मामा जी ने चुत चुदाई की होली खेली

ससुर बहु सेक्स कहानी मेरे शौहर के मामा से चुदाई की है. वे दुबई घूमने हमारे पास आये तो मेरे शौहर काम में उलझे रहे. इस दौरान ससुर ने मुझे गर्म करके चोद दिया.

नमस्ते दोस्तो, मैं सोहेल एक नई सेक्स कहानी लेकर फिर से हाजिर हूँ.
यह ससुर बहु सेक्स कहानी मेरी चाची शबनम ने लिखी है. ये वही शबनम चाची हैं जिन्हें मैंने अपने टीचर से चुदाई कराते देखा था, फिर
चाची की चूत और गांड मैंने भी मारी थी.

तो चाची की ससुर बहु सेक्स कहानी चाची की जुबानी:

यह Hindi Sexy Audio Story सुनकर मजा लें.

दोस्तो, मैं शबनम हूँ. मेरे शौहर अहमद जब दुबई में थे तो मैं भी उनके साथ थी.
एक बार अहमद के मामाजी का हमारे घर आना हुआ.
वो दुबई घूमने आए थे तो हमारे घर में ही रुके.

एक दिन मैं समझ गई कि मामाजी रसिया किस्म के हैं. जब अहमद आफिस जाते, तो वो अक्सर अकेले में मुझसे रसभरी बातें करते.
उनसे इस तरह कि बात करने में मुझे भी मजा आता और मैं उनके साथ खूब बातें करती.

धीरे धीरे हम दोनों खुलकर काफी सेक्सी बातें करने लगे. वो अपनी जवानी के किस्से बताते और मैं मजा लेती रहती.

इसी बीच होली का त्यौहार आया. दुबई में सारे भारतीय धर्म आदि को भूलकर मिल कर हर त्यौहार मनाते हैं.

अहमद तो ज्यादा होली खेलते नहीं हैं और वैसे भी उस दिन उनकी जरूरी मीटिंग थी, सो वो चले गए.

मैं मामा से बोली- मामा जी मैं बोर हो रही हूँ, चलो बाहर होली खेलते हैं.

दुबई में सागर किनारे होली खेलने की व्यवस्था बनाई जाती है. हम दोनों वहीं चले गए.

वहां खूब मस्ती का माहौल था. सब लोग जमकर होली खेल रहे थे. हम दोनों भी होली खेलने लगे. थोड़ी देर में हम दोनों पूरी तरह से रंग में डूब गए.

  सुहागरात मनाने के चक्कर में- 1

जब हम दोनों का मन भर गया तो वे बोले- चलो शबनम, वहां कॉटेज में चल कर नहा लेते हैं.

मैंने हामी भर दी. हम कॉटेज में आ गए.

मामा बोले- शबनम मेरा मन नहीं भरा है, तुम्हारे साथ और होली खेलने का मन है.
मैं बोली- मामा जी, इतनी होली तो खेल ली, मुझे पूरा रंग दिया और कहां रंग लगाना बाकी रह गया है!

मामा ने जेब से गुलाल निकालकर मेरे सीने पर मारा और बोले- इन पर तो रंग लगाया ही नहीं है.

मैं कुछ बोलती, उससे पहले उन्होंने मेरे मम्मों को दबोच लिया और बोले- शबनम, इन संतरों को भी रंग लेने दो.

मैं अलग हो गई, तो वे मेरा चेहरा हाथों में लेकर बोले- बुरा मान गई क्या?
मैंने कहा- नहीं.

वे मेरे मम्मों को निचोड़ते हुए बोले- शबनम, आज जी भरकर होली खेलेगें.
मैं कराहते हुए बोली- आहह मामा जी … प्लीज छोड़ दो … दर्द हो रहा है.

उन्होंने मुझे बांहों में दबोचा और मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया. मामा जी मेरे बदन को सहलाने लगे.
मैं ‘उम्म उम्मम्म अम्मम ..’ करने लगी.

