पड़ोसी लड़कियों की छोटी गांड चुदाई का मौक़ा मिला- 1

गर्ल हिंदी एनल फक़ स्टोरी में पढ़ें कि हम पड़ोसी लड़के लड़कियां साथ साथ खेलते थे. एक दिन मैं उनके घर गया तो ऊपर वाले कमरे में पड़ोसी लड़की को नंगी गांड करके घोड़ी बनी देखा.

दोस्तो,
मेरी पिछली कहानी
पड़ोसन भाभी के बाद उसकी कुंवारी ननद
आपने पढ़ी और पसंद की, धन्यवाद.

ये सेक्स कहानी कई साल पहले की है. उस वक्त की धुंधली यादें आज भी मेरे मन-मष्तिष्क पर उभर आती हैं.

काफी दिन तक सोचने के बाद अब उस घटना को एक सेक्स कहानी के रूप में लिख कर आपके सामने पेश कर रहा हूँ.
आप सेक्स कहानी का मजा लीजिए.

इस Girl Hindi Anal Fuck Story के पात्रों को एक बार समझ लीजिए.

मैं निक्कू, मेरी दो बहनें सोनी और मोनी, मेरे मम्मी पापा.
सामने के घर में से कल्लू व उसकी बहन सपना.
ठीक बराबर के घर में माही व निकिता.

ये कहानी 1990 के आस पास के शाहदरा की तब की है जब हमारा घर गली के बिल्कुल आखिर में था.
उसके बाद काफी सारे खाली प्लॉट थे जिनमें आवारा जानवर घूमते रहते थे.

हम सबके परिवार दिल्ली के पास के गांवों से आए थे तो हमें बचपन में खेलने के लिए बहुत समय व बहुत सारे खेल मिले.

हम सब बचपन से ही डॉक्टर, हाइड सीक, साइकिल के टायर कैसे खेल खेला करते थे.

अब बचपन साथ बीता, तो जवानी भी साथ ही आनी थी.

बीसवीं सदी खत्म होने को आ गई थी और हम सब जवान होने लगे थे.
उस समय तक इंटरनेट और वीडियो गेम ज्यादा प्रचलित नहीं थे. टीवी में भी शक्तिमान, चंद्रमुखी, चित्रहार, या संडे वाली फिल्म ही सब देखते थे वरना सब साथ में ही खेलते थे.

हमारे सबके पापा नौकरीपेशा थे तो वो सब दिल्ली में अपनी नौकरी करने निकल जाते थे.
मम्मी घर के काम करने में जुटी रहतीं और काम के बाद समय मिलते ही पड़ोस में एक दूसरे के साथ बैठ कर बात करने लगती थीं.

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उनकी बातों को सब लोग चुगली करना भी कहते हैं.

हम सब जवान हो गए थे, सबके जिस्म में जवानी भरने लगी थी.
लड़कियों के दूध फूल गए थे और मेरे और कल्लू के लंड, चूत गांड चोदने लायक हो गए थे

इसके साथ ही हम सबका रिश्ता अभी भी दोस्ती वाला था.

गर्मी की छुट्टी चल रही थी तो कल्लू के मामा के बच्चे सौरभ और सुचित्रा आए हुए थे.
हम उनको भी बचपन से जानते थे, उनके साथ भी काफी घुल मिल कर रहते थे.

वैसे तो सब सुचित्रा को सुची कहते थे, पर हम सब दोस्त मजाक में सुची को लुच्ची कहते थे.

हम सब हमउम्र थे, पर सुची हम सबमें सबसे बड़ी उम्र की थी.

एक दिन की बात है मेरा टाइमपास नहीं हो रहा था. इसकी वजह से कुछ खेलने के लिए मैंने अपनी बहनों को ढूंढा तो वो मुझे नहीं मिलीं.

फिर मैं पड़ोस में माही और निकिता के घर गया तो वहां पर पता चला कि वो सब खेलने के लिए कल्लू के घर गई हैं.

