बूढ़े अंकल ने मेरी कुंवारी गांड चोदकर खोली-1

लड़के की गांड चुदाई कहानी में पढ़ें कि मेरा चेहरा लड़कियों के जैसा मासूम है. गुलाबी होंठ, गोरा रंग, भरी गोरी जांघें और उभरी हुई गांड है. एक दूकान वाले अंकल ने मुझे नंगा कर दिया.

हमारे शहर के बीच में वो दुकान थी, जहां वह बूढ़े अंकल बैठा करते थे.
वे पोस्टर्स, बच्चों के स्कूल की किताबें वगैरह बेचा करते थे.

यह Ladke Ki Gand Chudai Kahani वहीं पर घटित हुई थी. यह मेरी जीवन की सच्ची घटना है, जो मैं आज यहां प्रस्तुत कर रहा हूं.

मेरा नाम मोनी है और मैं स्कूल का छात्र हूं.
मैं दिखने में बहुत ही सुंदर हूं और बहुत ही खूबसूरत हूं.

मेरा चेहरा लड़कियों के जैसा मासूम है. गुलाबी होंठ, गोरा रंग मेरी भरी गोरी जांघें और मेरी उभरी हुई गांड है, जो अन्दर से बहुत ही नर्म और मुलायम है. अच्छे-अच्छे मर्दों के लंड खड़ा कर देती है.

यह बात मुझे पहले मालूम नहीं थी, लेकिन इस घटना के बाद बहुत कुछ साफ हो गया था.

जैसा कि मैंने बताया कि वह बूढ़े अंकल उस दुकान में किताबें वगैरह बेचा करते थे.
हम सारे लड़के अक्सर उनके पास कुछ ना कुछ लेने जाते रहते थे.

लेकिन यह बात बहुत कम लोगों को पता थी कि वह अश्लील पुस्तकें भी बेचा करते थे जिनमें चुदाई की रंगीन तस्वीरें हुआ करती थीं.
हमारी कक्षा के कुछ हरामी लौंडों की वजह से मुझे भी इस बात का पता चला और मैंने भी उन किताबों को देखने में रुचि लेनी शुरू कर दी.

क्योंकि मैं भी धीरे-धीरे जवानी की तरफ कदम बढ़ा रहा था और मेरे अन्दर भी रंग भरते जा रहे थे.
मैं नियमित रूप से उन बूढ़े अंकल के पास जाकर नई आई अश्लील पुस्तकें खरीदा करता था.

अंकल से मेरी खासी बनने लगी थी. अंकल मुझे बड़े प्यार से बिठाते थे और खुल कर बात करते थे.
इससे अंकल से सेक्सी बात करने में मेरी हिचक और शर्म खत्म हो गई थी.

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अंकल मुझसे पूछते थे कि किस तरह के सेक्स वाली किताब दूँ.
मैं कह देता था कि बस अंकल कुछ ऐसी दो, जिससे मजा आ जाए.

अंकल हंस कर पूछते कि पीछे से चुदाई वाली किताब दूँ? उसमें मजा आता है?
मैं भी कह देता था- हां अंकल, वो ही किताब दे दो.

इससे मेरी कामना और रूचि गांड चुदाई की किताबों में बढ़ गई थी.

एक दिन जब मैं दुकान पर गया तो मैंने अंकल से अश्लील किताब मांगी.
अंकल ने हमेशा की तरह कागज में लपेट कर छुपाकर मुझे एक नई किताब दे दी.

मैं उसे लेकर घर आ गया और घर में अकेले में उसे खोला तो पाया वह किताब मेरे पास पहले से थी. मैं उसको वापस करने अगले दिन दुकान पर गया.

उस वक्त दुकान पर कोई नहीं था.
अंकल अकेले बैठे हुए थे.

