मौसी मां के साथ अश्लील मस्ती

XxX गन्दी बात की मैंने अपनी मॉम जैसी मासी के साथ. मेरी मौसी की शादी मेरे पापा से हो गयी. पर मैं मौसी के जिस्म को देख कर गर्म हो जाता था.

दोस्तो, मेरा नाम विनोद है। मेरी उम्र 25 वर्ष है। मैं उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से हूं।
यह मेरी पहली कहानी है दोस्तो … आपका प्यार व सहयोग मिला तो फिर हाजिर होऊंगा नई नयी कहानियों के साथ!

मेरे घर में मैं, मेरी मौसी मां, पिताजी, दो बड़ी बहनें हैं। असल में मेरी माँ की मृत्यु मेरे बचपन में हो गयी थी तो मेरे पिताजी की शादी मेरी मौसी से हो गयी थी.
स्कूल टीचर है उनकी उम्र 45 वर्ष है। पिता एक दुकान पर काम करते हैं और पीकर ही घर आते हैं।

मौसी मां उनका बिस्तर बाहर बरामदे में लगाकर तैयार रखती जिससे वो आकर कोई बवाल न करें और आराम से सो जाए। पिताजी भी आते और चुपचाप खाना खाकर सो जाते।

मेरी बहनें टी वी की शौकीन हैं, वो एक साथ सीरियल देखती और साथ सोती।

मैं बचपन से मौसी मां के कमरे में ही पढ़ता और उनके साथ ही सोता था।

मौसी मां मुझे बहुत प्यार करती हैं।

मेरी मौसी मां सांवली, एकदम टाइट और भरे बदन की महिला हैं उनकी चूचियाँ काफी टाइट और सुडौल हैं।
उनकी गांड काफी चौड़ी है, बस देखकर मेरे दिल में यह Xxx गन्दी बात आती है कि उनकी गांड की दरार के बीच अपना लंड रगड़ दूँ।

जब रात को मौसी मां नाइटी पहनकर काम करती तो नाइटी में उनकी गांड देखते ही बनती थी।

जब मौसी मां चलती तो उनकी मटकती गांड देखकर मेरा लंड तो सलामी देने लगता जिससे मेरा लोवर तम्बू का आकार ले लेता.
तो मैं सबसे छुपकर अपने लंड को शांत करने की कोशिश करता, कभी कभी तो लंड की शांति के लिए मुठ भी मारनी पड़ जाती थी।

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यह बात तब की है जब मैं 12वीं में था। भविष्य के बारे में सोच ही रहा था कि मौसी मां ने नींद में एकदम से करवट मेरी ओर बदली और अपनी भारी भरकम जांघें मेरे पेट पर रख दी और घुटनों से नीचे का हिस्सा मेरे लंड से होता हुआ पैर मेरी टांगों के बीच रख दिया।
उनका एक हाथ मेरे सीने पर था।

मेरा दांया हाथ उनकी दोनों टांगों के बीच था पर मैं चाह कर भी अपना हाथ हिला नहीं पा रहा था। मेरी कोहनी उनके पेट को छू रही थी।
उनकी चूचियाँ मेरे कंधे को दबा रही थी।

मेरी तो हालत ही खराब होने लगी जब उनकी गर्म गर्म सांसें मेरे कान और गर्दन पर पड़ने लगी।

मैंने इससे पहले मौसी मां को इतने करीब और इस तरह कभी नहीं महसूस किया।

मेरा लंड अब मेरे बस में नहीं था पर मौसी मां के पैर की वजह से वो खड़ा नहीं हो पा रहा था और दर्द कर रहा था।
मैं मौसी मां की चूचियों पर हाथ फेरना चाहता था पर उनका हाथ मेरे सीने पर होने की वजह से उनकी चूचियाँ उनके हाथों से छिपी थी।

