हनीमून पर होटल में बीवी की गांड फाड़ी

फर्स्ट ऐनल सेक्स कहानी में पढ़ें कि अपनी दुल्हन की चूत की खूब चुद्फई करने के बाद मेरा मन उसकी गांड की सील तोड़ने का था. मैं अपने इरादे में कैसे कामयाब हुआ?

फ्रेंड्स, मैं राजेश शर्मा, नागपुर पुनः आपके सामने अपनी दूसरी कहानी के साथ हाजिर हूँ.
आपने मेरी पहली सेक्स कहानी
मैंने अपनी दुल्हन के साथ सुहागरात मनाई
में अभी तक आपने पढ़ा कि मैंने अपनी सुहागरात कैसे मनाई और अपनी बीवी से लंड कैसे चुसवाया.

अब आगे First Anal Sex Kahani:

तीसरे दिन भी मैं देर तक सोता रहा.
सुबह 9 बजे रागिनी ने आकर मुझे उठाया.
वो नहाकर आई थी, उसके बाल गीले थे.

मैंने उसे खींच लिया और चूमने लगा.

फिर मैंने नीचे आकर चाय पी और नहाकर अपने दोस्तों से मिलने चला गया.

दोपहर में सबके साथ लंच किया और कमरे में तैयारी करने चला गया.
हमें हनीमून मनाने के लिए महाबलेश्वर जाना था.

थोड़ी देर में रागिनी आ गई और हमने साथ में ही सफर की तैयारी की.

महाबलेश्वर के होटल में चेक-इन करते ही हमने खाने का आर्डर दिया और साथ में नहाने चल दिए.

खाना खाने के बाद दोनों पूरे नंगे हो गए, फिर वही चुम्मा-चाटी शुरू हो गई.

आज हम घर से बाहर होने के कारण रागिनी भी ज्यादा खुलकर मुझे चूम रही थी.

एक दूसरे को चूमते-चूमते हम फिर से 69 की पोजीशन में आ गए.
आज उसने मेरा लंड मुँह में लेने में ज्यादा संकोच नहीं किया.

थोड़ी देर इस पोजीशन में रहने के बाद मैंने उसे बिस्तर पर नीचे लिटा दिया और एक तकिया उसकी गांड के नीचे लगा दिया जिससे उसकी चूत उभरकर ऊपर की ओर आ गई.

अब मैंने अपने लंड को उसकी चूत के छेद पर रखा और एक ही झटके में अपने लंड को उसकी चूत में डाल दिया.
उसे दर्द भी हुआ और अच्छा भी लगा.

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अब मैं उसे जोर-जोर से चोदने लगा.
न जाने क्यों आज मैं भी निसंकोच होकर पूरी ताकत से रागिनी को चोद रहा था.
और उसे भी शायद ज्यादा मजा आ रहा था क्योंकि वह भी नीचे से गांड उठाकर धक्के दे रही थी.

उसके नाखून मेरी पीठ में गड़ रहे थे लेकिन मुझे यह उस समय पता ही नहीं चला.

कुछ ही देर में उसका शरीर अकड़ने लगा.
मैंने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी और हम दोनों ही झड़ गए और उसी स्थिति में पड़े रहे.

उठने के बाद हम नहाकर बाहर घूमने चले गए.
रात में नीचे होटल के रेस्टोरेंट में खाना खाकर ही ऊपर कमरे में गए.

कमरे में जाते ही रागिनी प्यार भरी नजरों से मुझे देखने लगी.

मैंने पूछा- क्या बात है, बड़ी रोमांटिक मूड में हो?
वह बोली- हां जानू, मैंने सोचा भी नहीं था कि तुम मुझे इतना प्यार करोगे.

मैंने उसे अपने आगोश में ले लिया और चूमने लगा.
हम दोनों ने एक दूसरे के कपड़े उतार दिए और पूरे नंगे हो गए.

आज मेरे मन में कुछ और चल रहा था. अब रागिनी भी थोड़ी फ्री हो गई थी.
मैंने उसके होंठ, गर्दन, पीठ, बूब्स, निप्पल को चूसना शुरू कर दिया.

थोड़ी ही देर में वो गर्म हो गई और लंड को जोर से पकड़ने लगी.
कुछ ही देर में हमने 69 की पोजीशन ले ली और एक दूसरे को बुरी तरह से चाटने, चूसने लगे.

थोड़ी देर में मैंने उसे घोड़ी बनने के लिए कहा और पीछे से चोदने लगा.
वहीं मैंने देखा कि उसकी गांड का छेद तो बहुत ही छोटा है.

तब मैंने उसकी गांड को सहलाना और दबाना शुरू कर दिया और उसके छेद में धीरे से एक उंगली डाल दी.
वह एकदम से उचक गई, वो घबरा कर बोलने लगी- वहां कुछ मत करना.