उन्होंने मेरी पैंटी में हाथ डाला और मेरी चुत सहलाने लगे.
मैं गरम होकर सिसयाने लगी- आहह इस्स आह आह ओह छोड़ दो.
उन्होंने मुझे छोड़ दिया और बोले- शबनम कपड़े उतारो … फिर अच्छी तरह से होली खेलेगें.

मैंने कपड़े उतारे और वे मेरे मम्मों को रंग लगाने लगे.
उन्होंने मेरी चुत के ऊपर भी रंग लगाया व मेरे पूरे बदन पर रंग लगा दिया.

मैं बोली- मामा अब मेरी बारी.
मैंने उनके कपड़े उतारे और उनके बदन पर रंग लगाने लगी. मैंने उनके लंड को भी रंग दिया.

हम दोनों चिपक गए और एक दूसरे को चूमने लगे.
थोड़ी देर बाद मैं बोली- मामा जी साथ में नहाते हैं, मजा आएगा.

उन्होंने मुझे गोदी में उठाया और हम दोनों बाथरूम में चले गए.

उन्होंने शॉवर चालू किया और हम दोनों नहाने लगे. हमने एक दूसरे के बदन को खूब रगड़कर साफ़ कर दिया.

मैंने उनके लंबे मोटे लंड को अपने मम्मों के बीच में फंसा लिया और मम्मों से लंड रगड़ने लगी.

मैं बोली- प्लीज मामा, अब सहन नहीं हो रहा है … जल्दी से चोद दो ना.
उन्होंने मेरी एक टांग हवा में उठाई और लंड चुत पर घिसने लगे.
मैं सिसयाने लगी- प्लीज आहह इस्स आ जल्दी से चोदो.

वे चुत में लंड घुसाने लगे.
मामा का लंड मोटा था तो मैं कराहते हुए बोली- आहह आह … धीरे धीरे मामा जी, बहुत मोटा है प्लीज धीरे.

उन्होंने मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया और धीरे धीरे लंड अन्दर सरकाने लगे.
मैंने उन्हें कसकर पकड़ा और कराहते हुए बोली- बाप रे आह ओह … कितना मोटा लंड है मामा जी … धीरे-धीरे आआ ऊऊईई डालो न.

जब पूरा लंड अन्दर हो गया तो मैं बोली- आहहह मामा जी आपने तो मेरी जान निकाल दी आह!

उन्होंने चुदाई शुरू कर दी और मैं सिसयाने लगी- आहह ओह इस्स आह प्लीज़ धीरे आह ओहह इस्स मजाहह आ रहा है.
मामा बोले- शबनम, क्या बात है क्या मस्त चुत है … मजा आ गया.

उन्होंने मेरे मम्मों को चूमते हुए चुदाई की रफ्तार बढ़ा दी और मैं मस्ती में सिसयाने लगी- वाह मामा जी, कितना अन्दर तक पेल रहे हो … आह मजाहह आ रहा है.

थोड़ी देर बाद उन्होंने लंड निकाला और मैं घुटनों पर बैठकर लंड को चाटने लगी.

वो बोले- शबनम लंड कैसा लगा?
मैं लंड चाटती हुई बोली- ये तो अहमद के लंड से ज्यादा बड़ा है. मामा जी, मुझे आपके लंड से चुदने में मज़ा आ गया.

उन्होंने लंड मेरे मुँह में डाला और घिसने लगे. मैं ‘औकक्क औक्क आक्क अम्मम.’ करने लगी.

मामा जी बोले- शबनम अब मैं तेरी गांड मारूंगा,चल कुतिया बन जा!
मैं कुतिया बन गई और बोली- मामा जी प्यार से डालना … मैं आपकी बहू हूँ.
वो मेरे ऊपर आकर बोले- तू चिंता मत कर शबनम … मैं आराम से तेरी गांड मारूंगा.

उन्होंने लंड मेरी गांड पर टिकाया और दबाने लगे.

