दोस्त की बीवी और साली मेरे लंड की दीवानी-3

गाँव की चूत चुदाई स्टोरी में पढ़ें कि मैं अपने दोस्त की साली को उसके घर छोड़ने गया तो वहां हम दोनों अकेले थे. हम दोनों ने कैसे फटाफट चुदाई का मजा लिया?

साथियो, मैं आपका दोस्त हर्षद मोटे आपके लंड चूत में आग लगाने के लिए पुन: हाजिर हूँ.
पिछले भाग
दोस्त की साली की वासना का ज्वार
में अब तक आपने पढ़ा था कि सोनाली और मैं एक दूसरे के अंगों से खेलने लगे थे और जल्द ही चुदाई के लिए गर्मा गए थे.

अब आगे Gaon Ki Chut Chudai Story:

अब सोनाली ने कहा- हर्षद अब बस करो ना … मुझसे अब नहीं सहा जाता.
मेरा भी वही हाल था और मुझे वहां से वापस भी जाना था.

मैंने सोनाली को बेड के किनारे बिठाया और पीठ के बल लिटा दिया.
अब मैंने उसके दोनों पैर अपने हाथों से पकड़कर ऊपर उठा दिए और दोनों तरफ फैलाकर पकड़ कर रखे.

सोनाली की फूली और गीली चूत पर मेरा लंड ठोकर मारने लगा था.
लंड का अहसास पाते ही सोनाली चिहुंक उठी. उसने एक हाथ की उंगलियों से अपनी चूत की फांकों को फैला दिया और दूसरे हाथ से मेरा लंड पकड़ लिया.

उसने लंड का सुपारा चूत के मुँह पर रख दिया. सुपारा चूत पर लगते ही मैंने जोरदार धक्का देकर आधे से अधिक लंड चूत में पेल दिया.
लंड चूत को चीरते हुए अन्दर घुस गया था.

इस अचानक धक्के से सोनाली चिल्ला दी- ऊई मां आह ओह हा हं हं स् स् स्ह स्हा हा मर गई.
वो मादक आवाजें निकालकर छटपटा रही थी.

मैंने उसके पैर कसके पकड़ रखे थे और खड़े रहकर ही उसकी चूत पर लंड का पूरा दबाव बनाए रखा था.

थोड़ी देर के बाद सोनाली अपनी गांड हिलाने लगी तो मैं अपनी कमर आगे पीछे करके लंड अन्दर बाहर करने लगा.
सोनाली की चूत बहुत गर्म हो गयी थी और गीली भी. इसी वजह से मेरा लंड भी गीला हो रहा था.

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अब मैंने अपने दोनों पैर दोनों तरफ फैला दिए और सोनाली के दोनों पैर अपने कंधों पर रखकर लंड को अन्दर बाहर करने लगा.
सोनाली अपने दोनों हाथों से चूत को सहलाती हुई लंड को सहला रही थी.

मैं झुककर अपने दोनों हाथों से उसके स्तन सहलाने लगा.
इस तरह से कुछ मिनट चूत चुदाई करने के बाद मैंने अपनी गति बढ़ा दी.

अब पूरी ताकत से मैं घपाघप धक्के मारने लगा था. मेरा पूरा लंड सोनाली की चूत की गहराई में उतर रहा था. हम दोनों काफी मदहोश हो गए थे.

लंड और चूत पूरी तरह से गीले होने के कारण पचा पच पचक पचा पच की कामुकता बढ़ाने वाली आवाजें बेडरूम में गूंजने लगी थीं.
हम दोनों भी सिसकारियां लेने लगे थे.

इस तरह दस मिनट धुंआधार चुदाई के बाद हम दोनों ही कामवासना की चरमसीमा तक पहुंच गए थे.

सोनाली बोली- आह हर्षद … अब मैं झड़ने वाली हूँ.
ये सुनकर मैंने कहा- आह सोनाली, मैं भी झड़ने वाला हूँ.

हम दोनों साथ में ही झड़कर एक दूसरे की प्यास बुझाने लगे थे.
इसके साथ मैंने कुछ और धक्के मारकर मेरा लंड सोनाली की चूत की गहराई में पेल दिया.
मेरा लंड उसके गर्भाशय के मुँह पर अपने वीर्य की पिचकारियां मारने लगा.

मेरी गर्म वीर्य के पिचकारी अहसास होते ही सोनाली की चूत ने अपना लावा छोड़ दिया था.
उसकी चूत ने फटकर अपना माल बहाना शुरू कर दिया था.
वो मेरे लंड को अपनी चुतरस से नहला रही थी.