लेकिन मैंने उसकी गांड में उंगली डालना शुरू ही रखा.
इस पोजीशन में चुदाई करने का अलग ही मजा आ रहा था.

मैंने अब एक हाथ से उसके कंधे को पकड़ लिया और दूसरे हाथ से उसका बूब दबाने लगा.
इससे मुझे जोर से झटके लगाने में आसानी हो गई थी.

इस तरह की चुदाई से रागिनी का शरीर अकड़ने लगा और वो झड़ने लगी.
मैंने और तेजी से धक्के मारने शुरू कर दिए और कुछ ही देर में मैं भी झड़ गया और बिना सफाई किए हम दोनों वैसे ही एक दूसरे से चिपककर सो गए.

रात में नींद खुली तो देखा रागिनी निश्चिंत होकर बेसुध सो रही है.
मेरे मन का शैतान जाग गया. मैंने उसे चूमना शुरू कर दिया.

वो कसमसाई, उसकी नींद खुल गई.
मैं उसे चाटता ही रहा.

उसके उठने के बाद भी मैं उसके बूब्स दबाता रहा, चूसता रहा, उसके दोनों निप्पलों को चूसता, चाटता और काटता रहा.

धीरे धीरे वो गर्म हो गई.
उसने मेरे लंड को जोर से पकड़ लिया और उसे हिलाने लग गई.

मैंने उसको पलट दिया और उसकी गर्दन, कंधे, पीठ, कमर और गांड को चूसता और चाटता रहा.
उसकी गांड को मैंने जोर-जोर से दबाया और चार पांच जगह दांतों से काटा भी.

हर बार वो सिहर जाती थी.
उसे भी मजा आ रहा था.

मैं नीचे उसकी जांघों को चाटने लगा.

फिर मैंने उसे पलट दिया.
अब मैं उसके पेट और नाभि को चाट रहा था.

वो बार-बार अपनी हथेलियों में मेरे चेहरे को भरकर सहला रही थी.
उसके हाथों के कंपन से उसकी उत्तेजना का पता चल रहा था.

बाद में वो उत्तेजित होकर बैठ गई और मेरा लंड चूसने लगी.

मैंने प्यार से उसे उठाया और अपने आगोश में ले लिया और उसके होंठों को चूसने लगा.

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मैंने कहा- रागिनी, तुम मुझे कितना प्यार करती हो!
वह बोली- बहुत ज्यादा.

मैंने कहा- मेरा कहा मानोगी?
उसने हां कहा.

तब मैंने कहा- आज मुझे तुम्हारी गांड मारनी है.
वो एकदम घबरा गई और मना करने लगी.

मैं उसे समझा रहा था कि ज्यादा दर्द नहीं होगा.
फिर मैंने उसे सुहागरात की चूत चुदाई की याद दिलाई कि दर्द तो वहां भी हुआ था, लेकिन अब मजा आता है ना.

थोड़ी ना-नुकुर के बाद वो मान गई लेकिन दर्द होने पर तुरंत लंड निकाल लेने की शर्त पर!

इसीलिए मैंने कोल्डक्रीम लेकर उसकी गांड में अन्दर बाहर तक अच्छे से लगाई.
बाद में क्रीम को अपने लंड पर भी अच्छे से लगाया.

क्रीम लगाते समय ही मुझे अहसास हो गया था कि उसकी गांड का छेद छोटा है.

मैंने उसे घोड़ी बनने को कहा.
वह बहुत घबराई हुई थी.

मैंने उसकी गांड को चाटना शुरू कर दिया.

उसकी घबराहट को दूर करने के लिए मैंने उसकी गांड को फैलाकर उसे रिलैक्स होने को कहा. उसके रिलैक्स होने के बाद अपना लंड उसकी गांड के छेद पर रखकर धीरे धीरे दबाने लगा.

इस दबाव से और क्रीम के कारण मेरे लंड का सुपारा उसकी गांड में घुस गया.
उसे दर्द हुआ.

वो चिल्लाए, इसके पहले ही मैंने अपने एक हाथ से उसका मुँह बंद कर दिया.
वो दर्द के कारण कसमसा रही थी, मैं दूसरे हाथ से उसका बूब दबा रहा था.

मैंने सोचा कि यदि इसने एक बार लंड बाहर निकाल लिया तो फिर ये उसे वापस गांड में डालने ही नहीं देगी इसलिए मैंने अपनी पकड़ मजबूत करते हुए एक जोरदार झटका मारकर आधे से ज्यादा लंड को उसकी गांड में घुसा दिया.

वो तड़फ गई और छटपटा रही थी.
इसी छटपटाहट में मैं उसके ऊपर गिर पड़ा.

