सौतेली मॉम की चूत में कुंवारे बेटे का मूसल लंड-1

हॉट स्टेप मदर सेक्स स्टोरी मेरे पापा की दूसरी पत्नी की चुदाई की है. मेरा लंड बहुत बड़ा है. एक बार मॉम मेरे बाइक पर थी, उनका हाथ मेरे लंड पर पड़ गया.

दोस्तो, मेरा नाम राजेश है. मैं उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूँ.

यह मेरी पहली सच्ची सेक्स कहानी है. Hot Step Mother Sex Kahani मेरी और मेरी सौतली मम्मी के बीच की है.

मेरी सौतेली मम्मी का नाम सुप्रिया है. वो देखने में बहुत ही खूबसूरत हैं. उनका बदन एकदम टाईट कसा हुआ और स्लिम है.

मम्मी एकदम दूध के जैसी गोरी हैं. उनकी उम्र तो ज्यादा है पर काया 30-32 वर्ष की लौंडिया जैसी है.
मेरी सगी मम्मी की शादी के ठीक एक साल बाद मैं पैदा हुआ था. लेकिन मेरे जन्म के बाद मेरी माँ की मृत्यु हो गयी थी. इसके बाद पापा की दोबारा शादी सुप्रिया से हो गयी थी.

मैं आपको बता दूँ कि मेरे घर में हम 4 लोगों की फैमिली है, जिसमें मैं सबसे बड़ा हूँ. एक छोटी बहन है और मम्मी पापा हैं.

मैंने पहले कभी भी अपनी स्टेप मॉम के बारे में गलत नहीं सोचा था लेकिन मेरे साथ एक ऐसी घटना घटी कि मैं अपनी मम्मी को चोदने के बारे में ही सोचने लगा था.

हुआ यूं कि मुझे और मेरी मम्मी को मामा के घर जाना था.
मैं जाना नहीं चाहता था.

लेकिन मेरे पापा ने बोला- बेटा अपनी मम्मी को अपने मामा के घर छोड़ आओ. फिर चाहे वापस आ जाना.

कुछ सोचने के बाद मैं तैयार हो गया क्योंकि मुझे भी मामा के घर गए हुए ज्यादा दिन हो गए थे.
मैंने सोचा कि एकाध दो दिन रह कर मैं वापस आ जाऊंगा.

मैं मम्मी को अपनी बाइक पर बैठा कर चल दिया.

उस टाइम बारिश का मौसम था.
जब मैं मम्मी को लेकर जा रहा था तो हल्की हल्की बारिश भी हो रही थी.

  मेरी प्यारी मौसी की करतूत

मामा के घर पहुंचते पहुंचते हम दोनों ज्यादातर भीग गए थे और सड़क पर कीचड़ हो गया था.

एक मोड़ ऐसा आया कि फिसलन के कारण मेरी गाड़ी थोड़ी सी असंतुलित हो गयी.

इससे मेरी मम्मी एकदम से डर गईं और उन्होंने तुरंत मेरी कमर के दाहिने हिस्से के पास हाथ रख दिया.

मैंने संतुलन बनाया और बाइक को गिरने से बचाते हुए सही से चलने लगा.

अब बाइक सही से चलने लगी थी लेकिन मेरी मम्मी ने अपना हाथ मेरी कमर से नहीं हटाया. बल्कि अब तो उनका हाथ मेरे लंड को छूने लगा था.
इससे मेरा लंड अब थोड़ा थोड़ा खड़ा होने लगा.

मैं मम्मी से बोल रहा था कि मम्मी थोड़ा सही से बैठो.
मम्मी सही से बैठ जाती थीं लेकिन फिर डर से बार बार मुझे पकड़ ले रही थीं.

इसके चलते मेरा लंड एकदम खड़ा हो गया.

मैं बता दूँ कि मेरा लंड बहुत मोटा और लम्बा है. मेरी हाईट 6.2 इंच है.