मैंने उनके पास जाकर वो किताब रख दी और कहा- अंकल यह किताब मेरे पास पहले से ही है, जो नई किताब आई हो, वह दो ना.
अंकल मेरी तरफ गौर से देखने लगे.

उस दिन मैंने नेवी ब्लू हाफ पैंट पहनी थी और ब्लैक टी-शर्ट.
इस रूप में मेरा गोरा बदन गजब ढा रहा था.
जो भी लौंडेबाज मुझे देखता वो अपना लंड सहलाने लगता.
यहां तक कि और बड़े-बड़े अंकल भी मुझे हवस भरी नजरों से देख रहे थे. वही चीज मैंने इस बूढ़े अंकल में भी देखी.

अंकल मुझे गौर से देखने लगे.
फिर उन्होंने मुझसे मुस्कुराकर कहा- क्या बात है, आजकल तुमको इन चीजों को देखने में कुछ ज्यादा ही मजा आ रहा है!
मैंने हल्के से शर्मा कर कहा- अरे नहीं अंकल, वह तो बस यूं ही!
और मैं हल्के से मुस्कुरा कर चुप हो गया.
मेरी नजरें नीची हो गईं.

तभी अंकल ने धीरे से मेरे गोरे हाथों पर अपना भारी खुरदरा हाथ रख दिया और कहा- शादी कब कर रहे हो, किसी लड़की के साथ अब तक कुछ किया है भी या नहीं?
“अरे क्या अंकल आप भी कैसी बातें कर रहे हैं. भला यह भी मेरी को शादी करने की उम्र है. और रही बात लड़की की, तो अब तक मैंने ऐसा कुछ नहीं किया है.” मैंने शर्मा कर कहा.

“ओह तो यह बात है.”
अंकल मुस्कुराए और मेरे कान में धीरे से फुसफुसा कर बोले- कल आना, तुम्हारे लिए एक खास चीज रखूंगा.

फिर वो अजीब से अंदाज से मेरे हाथों को सहलाने लगे. मुझे थोड़ी शर्म सी आई और मैं वहां से अपने घर चला गया.
पूरी रात मैं यही सोचता रहा कि आखिर कल अंकल मेरे लिए ऐसी क्या खास चीज रखेंगे.

फिर मुझे लगा वह कोई अच्छी सी किताब की बात कर रहे होंगे लेकिन उनका हाथ से मेरे हाथ को सहलाना मुझे कुछ अजीब सा अहसास देने लगा था.
मुझे लग रहा था कि वो बात सिर्फ किताब की नहीं, शायद कुछ और है.

ये सब सोच कर मेरे अन्दर एक अजीब सी सिरहन दौड़ गई और मैंने आने वाले कल के लिए खुद को तैयार कर लिया.

मैंने यह सोच लिया कि कल मैं अंकल के पास पक्का जाऊंगा और वो क्या बात है, उसे जरूर देखूंगा.
यही सब सोचते सोचते मैं सो गया.

अगले दिन मैं तैयार होकर ब्लैक पैंट और एक काली सफेद टी-शर्ट पहनकर 4:30 बजे शाम को अंकल की दुकान की तरफ चला गया.
जब मैं वहां पहुंचा तो अंकल की दुकान पर कोई नहीं था.

मुझे देखकर अंकल बहुत खुश हुए और मुझे उन्होंने जल्दी से लपक कर दुकान के अन्दर ले लिया.
उन्होंने मुझे दुकान के पीछे पार्टीशन की तरफ भेज दिया और कहा- मैं अभी दुकान बंद करके थोड़ी देर में आता हूं.

पार्टीशन के उस तरफ अंकल रहते थे. वहां पर जमीन पर एक बड़ा अच्छा सा गद्दा बिछा हुआ था. उस पर बड़ा प्यारा सा चादर बिछाया हुआ था. कुछ छोटी मोटी चीजें भी रखी थीं.
मैं जाकर बिस्तर पर बैठ गया.

