कॉलेज में पहला पहला प्यार- 3

फर्स्ट सेक्स इरोटिक हिंदी स्टोरी मेरी क्लासमेट मेरी गर्लफ्रेंड के साथ पहली बार चुदाई की है. हम दोनों एक दूसरे को बहुत प्यार करते थे. जब हमें दो जिस्म एक जान होने का मौक़ा मिला तो …

कहानी के पिछले भाग
प्यार का इज़हार और पहला चुम्बन
में आपने पढ़ा कि मैं अपनी क्लासमेट आकांक्षा से अपने प्यार का इज़हार कर चुका था. उसने भी मुझे स्वीकार कर लिया था.

अब आगे First Sex Erotic Hindi Story:

आकांक्षा– सुनो, मेरे पापा भी एक हफ्ते के लिए बिजनेस के सिलसिले में बाहर जा रहे हैं. तो क्या तुम मेरे घर आ सकते हो एक हफ्ते के लिए?
मैं– तुम्हारे घर कोई नहीं होगा क्या?
मैंने चौंकते हुए पूछा।

आकांक्षा- नहीं, जब पापा बिजनेस के लिए बाहर जाते हैं तो मैं अकेले ही होती हूं और अब तो आदत हो गई है।
मैं– अगर तुम्हें कोई दिक्कत नहीं है तो मुझे भी नहीं है। मैं आ जाता हूं फिर कल ही!

अगले दिन दोपहर को मैं अपने ज़रूरी सामान के साथ आकांक्षा के घर पहुंचा।
उसके पापा सुबह ही निकल चुके थे।

मैंने रास्ते से उसके लिए एक गुलाब का पौधा खरीदा।
जिसे देखकर वो बहुत खुश और आश्चर्यचकित होकर पूछ बैठी– लड़के तो बस फूल लाते हैं और तुम पौधा ले आए हो?
मैं– दरअसल ये मैं इसलिये लाया हूं ताकि तुम जब भी इसमें पानी डालो तो तुम्हें ये साथ में बिताया एक हफ्ता याद आए।
आकांक्षा शर्माकर मेरे गले लग गई और आंसू छलका बैठी।

मैंने उसके आंसू पूछते हुए वजह पूछी तो उसने बताया कि वह अपनी मां के जाने के बाद कितनी अकेली है और पापा बिजनेस की वजह से अक्सर बाहर ही रहते है।

तब मैंने उसका माथा चूमते हुए कहा– अब मैं आ गया हूं ना … अब नहीं रहोगी अकेली!
वो ये सुनकर खुश हुई और मुस्कुराते हुए बोली- तुम्हारे लिए एक केक बेक किया है चलो टेस्ट करके बताओ कैसा बना है।

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हम दोनों ने वो केक काटकर सेलिब्रेट किया और बात करने बैठ गए।
वो मेरी छाती की टेक लगाए मेरी टांगों के बीच में बैठी थी और मैंने उसके चारों तरफ उसको अपनी बांहों में जकड़ा हुआ था।

वह मुझे केक खिलाती और खुद खाती!
इसी तरह बातों का सिलसिला चलता रहा।

उसके होंठों पे थोड़ा केक लगा रह गया था।
मुझे मस्ती सूझी और मैंने उसके होंठों पे लगे केक को अपने होंठों से चूमकर हटाया।
उसने पीछे से ही मेरे गाल पे हाथ रखा और किस करने लगी।

हम दोनों एक दूसरे के होंठ चूस रहे थे।
उसके होंठों पर लगे चॉकलेट केक की वजह से किस करने में और भी मजा आ रहा था।

वो थोड़ा रुकी और आंखों में आंखें डालकर जैसे चुप रहकर उसके साथ रहने के लिए शुक्रिया कह रही हो।
मैंने भी उसकी आंखों पर चूमकर उसके शुक्रिया को कबूल लिया।

और ये एक मौन स्वीकृति थी उसकी तरफ से कि जो उस दिन रह गया था आज पूरा कर लो।

मैंने बड़े प्यार से उसके मुंह में अपनी जीभ चला दी और वो उसे चूसने लगी।
मैं उसे अपनी बांहों में भरके अपनी तरफ समेटने लगा।