मेरा लंड खड़ा होने के कारण मेरी पैंट में दाहिनी तरफ ही हो गया था. इससे मेरी मम्मी को शायद लंड महसूस होने लगा था.

उनका हाथ लंड से टच हो रहा था तो बाइक चलाते समय मेरा ध्यान कुछ भटकने लगा था.

आगे जब कुछ दूरी पर एक ब्रेकर आया, तो मम्मी की बैठक कुछ गड़बड़ हो गई.
उन्होंने संभल कर बैठना चाहा, तो जैसे ही वो सीधी हुईं कि मेरा पूरा लंड उनके हाथों में आ गया.

मम्मी के हाथ में लंड आते ही मेरे अन्दर की वासना एकदम से जग गयी.
मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा. मेरा जी चाहने लगा था कि अपनी मम्मी को यहीं इसी बारिश में भीगते हुए कहीं किनारे रोक कर जी भरके चोद लूं.
लेकिन मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी.

मम्मी मुझसे पूछने लगीं- बेटा ये जेब में क्या रखे हो?
मैं कुछ नहीं बोला मगर मेरे दिमाग में सिर्फ मम्मी को कैसे चोदूं कि ये आइडिया चलने लगा था.

कुछ पल बाद ही मेरे दिमाग में आया कि क्यों न पेशाब के बहाने अपना लंड अपनी मम्मी को दिखा दूँ.

हुआ भी ऐसा ही.

मैं खाली और एकांत जगह ढूँढने लगा. आगे कुछ आगे जाने में अमरूद और केले के बहुत बड़े बड़े खेत दिखे.

जिस रास्ते से हम जा रहे थे, वो उन खेतों के बीचों बीच से जाती थी. वो माफिक जगह देखते ही मेरा दिल धड़कने के साथ खुश हो गया. मैं सोच रहा था कि मम्मी को अपना लंड दिखाकर उन्हें चुदने के लिए गर्मा दूँगा.

आगे बागवानी के एक सुनसान से मोड़ पर ले जाकर मैंने बाइक को रोक दिया.

मां मुझसे पूछने लगीं- क्या हुआ … गाड़ी क्यों रोक दी?
मैंने मम्मी से कहा- मुझे पेशाब लगी है.

जब मैं बाईक से उतरा तो मम्मी को देख कर सिहर उठा. उनके शरीर से साड़ी से पूरी चिपक चुकी थी. उनके मम्मों के आकार एकदम साफ साफ दिख रहे थे.

किसी तरह मैंने अपने आपको कंट्रोल किया और पेशाब करने के लिए उसी दिशा में घूम गया, जिधर मम्मी थीं.

मेरी कोशिश थी कि वो आसानी से मेरे लंड को देख सकें.
मेरी मम्मी ने अपना मुँह फेर लिया था.
पर मैंने भी मन बना लिया था कि आज मम्मी को लंड दिखा कर ही रहूँगा.

मेरा लंड एकदम टाइट था. लंड इतना सख्त ही गया था कि मैं जब उसे पैंट से बाहर निकाल रहा था तो मुझे बड़ी दिक्कत हो रही थी.

कैसे भी करके मैंने लंड बाहर निकाला.
अब साला लंड से पेशाब नहीं निकल रही थी. चूंकि लंड खड़ा होने के कारण पेशाब उतरने को राजी नहीं थी.

जब सामान्य से कुछ ज्यादा समय हो गया, तो मम्मी मेरी सोचने लगीं कि अभी तक मेरा बेटा कर क्या रहा है.

मैं तो अपना लंड मम्मी को दिखाना चाहता था इसी लिए और ज्यादा टाइम लगा रहा था.

तभी मम्मी ने मुड़कर देखा तो वो घबरा गईं. क्योंकि मैं उन्हीं की तरफ देख कर अपना लंड हिला रहा था.
मेरी मम्मी के दिमाग में मेरा लंड छप गया, वो तिरछी नजरों से मेरे लंड को बार बार देख रही थीं.

मैं मूतना खत्म करके वापस आ गया.