मैंने उनकी टांग और हाथ सीने से हटाकर अपनी दूसरी तरफ तक लाया और एक करवट लेकर अपना बायां हाथ ले जाकर उनकी पीठ पर रख दिया.
यह सब करते वक्त यह ध्यान रखा कि वो जाग ना जायें।

अब मौसी मां की दांयी टांग और दांया हाथ मेरी पीठ की ओर था और मेरा हाथ उनकी पीठ पर था; उनकी भरी भरी चूचियाँ मेरे सीने से लग रही थी।

कभी कभी मैं उनको अपनी बांहों में जकड़ता, कभी उनकी ब्रा के हुक पर हाथ फेरता, कभी अपना हाथ मौसी मां के चूतड़ों पर रख देता।

इस समय मौसी मां की गर्म सांसें मेरे चेहरे पर पड़ रही थी.
मैंने डरते डरते दो बार अपने होठों से मौसी मां के होंठों को टच किया।

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इस दौरान मैं कब सोया, पता ही नहीं चला।

सुबह रोज की तरह मौसी मां ने जगाया और मैं तैयार होकर स्कूल चला गया।

अगले कुछ दिनों तक कुछ नहीं हुआ.

फिर एक रात जब मैं पढ़ाई कर रहा था और मौसी मां मेरे पास में गहरी नींद में लेटी थी.
उनका चेहरा छत की ओर था और जब वो सांस लेती तो तो उनकी चूचियां उबलते दूध की तरह ऊफान मारती ऊपर होती फिर नीचे हो जाती.

मैं ए टक उनकी चूचियों को ही देखे जा रहा था क्योंकि दिन में मुझे यह अवसर मिलने से रहा।

अचानक मेरा ध्यान नीचे की ओर गया तो देखता ही रह गया.
उनकी नाइटी घुटनों से थोड़ा ऊपर थी, उनकी जांघों का कुछ हिस्सा दिख रहा था पर भरी भरी जांघें गजब ढा रही थी. वो चहरे की तुलना में अधिक गोरी थी।

मैं खुद को रोक नही पाया और लाइट आफ करके लेट गया।

कुछ देर ऐसे लेटने के बाद करवट ली और हाथ उनकी चूचियों पर रख दिया, जाघें उनकी जांघ पर।

हाथ रखने पर महसूस हुआ कि उन्होंने ब्रा नहीं पहनी है।
मैं उनके निप्पल अपनी हथेली पर महसूस कर रहा था।

मेरी धड़कन ऐसे चल रही थी जैसे दिल में कोई गेंद उछल रही हो।

जैसे ही धड़कन कुछ शांत हुई, मैं अपना हाथ हिला कर उनकी चूची सहलाने लगा. मैं हाथ आई उन चूचियों दबाना तो बहुत चाहता था पर डर के मारे नहीं दबा रहा था कि मौसी मां कहीं जाग न जायें।

इधर मेरा खड़ा लंड अपने चरम पर था मानो वह बेड में छेद करना चाहता हो।

जैसे जैसे मैं अपने हाथ में उनकी चूची और जांघ उनकी जांघ पर महसूस करता, मेरा लंड और टाइट होता जाता.
वो मेरे लिए अनोखा और अभूतपूर्व अनुभव था क्योंकि अब तक मैं किसी स्त्री के इतना करीब नहीं गया था।

मैंने कभी उनकी चूची पर हाथ रख हल्का सा सहलाता तो कभी उनके निप्पल को ऊंगलियों पर महसूस करता।

मैं उनकी जांघ पर अपनी जांघें पूरी तरह महसूस कर रहा था कि इसी बीच उत्तेजना में कब मेरा मुठ बिना मुठ मारे ही निकल गया.
मेरा लोवर थोड़ा सा वीर्य से भीग गया.
ऐसा पहली बार हुआ था पर मुझे अलग ही संतुष्टि मिली और कब नींद आयी पता भी नहीं चला।

सुबह मौसी मां जब स्कूल जाने के लिए मुझे झुक कर जगा रही थी तो मैंने जसे ही आंख खोली तो नाइटी में से झांकती उनकी चूचियों की दरार नजर आयी.
इससे अंगड़ाई लेते हुए मेरे चहरे पर मुस्कान आ गयी.

