को भींच लिया और कमर आगे पीछे करने लगी. इस बार मेरे लंड पर उनकी चूत की ग्रिप बड़ी जबरदस्त थी.
लगता था बहूरानी अपनी चूत में लंड फंसा कर खींच रही हो.

करीब दो ही मिनट बाद उनकी चूत फिर से दलदली सी हो गयी और उनके मूवमेंट्स एकदम तेज हो गए.
मैं समझ गया कि बहूरानी अब झड़ने ही वाली है.

अगले आठ दस धक्के उन्होंने और लगाए और औंधी ही मेरे पैरों के बीच लेट कर झड़ने लगीं इधर मेरी छूट भी हो गयी और बहू की चूत से रज और वीर्य कर मिश्रण बह निकला.

“अदिति बेटा, तेरा ये रिवर्स काउगर्ल आसन तो मस्त है, जब तू लंड को चूत से जकड़ कर आगे पीछे होती है तो क्या मस्त आनंद आता है.” मैंने बहू को चूमते हुए कहा.

“हम्म मम्म … ठीक है पापाजी!” बहूरानी संक्षिप्त स्वर में बोली.

“बेटा, अब क्या मूड है तुम्हारा?” मैंने यूं ही पूछ लिया.
“पापाजी, वन्स इज नॉट एनफ …यू नो, फिर पता नहीं कब ये समय अपने जीवन में लौट कर आये!” बहूरानी मेरा चेहरा अपने दोनों हाथों में लेकर बोली.

“हां बेटा, तू सही कह रही है; आज की रात सोने के लिए नहीं है …इन फैक्ट इट इज नेवर एनफ!” मैंने उसे पुनः अपने से लगा कर कहा.

इसके बाद सारी रात आंखों ही आंखों में कट गयी. कितनी बार फिर फिर से चुदाई हुई कुछ स्मरण नहीं, बहूरानी बारम्बार झड़ती रही और मेरी लुंगी से अपनी बहती चूत बार बार पौंछती रही.
कुछ याद नहीं.

दिन चढ़े जब नींद खुली तो देखा कि बहूरानी खूब गहरी नींद में है और उनके मुख पर एक मनमोहक मुस्कान तैर रही है.

और मेरी लुंगी पूरी गीली होकर उनकी जांघों के बीच दबी हुई है.

विदाई की बेला आन पहुंची थी. आगरा स्टेशन पर हम समय से पहले ही पहुंच गए थे.

बहूरानी को दिल्ली ले जाने वाली ट्रेन भी अपने समय से दो मिनट लेट आन पहुंची.

बहूरानी का बैग मैंने उनकी कोच में चढ़ा दिया और उसे उसकी बर्थ पर बैठा दिया.

मैंने तो बहू से बहुत कहा कि मैं भी दिल्ली तक चलता हूं वहां से एअरपोर्ट तक सी ऑफ करके मैं भी किसी फ्लाइट से नागपुर लौट लूंगा.
पर वो मानी नहीं, कहने लगीं- पापाजी, आप बेकार में परेशान न हो; मैं चली जाऊंगी.

ट्रेन चलते ही मैंने बहू को हैप्पी जर्नी बोला और उतर गया.

अन्तर्वासना के प्रिय पाठको; यह फादर इन ला सेक्स कहानी बस यहीं तक.
आप अपने कमेंट्स, अपनी प्रतिक्रिया मेरी नीचे लिखी ईमेल आईडी पर भेज सकते हैं.

और हां आप सब पाठकों से निवेदन है कि फादर इन ला सेक्स कहानी के सम्बन्ध में अपने कमेंट्स, सुझाव इत्यादि शालीन भाषा में ही लिखें; अदिति बहूरानी के बारे में कोई भी निकृष्ट बात न लिखें.
धन्यवाद
पं सुकांत शर्मा
[email protected]