वो मेरे चंगुल से छूटने का प्रयास कर रही थी लेकिन मैंने उसको दबाये रखा और उसकी गर्दन, गाल और कान चूमता रहा. एक हाथ से बूब दबाता रहा.

उसकी गांड फट चुकी थी लेकिन मेरा लंड अभी भी दो-ढाई इंच बाहर था.
हम वैसी ही स्थिति में पड़े रहे.

थोड़ी देर में वो शांत हुई तो मैंने बड़े प्यार से उसे घोड़ी वाली पोजीशन में लाकर धीरे-धीरे वहीं पर धक्के मारना शुरू किया.

इस प्रयास से उसके दर्द में बढ़ोतरी न होने से वो और रिलैक्स हुई तो मैंने धक्कों को थोड़ा बढ़ाया.
इन बड़े हुए धक्कों को भी उसने सहन कर लिया तो मैंने मौका देखकर एक जोरदार झटके से अपना पूरा लंड उसकी गांड में डाल दिया.

इस बार वो थोड़ा ही चिल्लाई और अपने होंठों को भींचकर अपने दर्द को सहन करने लगी.
उसकी आंखों में आंसू आ गए थे, वो दर्द के कारण कराह रही थी.

सही में उसके शरीर की तुलना में उसकी गांड का छेद कुछ ज्यादा ही छोटा था.
मुझे मेरे लंड को अन्दर बाहर करने में तकलीफ हो रही थी.
शायद कहीं न कहीं लंड भी छिल गया था.

मैं उसकी गांड चोदता रहा और अगले पांच मिनट में ही मेरा वीर्य उसकी गांड में ही निकल गया.

उसकी गांड फट चुकी थी और उसमें से खून निकल रहा था.

इतना चोदने के बाद वो निश्चल सी पेट के बल बिस्तर पर लेटी रही.
मैं उसे ऊपर से नीचे तक चूमता रहा.

तभी वो बाथरूम जाने के लिए उठी लेकिन लड़खड़ाकर बैठ गई.

मैं उसे पकड़कर बाथरूम में ले गया.

Xxx फर्स्ट ऐनल सेक्स के कारण वो ठीक से चल नहीं पा रही थी. वो चुप थी लेकिन उसकी आंखों में मेरे लिए गुस्सा भी था.

बाथरूम में मैंने उसकी गांड और चूत को गर्म पानी से बहुत देर तक सेंका.
उसे अच्छा लगा.

बाद में उसे बिस्तर पर बैठाकर मैंने दर्द की दवा दी, उसे पुचकारते हुए सुला दिया और मैं भी सो गया.

दूसरे दिन हम दोनों ही देर तक सोते रहे.

उठने के बाद रागिनी मुझसे थोड़ी नाराज थी क्योंकि मैंने उसकी गांड जो फाड़कर रख दी थी.

दवा के कारण उसका दर्द काफी कम हो गया था.

हमने एक साथ स्नान किया और मैंने फिर से उसकी चूत और गांड को गर्म पानी से अच्छे से सेंका जिससे उसे अच्छा लगा और वह नॉर्मल हो गई.

हमने दोपहर का खाना होटल के रेस्टोरेंट में ही खाया और घूमने चले गए.

आज मैं रागिनी से बहुत ही नरमी से पेश आ रहा था.
मुझे पता था कि उसकी गांड फाड़कर मैंने अच्छी शुरूआत नहीं की थी.
अब मुझे उसे नॉर्मल मूड में ही रखना था.

होटल में आने के बाद भी मैं शांत बैठा था.
तभी वो मेरे पास चलकर आई और बड़े प्यार से मेरे सिर के बालों में हाथ फेरते हुए बोली- क्यों, क्या हो गया … एकदम चुपचाप से क्यों हो गए हो. क्या आज प्यार नहीं करोगे?

मैंने उठकर उसे अपनी बांहों में भर लिया और चूमते हुए कहा- रागी, कल मेरे से गलती हो गई है. मुझे तुम्हारी गांड नहीं मारनी चाहिये थी.

उसने कहा- जो हो गया, सो हो गया. आओ अब प्यार करो.
मैंने खड़े-खड़े ही उसके होंठों को, गर्दन को, बूब्स को चूमना शुरू कर दिया.

उसने भी मेरी चुम्मियों का उत्तर देते हुए अपने हाथों से खुद को और मुझको नंगा कर दिया.

अब तो मैं उसके ऊपर से नीचे तक बस चूमते ही जा रहा था और वह सिसकारियां लेती जा रही थी.

उसने एक हाथ से मेरे लंड को पकड़ लिया था और उसे आगे-पीछे करती जा रही थी.

मैंने जब देखा कि वो पूरी तरह से गर्म हो गई है, तब मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी गांड के नीचे तकिया लगा दिया, जिससे उसकी चूत और उभरकर सामने आ गई.

मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर लगाया और एक ही झटके में अन्दर डाल दिया.
उसे दर्द तो हुआ लेकिन उसने दोनों होंठों को भींचकर उसे सह लिया.

मैंने धीरे से धक्के लगाना शुरू कर दिया.
अब उसे भी आनन्द आ रहा था, वो सिसकारियां ले रही थी.

मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी, वो नीचे से अपनी गांड उठाकर पूरे लंड को अपनी चूत में ले रही थी.
हम दोनों ही चुदाई का भरपूर आनन्द ले रहे थे.

अचानक ही उसका बदन अकड़ने लगा, वो जोर से उछलने लगी और झड़ गई.

मैं रुका नहीं बल्कि अपनी स्पीड बढ़ा दी जिससे मैं भी कुछ झटकों के बाद झड़ गया और रागिनी के ऊपर ही लेट गया.

काफी देर तक इसी स्थिति में रहने से वो नींद के आगोश में जाने लगी थी लेकिन मेरा मन अभी भरा नहीं था.

मैंने उसके बालों को सहलाना शुरू कर दिया और उसके होंठों, गालों को कोमलता से चूमने लगा.

वो मुस्कुरा रही थी लेकिन उसे नींद भी आ रही थी.

मैं नीचे सरकते हुए उसके बूब्स को चूसने लगा, दूसरे हाथ से मैंने उसके निप्पलों को दबाना और मसलना भी शुरू कर दिया.

अब वो भी मजा लेने लग गई थी.
उसने अपने हाथ से मेरे लंड को सहलाना शुरू कर दिया.
लंड फनफनाकर खड़ा हो गया.

मैं मुँह से बूब चूस रहा था, एक हाथ से निप्पल मसल रहा था और दूसरे हाथ से उसकी चूत सहला रहा था.
उसकी चूत पनिया गई थी.

अचानक उसने मुझे रुकने के लिए कहा, मैं असमंजस में पड़ गया.

तभी उसने मुझे नीचे लेटने को कहा और मेरे ऊपर बैठकर पूरे लंड को धीरे से अपनी चूत में घुसा लिया.
अब वो ऊपर-नीचे होकर झटके मार रही थी.

इस पोजीशन में हम दोनों को ही अधिक मजा आ रहा था.
एक तरह से आज रागिनी मुझे चोद रही थी.

मेरे लिए ये एक नया अनुभव था.

वो उचक-उचककर मेरे लंड को अपनी चूत में अन्दर-बाहर कर रही थी.
उचकने के कारण उसके बूब्स भी बाउंस हो रहे थे, मैंने दोनों हाथों से उसके बूब्स पकड़ लिए थे और उन्हें दबाता जा रहा था.
उसे भी इस पोजीशन में मजा आ रहा था.

सात-आठ मिनट की चुदाई में हम दोनों ही झड़ गए.

उस रात हम दोनों ने एक बार और चुदाई की क्योंकि हमें दूसरे दिन वापस नागपुर आना था.

नागपुर में घर के सभी मेहमान जा चुके थे.
मुझे भी सोमवार से ऑफिस ज्वाइन करना था.

घर में रात के अलावा सुबह, शाम, जब भी मौका मिलता मैं रागिनी को चोद देता था.

नागपुर में वो केवल दो सप्ताह ही रही और इतने दिनों में हमने बार-बार अलग-अलग तरीके से चुदाई की.
एक बार उसकी इच्छा से मैंने उसकी गांड भी मारी और इस बार उसे बहुत कम दर्द हुआ.

अगले दिन बड़े साले साहब उसको रायपुर ले गए.
रागिनी के रायपुर जाने के बाद से मेरा मन किसी काम में नहीं लगता था.

दिन भर तो ऑफिस में और दोस्तों के साथ गुजर जाता था लेकिन कमरे में आते ही मेरा ही कमरा मुझे खाने को दौड़ता था.

रागिनी से केवल फोन पर बात होती थी और वो बदमाश फोन पर सेक्सी बातें करके मुझे और तरसाती थी, भड़काती थी.
कभी-कभी वो बाथरूम में जाकर कपड़े उतारकर अपने बूब्स और चूत के दर्शन कराकर मेरी उत्तेजना को चरम पर पहुंचा देती थी.

एक दिन एक अचानक ही रागिनी ने मुझे सबसे बड़ी खुशखबरी सुनाई कि वो प्रेग्नेंट हो गई है.

यह सुनकर उसके और मेरे घर वाले भी बहुत खुश हुए और मैं रागिनी से मिलने रायपुर चला गया.

अगली कहानी में मैं अपनी ससुराल का घटनाक्रम आपको लिखने वाला हूँ.

इस फर्स्ट ऐनल सेक्स कहानी में आपको मेरा प्रस्तुतिकरण कैसा लगा, कृपया मेरे ईमेल पर बताएं.
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