सोनाली ने झड़ते ही मुझे अपने ऊपर चिपका लिया और साथ में अपने दोनों पैरों से मेरी गांड को कस लिया, मेरे लंड का दबाव वो अपनी चूत पर बनाए रही.
मैंने अपना सर उसके कंधे पर रख दिया, तो सोनाली ने मुझे अपनी बांहों में कस लिया.

हम दोनों ही निढाल होकर सिसकारियां ले रहे थे.
हम दोनों ही थक चुके थे, तो ऐसे ही एक दूसरे की बांहों में कुछ मिनट लेटे रहे.

फिर मैं सर उठाकर सोनाली के चेहरे को देख रहा था. उसके चेहरे पर एक अलग सी खुशी दिख रही थी.

उसका चेहरा खुशी से खिल रहा था.
मैंने अपने दोनों हाथों में उसका सर पकड़कर उसके होंठों को चूम लिया.

सोनाली ने आंखें खोलकर मेरे होंठों को चूम लिया और अपने दोनों हाथों से मेरी गांड को सहलाती हुई कहने लगी- हर्षद मुझे लगता है कि तुम मुझे प्रेग्नेंट करके ही जाओगे. कितना सारा अमृत न जाने कितनी बार मेरी चूत को पिलाया है. अब मैं पूरी तरह से खुश हूँ.

ये कहते हुए उसने अपने पैरों की मेरी गांड की ऊपर की पकड़ को ढीला कर दिया और अपने पैर बेड पर छोड़ दिए.

मैंने उसके दोनों मम्मों को बारी बारी से सहलाकर चूम लिया.
अब मैं खड़ा होने लगा और आहिस्ता से अपना लंड चूत से बाहर निकालने लगा.

सोनाली की चूत से कामरस बहकर नीचे फर्श पर टपकने लगा.
सोनाली उठकर बेड के किनारे बैठ गयी.

मैंने पूरा लंड बाहर निकाला तो कामरस तेजी से फर्श पर गिरने लगा.
सोनाली और मैं ये नजारा देख रहे थे.

सोनाली बोली- मेरी शादी के बाद अभी तक मेरी चूत से जितना चुतरस मेरे पति ने नहीं निकाला, उतना तो तुमने कल रात और अभी इतना सारा चुतरस निकाला है हर्षद.

इतना कहते हुए उसने कपड़ा लेकर अपनी चूत पौंछकर साफ कर ली और फर्श भी पौंछकर साफ कर दिया.
फिर कपड़ा बाथरूम में डालकर मेरे पास आ गयी.

वो अपने घुटनों के बल बैठकर मेरा लंड अपने हाथ में पकड़कर बोली- अब मुझे तुम्हारे इस अमृत को पीना है हर्षद. हम दोनों कभी मिलेंगे भी या नहीं.
ये कह कर वो अपनी जीभ से मेरे वीर्य से लबालब सुपारे को चाटने लगी.
मेरे बदन में लहर सी दौड़ने लगी.

अब सोनाली ने मेरा सुपारा अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी.
सोनाली की मुँह से पच पक पचा पच की मादक आवाजें आ रही थीं.
मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने अपने दोनों हाथों से उसका सर पकड़ लिया और लंड अन्दर बाहर करने लगा.

सोनाली मेरा मुरझाया पूरा लंड बड़े प्यार से अपने मुँह में लेकर चूस रही थी.
चूस चूस कर सोनाली ने पूरा लंड साफ कर दिया था.

मैंने घड़ी देखकर सोनाली को उठाया और कहा- छह बजने वाले हैं सोनाली. अब उठो, मुझे जाना पड़ेगा.
सोनाली उठकर खड़ी हो गयी और बोली- चलो हर्षद, अब हम दोनों जल्दी से नहाकर फ्रेश हो जाते हैं.

वो मुझे पकड़कर बाथरूम में ले गयी.
उसने शॉवर चालू किया और हम दोनों एक दूसरे को साबुन लगाकर नहलाने लगे.

मैं अपने दोनों हाथों से उसके स्तन, पेट, कमर पर साबुन लगाकर उसे सहलाते हुए नहला रहा था.

सोनाली भी मेरे सीने से लेकर कमर तक अपने दोनों हाथों से साबुन लगाकर नहला रही थी.
मेरा लंड सोनाली की चूत को ठोकर मार रहा था.

हम दोनों कामुक हो रहे थे. ऊपर से ठंडा पानी हमारे ऊपर गिर रहा था. बहुत ही रोमांटिक माहौल बन गया था.

अब सोनाली ने मेरा लंड दोनों हाथों में पकड़कर लंड की खाल आगे पीछे करके लंड को नहलाने लगी, साथ में मेरे लंड का सुपारा भी अपनी चूत पर रगड़ने लगी.
हम दोनों फिर से कामवासना में डूबने लगे थे.