मैं कराहने लगी- उफ्फ फ्फ़ मर गई मम्मी रे … आहह आह प्लीज धीरे.
वे बोले- शबनम दर्द हो रहा है तो लंड निकाल लूँ.

मैं मुड़कर बोली- नहीं मामा जी आप रुकना मत … मैं सब सहन कर लूंगी. आप बस ये बताओ कि अभी कितना घुस गया है!
वो बोले- बस आधा बचा है.

उन्होंने मेरी कमर पकड़ी और लंड दबाने लगे. उनका लंड मेरी गांड में समाने लगा, तो मैंने होंठ भींच लिए और दर्द सहन करने लगी.

थोड़ी देर में पूरा लंड मेरी गांड में फिट हो गया.
मैं बोली- आहहह आह मामा जी दर्द हो रहा है आहह ओह.

उन्होंने मुझे पीछे खींचा और मेरे मम्मों को मसलते हुए बोले- वाह शबनम क्या बात है क्या मस्त गांड है आह मज़ा आ गया.

मामा ने मेरी गांड मारनी शुरू कर दी. मैं मस्ती से कराहने लगी.

पांच मिनट बाद मेरी गांड का दर्द कम हो गया और मैं मस्त होकर बोली- आहह मामा जी, अब स्पीड बढ़ा दो … मेरा दर्द कम हो गया है.

मामा ने मेरी गांड मारने की स्पीड बढ़ा दी. साथ ही उन्होंने शॉवर चालू कर दिया और गिरते पानी में गांड मारने लगे. मामा का लंड तेजी से गांड के अन्दर बाहर हो रहा था.

मैं गांड हिलाते हुए बोली- मामा, काफी मजा आ रहा है.
वे बोले- सच में शबनम तेरी गांड बड़ी मस्त है, मुझे तो मजा आ गया. मैंने अब तक कई औरतों को चोदा है पर तेरी जैसी चुदासी लौंडिया पहली बार चोद रहा हूँ.

करीब 15 मिनट के बाद गांड मारने के बाद उन्होंने लंड निकाला और खड़े हो गए.

मैंने लंड मुँह में डाल लिया और तेजी से चूसने लगी.
उन्होंने मुझे वाशबेसिन के प्लेटफार्म पर लिटा दिया और अपना गर्म लंड मेरी चुत में डाल दिया.

मैंने अपनी दोनों टांगें उनकी कमर में फंसा लीं. वो मेरे मम्मों को निचोड़ते हुए जोर से चुदाई करने लगे. मैं उनके लंड को अपनी चुत में अन्दर बाहर होते हुए देखने लगी.

मैं लंड अन्दर बाहर होते देखते हुए बोली- आहहह मामा जी … मजाहह आह ऊऊ आआ आअह्ह रहाआ है.
मामा लंड चुत में पेलते हुए बोले- शबनम क्या मस्त चुत है,चोदने में खूब मजा आ रहा है.

उन्होंने मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया और ताबड़तोड़ चुदाई करने लगे.

तभी मैं चिल्लाई- आह्ह मामा जी मैं झड़ गई हूँ … आह प्लीज छोड़ दो.

पर वे मुझे चोदते रहे और करीब 5 मिनट के बाद उन्होंने अपने वीर्य से मेरी चुत भर दी.

वो मुझे चूमते हुए बोले- शबनम कैसा लगा!
मैं बोली- आह मामा जी खूब मजा आया.

फिर हम साथ में नहाये. इसके बाद भी हम दोनों ने जी भरकर वासना का खेल खेला और घर वापस आ गए.
इस तरह ससुर ने बहु को चोदा.

थोड़ी देर बाद अहमद भी आ गए और हम लोग बातें करने लगे.
डिनर के बाद हम लोग सोने चले गए.

बेडरूम में अहमद मूड में आ गए और उन्होंने मुझे दबोच लिया.
थोड़ी देर में हमारे नंगे बदन आपस में उलझ गए.

अहमद ने मेरी टांगें फैलाईं और लंड मेरी चुत में डाल दिया.

