Mamu Ne Mehndi Ki Raat Bhanji Riya Ki Seal Todi – Super Hot Incest Sex Story
सेक्सी नॉवेल पढ़ते बात बढ़ी, लंड निकला, चोली खुली, गुलाबी चूत पर उंगली फिरी और फिर 7 इंच का मोटा लंड वर्जिन चूत में उतर गया और भांजी रिया की सील टूट गयी। मेहंदी की रात, जब सब सो रहे थे, 22 साल का मामू और 18 साल की मौसेरी भांजी रिया एक ही कमरे में अकेले। पहली चुदाई में रस, कराहटें, दो बार झड़ना और पूरी रात तीन बार चुदाई। अब भी शादी के बाद भांजी चुपके से मामू से चुदवाती है और कहती है – ये बेटी तुम्हारी ही है। सच्ची-सी लगने वाली सबसे गरम देसी इंसेस्ट कहानी।
यह कहानी उन दिनों की है जब मेरे बड़े मौसेरे भाई की शादी चल रही थी। उनका घर छोटा था, इसलिए सारी रस्में हमारे दिल्ली वाले घर में ही हो रही थीं। हमारा घर करीब 1000 स्क्वेयर फीट का था, लेकिन शादी के दिनों में वहां 40-60 लोग आसानी से ठहर सकते थे। पूरा घर हंसी-ठहाकों, संगीत और मिठाइयों की महक से भरा रहता था।
मेरी भांजी रिया—मेरे मौसेरे भाई की बेटी—उस वक्त 18 साल की थी। उसकी जवानी ताज़ा-ताज़ा खिल रही थी। गोरी, मुलायम त्वचा, भरे हुए होंठ, गहरी आंखें और वो किलकारी जैसी हंसी। मैं 22 का था, कॉलेज खत्म करके नौकरी की तलाश में। रोहन, उसका छोटा भाई, सिर्फ 14 का था—बस गेम खेलता रहता। हम तीनों एक ही कमरे में सो रहे थे। कमरा बड़ा था, दो बेड और एक सोफा था।
मेहंदी की रात थी। घर में म्यूजिक बज रहा था, लड़कियां नाच रही थीं, और हंसी-मजाक का माहौल था। रिया ने हरा लहंगा-चोली पहना था—गहरा पिस्ता हरा, जिसमें गोल्डन वर्क था। चोली इतनी टाइट कि उसके भरे हुए स्तन ऊपर उठे हुए थे, गहरी दरार साफ दिख रही थी। लहंगे की घाघरा घुटनों से नीचे तक लहरा रहा था, लेकिन जब वो चलती तो उसकी पिंडलियां और टांगों की चमक झलक जाती। उसके लंबे काले बाल खुले थे, हल्की-हल्की लहराते हुए। आंखों में काजल, माथे पर बिंदी, और होंठों पर गुलाबी लिपस्टिक।
वो इतनी आकर्षक लग रही थी कि मेरी नजरें बार-बार उस पर टिक जातीं। वो नाचते वक्त अपनी कमर लहराती, हाथ ऊपर करके घूमती—उसकी कमर की मटक और स्तनों की उछाल देखकर मेरा मन बेकाबू हो जाता।
रस्में रात के 2 बजे खत्म हुईं। लोग थककर सोने लगे। मैं कमरे में आया। रोहन पहले से ही बेड पर था, गहरी नींद में। मैं अपना बेड पर लेट गया, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। मन में रिया का चेहरा, उसकी मुस्कान, उसकी कमर की लचक घूम रही थी। मैंने फोन निकाला और एक पुरानी सेक्सी हिंदी नवेल खोल ली। कहानी में भाई-बहन की गरमागरम चुदाई का सीन था। पढ़ते-पढ़ते मेरा लंड सख्त हो गया। मैंने शॉर्ट्स के ऊपर से ही उसे सहलाया, धीरे-धीरे।
तभी दरवाजा खुला। रिया अंदर आई। उसने दरवाजा अंदर से बंद किया और चुपके से मुस्कुराई। “मामू… आप सो नहीं रहे?”
“नींद नहीं आ रही, बेटा। तू क्यों आई?”
वो मेरे पास आई, बेड के किनारे पर बैठ गई। उसकी परफ्यूम की महक मेरे नाक में घुसी। “मुझे भी नींद नहीं आ रही। सब सो गए, मैं सोच रही थी… आपसे बात कर लूं।”
उसकी आंखें चमक रही थीं। मैंने देखा—उसकी सांसें थोड़ी तेज थीं। मैंने हल्के से पूछा, “क्या बात करनी है?”
वो शरमाई, फिर बोली, “वो… आज मेहंदी लगी है ना… हाथों में लगी मेहंदी बहुत गहरी है। लोग कहते हैं गहरी मेहंदी मतलब… पति बहुत प्यार करेगा। लेकिन मुझे तो… पता नहीं कैसा होगा वो सब।”
मैंने उसकी आंखों में देखा। उसमें मासूमियत थी, लेकिन साथ ही एक अजीब सी चाहत भी। मैंने धीरे से कहा, “तुझे सच में जानना है… वो सब कैसा होता है?”
वो होंठ चबाकर बोली, “हां मामू… आप तो बड़े हो… आप जानते होंगे ना?”
मैंने मुस्कुराकर कहा, “जानता हूं। लेकिन सुनकर नहीं, देखकर ही समझ आएगा।”
उसने सर झुकाया, फिर धीरे से बोली, “तो… दिखाओ ना।”
मेरा दिल जोर से धड़का। मैंने धीरे से अपनी शॉर्ट्स नीचे की। मेरा 7 इंच का लंड पहले से ही पूरा तना हुआ था—मोटा, नीला सुपारा चमक रहा था। रिया की आंखें फैल गईं। वो उसे घूरती रही, फिर बोली, “मामू… ये… इतना बड़ा… और सख्त कैसे?”