ना चाहकर मैं भी अपने एक हाथ से सोनाली की चूत को सहलाने लगा और दूसरे हाथ से उसकी गोरी सी मांसल गांड सहलाने लगा.

सोनाली कामुक सिसकारियां लेने लगी- ऊफ्फ आह ओह स् स् स्ह स्ह हूँ हुं.
साथ में वो अपने दोनों पैर फैलाकर मेरा लंड चूत पर रगड़ने लगी.
पैर फैलाने की वजह से चूत फूल गयी थी.

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मैं भी मदहोश हो रहा था. मैंने अपना दूसरा हाथ भी सोनाली की गांड पर रखकर जोर का धक्का मारकर आधा लंड चूत में घुसेड़ दिया.
सोनाली सीत्कारने लगी.

पानी की वजह से लंड और चूत गीली हो रही थी.
मैंने सोनाली का एक पैर उठाकर पकड़ कर रखा और दूसरा हाथ उसकी कमर में डालकर उसे कसकर पकड़ लिया.

सोनाली ने अपनी बांहों में मुझे कस लिया.
उसके स्तन मेरे सीने पर रगड़ रहे थे.
ऊपर से शॉवर का ठंडा पानी हमें मदहोश बना रहा था.

मैं लगातार धक्के मारकर लंड सोनाली की चूत में पूरा डालकर धुंआधार चुदाई करने लगा.
हम दोनों इतने कामातुर हो गए थे कि दोनों साथ में जोर से सिसकारियां लेते हुए झड़ गए.

हम दोनों ही थोड़ी देर तक एक दूसरे की बांहों में उसी हालत में खड़े रहे और तेज सांसें लेते रहे.

थोड़ी ही देर में हम अलग होकर नहाने लगे और नहाकर बाहर आ गए.
हम दोनों अपने कपड़े पहनकर तैयार हो गए.

मैंने घड़ी देखकर सोनाली से कहा- सोनाली, सवा छह बज गए हैं अब मैं चलता हूँ.

हम दोनों नीचे आ गए. सोनाली ने मुझे अपने गले से लगाया और रोने लगी.
मैंने उसके आंसू पौंछते हुए कहा- अब रोना नहीं. हमेशा खुश रहना … और जल्दी से खुशखबरी सुनाना.

सोनाली मुझे चूमती हुई बोली- हर्षद खुशखबरी तो सबसे पहले तुम्हें ही सुनाऊंगी.
हमने एक दूसरे के नंबर अपने मोबाईल में सेव किए.

मैंने सोनाली से कहा- तुम्हें याद है ना सोनाली … वो क्रीम जरूर लगाना.
सोनाली मुस्कुराकर बोली- हां हर्षद, मुझे याद है.

मैं निकलकर बाहर आया और कार ले आया. मैंने बाय करने के लिए कार की खिड़की का कांच नीचे कर दिया.

सोनाली कार के दरवाजे के पास आयी और अपना सर अन्दर डालकर मेरे होंठों पर अपने होंठ रखकर मुझे चूम लिया.
मैंने भी उसे चूम लिया.

मैंने कहा- अगर याद आए, तो फोन करना सोनाली. खुद को अकेली मत समझना. मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूँगा. ठीक है … अब मैं चलता हूँ.
हम दोनों ने एक दूसरे को बाय किया और मैं चल पड़ा.

गाँव की चूत चुदाई के बाद मैं अब पूरी गति से कार चलाकर सात बजे घर पहुंच गया.
सभी मेरा इंतजार कर रहे थे.

मैं फ्रेश होकर आया तो सरिता भाभी चाय लेकर आयी.
चाय देती हुई मुस्कुराकर बोली- कोई तकलीफ तो नहीं हुई ना देवर जी?

मैंने उसको आंख मारते हुए कहा- कुछ भी तकलीफ नहीं हुई भाभी जी. आराम से गया और आराम से आया.
सरिता भाभी मुझसे बोली- हां मुझे पता था कि सब आराम से हुआ होगा.

इतने में एक औरत सोहम लेकर आयी.

तभी सरिता ने कहा- देवर जी ये तुम्हारे दोस्त की मौसी हैं. तुम सोनाली को छोड़ने गए थे. उसके बाद ये आयी हैं. कुछ काम की वजह से ये कल जन्मदिन पर नहीं आ सकी थीं. इसलिए आज आ गयी हैं.
मैंने हंसते हुए उन्हें नमस्ते किया.
वो बहुत हॉट माल दिख रही थीं.