तो मौसी मां ने पूछ लिया- क्यूं इतना खुश है आज? अच्छी नींद आई क्या?
मैं कुछ नहीं बोला।

उन्हें क्या पता था कि उनकी सबसे कीमती चीजें रात मेरी मुट्ठी में थी।

मैं खुशी खुशी तैयार हुआ और स्कूल चला गया।
आज स्कूल में मेरा मन नहीं लग रहा था, बार बार वो दृश्य ‘जब सुबह मौसी मां मुझे जगा रही थी’ तो भरी भरी चूचियों के बीच उनके क्लीवेज मेरी नजरों के सामने आ रहा था।

जब मैं स्कूल से घर पहुंचा तो मैंने देखा आज मौसी मां घर पर मुझसे पहले आ गयी और लेटी हुई हैं।

पहले मुझे लगा कि आज उनका हाफ डे है.
फिर मेरा ध्यान बगल की मेज पर गया जिस पर कुछ दवाएं, जग और ग्लास रखा था।
मुझे लगा कुछ गड़बड़ है।

मैं मौसी मां को डिस्टर्ब नहीं करना चाहता था, मैं तुरंत भाग कर दीदी के पास गया.
पूछा तो पता चला कि आज मौसी मां की स्कूल में तबियत खराब हो गयी थी. उनकी एक कलीग ने उन्हें घर ड्राप किया. डाक्टर ने बोला टायफाइड हो गया है, कुछ दिन इन्हें आराम की जरूरत है।
मैंने दीदी से बोला- बेचारी मौसी मां इतना काम अकेले करती हैं, आप लोग भी हेल्प करा दिया करो।
वो मुझपे चिल्लाने लगी, बोली- हमें पढ़ना रहता है और मौसी मां के लाडले … तू क्यूं कुछ नहीं करता?

झगड़े की आवाज से मौसी मां जग गयी, बोली- क्या हुआ? क्यों झगड़ रहे हो?
मैं तुरंत भागकर मौसी मां के पास गया और उनसे पूरा हाल पूछा.

तो वो बोली- हां बस थोड़ा सर दर्द, चक्कर आ गया और थोड़ा बुखार था डाक्टर ने आराम करने को कहा है. जल्द ठीक हो जाऊंगी।
मैं मौसी मां के बगल बैठ गया।

मैंने मौसी मां से पूछा- क्या मैं आपका सिर दबा दूं?
“बेटा कमजोरी लग रही है … दर्द तो पूरा बदन कर रहा है. दबा दे … शायद कुछ आराम मिल जाए! लेकिन पहले तू खाना खा ले, स्कूल से आया है, थक गया होगा।”

मैं बोला- नहीं मां, पहले दबा दूँ, फिर खाऊंगा।
मौसी मां ने कहा- खा ले बेटा … रात का कुछ भरोसा नहीं … तेरी दीदी कब बना के देंगी. इसलिए तू खा ले, कब तक भूखा रहेगा।

मैंने मौसी मां की बात मान ली और खाना खाकर आया.
फिर मैं मौसी के सिराहने बैठकर उनका सिर दबाने लगा।

मैं अपनी मौसी मां से बहुत प्यार करता हूं।
मैंने मौसी मां से बोला- आप इतना काम क्यूं करती हो? दीदी लोग से बोलो कि आपका हाथ बटा दिया करें।

मौसी मां ने कहा- उनको टी वी फुरसत हो तब ना … काम कहती हूँ तो पढ़ने बैठ जाती हैं।

मैं मौसी मां से बात कर ही रहा था कि मेरा ध्यान नाइटी से बाहर झांकते उनके क्लीवेज पर चला गया। मैं तो बस देखता ही रह गया.
ऐसा लग रहा था मानो दो ऊंची ऊंची पहाड़ियों के बीच कोई दर्रा (पास) हो।

