चचेरी बहन के पिछले छेद में लंड का मजा

यह मेरी बहन की गांड की चुदाई कहानी है. मैं अपनी चचेरी बहन की चूत को बहुत बार चोद चुका था. अब मुझे उसकी गांड चुदाई का मजा लेना था. यह मौका मुझे कैसे मिला?

नमस्कार दोस्तो. मैं प्रीतम हूं. आपने मेरी पहली कहानी
चचेरी बहन की सील तोड़ी
पढ़ी होगी.

उस कहानी में मैंने आपको बताया था कि कैसे मेरी चचेरी बहन पुण्या ने मेरे फोन में भाई बहन की चुदाई वाली कहानी पढ़ ली; और मैंने उसको अपनी चूत सहलाते देख लिया.
फिर उसने अपने प्यार का इजहार किया और मैंने उसकी चूत की सील तोड़ दी.

उसके बाद जब भी हमें मौका मिलता हम लोग चुदाई करने लगे. उसकी चूत को मैंने कई बार चोदा.
और अब मैं अपनी बहन की गांड चुदाई भी करना चाहता था.

आपको मैंने अपने परिवार और सदस्यों के बारे में बता दिया था.
पुण्या का फिगर भी मैंने बताया था.
अगर आपको ये सब जानकारी नहीं है तो आप इस कहानी का पहला भाग पढ़ सकते हैं.

अब मैं आपको आगे की कहानी बताने जा रहा हूं.

मैंने पुण्या की चूत चोद चोदकर उसको और ज्यादा सेक्सी बना दिया था.
उसका फिगर और ज्यादा उभरने लगा था और उसकी गांड बहुत ज्यादा आकर्षित करने लगी थी.
अब मैं चचेरी बहन की गांड चुदाई करने के लिए जैसे तड़प रहा था.

बहुत समय मैंने इंतजार किया और एक दिन मुझे वो मौका मिला.
उस दिन उसके ननिहाल में उसकी नानी की तबियत खराब हो गयी.
उन लोगों का जाना जरूरी हो गया.

पुण्या की मम्मी यानि कि मेरी चाची और उनका बेटा दोनों ही ननिहाल जाने लगे.
पुण्या को घर पर रहना पड़ा क्योंकि उसको मेरे चाचा के लिए खाना भी बनाना था.

चूंकि उसके पापा चाची और भैया को छोड़ने जाने वाले थे तो जाते हुए वो मुझे बोलकर गये- तुम पुण्या का खयाल रखना. जब तक मैं लौटकर न आ जाऊं तुम यहीं पर रहना.

ये बात सुनकर मैं बहुत खुश हो गया था और पुण्या भी.
मैंने उसको देखकर स्माइल की तो वो भी मुस्करा कर अंदर चली गयी.

दोपहर को उसके पापा उनके बेटे और पत्नी को छोड़ने के लिए निकल गये.

उनके जाते ही हमने मेन गेट को अंदर से बंद कर लिया और फिर अंदर रूम में आ गये.

अंदर आकर हमने रूम को भी भीतर से लॉक कर लिया और उसको मैं बांहों में लेकर चूमने लगा.

कई दिनों के बाद मुझे पुण्या के जिस्म का स्पर्श मिला था.

मैंने कई दिन से मुठ भी नहीं मारी थी. इस वजह से तड़प भी ज्यादा थी और जोश भी.

मैं एक हाथ से बहन की चूचियों को जोर जोर से दबाते हुए दूसरे हाथ से उसकी गांड को सहला रहा था.

आज मैं उसकी गांड चोदने का ही मन बनाकर आया था.
वो भी मेरी गर्दन में हाथ डालकर मेरे होंठों को जोर जोर से चूस और काट रही थी.

मेरा लंड उसके सूट के ऊपर से ही उसकी चूत को छूने की कोशिश कर रहा था.

फिर मैंने उसके कमीज को ऊपर उठा दिया और उसकी ब्रा में मुंह देकर उसकी चूचियों की घाटी को चूमने लगा.
वो भी मेरे सिर को अपनी छाती में दबाने लगी.

मैंने उसकी चूचियों को ब्रा के ऊपर से ही दबाना शुरू कर दिया.
मैं आज बहुत जोश में था और मेरे हाथों की पकड़ बहुत कड़ी थी.

पुण्या कसमसा रही थी और चूचियों में हो रहे दर्द को बर्दाश्त करती जा रही थी.
उसकी चूचियों के निप्पल मटर के दाने जैसे कठोर हो गये थे जिनको दो उंगलियों के बीच में लेकर मसलने में मुझे बहुत मजा आ रहा था.

ब्रा के अंदर ही हाथों में उसके चूचुक अच्छे से महसूस हो रहे थे.