वे तेजी से मेरी चुत चोदने लगे और मैं सिसयाने लगी- आहह इस्स आह अहमद आह आह ओह.

पर सच तो ये था कि मामा के मोटे लंड से चुदने के बाद अहमद का लंड मुझे छोटा लगने लगा था.
उसके लंड से चुदने में मुझे जरा भी मजा नहीं आ रहा था.
पर मैं क्या करती,चुपचाप चुदती रही.

करीब 10 मिनट के बाद अहमद ने चुत में वीर्य भर दिया और मेरे ऊपर गिर गए.
थोड़ी देर बाद वे अलग होकर सो गए और मैं प्यासी रह गई. थोड़ी देर बाद अहमद के खर्राटे गूंजने लगे, मैं समझ गई कि अब वो नहीं उठने वाले.

मैं बस नाइटी लटका कर नंगी ही बेडरूम से बाहर आई और मामा के बेडरूम का दरवाजा खटखटाने लगी.

उन्होंने दरवाजा खोला और बोले- शबनम क्या हुआ?
मैं नाईटी उतार कर बोली- मामा, मैं आपके लंड से चुदना चाहती थी.

उन्होंने मुझे अन्दर खींचा और दरवाजा बंद कर दिया.
मैं उन्हें चूमकर बोली- अहमद के साथ मजा नहीं आया, आप मुझे संतुष्ट कर दो.

उन्होंने मुझे जमीन पर लिटाया और मेरे मम्मों को दबाने लगे.
मैं गरम हो गई और उनके बदन को जकड़ लिया.

मैंने अपने हाथ से उनका लंड निकाला और अपनी चूत पर रखकर बोली- प्लीज मामा जल्दी डालो … अहमद ने मुझे प्यासी छोड़ दिया. अब मुझसे सहन नहीं हो रहा है.

उन्होंने लंड मेरी चुत में सरका दिया और मेरे मम्मों को निचोड़ते हुए जोर से चुदाई शुरू कर दी.

मैं चुदाई कि मस्ती में सिसयाने लगी- आहह इस्स आह आह ओह ओह प्लीज आहह ओह धीरे धीरे.

मामा बोले- शबनम धीरे बोलो … अहमद जग जाएगा.
मैं बोली- वो नहीं जगेंगे, मेरी चूत चोदने के बाद उनको नींद गहरी आती है.

उन्होंने अपने कपड़े उतारे और मुझे चूमना शुरू कर दिया.
मैंने उनकी कमर कस ली और टांगें हवा में उठा दीं.

करीब 15 मिनट के बाद मैं झड़ गई और हांफने लगी- प्लीज मामा निकाल लो.
उन्होंने लंड निकाला खड़े हो गए और बोले- तू तो झड़ गई पर मेरा क्या होगा?
मैंने मुस्कुराते हुए कहा- मामा मैं आपकी बहू हूँ, आपका पूरा ख्याल रखूगी.

मैं घुटनों पर हाथ रखकर झुक गई.

मामा ने लंड मेरी गांड पर टिका दिया और बोले- शबनम, तू सबसे अच्छी बहू है.

उन्होंने लंड का सुपारा मेरी गांड में फिट कर दिया और मेरे हाथों को पकड़ कर एक ही धक्के में पूरा लंड मेरी गांड में पेल दिया.

मैं बोली- आहहह मामा जी आपने तो मेरी जान निकाल दी.

वे हंसने लगे और तेजी से गांड मारनी शुरू कर दी. मैं ‘आअह आअह उम्म्ह ..’ करने लगी.

उन्होंने मुझे खींचकर चिपका लिया और मेरे मम्मे दबाने लगे.
मैं बोली- खूब मजा आ रहा है मामा.

और मैं मुड़कर उनके होंठों को चूमने लगी और हम खड़े होकर चुदाई करने लगे.