उनका सांवला रंग उन्हें और भी मादक बना रहा था।

अब मैं उनसे बातें बंद करके एकटक बस उनकी सांसों पर उठती और गिरती चूचियां व उनके क्लीवेज देखे जा रहा था।
मेरा लंड लगातार उनकी चूचियों को सलामी दिये जा रहा था।

करीब 15 मिनट उन चूचियों को निहारने और सिर दबाने के बाद अब मैंने उनसे हाथ दबाने को पूछा.
तो उन्होंने हां कर दी.

अब मैंने दांयी ओर आकर अपनी कुर्सी पर बैठकर उनके हाथ दबाना शुरू किया.
हाथ दबाते दबाते अनजाने में मेरे हाथ की चारों उंगलियां बगल से उनकी चूची को टच हो गयी।
मेरा लंड फिर से ऊछाल मारने लगा।

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मैंने उनका हाथ और उनके शरीर की ओर खिसकाकर कर दिया जिससे मैं अपनी ऊंगलियों को उनकी चूची को ज्यादा से ज्यादा स्पर्श करा सकूं।
अब मेरा हाथ उनकी चूची को अच्छी तरह से स्पर्श कर रहा था। अब जब मेरा हाथ कोहनी से ऊपर का भाग दबाता तो उनकी चूची स्पर्श होती और जब कोहनी से नीचे का भाग दबाता तो उनके पेट और कमर का भाग स्पर्श होता।

मेरा लंड टाइट होकर एक मोटी लाठी के समान हो गया था।
मुझे तो मजा आ रहा था, मैं तो चाहता था कि दबाना कभी बंद ही न हो.

लेकिन लगभग 10 मिनट दबवाने के बाद मौसी मां ने दूसरा हाथ दबाने को कहा।

मैं उठा और मौसी मां के बांयी ओर चला गया।
चूंकि बायीं ओर मुझे बेड पर ही बैठकर उनके हाथ दबाने थे तो मैंने उनका हाथ उठाकर अपनी जांघ पर रख दिया और दबाना शुरू किया.
उनका हाथ अब कंधे की सीध में था।

जाने अंजाने उनका हाथ मेरे लंड पर रख गया। मेरा लंड फिर से फुफकारने लगा.

जैसे ही मेरा लंड खड़ा होने लगा, मैंने उनका हाथ अपने लंड से हटा लिया जिससे मौसी मां को मेरे लंड का कोई आभास न हो।

जैसे ही मेरा लंड बैठता, मैं फिर से उनकी हथेली अपने लंड पर रख देता।
ऐसा करने में मुझे मजा भी आ रहा था और डर भी लग रहा था क्योंकि जरा सी गलती और पकड़े जाना।

इसी बीच मेरा ध्यान नाईटी की बांहों से झांकते आर्मपिट की ओर गया।
अंदर का नजारा साफ नहीं दिख रहा था।

मैंने उनकी नाइटी की आस्तीन थोड़ा ऊपर की.
कसम से क्या नजारा था … मौसी मां की आर्मपिट का एकदम चिकना भूरा रंग … हल्की पसीने की बूंदें … छोटे छोटे बाल. लगता था कि 3-4 दिन हुए हैं शेव किए।

मैंने उनकी हथेली एक बार फिर अपने बैठे लंड पर रखी और हाथ दबाते हुए उनकी आर्मपिट (बगलों) की ओर बढ़ाया और आगे वाली उंगली से उनकी आर्मपिट सहलायी तो देखा वहां की चमड़ी बाकी जगहों से मुलायम थी. मुझे उंगली पर आर्मपिट का पसीना साफ महसूस हो रहा था।

मैं वहां की खुशबू जानने के लिए ऊंगली नाक के पास लाया तो मैं तो उस खुशबू में मदहोश होने लगा।
कसम से क्या मादक खशबू थी … उसमें पसीने और परफ्यम दोनों की खुशबू की मिलीजुली महक थी।
पर जो भी था एकदम कामुक था।

इस बीच कब मेरा लंड उनके हाथ में ही खड़ा हो गया।
मैंने जल्दी से उनका हाथ हटाया.