तभी भाभी ने कहा- मौसी, ये है हर्षद जी. इनकी मम्मी और पिताजी वो उधर बैठे हैं. उनसे आपको मिलवाया था ना … ये इनके दोस्त कम लेकिन भाई जैसे ही हैं. बाकी जो भी है, वो मैंने आपको बता ही दिया है मौसी जी.
सरिता ने मेरी तरफ आंख मारकर जब ये बोला, तो मैं समझ गया कि ये भी मेरे लंड के लिए सैट हो गई है.

विलास की मौसी का नाम देविका है. उसकी उम्र शायद 42 साल की रही होगी, लेकिन वो 35 साल की माल सी दिखती है. एकदम गोरी सी दिखने में खूबसूरत, कद साढ़े पांच फुट, लंबे बाल, फिगर 34-30-36 का … थोड़े से बाहर को निकले हुए चूतड़ थे. उसके उठे हुए चूतड़ों को देख कर ही किसी का भी लंड खड़ा हो जाए.
देविका ने एक बड़े गलेवाला टाईट ब्लाउज पहना हुआ था, जिसमें से उसके आधे से ज्यादा दिखने वाले गोरे स्तन मुझे मदहोश कर रहे थे.

उसके सफेद ब्लाउज से निपल्स साफ दिख रहे थे और दोनों स्तनों के बीच की दरार बड़ी मस्त दिख रही थी.
मैं देविका को देखता ही रह गया. देविका मौसी भी मेरी ही तरफ देख रही थी.

भाभी हम दोनों की तरफ देख रही थी तो मैंने सोहम को मौसी के पास से लेने के लिए हाथ बढ़ाया.

मैंने कहा- चलो सोहम बाहर घूमकर आएंगे.
मौसी ने कहा- सोहम, अपने अंकल के पास जाओ.

इसी बहाने मैंने अपने हाथ आगे बढ़ाकर सोहम को लेते हुए मौसी के दोनों स्तनों को उंगलियों से सहला दिया.
एक नजर देविका को देखा और सोहम को अपने पास ले लिया.
मेरी हरकत से मौसी शर्मा गयी, उसका चेहरा लाल हो गया था.

भाभी सब देखकर बोली- मौसी चलो हम किचन में चलते हैं.
वो दोनों चली गईं.

मैं सोहम को लेकर बाहर चला गया.
अब शाम के साढ़े सात बज चुके थे. मैं आंगन में एक कुर्सी लेकर बैठ गया और सोहम के साथ खेलने लगा.

बाकी सब लोग हॉल में टीवी देख रहे थे.
इतने में सरिता भाभी दूध की बोतल लेकर आयी.

‘देवर जी सोहम को भूख लगी होगी, जरा इसे दूध पिला दो.’
वो मेरे हाथ में बोतल देकर बोली.

तो मैं बोतल लेकर सोहम को दूध पिलाने लगा.
भाभी बोली- हर्षद कैसी लगी मौसी?
मैंने हड़बड़ाकर कहा- क्या मतलब?

सरिता ने मुझे आंख मारते हुए कहा- इतने भोले मत बनो हर्षद. मैं सब समझती हूँ. मौसी भी तुम पर फिदा हैं. तुम्हारे पास कुछ जादू है क्या, जो शादी शुदा औरतें तुम्हारे पीछे पड़ जाती हैं.
मैंने कहा- मैं कुछ समझा नहीं भाभी.

सरिता भाभी मुस्कुराकर बोली- रात को सब कुछ समझ जाओगे हर्षद.
इतना कहकर सरिता वहां से चली गयी

मैं सोहम को दूध पिलाते हुए मौसी के बारे में ही सोचने लगा था.
इतने में विलास आया. वो कुछ काम से बाहर गया था.

वो भी कुर्सी लेकर मेरे पास बैठ गया और हम दोनों बातें करने लगे.
विलास ने कहा- मेरी मौसी से मिले कि नहीं हर्षद?
मैंने कहा- हां, भाभी ने मेरी उनके साथ पहचान करवा दी है.

ऐसे ही हम दोनों बात करने लगे.

सोहम हम दोनों के साथ मस्ती कर रहा था. सोहम मेरे साथ अच्छी तरह से घुल-मिल गया था.
रात के साढ़े आठ बज गए थे तो भाभी हमें खाना खाने के लिए बुलाने आयी.

हम दोनों खाना खाने चले गए.

दोस्तो इसके आगे क्या हुआ, ये जानने के लिए आपको मेरी अगली कहानी का इंतजार करना पड़ेगा.

गाँव की चूत चुदाई स्टोरी आपको कैसी लगी, मेल से जरूर बताना दोस्तो. कुछ गलतियां हो गयी हों, तो माफ करना.
तब तक के लिए नमस्कार.
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