अब उसने मेरी लोअर के ऊपर से ही मेरे लंड को सहलाना शुरू कर दिया.
मेरा लौड़ा तनकर एकदम से लकड़ी के डंडे जैसे सख्त हो चुका था.
वो लंड को पकड़ कर भींच रही थी और कभी मेरे टट्टों को छेड़ रही थी.

कुछ देर उसकी चूचियों को दबाने और मसलने के बाद मैंने उसके कुर्ते को निकलवा दिया.
फिर उसको बांहों में लिया और उसकी गांड को दबाते हुए उसको किस करने लगा.

अब तक पुण्या काफी गर्म हो चुकी थी और वो मेरे बदन से एकदम चिपकने की कोशिश कर रही थी.
मैंने उसकी ब्रा के हुक खोल दिये और उसको बेड पर पटक लिया.

उसकी ब्रा को उतार कर मैंने एक तरफ फेंका और उसकी नंगी चूचियों पर टूट पड़ा.

मैं जोर जोर से उसकी चूचियों को दबाते हुए पीने लगा.
वो सिसकारियां भरने लगी.

उसके निप्पल एकदम तनकर पहाड़ की नुकीली चोटी के जैसे हो गये थे.
मैंने उसके निप्पल को दांत में पकड़ कर हल्का सा काट लिया तो वो एकदम से कराह उठी.

मेरे हाथों की पकड़ बहुत तेज थी और उसकी चूचियां एकदम से लाल हो गयी थीं.
मैं फिर भी उसकी चूचियों को पीता जा रहा था.

फिर कुछ देर के बाद मेरा हाथ उसकी सलवार के ऊपर से उसकी चूत को भी सहलाने लगा.
उसकी चूत का गीलापन मुझे उसकी सलवार के ऊपर से भी महसूस हो रहा था.

मेरी बहन को चोद चोदकर मैंने एक गर्म माल बना दिया था. आज उसकी गांड चुदाई की बारी थी.

अब मैंने उसकी सलवार को उतरवा दिया और उसकी टांगों से निकाल दिया.
उसने लाल रंग की पैंटी पहनी हुई थी जो पूरी गीली होने को थी.

मैंने उसकी पैंटी पर लगे रस को सूंघा तो मेरी जीभ एकदम से निकलकर उसकी चूत को पैंटी के ऊपर से ही चाटने लगी.
उसके बदन में एक लहर सी दौड़ी और वो सिसकार उठी- आह्ह … भैया!

धीरे से फिर मैंने उसकी पैंटी को भी नीचे खींचना शुरू कर दिया और उसकी चूत को नंगी कर दिया.
उसकी चूत पूरी गीली हुई पड़ी थी.

देर न करते हुए मैंने उसकी चूत में जीभ लगाई और जोर जोर से चाटने लगा.
वो सिसिया गयी- ओह्ह … ऊईई … भैया … आह्हा … आईई … ऊह्ह … चाट लो … ओह्ह … चाट लो भैया … खा लो इसको … उईई मां … ईस्स्स … आह्ह … और जोर से।

मैं पूरी गति के साथ उसकी चूत में जीभ चला रहा था.

जब वो पूरी गर्म हो गयी तो मैंने अपने कपड़े भी उतार फेंके. मैं पूरा नंगा हो गया और उसके सामने लंड तानकर खड़ा हो गया.

वो जानती थी उसको क्या करना है.
उसकी प्यास मैंने पूरी जगा दी थी और वो सीधी मेरे लंड पर टूट पड़ी. लंड को मुंह में लेकर जोर जोर से उसको चूसने लगी जैसे कि लंड न हो कोई लॉलीपोप हो.

मैं भी लंड चुसवाने के आनंद में खो गया.
दोस्तो, मैं आपको क्या बताऊं … मेरी चचेरी बहन इतना मस्त लौड़ा चूसती है कि दो मिनट में ही आदमी खल्लास.

मगर मैं उससे बहुत बार चुसवा चुका था इसलिए मैं ज्यादा देर टिक पाता था.

काफी देर चुसवाने के बाद मैंने उसके मुंह में ही माल निकाल दिया क्योंकि मैं कंट्रोल नहीं कर पाया.

उसके बाद मैंने उसको पेट के बल लेटा लिया.
उसकी गांड अब पहले से बड़ी लग रही थी.

मैंने उसको घुटनों पर झुकने के लिए कहा. उसने अपनी गांड ऊपर उठाई और सिर को नीचे बेड पर टिका कर चूतड़ ऊपर उठा लिये.
उसकी रिसती हुई चूत और टाइट मोटी गांड मेरे सामने थी.

दोनों को ही चोदने का मन कर रहा था लेकिन आज गांड चुदाई की बारी थी.

