मेरा छठा पति बड़े लंड वाला निकला

गे गांड फाड़ स्टोरी में पढ़ें कि मैं चिकना लड़का हूँ, लड़की बन कर 5 पतियों से शादी की, सबसे गांड मरवाई. तभी हमारे साथ एक और आदमी आ गया.

मेरी पिछली कहानी
एक रात में चार पतियों का लंड लिया
में आपने पढ़ा कि मैंने लड़की बन कर 5 पतियों से शादी की, सबसे गांड मरवाई.

अब आगे Gay Gand Faad Story:

एक हफ्ते बाद मदन जी अपने गांव चले गए थे.
वो मुझे मदन फ़ोन करते रहते थे.
एक महीने बाद मदन जी ने मुझको फ़ोन पर कहा- स्पीकर पर फ़ोन रखो, मुझे सभी से बात करनी है.

मदन जी ने सबसे पूछा- तुम लोग मेरे चौधरी मामा को तो जानते हो, जो पास के गांव में रहते हैं, जिनका फल का बगीचा है.
अनिल ने कहा- हां जानते हैं.

मदन जी- चौधरी मामा की पत्नी गुजर जाने के बाद उन्होंने दूसरी शादी की, पर उनकी दूसरी पत्नी भाग गयी. वे पुणे आकर हमारे साथ रहकर फल की दुकान चलाना चाहते हैं.
ये सुनकर सभी चिंता में पड़ गए, अब मेरे साथ उनकी चुदाई में बाधा होगी.

चौधरी मामा को लेकर मदन पुणे पहुंच गए, उनको सोने के लिए मदन जी के साथ एक बेडरूम दे दिया गया.

मैं संजय, अब लड़कों के कपड़े में रहता था. पर मेरे बड़े चूचे चौधरी मामा ने देख लिए थे.

चौधरी जी सुबह जल्दी उठ जाते, उन्होंने देखा कि रोज सुबह कभी अनिल, कभी सुनील कभी विक्रम कभी मोहन मेरे कमरे से बाहर निकलते हैं.

एक रात मदन जी कमरे से गायब थे.
वो मेरे साथ खेल रहे थे.

सुबह मदन जी मेरे कमरे से बाहर निकले.
चौधरी मामा को शक हुआ, शायद वो समझ गए थे कि ये लोग बारी बारी मेरी गांड मारते हैं.

मेरा व्यवहार भी लड़कियों जैसा था.
चौधरी मामा ने सच बात जानने के लिए एक योजना बनाई.

  मेरा पहला गे सेक्स अनुभव-2

एक शाम चौधरी मामा में कहा- आज मेरा जन्मदिन है, अपन पार्टी करेंगे. मैं चिकन और दारू की बोतल लाया हूँ. संजय आज चिकन पकाएगा.

पार्टी शुरू हो गई.

दारू के नशे में चौधरी मामा बोले- तुम लोगों को बताता हूँ, मेरी दूसरी बीवी क्यों भाग गयी?
सुनील- हां बताओ.

चौधरी जी- मुझे गांड मारने में बहुत मजा आता है. चूत से ज्यादा मजा गांड मारने में आता था. मैं अपनी पहली बीवी की गांड मारता था, उसे भी बहुत मजा आता था. दुर्भाग्य से उसकी मौत हो गयी, मैंने दूसरी शादी की.
सुनील- हां फिर?

चौधरी जी- फिर क्या … दूसरी बीवी के साथ सुहागरात को मैंने पहले उसकी चूत का उद्घाटन किया. उसे दर्द हुआ, पर वो सह गयी. उसकी सहेलियों ने उसे बताया था कि पहली बार चुत में लंड लेने से दर्द होता है. दूसरे राउंड में मैंने किसी तरह से उसे गांड मरवाने के लिया राजी किया. मैंने जब अपने लंड पर तेल लगाकर, बीवी की गांड में डालने की कोशिश की, तो वह दर्द से चीखने लगी. मैं रुक गया. बीवी ने अपने कपड़े उठाए और खेत में भाग गयी. फिर साली उधर से ही वह मायके चली गयी. बहुत समझाने के बाद भी नहीं लौटी.
सब हंसने लगे.