मेरे दोनों हाथ उसके पेट से होते हुए उसके दोनों चूचों पर चले गए और हल्के से उनको दबा दिया जिस वजह से उसके मुंह से एक हल्की सी सिसकारी निकल गई।

उसने अपने हाथ मेरे हाथों के ऊपर रख लिए और उसके शरीर में एक अलग सी खुमारी छाने लगी।
अब शायद बहुत देर तक इस पोजीशन में होने की वजह से उसको तकलीफ़ होने लगी थी।

वो मेरे पैरों के बीच से उठी और मेरी गोद में मेरी तरफ मुंह करके बैठ गई।
उसने मेरे गले में अपनी बांहों का हार पहनाया और मेरे चहरे को हर जगह चूमने लगी।

उसकी ये हरकत मेरे शरीर में और भी उत्तेजना पैदा कर रही थी।
वो अपने होंठों को मेरे होंठों के पास लाती और हल्का सा छुआ कर हटा लेती।

उसकी ये अदा मुझे पागल और बेचैन कर रही थी।

मैंने परेशान होकर उसकी गर्दन को पीछे की तरफ झुकाया और उसकी गर्दन को चूमना शुरू कर दिया।
वो अपनी बांहों को और कड़ा करके मेरे होंठों को अपनी गर्दन में गाड़ा देना चाहती थी।

अब मेरे हाथ उसकी कमर से होते हुए उसके गोल मटोल चूतड़ तक पहुंचे।
मैं उसके चूतड़ सहलाने लगा और उसे अपनी तरफ धकेलने लगा।

वो अचानक रुकी और मेरी तरफ प्यार से देखते हुए बोली– मैंने कभी सोचा नहीं था कि मैं और तुम कभी इस तरह एक हो जायेंगे।
मैं– सोचा तो मैंने भी नहीं था लेकिन जब तुम्हें फ्रेशर पार्टी में काली साड़ी में देखा था तो इच्छा हुई थी कि तुम्हें अपना साथी बना लूं।
आकांक्षा– सच्ची?
मैंने उसके होंठों को चूमते हुए कहा– मुच्ची!

आकांक्षा मुस्कुरा दी और बोली– मुझे कुछ कुछ होने लगा है।
मैंने अनजान बनते हुए पूछा– क्या?
आकांक्षा ने मेरी छाती में एक हल्का मुक्का रखते हुए बोली– बुद्धू हो तुम!

मैं आकांक्षा का इशारा समझ कर उससे बोला– तुम्हारे कमरे में चलें?
आकांक्षा– हां, वो उस तरफ है मेरा कमरा।
हाथ से इशारा करते हुए बोली।

मैंने उसे अपनी गोद में भरके एक बच्चे की तरह उठा लिया और वो भी एक बच्चे की तरह मुझसे चिपककर मुझे चूमने लगी।
मैंने उसे बिस्तर पर पटक दिया और उसके ऊपर चढ़ गया।

अब बारी थी उसकी टी शर्ट उतरने की … मैंने उसकी टी शर्ट नीचे से पकड़ी तो आकांक्षा ने इशारा समझते हुए हाथ ऊपर कर लिए और मैंने एक झटके में उसकी टी शर्ट उसके गोरे बदन से अलग कर दी।

मैं उसकी ब्रा में कैद चूचियों को निहार रहा था जिसका अंदाजा उसे था।
उसने पहले अपनी चूची को देखा, फिर मेरी तरफ देखा जिससे वो थोड़ा शर्मा गई और अपने हाथों से अपने चहरे को ढक लिया।

मैं फिर आकांक्षा को लिटाते हुए उसकी एक चूची को ब्रा के ऊपर से चूमने लगा जिसे वो अपनी हथेली को थोड़ा सा हटाकर मेरी इस हरकत को देखने लगी।

अब हम दोनों उत्तेजित हो चुके थे जिसकी गवाही कमरे में बढ़ती गर्मी दे रही थी।
मैंने देर न करते हुए उसकी ब्रा उतरने की कोशिश की जिसका हुक मुझसे नहीं खुला।

मेरी बेबसी को समझकर आकांक्षा ने अपना हाथ हुक तक पहुंचाया और उसे खोल दिया।
मैंने धीरे धीरे ब्रा को हटाया जैसे किसी नायाब चीज पर से परदा हटाया जाता है।