मैं भी कल्लू के घर चला गया.

वहां सब आंटी लोग बैठ कर बातें रही थीं.
मैंने पूछा कि कल्लू वगैरह सब कहां खेल रहे हैं.

तो कल्लू की मम्मी ने ऊपर छत की तरफ इशारा कर दिया.
मैं छत पर आ गया.

वहां दो कमरे थे और आगे की तरफ बहुत सारे गमले रखे थे, जिनमें फूल और पौधे लगे थे.
दोनों कमरे बंद थे, पर एक कमरे में से कुछ आवाज आ रही थी.

तब मैंने खिड़की से झांक कर देखा, तो नजारा देखने लायक था.

उस कमरे में मेरी दोनों बहनें मोनी, सोनी, कल्लू उसकी बहन सपना, सुची व पड़ोस की लड़की माही व नितिका सब खेल रहे थे.
खेल कौन सा था, ये जानकर आपको मजा आ जाएगा.

मेरी बहन सोनी अपनी सलवार को नीचे करके घोड़ी बनी हुई थी और कल्लू पीछे से अपना लंड उसकी गांड में डाल कर धक्के लगा रहा था.
बाकी सब लोग उन दोनों को बड़े ध्यान से देख रहे थे.

तभी सुची ने कहा- अब मेरा नंबर …
तो सोनी हट गई और सुची अपनी सलवार उतार कर घोड़ी बन गई.

फिर कल्लू ने पीछे से लंड उसकी गांड के अन्दर डाल दिया और उसकी गांड मारने लगा.
मुझे ये सब देख कर बड़ा गुस्सा आया.
पर इन सबको मस्ती करता देख, मेरा भी मन हुआ.

मैंने अपनी बहन को दरवाजा खोलने को कहा.

मुझे आया जानकर कमरे के अन्दर एकदम से हड़बड़ी मच गई और सुची ने जल्दी से अपनी सलवार पहन ली.
कल्लू ने भी अपनी निक्कर ऊपर की और तभी मेरी बहन ने दरवाजा खोल दिया.

मैं अपना गुस्सा छोड़ मुस्कुराते हुए अन्दर गया और बोला- मुझे भी खेलना है.
वो सब डर कर चुप हो गए.

तब सुची ने हिम्मत करते हुए कहा- अभी तो हम छुपम छुपाई खेलने वाले हैं, तुम भी खेल लो.
मेरे मन में तो वो गांड मारने वाला खेल गर्ल एनल फक़ ही चल रहा था.
पर मैं चुप रहा और हम सब हाइड सीक खेल कर वापस घर आ गए.

रात को मम्मी पापा के सोने के बाद मैंने सोनी को उठाया और उस खेल के बारे में पूछा.
वो बोली- वो सुची ने बताया था कि कैसे खेलना होता है. उसने अपने भाई के साथ वो खेल बहुत बार खेला भी है.

मैंने कहा- मुझे भी खेलना है.
वो बोली- मम्मी पापा को मत बताना.

मैंने हां बोल दिया तो सोनी बोली- कल दिन में खेलेंगे, अभी तो रात को मम्मी देख लेंगी.
मैंने कहा- नीचे चलते हैं, वहां बाथरूम में थोड़ी देर खेलेंगे.

सोनी मान गई और हम दोनों छत से नीचे आ गए.

सोनी बाथरूम की बजाए कमरे में जाने लगी.
मैंने कहा- क्या हुआ?

तब वो बोली कि बाथरूम में अच्छा नहीं लगेगा. इधर कमरे में आ जा.
हम दोनों कमरे में चले गए.

सोनी ने अपनी सलवार उतार दी और पैंटी भी घुटनों तक उतार कर वो बेड पर हाथ रख कर घोड़ी बन गई.

मैंने अपना लोअर नीचे खींच कर लंड बाहर निकाला और सोनी की गांड के छेद में डालने लगा.
लंड अन्दर नहीं घुस रहा था.