मेरे दिल की धड़कन बढ़कर इतनी तेज हो गयी मानो दिल सीना चीर कर बाहर ही आ जाएगा.
डर के मारे शरीर पसीने से भीग गया।

लगभग 10 मिनट बाद मौसी मां ने बोला- बेटा, कुछ कुछ आराम मिल रहा है. थोड़ी देर पैर भी दबाकर तू जाकर पढ़ाई कर … तुझे अभी होमवर्क भी कम्पलीट करना होगा।
मैंने भी हां कर दी.

अब मैं उनके पैरों की तरफ आ गया।
वो दोनों पैर लगभग सटाकर लेटी थी।

मैं उनकी टांगों को फैलाना चाहता था जिससे पांव दबाने में आसानी हो।
मैंने बेपरवाही उनकी दोनों जांघों के अंदर वाले भाग पर हाथ रखकर फैलाने के लिए थोड़ा जोर लगाया ही था कि उन्होंने खुद-ब-खुद अपनी टांगें चौड़ी कर दी मानो कोई महिला किसी पुरूष को अपनी चूत मारने का आमंत्रण दे रही हो।

मन ही मन मैं सोच रहा था कि काश मौसी मां ने मेरे लंड के लिए ऐसे ही अपने चूत के द्वार खोले होते।

मैं मौसी मां की दांयी टांग की तरफ बैठ कर उनके पांव दबाने लगा।
मैंने नीचे से टांग दबानी शुरू की.

जैसे जैसे मैं ऊपर जाता गया, उनकी टांग की मांसपेशियाँ मुलायम होती जा रही थी. जैसे ही मैं उनकी जांघ को हाथों से दबाया, कसम से मेरे रोम रोम में बिजली कौंध उठी.
क्या मखमली जांघें थी मौसी मां की!

इससे पहले मैंने किसी भी महिला की जांघों को नहीं छुआ था।

पहले मैं मौसी मां की जांघ को नीचे तक ही दबाता था। फिर मैं हाथ को तेजी से आगे बढ़ाता और थोड़ा ऊपर तक हाथ ले जाता।

मौसी मां कुछ नहीं बोली. शायद उन्हें आराम मिल रहा था.

मेरी हिम्मत और बढ़ी और अगली बार मैं अपना हाथ और ऊपर तक ले जाने लगा।
ऐसा करते करते अब मैं अपना हाथ कमर तक ले जाने के बारे में सोचने लगा और अगली बार मैं अपना हाथ कमर तक ले गया।

ये क्या … मौसी मां ने पैंटी पहनी हुई थी जिसकी इलास्टिक मेरे हाथों में टच हो रही थी।

सचमुच आज से पहले मैंने किसी पैंटी पहनी महिला की पैंटी को अपने हाथों में नहीं महसूस किया था।
एक अजीब सा रोमांच मेरे शरीर में दौड़ उठा और मेरा लंड इस कदर खड़ा हो गया जैसे वो लोवर फाड़कर बाहर आ जाएगा.

लेकिन मुझे इस खड़े लंड को छुपाने की परवाह नहीं थी क्योंकि मौसी मां लेटी हुई थी।

अब मैं जानबूझ कर उनकी पैंटी पर हाथ फेर देता और पैंटी को हाथ के स्पर्श से ही समझने की कोशिश करता कि यह पैंटी मौसी मां के शरीर के कितने भाग को ढके हुए है।

ऐसा करने पर मुझे पता चला कि पैंटी की चौड़ाई लगभग दो उंगली जितनी चौड़ी है और यह चूत से होती चूत और टांग के बीच की जगह से होते हुए कमर की साइड वाली हड्डी तक फैली है।

कभी कभी मैं मौसी मां की जांघों के भीतरी हिस्से में हाथ ले जाकर चूत की फांकों को छूने की कोशिश करता था.
इस कोशिश में कभी कभी मैं सफल हो जाता और चूत की फांकों को हाथ पर महसूस करता.