आकांक्षा के दोनों चूचे बहुत सुंदर लग रहे थे।
भूरे रंग के चूचुक पर एक छोटा सा दाना था।

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मैंने एक चूची को चूमकर मुंह में भर लिया जिससे आकांक्षा के मुख से सिसकारी निकल गई जो बहुत ही मादक और उत्तेजक थी।
आकांक्षा मेरे बालों में हाथ फिराते हुए मुझे अपने चूचे से खेलते हुए देख रही थी।

मैं उसके चूचों को बारी बारी चूमता, चाटता और उसके कठोर हो चुके दानों को अपनी जीभ से कुरेदता।
उसके चूचे बहुत मुलायम थे जिन्हें छोड़ने का मन ही नहीं कर रहा था।

मैंने आकांक्षा की एक चूची को मुंह में भरते हुए उसकी तरफ देखा और उसकी उत्तेजना को समझते हुए इसके शॉर्ट्स के ऊपर से उसकी चूत पर हाथ रखकर सहलाने लगा।
मेरी इस हरकत से वो चिहुंक उठी।

उसकी शॉर्ट्स गीली थी जिससे मैं समझ गया कि अभी इसकी चूत को और इंतजार कराना ठीक नहीं!
मैंने उसकी शॉर्ट्स उतारने के लिए हाथ बढ़ाया और घुटनों तक सरका दिया।

उसने नीचे पैंटी नहीं पहनी थी।
मैंने आश्चर्य से उसकी तरफ देखा तो वो बोल पड़ी– मैं जब घर पे होती हूं तो पैंटी नहीं पहनती।

मैंने जवाब में उसकी चूत पर अपनी उंगली मसली और उसके होंठों को चूसने लगा।
थोड़ी देर बाद मैं उसकी चूत पर पहुंचा और उसकी गीली हो चुकी चूत को चूम लिया।
मुझे वो थोड़ा खारा लगा पर मज़ा भी आया।

मैं उसकी चूत के इर्द गिर्द अपनी जीभ चला रहा था। मैं एक हाथ उसके मुंह के पास ले गया तो उसने मेरा अंगूठा अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी।
मुझे उसकी हरकत से अंदाजा हो गया था कि इसे लंड चूसने में कोई परेशानी नहीं होगी।

अब आकांक्षा उठा उठा कर अपनी चूत चुसवा रही थी।

यहां जींस में मेरा लंड पूरा अकड़ चुका था और आज़ादी की गुहार करने लगा।
मैं अपनी जींस उतरने के लिए उठा ही था कि आकांक्षा ने मुझे अपनी तरफ खींच लिया और मेरे होंठों को चूसने लगीं।
मुझे ऐसे ही अपने कपड़े उतारने पड़े।

अब मेरा सख्त लंड उसकी गर्म चूत से टकरा रहा था।

उसने मुझे मेरे घुटने पर बैठने को कहा … मैं बैठ गया।

वो घोड़ी बनी और मेरा लंड हाथ में पकड़कर मेरे आंड मुंह में भर लिए।

उसकी इस हरकत से मुझे एहसास हुआ कि शायद आकांक्षा पहले भी चुदाई करवा चुकी है।

इसी उत्सुकता से मैंने आकांक्षा के गालों पे हाथ फेरकर पूछा– क्या तुमने पहले भी सेक्स किया है?
आकांक्षा– नहीं तो, ऐसा क्यूं पूछा तुमने?
मैं– तुम इतने अच्छा से लंड चूस रही हो तो मुझे लगा कि …

आकांक्षा मुस्कुराकर बोली– मैं ‘फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे’ जैसे इरोटिक नॉवेल पढ़ती रहती हूं, मुझे इस सबका अंदाजा है। तुम बस एंजॉय करो।
इतना बोलकर उसने फिर से मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया।

आकांक्षा ऐसे लंड चूस रही थी जैसे उसे इसका अभ्यास हो।
वो लंड को पूरा मुंह की गहराई तक ले जाती और जीभ से खेलती। कभी अपने मुंह को मेरे लंड पर आगे पीछे करती तो कभी सुपारे पर जीभ फिराने लगती।
मुझे अंदाजा भी नहीं था कि आकांक्षा मेरे लंड से इतनी अच्छी तरह से खेलेगी और मुझे अपने लंड चुसाई के हुनर का दीवाना बना लेगी।

अब मैंने उसको बालों से पकड़कर अपनी तरफ खींचा और उसके होंठ चूसे फिर उसकी चूत पर लंड रगड़ते हुए बोला– क्या तुम तैयार हो?
आकांक्षा मेरे मुंह से अपनी जीभ निकलते हुए– कब से विशू!