थोड़ी देर में अंकल दुकान बंद करके अन्दर आ गए.
उन्होंने मुस्कुराते हुए मुझे देखा.

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मैंने कहा- कल आप मेरे लिए किस खास चीज की बात कर रहे थे?
उन्होंने उसी तरह मुस्कुरा कर कहा- आज तो तुम्हारे लिए दो खास चीजें हैं. पहले तो तुम यह ले लो.

उन्होंने सेल्फ में से एक नई किताब निकाली और मेरी तरफ रख दी.
उस किताब को देखते यह मेरे अन्दर खून भड़कने लगा क्योंकि वह एक नई वाली चुदाई की किताब थी जिसमें जबरदस्त किस्म के फोटो दिए गए थे.

उसमें कुछ और भी था जिसमें एक बड़ी उम्र के अंकल एक कमसिन लड़के की गांड मार रहे थे.
मुझे देखकर ऐसा लगा कि मैंने पहली बार ऐसा कुछ देखा था.

अंकल मेरी तरफ देख रहे थे.
फिर वो मेरे बगल में बैठ गए.
अंकल ने कहा- चलो, मैं भी तुम्हारे साथ देखता हूं.

अब मेरे साथ वो भी किताब पलट कर देखने लगे.
उसके बाद उन्होंने किताब देखते-देखते मेरे हाथ और मेरे बदन पर हाथ चलाना शुरू कर दिया.

मैं किताब देखने में इतना खो गया था कि मुझे पता ही नहीं चला कि मेरे आस-पास क्या हो रहा है.
धीरे-धीरे अंकल मेरी जांघों को सहलाने लगे.

वो अपने हाथ को मेरे लुल्ली पर ले आए और उस पर हाथ फेरने लगे.

तब मैंने अंकल की तरफ गौर से देखा तो उन्होंने कहा- बेटा तुम मजे से किताब देखो, बस मैं तो बस यूं ही, तुम्हें और थोड़ा मजा देने की कोशिश कर रहा हूं.
अंकल धीरे-धीरे मेरे पूरे जिस्म पर हाथ फेरने लगे.

यह सच था कि मैं किताब देख रहा था लेकिन मेरे बदन को छूना मेरे अन्दर एक अजीब सी फीलिंग जगा रहा था.
मैं वासना से सिहरने लगा.

अंकल धीरे-धीरे और करीब आ गए और वह भी फोटो देख कर बोलने लगे- यह वाला देखो, कितना जबरदस्त है. यह देखो, इतना मोटा लंड लड़के की गांड में घुसा हुआ है.

अंकल इस तरह की बातें करने लगे और मेरे अन्दर कुछ अजीब सा लगने लगा.
धीरे-धीरे करते-करते अचानक मेरे बाएं हाथ को उठा कर अंकल ने अपने लंड पर रख दिया.

मेरा गला सूखने लगा.
अंकल का बड़ा लंड पैंट के अन्दर हिलोरें मार रहा था.

मेरी सांस अटकने लगी और मेरा ध्यान किताब पर से हटने लगा.
उधर अंकल किताब के पन्ने पलट कर मुझे दिखाते जा रहे थे.

थोड़ी देर ऐसे ही चलता रहा और जब मुझसे रहा नहीं गया, तो मेरे हाथ से किताब नीचे आ गई.
अंकल ने मुझे किस कर दिया. पहले तो मुझे बहुत अजीब सा लगा, लेकिन अच्छा लगा.

फिर अंकल मुझे और भी किस करने लगे.
मैं थोड़ा सा हटा और सोचा कि यह साला क्या हो रहा है.
लेकिन मैंने कुछ कहा नहीं.

अंकल और ज्यादा किस करने लगे.
धीरे-धीरे उन्होंने मेरी लुल्ली पर हाथ रख दिया और उसको हिलाने लगे.