“जब कोई लड़की इतनी हॉट लगे… तब ये ऐसे ही हो जाता है। तेरे लिए हुआ है ये।”
वो शरमाकर मुस्कुराई। मैंने उसका हाथ पकड़ा और धीरे से अपने लंड पर रख दिया। उसकी नरम हथेली लगते ही मैं सिहर उठा। वो धीरे-धीरे उसे सहलाने लगी, जैसे पहली बार छू रही हो। “गर्म है… और सख्त… अंदर से कितना मोटा लग रहा है।”
मैंने उसकी चोली के हुक खोले। उसके स्तन बाहर आए—मध्यम आकार के, लेकिन सख्त और उभरे हुए। गुलाबी निप्पल्स तने हुए। मैंने एक को मुंह में लिया, जीभ से चाटा। रिया ने “आह्ह…” की आवाज निकाली, उसकी पीठ झुक गई। मैंने दूसरे को मसला, निप्पल को अंगूठे से रगड़ा। वो कराह रही थी—“मामू… कितना अच्छा लग रहा है… और करो…”
मैंने उसका लहंगा ऊपर किया। उसकी पैंटी गीली हो चुकी थी। मैंने उसे उतारा। उसकी चूत गुलाबी, हल्के मुलायम बालों से ढकी, और पहले से ही रस टपक रहा था। मैंने उंगली से उसके क्लिट को छुआ। वो सिहर उठी। “उम्म्म… वहां… हां…”
मैंने धीरे से एक उंगली अंदर डाली। वो बहुत टाइट थी। उसकी दीवारें मेरी उंगली को जकड़ रही थीं। मैंने दूसरी उंगली डाली और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। रिया की कमर उठ रही थी। “मामू… और गहराई… आह्ह… बहुत मजे आ रहे हैं…”
मैंने बेबी ऑयल लिया, उसकी चूत पर अच्छे से लगाया। अपना लंड भी चिकना किया। फिर उसे कार्पेट पर लिटाया। उसकी टांगें फैलाईं। उसकी चूत खुलकर सामने थी—गीली, लाल, तैयार। मैंने लंड का सुपारा उसके छेद पर रखा। धीरे से दबाया। सुपारा अंदर गया। रिया ने आंखें बंद कीं, होंठ काटे। “आह्ह… दर्द हो रहा है… लेकिन रुकना मत…”
मैंने और दबाया। आधा लंड अंदर। उसकी चूत फट रही थी। थोड़ा रस निकला—पहली बार की निशानी। लेकिन उसकी आंखों में दर्द कम, मज़ा ज्यादा था। मैंने एक जोरदार झटका दिया—पूरा लंड अंदर। रिया चीखी—“आआह्ह्ह… मामू… पूरा अंदर… कितना भरा हुआ लग रहा है…”
मैंने धीरे-धीरे शुरू किया। हर थ्रस्ट के साथ वो कराहती—“और तेज… मामू… चोदो मुझे… अपनी भांजी को चोदो…” मैंने स्पीड बढ़ाई। उसके स्तनों को मसलता रहा, होंठ चूमता रहा। उसकी जीभ मेरी जीभ से लिपटी हुई थी। 10-15 मिनट बाद उसकी चूत सिकुड़ने लगी। वो पहली बार झड़ी—“आआह्ह्ह… मैं जा रही हूं… मामू…” उसका रस मेरे लंड पर बहा।
मैं रुका नहीं। और जोर से चोदा। दूसरी बार वो और तेज झड़ी—कार्पेट पर पानी जैसा फैल गया। मैं भी झड़ने वाला था। लंड बाहर निकाला और उसके पेट, स्तनों पर गाढ़ा, गरम माल छोड़ दिया। वो पसीने और माल से चिपचिपी हो गई थी।
हम कुछ देर लेटे रहे। फिर मैंने उसे गोद में उठाया, बाथरूम ले गया। गर्म पानी से दोनों ने एक-दूसरे को धोया। मैंने उसकी चूत साफ की, उसने मेरा लंड। वापस आए तो रोहन सोफे पर शिफ्ट कर दिया। रिया मेरी बाहों में सो गई।
उस रात मैंने उसे दो बार और चोदा—एक बार साइड से, एक बार वो ऊपर थी। धीरे-धीरे, प्यार से। हर बार वो ज्यादा मजे ले रही थी।
आज रिया की शादी हो चुकी है। मुंबई में सेटल है। एक बेटी है उसकी। लेकिन हर 6-8 महीने में वो दिल्ली आती है। मौका मिलते ही मेरे पास आकर कहती है—“मामू जान… मुझे फिर वही चाहिए… तुम्हारा लंड ही मुझे असली सुकून देता है। मेरे पति का तो छोटा है, जल्दी थक जाता है। मैं तो रात-रात भर तुम्हें याद करके उंगली करती हूं। लेकिन असली मज़ा तो तुम्हारे साथ ही आता है।”
और हम फिर वही करते हैं—चुपके से, गरमागरम, बिना किसी गिल्ट के। क्योंकि वो पल सिर्फ हमारा है।
बस, यही है मेरी वो रात… और वो रिश्ता जो आज भी जलता रहता है।
मेहंदी की रात में खुली जवानी की गांठ,
मामू के लंड से भांजी की चूत हुई सींची सारी रात।
रस भी बहा, पानी भी छूटा, सिहर उठी वो बार-बार,
अब भी आती है चुपके से, कहती है — बस तेरा ही है अधिकार।