मुझे उसके होंठों से विशू सुनकर खुमारी छा गई।
मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसकी टांगें चौड़ा दी।

मैं उसके ऊपर लेट गया और अपने लंड को उसकी चूत में घुसाने का प्रयास करने लगा।
थोड़े प्रयास के बाद मेरा सुपारा उसकी टाइट चूत में घुस गया जिस वजह से आकांक्षा दर्द से कराह उठी और मेरी छाती से चिपक गई।
मैं रुक गया।

थोड़ी देर बाद जब उसका दर्द कम हुआ तो उसने ‘हम्मम’ का इशारा किया।
मैंने थोड़ा जोर लगाते हुए आधा लंड उसकी चूत के अंदर तक धंसा दिया जिस वजह से वो थोड़ा पीछे हटने लगी लेकिन विरोध नहीं कर रही थी।

शायद उसे चुदाई में होने वाले दर्द का एहसास था।
मैं फिर रुक गया।

उसने थोड़ी देर बाद फिर ‘हम्मम'[ का इशारा किया और मैं समझते हुए उसकी चूत में आधा धंसा लंड आगे पीछे करने लगा।

अब उसे दर्द कम हो रहा था और मेरा लंड भी उसकी चूत में अपनी जगह बना चुका था।
थोड़ी देर में उसका दर्द आनंद में बदल गया जिसका फायदा उठाते हुए मैंने अपना पूरा लंड उसकी चूत की गहराई में उतार दिया।
उसे दर्द हुआ लेकिन मेरा साथ देती रही।

वो मेरे चूतड़ों पर हाथ रखकर मुझे अपनी तरफ धक्के लगाने में मदद कर रही थी जिससे मुझे उसकी उत्तेजना का एहसास हो रहा था।

इसी दौरान वो झड़ गई और उसने अपना शरीर और चूत ढीली छोड़ दी।

मेरे धक्के अब भी जारी थे।
थोड़ी देर में मैं भी झड़ने को हो गया तो मैंने बोला– मेरा भी होने वाला है।
आकांक्षा ने कहा– अंदर मत डालना।

इतना बोलकर उसने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया और अपना जूड़ा बांधते हुए मेरी टांगों के बीच में आकर मेरा खून और उसके वीर्य से सना लंड पौंछकर चूसने लगी।

मैं ज्यादा देर टीक नहीं पाया और उसके मुंह में ही अपना वीर्य निकाल दिया।
उसने भी अपना मुंह नहीं हटाया और मेरी आखरी बूंद तक को उसने अपने मुंह में ही झड़ने दिया जिसे उसने निगला नहीं था बल्कि मुंह में ही रखे रखा और बाथरूम में जाकर थूक आई।

वो बाथरूम से लौटकर आई तो वो मुस्कुरा रही थी.
उसके चेहरे पर फर्स्ट सेक्स से मिली संतुष्टि के भाव पढ़े जा सकते थे और वो मेरे ऊपर लिपटकर लेट गई।
उसे नींद आ गई और वो से गई।

मैं उसके बगल में लेटा हुआ उसे निहारता हुआ सोच रहा था कि मैं कितना खुश किस्मत हूं कि आकांक्षा जैसी लड़की मेरी जिंदगी का हिस्सा है।

आकांक्षा को सेक्स के बारे में सब समझ थी तो मुझे उसको किसी चीज़ के बारे में बोलना ही नहीं पड़ा, सब कुछ अपने आप ही हो रहा था।
तब मुझे समझ आया अगर लड़की समझदार और आप पर भरोसा करे तो वो आपके साथ सभी हदें लांघ सकती है।

मैं यही सोचता हुआ अपनी किस्मत पर गर्व कर रहा था और मुझे भी नींद आ गई।
मैं उसको बांहों में भरकर सो गया।

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