करीब 20 मिनट तक वो गांड मारते रहे और फिर उन्होंने लंड निकाल लिया.
मैं घुटनों पर बैठी और मुँह खोल दिया. उन्होंने मेरे चेहरे और मम्मों को वीर्य से नहला दिया.

मैं अपने मम्मों के वीर्य को चाटते हुए बोली- स्वाद अच्छा लगा मामा जी. अब मैं चैन से सोऊंगी.

मैंने नाईटी पहनी और वापस अहमद के पास आकर सो गई.

सुबह मेरी नींद जल्दी खुल गई और मुझे रात का ख्याल आ गया.
मैं गरम हो गई और उठ कर मामा के बेडरूम का दरवाजा खटखटा दिया.

मामा दरवाजा खोला और बोले- शबनम, इतनी सुबह उठ गई?
मैं बोली- हां मामा, आपकी याद आ रही थी.

उन्होंने मुझे अन्दर खींचा और बेडरूम का दरवाजा बंद कर दिया.

मैं उनसे चिपक गई और बोली- मामा जी, मेरा चुदने का मन हो रहा है.

वो मेरी नाईटी उतारकर बोले- चलो सुबह की शुरूआत करते हैं.
उन्होंने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और अपना गाउन उतारकर मेरे ऊपर चढ़ गए. उन्होंने मेरे होंठों को चूमना चूसना शुरू कर दिया और मैं उनके बदन को सहलाने लगी.

उनका लंड मेरी चुत से टकराने लगा. उन्होंने करवट ली, तो मैं उनके ऊपर आ गई.

मैं उनके लंड को अपनी चुत में डालकर बैठ गई.

वो बोले- वाह! शबनम लंड की सवारी करेगी.
मैं हंसी और लंड पर उछलने लगी- उफ्फ आहह इस्स आ ओह इस्स आह आह मामा जी मजाहह आह गया!

वे मेरे मम्मों को निचोड़ते हुए नीचे से धक्के मारने लगे.

तभी बाहर अहमद की आवाज आई- शबनम कहां हो?
मैं रूक गई, पर मामा नहीं रुके और चोदते रहे.

मैं उन्हें रोकने लगी- मामा रुको, अहमद उठ गए हैं.

वे उठे तो मैं पीछे गिर गई. उनका लंड मेरी चुत में ही फंसा था.
मैंने कहा- प्लीज़ मामा छोड़ दो.
वो बोले- शबनम, जो होगा देखा जाएगा.

उन्होंने मेरी टांगें फैला दीं और तेजी से चोदने लगे. अहमद मुझे बाहर ढूंढ रहे थे और मैं अन्दर मामा जी से चुद रही थी.

करीब 20 मिनट बाद मामा ने वीर्य से मेरी चुत को भर दिया.
वे झड़ कर मुझ पर गिर गए और मुझे चूमने लगे.

मैं उन्हें रोक रही थीं- मामा छोड़ दो, अहमद बाहर हैं.

थोड़ी देर तक चूमने के बाद वो उठे और बोले- शबनम, मैं अहमद को बाहर ले जाता हूँ.

वो कपड़े पहनकर बाहर गए और बोले- क्या हुआ अहमद? शबनम बाहर गई होगी, चलो देखते हैं.
अहमद बोले- मामा आप ठीक कहते हो, वो कभी कभी बाहर घूमने जाती है.

वे दोनों बाहर चले गए.

मैंने बेडरूम की खिड़की से दोनों को बाहर जाते हुए देखा तो चैन की सांस ली और नाईटी पहनकर किचन में चली गई.

इसके बाद शाम को अहमद का इण्डिया जाना हो गया.
वो मामा से मेरा ख्याल रखने का कह गए थे.

मेरे ममेरे ससुर ने बहु को चोदा सात दिन तक! मेरी चुत को चोद कर उसका भोसड़ा बना दिया.
उनका इस तरह से मेरा ख्याल रखना मुझे बेहद पसंद आया.

आपको ससुर बहु सेक्स कहानी कैसी लगी, प्लीज़ मुझे मेल करें.
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