सोनी बोली- जल्दी करो न!
मैंने जोर का धक्का दिया तो मेरा थोड़ा सा लंड अन्दर घुस गया.
जिससे उसको दर्द हुआ और वो ‘आह मम्मी …’ बोल कर खड़ी हो गई.

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अब वो मेरा लंड देखने लगी.
सोनी- तेरा तो बहुत मोटा है, इससे दर्द हो रहा है. अब मैं नहीं करूंगी.

मैं- कल्लू के साथ तो खेल रही थी.
सोनी- उसका छोटा सा है, उससे दर्द नहीं होता. वैसे भी कल्लू मुझसे उम्र में छोटा था.

तब मैंने सोनी को बहुत मनाया पर वो नहीं मानी और वापस ऊपर चली गई.

अगले दिन जब दोपहर में कल्लू के घर खेलने गए तो वहां कल्लू, सपना, सौरभ, सुची थे क्योंकि माही और निकिता अपनी मम्मी के साथ अपने मामा के यहां चली गई थीं.

अब फिर से हम सब छत पर खेलने गए.
सोनी ने सुची को रात वाली बात बताई तो वो लुच्ची मुस्कुरा रही थी.

हम सब हाइड सीक खेलने लगे.
मेरी बहन मोनी को हम सबको ढूंढना था. वो नीचे की तरफ सीढ़ियों पर खड़ी होकर एक से दस तक गिनने लगी और हम सब छुपने लगे.

लुच्ची मेरे पास आकर छुप गई और मेरी शॉर्ट्स के ऊपर हाथ फेरने लगी.
कमरे में ज्यादा रोशनी नहीं थी और हम दोनों एक संदूक के पीछे छुपे थे.

मैं बोला- ये क्या कर रही हो?
तो लुच्ची बोली- रात को तुमने सोनी के साथ खेला था ना … वो ही खेल खेलना है.

मैं बोला- सबको बुला लो.
सुची बोली- नहीं, सौरभ को पता चल गया तो वो साला मम्मी को बता देगा. उसने पहली भी मेरी पिटाई करवाई है.

मैं- तो तुम अकेली खेलोगी?
सुची- हां. मैं और तुम दोनों ही खेलेंगे. बाद में तुम जिसके साथ बोलोगे, उसी के साथ कर लेना.

मैंने उसकी बात को न समझ पाने जैसा मुँह बनाया.

वो बोली- मैंने सोनी और सपना को भी बता दिया कि तुम्हारा बड़ा है तो ज्यादा मजा आएगा.
मैं- पर रात को सोनी ने तो मना कर दिया था!

सुची- एक दो बार करने से थोड़ा दर्द होता है, फिर तो मजा ही मजा आता है. बस तुम धीरे धीरे से डालना और थूक लगा कर चिकना कर लेना.

मैंने अपना लंड निकाल कर सुची को दिखाया तो वो साली लुच्ची लंड देख कर एकदम मस्त हो गई और मेरे लंड को पकड़ कर सहलाने लगी.
उसने अपनी सलवार नीचे खींच दी और घोड़ी की तरह झुक गई.

मैंने पीछे से लंड उसकी गांड में डाल दिया तो वो आह मम्मी की आवाज करने लगी.
उसके पास में छुपी सपना हमारे पास आई और बोली- क्या हुआ?

मैंने सपना को देख कर लंड गांड से बाहर निकाल कर छुपा लिया.
सुची बोली- हम दोनों वो ही खेल खेल रहे हैं. चुप हो जा, वर्ना सौरभ आ जाएगा.

सपना बोली- वो तो सीढ़ियों पर गया है. अबकी बार हमें उसी को ढूंढना है.
लुच्ची बोली- तू इधर ही छुप जा, सौरभ इधर आए तो बता देना. हम छुप के खेल का मजा ले रहे हैं.