चौधरी जी- तुम छहों में से कभी किसी ने बीवी की गांड मारने का अनुभव लिया है?
पांचों लोगों ने हां में सर हिलाया.
उन्होंने मेरी तरफ देखा.

मैंने कहा- मेरी बीवी नहीं है.
चौधरी मामा बोले- अरे बीवी नहीं है, तो क्या हुआ … क्या लंड भी नहीं है. क्या तूने किसी की गांड नहीं मारी?

ये कह कर वो खुद हंसने लगे.

फिर बोले- मैं बाथरूम से होकर आता हूँ.
वो बाथरूम चले गए.

चौधरी जी के जाते ही सब सलाह करने लगे कि क्या चौधरी को सब सच बता दिया जाए. चौधरी के होते हुए संजय लड़कियों के कपड़े नहीं पहन सकता. सबको संजय के कमरे में रात को छुपकर जाना पड़ता है.
सुनील बोले- यदि संजय, चौधरी को छठा पति बनाने के लिए राजी हो, तभी ये बात आगे बढ़ सकती है.

पांचों बोल पड़े- लगता है यही एक मात्र उपाय है.
मैं- यदि तुम सबकी यही राय है, तो मैं अपने पतियों की इच्छा पूरी करूंगी. मैं भी इस लुकाछिपी से परेशान हूँ. मैं अपने कमरे में जाती हूँ. यदि चौधरी राजी हो जाएं तो मुझे बात बता देना. मैं लड़कियों के कपड़े पहनकर, सजनी बनकर आऊंगी.

ये कह कर मैं अपने कमरे में चला गया.
चौधरी वापस आकर बैठ गए.

सुनील- चौधरी जी आपको मैं पूरी बात बताता हूँ, मगर पहले आप इसको गुप्त रखने का वादा करें.
चौधरी ने वादा किया कि मैं किसी को कुछ नहीं बताऊंगा.

सुनील- हम सबकी पुणे में एक ही बीवी है और वह है संजय. उसको हम सब प्यार और इज्जत करते हैं. बारी बारी एक दिन और उस रात को वह हम पाँचों में से किसी एक की बीवी होती है. संजय के बनाये स्वादिष्ट खाने से हम सबकी सेहत अच्छी हो गई है. संजय की सलाह से हम लोगों दुकान की कमाई बढ़ गयी है. उसके साथ यौन सुख भी बहुत मिलता है. हमने उसे सजनी नाम दिया है.

चौधरी जी- मैंने देखा है संजय के चूचे कुछ ज्यादा ही बड़े है. पर संजय तो एक लड़का है, उसमें तुम लोगों को बीवी कैसे दिखती है?

सुनील- आप एक बार संजय को लड़की के भेष में देखेंगे तो आप भी उससे शादी करने की जिद करने लगेंगे.
सुनील ने मुझको आवाज़ दी.

मैं सजनी के भेष में बाहर आ गई. साड़ी ब्लाउज, मेकअप, लिपस्टिक, गहने.
मैं किसी भी कमसिन लड़की से कम नहीं लग रही थी.

मेरा रूप देख कर चौधरी का मुँह खुला रह गया.
चौधरी बोल पड़े- मैं भी सजनी से शादी करना चाहता हूँ.

मैंने शर्माकर सर झुका लिया.

सुनील- लगता है सजनी राजी है. चौधरी जी आपको कोई यौन रोग तो नहीं है न. इसकी जांच हमारे डॉक्टर से करवानी होगी.

चौधरी जी राजी हो गए.

तीन दिन बाद डॉक्टर की रिपोर्ट आ गयी.
कोई समस्या नहीं है.
शादी सात दिन बाद होनी तय हुई.

उस दिन मैं दुल्हन के भेष में इतनी सुंदर लग रही थी कि कोई भी लड़की को जलन हो जाए.
चौधरी जी भी धोती कुर्ते में बांके जवान लग रहे थे.