मैं उसकी चूत को चाटने लगा क्योंकि मेरा माल निकल चुका था और लंड भी सिकुड़ चुका था.

मैं तेजी से उसकी चूत में जीभ चलाने लगा. मेरी नाक उसकी गांड में घुस गयी थी जिसकी गंध मुझे बहुत मादक लग रही थी.

आज चचेरी बहन की गांड चुदाई करके मैं उसके छेद का उद्घाटन करना चाहता था.

थोड़ी देर के बाद पुण्या की चूत ने पानी छोड़ दिया.
उसकी चूत का सारा रस मैंने पी लिया.

अब हम दोनों लेट गये और एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे. फिर धीरे धीरे वो मेरे लंड को सहलाने लगी और मैं चूत को।

दस पंद्रह मिनट की चूमा चाटी के बाद मेरा लंड फिर से तनाव में आने लगा और पुण्या भी दोबारा से गर्म होने लगी.

मैं उसके ऊपर आ गया और उसकी चूत पर लंड लगाकर रगड़ने लगा.
वो मेरी गांड को दबाने लगी और लंड को चूत में घुसवाने की जुगत करने लगी.

मैं समझ गया कि अब इसकी चूत चुदना चाह रही है.
मैंने उसकी चूत में एक ही झटके में लौड़ा घुसा दिया.

लंड अंदर घुसते ही वो मेरे से लिपट गयी और अपनी टांगें मेरी कमर पर चढ़ा दीं.

मैं उसको धीरे धीरे चोदने लगा और फिर मैंने स्पीड बढ़ा दी.
वो मदहोश हो गयी और मैंने फिर बीच में ही लंड निकाल लिया.

वो बोली- ये क्या भैया? चोदो ना?
मैं बोला- एक बार तेरी गांड चाटने का मन है मेरा!
वो बोली- पहले मेरी चूत मार लो फिर चाट लेना.
मैं बोला- नहीं, बीच में ही चाटनी है.

फिर वो खुद ही उठकर झुक गयी. मैंने उसकी गांड में मुंह लगाया और उसके चूतड़ों के बीच में मुंह देकर उसकी गांड चाटने लगा.

धीरे धीरे मेरी जीभ उसके छेद तक पहुंच गयी और छेद को चारों ओर से चाटने लगी.

वो सिसकारने लगी. उसको शायद गांड चटवाने में मजा रहा था. मैं फिर जीभ को हल्की हल्की उसकी गांड के छेद में घुसाने लगा. वो भी गांड को आगे पीछे करने लगी.

मैं बोला- लंड डाल दूं क्या इसमें?
वो बोली- मुझे डर लगता है, अगर फट गयी तो?
मैं बोला- नहीं फटेगी. आराम से करेंगे.
वो बोली- ठीक है. ट्राई कर सकते हैं.

मैंने उठकर नारियल तेल की शीशी उठाई और अपने लंड पर तेल लगाने लगा.
फिर मैंने उसकी गांड में उंगली से तेल लगाना शुरू किया.

एक बार तो वो उचकी लेकिन फिर आराम से उंगली को अंदर लेने लगी.

मैंने उसकी गांड में काफी सारा तेल लगा दिया. जब गांड अंदर से चिकनी हो गयी तो मैंने लंड का सुपारा उसकी गांड के छेद पर टिका दिया.
मैं धीरे धीरे लंड को धकेलने लगा लेकिन गांड बहुत टाइट थी.

मेरे लंड का मोटा सुपारा बहन की गांड में घुस ही नहीं पा रहा था.
मैंने फिर तेल की शीशी ली और नीचे एक कपड़ा बिछा लिया.
फिर लंड को छेद पर लगाकर ऊपर से तेल गिराने लगा और लंड के धक्के अंदर की ओर लगाने लगा.

लंड पूरा तेल में भीग गया और सुपारा हल्का सा छेद को खोलने लगा.
फिर मैंने शीशी को एक ओर रखा और उसकी गांड को थामकर एक जोर का धक्का मारा.

मेरा लंड एकदम से उसकी गांड में सरक गया और उसकी चीख निकल गयी.
मैं उसके ऊपर झुक गया और उसकी पीठ को चूमते हुए उसकी चूचियों को सहलाने लगा.
वो दर्द से बिलबिलाने लगी.

मगर अब लंड अंदर घुस चुका था. कुछ देर तक मैं लंड को अंदर ही घुसाए हुए डटा रहा. फिर मैंने इतने ही लंड को धीरे धीरे आगे पीछे करना शुरू किया.

थोड़ी देर के बाद उसका दर्द कम होना शुरू हो गया. उसने मेरा साथ देना शुरू कर दिया.

अब मैं हर धक्के के साथ हल्का सा लंड को अंदर कर देता था.
हर धक्के के साथ उसकी हल्की चीख निकल जाती थी.