सपना चली गई और वो लुच्ची फिर से घोड़ी बन गई.
मैंने भी अपना लंड उसकी गांड के सुराख में घुसा दिया. वो अब शोर नहीं मचा रही थी.
मैं धीरे धीरे से धक्के लगाने लगा और वो भी गांड में रगड़ लगने से मजे ले रही थी.

हम काफी देर तक ऐसे ही गांड में रगड़ कर मजे लेते रहे.
फिर मेरा पानी निकल गया और मैं रुक गया.

लुच्ची ने भी उधर पड़े एक कपड़े से अपनी गांड पौंछ ली और सलवार पहन ली.

अब सपना मेरे पास आई और बोली- मुझे भी खेलना है.
सुची बोली- उसका रस निकल गया है. बाद में खेल लेना.

सपना बोली- कल भी सोनी और सुची ने ही खेला था, मेरा तो नंबर भी नहीं आया था.
मैं बोला- कल मैं पक्का तेरे साथ खेलूंगा.

सपना बोली- मुझे तो अभी खेलना है वरना मैं मम्मी को बता दूंगी.
अब मेरी फट गई, पर सबसे ज्यादा सुची डर गई.

वो बोली- तुम किसी को कुछ मत बताना बस थोड़ी देर रुक जा … मैं कुछ करती हूं.
उसने कल्लू को ढूंढा, पर वो सौरभ के साथ छुपा हुआ था.

कुछ देर बाद हम सब को ढूंढने का मेरी छोटी बहन मोनी का नम्बर आ गया था.
सुची मेरे पास आई और मेरे शॉर्ट्स को नीचे करने को बोली.

मैंने अपना शॉर्ट्स नीचे कर लंड बाहर निकाल दिया, पर अब लंड में तनाव नहीं था … वो छोटा सा हो गया था.
लुच्ची ने हाथ में लंड पकड़ा और हिलाने लगी. वो मेरे लंड की खाल को खींच कर देखने लगी.

इससे मुझे अच्छा लगा और फिर से मेरे लंड में तनाव आ गया.
सुची ने लंड कड़क होते हुए देखा और सपना को इशारे से बुला लिया.

उसने कहा- सपना, अब तुम खेल लो.
सपना एकदम से खुश हो गई और अपनी स्कर्ट उठा कर पैंटी नीचे करके घोड़ी बन गई.

मैंने भी अपना लंड उसकी गांड के सुराख पर लगाया और जोर देते हुए अन्दर डालने लगा.

पर उसकी गांड का छेद छोटा था तो लंड नहीं घुस रहा था.
वो बोली- डाल दो अन्दर … बाहर क्यों रगड़ रहे हो.

मैंने थोड़ा थूक लंड पर गिराया और लंड की टोपी को चिकना कर लिया.

फिर सपना के छेद पर रखा और अन्दर डाल दिया.
अभी मेरे लंड का टोपा सपना की गांड में घुसा ही था कि वो चीख पड़ी और आगे को भाग गई.

पास खड़ी लुच्ची हमारे पास आई और वो बोली- साली कुतिया, इतना जोर से क्यों चीख रही है, कोई आ जाएगा.
सपना बोली- दर्द हुआ तो चीखी.

मैंने देखा कि मेरी छोटी बहन मोनी उधर आ रही थी.
तो मैंने सबको बताया कि मोनी इधर आ रही है.
सपना ने अपनी पैंटी पहन ली.

मोनी- क्या हुआ, शोर किसने मचाया?
मैं- सपना फिसल कर गिर गई थी, तो वो चीख पड़ी थी.

मोनी चुप हो गई और हम सभी ने सपना को चुप कराया.

दोस्तो, गर्ल एनल फक़ स्टोरी के अगले भाग में मैं आपको आगे की कहानी सुनाऊंगा.
आप कमेंट्स में अपनी राय बताइयेगा.

गर्ल हिंदी एनल फक़ स्टोरी का अगला भाग: गांड चुदाई का खेल

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