मैं और चौधरी जी ने माला बदलकर शादी की, चौधरी ने मेरी मांग में सिन्दूर लगाया.
सुहागरात रात को आठ बजे होनी थी. दावत में चौधरी जी और मैंने थोड़ा ही खाना खाया, रात को मेहनत जो करनी थी.

मैं सुहाग सेज पर घूंघट लगा कर बैठी थी. चौधरी जी कमरे में आए, मैंने उठकर उनके पैर छुए.

चौधरी जी ने मुझे आलिंगन में लेकर कहा- सजनी तुम्हारी जगह मेरे दिल में है.

उन्होंने मुझे पलंग पर बैठाया और मुझे काफी देर तक निहारते रहे.

फिर बोले- सजनी, तुम आज बहुत सुन्दर लग रही हो.
मैंने शर्माकर नजर झुका ली.

चौधरी जी ने मुझे अपने गांव, परिवार के बारे में बताया.
फिर मुझे प्यार से लिटा दिया और मेरे चेहरे, गर्दन, होंठ चूमने लगे.

अब वो धीरे धीरे मेरे स्तनों को मेरे ब्लाउज के ऊपर दबाने लगे.
चौधरी जी का खड़ा लंड मेरे जिस्म को छू रहा था.

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उन्होंने मेरा ब्लाउज और ब्रा उतार दिया.

कमरे में हल्की रोशनी थी.

मेरे बड़े और तने स्तन को देखकर चौधरी जी बोले- तुम्हारे स्तन तो बहुत सुन्दर हैं, कैसे बने?
मैं बोली- ब्रेस्ट पंप से.

ब्रेस्ट पंप से मेरे स्तन थोड़े बड़े तो हुए थे, पर उनको इतना बड़ा किया था मेरे पांचों पतियों ने.
उन्होंने मेरे चूचे दबाकर कर चूसकर मेरे दूध मस्त कर दिए थे.

मेरा नियम था कि एक पति के साथ जब मैं रात को रहती हूँ, तो दूसरे पतियों के साथ किए सेक्स बारे में बात नहीं करती थी.

चौधरी जी मेरे चूचे और निप्पल चूसने और दबाने लगे.
कुछ देर बाद दोनों के शरीर पर एक भी वस्त्र नहीं थे.

मैं चौधरी जी का लंड देखकर डर गयी.
उनका लंड 8 इंच लम्बा और बहुत मोटा था; एकदम घोड़े जैसा लंड था.

मेरे बाक़ी के पतियों का लंड इतना लम्बा और मोटा नहीं था.

अब मुझे समझ आया कि चौधरी जी की दूसरी बीवी क्यों गांड मराने की शुरुआत होते ही भाग गयी थी.

जिस किसी को भी गांड मरवाने में मजा आता है, उसका एक सपना होता है कि एक बार बड़ा और मोटा लंड गांड में लेकर देखे.
शायद सेक्स वीडियो देखने का परिणाम था. मुझे भी उत्सुकता थी, पर डर भी लग रहा था.

फिर मैं सोचा कि जब चौधरी जी की पहली बीवी उनके हब्शी लौड़े से मजे से अपनी गांड मरवाने का आनन्द ले सकती थी, तो मैं भी ले सकूंगी.
मैंने तो पांच लंड अपनी गांड में लिए थे.

चौधरी जी को भी समझ आ गया था कि मैं उनका बड़ा लंड देखकर डर गयी हूँ.

उनको चिंता हुई कि कहीं मैं भी उनकी दूसरी बीवी की तरह कमरे से भाग न जाऊं.

चौधरी जी- सजनी, क्या तुमको मेरा बड़ा लंड देखकर डर लग रहा है? घबराओ नहीं, मैं बहुत प्यार से करूंगा, ज्यादा दर्द हो तो बता देना.
मैं- आप मेरी चिंता न करें, मैं आपकी पत्नी हूँ, आपको खुश रखना मेरा कर्तव्य है. कुदरत ने आपको बड़ा हथियार दिया है और मेरी शादी आपसे हुई है. मैं आपकी खुशी के लिए पूरी कोशिश करूंगी.

चौधरी जी ने मुझे पेट के बल लिटाया, मेरी कमर और नितम्ब की मालिश की. मेरी गांड के छेद में तेल लगाकर एक उंगली, फिर दो उंगली डालकर उसे ढीली की.