मम्मी को बाइक पर बिठाया और चलने लगा.
रास्ते में मम्मी कुछ नहीं बोल रही थीं.

हम दोनों मामा के घर पहुंच गए.
मामा के घर के सभी जन हम लोगों को देखकर बहुत खुश हुए.

मम्मी अन्दर चली गईं और एक रूम के अन्दर कपड़ा चेंज करने लगीं.
मैं भी कपड़े बदल कर मम्मी को चोदने के बारे में सोच रहा था.

मम्मी का भी नजरिया कुछ अब बदला बदला सा लग रहा था.

कुछ देर बाद मैं अपने कुछ पुराने दोस्तों के साथ बाहर घूमने चला गया.

शाम को जब घूम कर वापस आया तो देखा मम्मी सोई हुई थीं.

मैंने खाना खाया और सोने के लिए जगह ढूंढने लगा.
मामा बोले- राजेश, तुम दीदी यानि अपनी मम्मी के पास सो जाओ.

मामा का घर दो कमरे का है, तो एक में मामा मामी सो गए. आगे के बरामदे में नाना नानी और एक रूम में मम्मी और मैं.

जब मैं मम्मी के पास सोने आया तो मम्मी कुछ असहज सा महसूस कर रही थीं लेकिन शायद अन्दर से वो भी खुश थीं कि मेरे बेटे का लंड इतना बड़ा है.

मैं भी उन्हें चोदने के बारे में ही सोच रहा था.

उस पूरी रात मैं सोया ही नहीं, सिर्फ मम्मी की जवानी को देख देख कर ही लंड सहलाता रहा.

फिर मैंने सोचा क्यों न कोई ऐसा आइडिया लगाया जाए जिससे मम्मी मुझसे चुदने के लिए राजी हो जाएं.

दूसरे दिन जब मम्मी नहाकर रूम में कपड़े पहन रही थीं, तब मैं अचानक से वहां पहुंच गया.
मेरी मम्मी एकदम नंगी थीं.

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उनके नमकीन बदन को मैंने देखा, तो देखता ही रह गया.
उनके बूब्स मानो अभी कोई कुंवारी लड़की के जैसे थे.
एकदम टाइट मम्मे थे.

मां ने मुझे देखते ही झट से कपड़े उठाकर अपने आपको ढक लिया.
वो एकदम से लजा गयी थीं.

मैं रूम से बाहर आ गया और बाथरूम में जाकर मम्मी बारे में सोचकर मुठ मारने लगा.

उधर मैं भी नंगा होकर ही मुठ मार रहा था, इतने में मम्मी आ गईं.
मैंने भूल से दरवाजे की कुंडी नहीं लगा पाई थी.
मेरी मम्मी ने फिर से मेरे लंड का दर्शन कर लिया और वो मुझे लंड की मुठ मारते हुए देखकर सिहरने लगीं.

मैं भी मम्मी को देखकर एकदम से डर गया कि मेरी मम्मी इसके बारे में पापा से बोल न दें.

मैं बाहर घूमने चला गया.
उधर मैंने एक चौपाल पर अपनी मम्मी के बारे में सुना.
वो सभी यही सब बातें कर रहे कि एक औरत आई है, बहुत ही हॉट फिगर वाली खूबसूरत माल है. साली मिल जाए, तो रगड़ दें.

वो सभी मिल कर मेरी मम्मी को चोदने के बारे में बोल रहे थे.
उन्हें ये नहीं पता था कि वो जिसकी बात कर रहे हैं, वो मेरी मम्मी है.

मैंने उनकी बातें सुन कर शांत ही रहना उचित समझा.

जब मैं शाम को घर वापस लौटा तो पता चला मामा मामी गाजियाबाद चले गए हैं. नानी भी उनके साथ ही चली गयी हैं.
घर में सिर्फ मम्मी और नाना जी थे.

मैंने मम्मी से पूछा था, तो उन्होंने सभी के जाने के बारे में मुझे बताया.
ये सुनकर मेरे मन में लड्डू फूटने लगा.