ऐसे ही करते करते मैंने उसकी गांड को चोदना शुरू कर दिया.

कुछ देर के बाद उसको गांड चुदाई करवाने में मजा आने लगा.
मैं अब धक्के तेज करने लगा और वो फिर से कराहने लगी.

मगर अब मैं अपनी गति को बनाये हुए उसकी गांड को चोदता रहा.

मेरी बहन की गांड इतनी टाइट थी कि लंड पूरा छिलने को हो गया था.
उसकी गोरी और मोटी गांड में जब धक्का लगता था तो वो पूरी हिल जाती थी.

चचेरी बहन की गांड चुदाई करते हुए मेरी जांघें जब उसके चूतड़ों से टकरा रही थीं तो फट फट की आवाज हो रही थी.
ये आवाज इतनी उत्तेजक थी कि अचानक से चुदाई की स्पीड तेज हो गयी.

अब और जोर से धक्के लगने लगे और वो दर्द के साथ सिसकारने लगी- आह्ह … भैया … ओह्ह भैया … ऊईई … आह्ह … मर गयी … आराम से भैया … आआ … आआआ … आह्ह … धीरे … ईईह्ह … ऊह्ह .. ओह्हह … धीरे करो … धीरे करो भैया.

मैं बिना उसकी बात पर ध्यान दिये बहन की गांड चोदता रहा. अब मैंने उसकी पीठ पर झुककर उसकी चूचियों को दोनों हाथों में ले लिया और उसको बेड पर लेटा लिया.

अब मैं जोर जोर से लंड को अंदर बाहर करने लगा.
उसके चूतड़ों की दरार में मेरा लंड रगड़ रगड़ कर छेद को चौड़ा कर रहा था.

अब मैं अपने पूरे उफान पर था. मेरा माल बस निकलने की कगार पर था.
दो-चार मिनट तक मैंने उसी स्पीड से धक्के लगाये और फिर बहन की गांड में ही झड़ने लगा.
मेरा सारा माल उसकी गांड में चला गया.

वो भी बेसुध सी हो चुकी थी और मैं भी उस पर निढाल हो गया.

उसके बाद जब मैंने लंड को निकाला तो उसकी गांड से मेरे लंड पर खून लग गया था.
थोड़ा सा खून उसके छेद पर भी लग गया था. मैंने उसे कपड़े से पौंछ दिया.

फिर हम दोनों साथ में चिपक कर लेट गये.
शाम तक हम नंगे ही लेटे रहे. मैं भी सो गया और वो भी.

फिर जब हम उठे तो मैंने समय देखा. पांच बज गये थे.
मैं उठकर कपड़े पहन ही रहा था कि बाहर का मौसम देखा जो खराब हो चुका था.

अब तक उसके पापा नहीं आये थे. मैंने उससे कहा कि फोन करके पूछ ले.
वो बात करने के लिए उठी तो उससे पहले ही चाचा का फोन आ गया. वो कहने लगे कि मौसम खराब हो गया है और वो आज नहीं आ पायेंगे.

अब रात को भी मुझे वहीं पर रुकना था क्योंकि पुण्या अकेली नहीं रह सकती थी.

मैं बोला- ठीक है अंकल, मैं रात को यहीं रुक जाऊंगा. आप टेन्शन न लेना. मैं पूरा ध्यान रखूंगा यहां.
ये बोलकर मैंने फोन रख दिया.

उसके बाद में बहुत खुश हुआ क्योंकि रात को मैं और पुण्या ही रहेंगे.

यह बात मैंने पुण्या को बताई तो वह भी खुश हो गई।

उसके बाद वह बोली- जल्दी से खाना बनाकर खा लेते हैं. उसके बाद मैं एक सरप्राइज दूंगी।
मैंने कहा- ठीक है.
फिर उसके बाद वह खाना बनाने चली गई.

हमने साथ में खाना खाया. उसको मैंने अपनी गोद में लेकर खाना खिलाया.
वह मुझे खिलाती रही और मैं उसे.
मैंने उसके मुंह से खाना खाया।

उसके बाद वह सरप्राइज की तैयारी करने चली गई.
मुझे नहीं पता था कि वो क्या सरप्राइज देने वाली थी.

उसने मुझे दूसरे रूम में जाने के लिए कह दिया. मैं भी चला गया.

दोस्तो, फिर पुण्या ने मुझे क्या सरप्राइज दिया वो मैं आपको अपनी कहानी में अगले भाग में बताऊंगा.

पको मेरी चचेरी बहन की गांड चुदाई की ये कहानी कैसी लगी इसके बारे में जरूर अपनी राय देना.
मैं आपके कमेंट का इंतजार करूंगा.