मेरी भी लुल्ली खड़ी हो गई और मुझे बहुत अच्छा लगने लगा.
अंकल ने अपना हाथ मेरे पैंट के अन्दर डाल दिया और मेरी सिसकारी निकल गई.

थोड़ी में अंकल ने अपनी शर्ट उतारकर साइड में रख दी.
उनका सीना बालों से भरा हुआ था, जो कि मुझे अजीब सा तो लग रहा था लेकिन अच्छा लग रहा था.

अंकल ने इसी के साथ मेरी शर्ट उतारने शुरू की.

मैंने कहा- अंकल यह क्या कर रहे हो?
तो वो मुस्कुरा कर बोले- बेटा बस देखते जाओ, अभी तुम्हें बहुत कुछ मजा आने वाला है.

यह कहकर उन्होंने मेरी टी-शर्ट उतार दी और मेरा गोरा बदन देखते ही खुश होकर बोले- कितना खूबसूरत बदन है तुम्हार!
यह कहते ही उन्होंने मेरे निपल्स को चूसना शुरू कर दिया और मेरी आंखें बंद होने लगीं, मेरे मुँह से सिसकारियां निकलने लगीं.

अंकल जो कुछ भी मेरे साथ कर रहे थे, वह मेरे अन्दर की लड़की को शायद जगाता जा रहा था.

थोड़ी देर ऐसा करने के बाद अंकल ने मेरे पैंट के हुक को खोला और पैंट को खींच कर बाहर निकालने लगे.

मैंने फिर थोड़ा सा रोका लेकिन अंकल ने मेरी पैंट खींच कर बाहर निकाल दी.
अब उन्होंने मुझे खड़ा किया और पलट दिया.

उन्होंने मुझे झुकने के लिए कहा, जब मैं झुका तो उन्होंने पीछे से मेरी चड्डी भी खींच कर नीचे कर दी.
तभी उनके मुँह से आह निकल गई.

वह मेरे चिकने और गोरे भरे-भरे चूतड़ों पर हाथ फेरने लगे. मुझे मजा आने लगा.
तभी उन्होंने मेरी गांड के छेद पर अपनी जुबान रख दी और मेरी गांड के छेद को चाटने लगे.

अब मेरे भी मुँह से सिसकारी निकल गई और अंकल के मुँह से भी सिसकारी निकल रही थी.
फिर उन्होंने मेरी चड्डी पूरी तरह से निकाल कर फेंक दी और मैं पूरा नंगा उनके सामने पड़ा हुआ था.

मैंने शर्म से अपनी आंखें बंद कर लीं.

अंकल बोले- तुम्हारा गोरा चिट्टा खूबसूरत नंगा जिस्म गजब ढा रहा है.
जबकि मैं यह सोचने लगा कि मैंने आखिर खुद को नंगा होने कैसे दे दिया.

तभी अंकल खड़े हुए और उन्होंने अपने भी कपड़े उतार दिए और एक साइड में रख दिए. वो पूरी तरह से नंगे हो गए.
जब मैंने उनकी तरफ देखा तो मुझे एक अजीब सी गुदगुदी का अहसास हुआ.

अंकल का पूरा जिस्म सफेद बालों से भरा हुआ था और उनका लंड जो नीचे लटक रहा था, वह काफी बड़ा था.
लंड के नीचे काफी बड़े आकार के गुल्ले लटक रहे थे जो झांटों से भरे हुए थे.

सच बता रहा हूँ दोस्तो, आज पहली बार मुझे किसी दूसरे के लंड को देख कर सनसनी सी होने लगी थी.

अपनी गे सेक्स कहानी के अगले भाग में मैं आपको बताऊंगा कि किस तरह से मेरी कुंवारी गांड की ओपनिंग हुई.

आप मेरी इस लड़के की गांड चुदाई कहानी पर मेल जरूर करें.
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लड़के की गांड चुदाई कहानी का अगला भाग: गे स्टूडेंट वर्जिन गांड स्टोरी

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