रात में नाना जी खाना खाकर बाहर सोने चले गए.
मैं रूम में सारे कपड़े उतारकर मम्मी के आने का इंतजार करने लगा.

लेकिन मेरी मम्मी दूसरे रूम यानि मामा मामी के रूम में सोने चली गईं.
मैं फिर से मुठ मार कर सो गया.

अगले दिन घर में मम्मी अपनी किसी सहेली से बात कर रही थीं.
उनकी सहेली मुझे देखकर बोलीं- कैसे हो बेटा … क्या हाल हैं?
मैं बोला- बढ़िया हैं आंटी.

फिर उन्होंने मुझसे कहा- कभी मेरे भी घर भी आओ … घूमकर चले आना.
मैं बोला- ठीक है आंटी. शाम को ही आता हूँ.

उन्होंने हामी भर दी.

शाम को मैं उनके घर गया. मैंने आंटी के घर की घंटी बजाई.

जब आंटी ने दरवाजा खोला तो मुझे देख कर बहुत खुश हुईं.
मैंने गौर किया कि वो मेरे लंड की तरफ ही बार बार देख रही थीं.
शायद मम्मी ने आंटी को मेरे बारे में सारी बातें बात दी थीं.

आंटी ने चाय पानी लाकर दिया.

फिर उन्होंने मुझसे पूछा- बेटा तुम्हें कोई बीमारी है क्या?
मैं बोला- नहीं तो आंटी, ऐसे क्यों पूछ रही हैं आप!

आंटी बोलीं- मुझे कुछ कुछ पता है.
मैं सोच में पड़ गया कि ये कहना क्या चाहती हैं.

फिर वो बिंदास बोलीं- तुम्हारा लंड इतना बड़ा और मोटा कैसे है?
मैं शर्मा गया.

इतने में उन्होंने मेरा लंड पकड़ लिया.
उनके पकड़ते ही मेरा लंड खड़ा हो गया.

वो बोलीं- दिखाओ, मैं देखती हूं क्या दिक्कत है.
इतना कहकर आंटी ने मेरी पैंट की जिप खोल दी और अपना हाथ अन्दर डालकर मेरे लंड को बाहर निकाल लिया.

वो लंड देख कर जैसे पागल हो गईं.
उनके मुँह से निकल गया- हे भगवान इतना बड़ा … ये कैसे हुआ?
मैंने कहा- मुझे नहीं पता है आंटी.

उसके बाद आंटी बोलीं- तुम्हारी मम्मी ने मुझे बताया था कि शायद तुम्हें कोई बीमारी है, जो तुम्हारा इतना मोटा और बड़ा लंड है.
इतनी देर में मैं भी अब एकदम जोश में आ गया था. मेरा मन कर रहा था कि इन्हें ही चोद दूँ.

तभी आंटी ने घुटने के बल बैठ कर मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया.

मैं तुरंत उनसे अलग हो गया.
मैंने कहा- आप ये क्या कर रही हैं?
वो बोलीं- क्या हुआ, प्लीज़ मेरी प्यास बुझा दो. तुम्हारा लंड देख कर मुझसे एक भी सेकेंड रहा नहीं जाता.

मैं आंटी से बोला- आंटी, मैं एक बात पूछूं, मेरी मम्मी आपसे क्या बोल रही थीं?
तो वो बोलीं- तुम्हारी मम्मी ने जब से तुम्हारा लंड देखा है, तब से उसके दिमाग में तुम्हारे ही लंड चुदने की बात चल रही है. लेकिन वो बोल रही हैं कि राजेश मेरा बेटा है, उसके साथ मैं ये काम नहीं करूंगी. मैंने उसे समझाया कि अगर बिना किसी के जाने चुदवा लो, तो कोई दिक्कत नहीं है.

मैंने आशा भरी नजरों से आंटी की तरफ देखा कि मेरी मम्मी ने आंटी से मुझसे चुदने के लिए क्या कहा.
आंटी बोलीं- तेरी मम्मी ने कहा कि नहीं, वो मेरा बेटा है, हां मेरे बेटे के लंड जैसा अगर कोई मिल जाएगा, तो वो चुदवाने के लिए जरूर सोचेगी.