फिर वो बोले- अपनी गांड ढीली छोड़ दो.
वो उंगली अन्दर बाहर करने लगे.

मुझे मजा आ रहा था, मैं सिसकारी भर रही थी.

चौधरी जी ने अब मुझे पीठ के बल लिटाया और बोले- अपने पैर छाती की तरफ करके अपने घुटनों को पकड़ लो.
मैंने वैसा ही किया.

चौधरी जी ने मेरी कमर के नीचे तकिया लगाकर कहा- इसको मिशनरी आसन कहते हैं. मैं तुम्हारा चेहरा देख सकता हूँ, तुमको ज्यादा दर्द हो तो बताना. मैं वहीं रुक कर दर्द कम होने का इंतजार करूंगा.

चौधरी जी ने अपने लंड पर तेल लगाया, मेरी गांड की छेद पर रखा और कहा- गांड ढीली करो.

मैंने अपनी गांड ढीली करके सर हिलाया. चौधरी ने एक झटके में अपना पूरा लंड मेरी गांड में डाल दिया.
मैं ‘आ आ मर गयी …’ कहकर चीख उठी. पर मैंने हिम्मत नहीं हारी, अपने घुटने पकड़ कर रखे.

मुझे महसूस हुआ मेरी गांड का छेद बहुत फैल गया है और लंड बहुत अन्दर तक चला गया है. यह मेरे लिए नया अनुभव था.
चौधरी जी मुझे पुचकारने लगे- बस थोड़ी देर में दर्द कम हो जाएगा.

अब चौधरी जी मेरे निप्पल चूसने लगे. स्तनों को हल्के हल्के से दबाने लगे.
चौधरी जी को मेरे दर्द की इतनी परवाह है, यह मुझे अच्छा लगा.

मेरा दर्द थोड़ी देर में कम हो गया.
मैंने कमर हिलाकर संकेत दिया.
चौधरी जी ने धीरे धीरे चोदना शुरू कर दिया.
मैं कमर उछाल उछाल कर साथ देने लगी.

चौधरी जी ने मुझे अपने घुटने छोड़ने को कहा और मेरे पैर कंधे पर ले लिए.

थोड़ी देर मिशनरी आसन में चोदने के बाद चौधरी जी ने मुझे पेट के बल लिटा दिया.
मैंने समर्पण में अपने पैर फैला दिए.
अपने चूतड़ों की गोलाइयों को हाथ से गांड के छेद से दूर कर लिया.

चौधरी जी ने अपना मोटा लंड मेरी गांड में डाला और धुआंधार गति से मेरी गांड मारने लगे.

मुझे हल्के दर्द के साथ बहुत मजा आ रहा था.
चौधरी जी थोड़ी देर मेरी गांड मारते … फिर रूककर मेरे ऊपर लेट जाते.

कुछ पल बाद फिर से मेरी गांड चोदने लगते.

रुक रुक कर गांड मारने के कारण, चौधरी जी बहुत देर टिके रहे.
मुझे गांड मराने में इतना मजा आ रहा था कि मैं अपने लंड को छुए बिना ही दो बार झड़ गयी.

मेरी चुदाई आधा घंटे चली.
झड़ने से पहले चौधरी जी का लंड और मोटा हो गया था.
उनके आखरी क्षणों की चुदाई किसी मशीन की तरह थी.
ऐसा लग रहा था कि आज मेरे शरीर के दो टुकड़े हो जाएंगे.

कुछ ही देर में चौधरी जी झड़ने लगे और मेरी गांड का छेद चौधरी जी के वीर्य से भर गया.

चौधरी जी ने मुझे सहारा देकर उठाया, बाथरूम में ले जाकर मेरी गांड धोने में मदद की.
उन्होंने अपना लंड भी धोया.

मैं थक गयी थी.
वापस आकर मैंने कपड़े पहनना शुरू किया.