वो एक अजब ही आनंद था मौसी मां की चूत के स्पर्श का!

ऐसा करते वक्त मेरा शरीर कांप रहा था.
पर फिर भी बार बार करने को दिल कर रहा था।

मैंने सोचा कि मौसी मां को शक न हो जाए, इसलिए ना चाहते हुए भी मैं उठा और दूसरी टांग की ओर आ गया।

अब चूत की छुवन का नशा मुझ पर चढ़ चुका था तो इस टांग को दबाते वक्त भी मैंने कमर पर पैंटी और चूत की बायीं फांक को बार बार मैंने हाथों पर स्पर्श किया।

करीब 1 घंटे की उठक बैठक से मेरा लंड बेहाल हो चुका था. अब उसे इससे ज्यादा की ख्वाहिश थी पर मैंने अपने दिमाग पर काबू किया.
और मेरा खड़ा लंड बेबसी से मेरी ओर सलामी दिए इस उम्मीद से मेरी ओर देख रहा था कि मैं उसके लिए कुछ करूं.

इसलिए मैंने पैर दबाना बंद करने का निश्चय किया.
पर शायद इसके बाद मुझे कोई दूसरा मौका न मिले इसलिए मैंने आखिरी बार तेज चलती हुई सांसों को रोककर आखिरी खतरा मोल लेने का निश्चय किया।

इसके लिए मैं पांव दबाने में तेजी लाया और आखिरकार पांव दबाते मैंने अपना हाथ उनकी चूत पर रख दिया।

पांव दबाते दबाते जब मैंने 2-3 बार चूत पर हाथ रखा तो चूत पर उगी उनकी कंटीली झांटें पैंटी के ऊपर से हाथ में आ गयी.
और मैं मौसी की चूत की दरार को हाथ पर स्पष्ट अनुभव कर पा रहा था।

चूत पर हाथ लगते ही मेरा लंड मेरे काबू से बाहर होने लगा.

अगली बार मैंने मौसी मां की चूत पर जैसे ही हाथ रखा, मेरा लंड झटके मारने लगा.
मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूं तो मैं अपना लंड पकड़कर बाथरूम की ओर भागा.

ऐसा करते हुए मैं थोड़ा लड़खड़ाया तो मौसी मां ने मुझे भागते देखा.
उन्होंने पूछा- क्या हुआ?
मैं बिना कुछ बोले बाथरूम की ओर भागा.

बाथरूम पहुंचने से पहले ही मेरा आधा मुट्ठ लोवर में निकल गया बाकी मुट्ठ बाथरूम में गिराकर साफ किया।
मुट्ठ से थोड़ा लोवर भीग गया था.

जब मैं लौटा तो मौसी मां ने फिर पूछा- क्या हुआ बेटा?
मैंने कहा- मौसी, जोर से पेशाब लगी थी।
मौसी मां मेरा भीगा लोवर देखकर मुस्कुराकर बोली- तो पहले ही कर आता … इतना क्यूं रोकता है कि पैंट में ही हो जाए! बेटा, इच्छाओं को दबाना नहीं चहिए कभी!

फिर मैंने होमवर्क किया और खाना खाकर सो गया.
पता नहीं क्यूं आज मुझे जल्दी नींद आ गयी।
आज मौसी मां दीदी के साथ सोई ताकि रात को उनकी देखभाल हो सके।

आपको मेरी मॉम गन्दी बात XxX स्टोरी कैसी लगी? मेरे ईमेल कर जरूर बताइएगा क्योंकि आगे की कहानी आपकी रूचि पर निर्भर करेगी।
आपका प्यार ही आगे लिखने को प्रेरित करेगा।
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