ये सब बातें सुन कर मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा था.

मैं आंटी से बोला- आप जो कहोगी, मैं वो सब करूंगा. आप सिर्फ मेरा एक काम करवा दो.
आंटी बोलीं- क्या बात है बेटा, बिना डरे बोलो.

मैं बोला- मेरी मम्मी को मुझसे चुदने को तैयार करवा दो.
इस पर आंटी हंसती हुई बोलीं- वो चुदाना चाहती तो है, लेकिन तुमसे नहीं … सिर्फ वो सिर्फ तुम्हारे लंड जैसा लंड चाहती है.

मैंने आंटी को समझाया कि आप मेरी मम्मी को मुझसे चुदने के लिए तैयार करो क्योंकि मैंने अभी तक किसी को चोदा नहीं है. मेरी मम्मी के जैसी मस्त माल कोई नहीं है. उनके जैसा सुडौल सुंदर और खूबसूरत लड़की या औरत मुझे अबतक नहीं दिखी. मैं सबसे पहले अपनी मम्मी को अपनाऊंगा, फिर किसी और के बारे में सोचूंगा. आप मेरी मम्मी को राजी कीजिए.

आंटी ने कहा- ठीक है, मैं कोशिश करती हूं. मगर पहले मुझे तो चोद दो.
मैंने कहा- आंटी, मैं अभी तक कुंवारा हूँ. मैं पहले अपनी मम्मी को चोदना चाहता हूँ … फिर किसी और के साथ सेक्स करूंगा.

आंटी ने ओके कह दिया.

मैं आंटी का नम्बर लेकर और मम्मी को मेरे लंड से चुदने की बात बोलकर अपने घर आ गया.

मैंने हर दो घंटे में आंटी से यही पूछा कि मेरी मम्मी मानी या नहीं.
मगर जब कुछ भी मामला सैट नहीं हुआ तो मैं मामा के घर से अपने घर वापस आ गया.

तीन दिन बाद आंटी का फ़ोन आया.
मैंने फ़ोन उठाया और पूछा- क्या हुआ आंटी, मेरी मम्मी मानी या नहीं?
वो बोलीं- नहीं, ऐसा वो नहीं कर सकती.

मैंने बहुत सोचने के बाद आंटी को बताया कि आप मेरी मम्मी से बोलो कि एक लड़का है, जिसका लंड ठीक राजेश के जैसा है. मैं एक बार उससे चुद चुकी हूं, लेकिन वो अपनी पहचान नहीं बताना चाहता. वो मेरे सिवाए किसी से अपनी पहचान गुप्त रखना चाहता है. तो क्या तुम उससे चुदवाना चाहोगी.

आंटी ने ओके बोल कर फोन कट कर दिया.

रात को 8 बजे मेरे पास फ़ोन आया.

आंटी बोलीं- तुम्हारी मम्मी चुदवाने को राजी हो गई हैं, लेकिन वो पूछ रही थीं कि कैसे क्या करना होगा और उसने कहा है कि उसका लड़का यानि तुम घर पर हो, तो उसको पता तो नहीं न चल जाएगा. उस लड़के से पूछ लेना कि वो किसी को बताएगा तो नहीं.

फिर मैंने आंटी को आइडिया दिया कि आप कहीं किसी होटल में मेरी मम्मी को लेकर आ जाओ. मम्मी से एक बात और कह देना कि चुदाई के समय दोनों की आँखों पर पट्टी रहेगी ताकि एक दूसरे को ना देख पायें और किसी को कुछ ना बता पायें.

आंटी ने मम्मी से यही बोला.

आंटी की बातें सुनकर मम्मी राजी हो गईं.

मैं बहुत खुश था कि मम्मी को चोदने का टाइम आ गया.

इस सेक्स कहानी के अगले भाग में मैं आपको स्टेप मदर सेक्स लिखूंगा. आप मुझे मेल करें.
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