चौधरी जी बोले- कपड़े मत पहनो, मैं तुम्हारा सुंदर बदन जी भरकर देखना चाहता हूँ. अभी सिर्फ रात के 10 बजे है. मेरी दोनों बीवियों के बदन इतने बाल रहित और चिकने नहीं थे.

हम दोनों नंगे की लेटकर बातें करने लगे, चौधरी जी अपनी फल की दुकान खोलने के बारे में बता रहे थे.

मैंने उन्हें सुझाव दिया कि आप इन लोगों की सब्जी की दुकान के पास ही अपनी दुकान खोलिए. एक दूसरे की मदद मिलेगी.
चौधरी जी बात करते करते मेरे एक चूचे पर हाथ फेर रहे थे और मेरा बदन सहला रहे थे.

मुझे मेरी गांड खाली खाली लग रही थी और एक बार गांड मरवाने की इच्छा हो रही थी.

चौधरी जी का लंड भी फिर से खड़ा होने लगा था.
वो बोले- सजनी क्या तुम मेरा लंड चूसना पसंद करोगी.

मैं खिसक कर उनके लंड के पास गयी. चौधरी जी का लंड हाथ में पकड़कर उसको देखा, बड़ा ही सुंदर लंड था.
एकदम घोड़े जैसा.

मैं उनका लंड चूमने लगी, लंड पूरा खड़ा हो गया. मैं लंड चूसने लगी.
गले तक लंड मुँह में डालने के बाद भी पूरा लंड मुँह में नहीं जा रहा था.

चौधरी जी ने अपना लंड मेरे मुँह से निकालकर मुझे पेट के बल लिटा दिया.
मैंने अपने पांव फैला दिए, अपने चूतड़ों को हाथ से दोनों तरफ फैला दिया.
मेरी गांड के छेद दिखने लगा.

चौधरी जी ने अपने लंड पर तेल लगाकर मेरी गांड में पूरा डाल दिया और मेरे ऊपर लेट गए.

मुझे थोड़ा दुखा पर मजा भी आया.

चौधरी जी अपनी निराली अदा से थोड़ी देर मेरी गांड मारते, फिर रूककर मेरे ऊपर लेट जाते.
मेरे गाल, गर्दन चूमते, मेरे चूचे दबाते. फिर चुदाई करने लगते.

इस बार मेरी गे गांड फाड़ चुदाई काफी देर तक चली.
मुझे इतना आनन्द कभी नहीं मिला था.

मैंने निश्चय कर लिया था कि मैं इस रुक रुक कर चोदने की कला को अपने बाक़ी पांच पतियों को भी सिखाऊंगी बिना चौधरी जी का नाम लिए.
इसमें चोदने और चुदने वाला दोनों नहीं थकते हैं.

इतनी देर चुदाई से मैं बिना अपना लंड छुए दो बार झड़ गयी थी.

हम दोनों बाथरूम से गांड और लंड धोकर आए.
मैं पैर फैलाकर चल रही थी, जैसे अभी भी मेरी गांड में लंड घुसा हो.
गांड में दर्द हो रहा था.

चौधरी जी ने मुझे पेट के बल लिटा दिया.
वो आइसबॉक्स में से बर्फ लेकर आए.

उन्होंने बर्फ का टुकड़ा रूमाल में रखकर मेरी गांड की छेद की बर्फ से सिकाई की.
इससे मुझे आराम मिला.

फिर मैंने बिस्तर की चादर बदली और नंगे ही सो गए.

यौन तृप्ति के बाद नींद बहुत अच्छी आती है.

सुबह उठकर देखा कि चौधरी जी सोए हुए हैं और उनका लंड झंडे के डंडे की तरह खड़ा है.

मैंने चौधरी जी का लंड पकड़कर प्यार से देखा और लंड चूसने लगी.
चौधरी जी की नींद खुल गयी, वे लंड चुसाई का मजा ले रहे थे, कमर उचकाकर मेरा मुँह चोदने लगे.
उनका मोटा लंड गले तक जा रहा था.

थोड़ी देर में चौधरी जी ने अपनी वीर्य की पिचकारी मेरे मुँह में छोड़ दी, मैं सारा वीर्य पी गयी.
फिर हम दोनों ने साथ में स्नान किया.

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