मेरे पापा के दोस्त ने मुझे चोदा

मेरा फर्स्ट सेक्स मेरे पापा के दोस्त के साथ था. मैं अपने भाई के साथ अंकल के घर पार्टी में गयी थी. पार्टी में अंकल मुझे देखते रहे. रात को हम वहीं रुक गए थे.

मेरे प्यारे दोस्तो,
आज मैं आप सबको मेरे पापा के दोस्त से चुदाई के बारे में बताने वाली हूं।
मेरा नाम प्रियंका है मैं 12 क्लास की छात्रा हूं।

मेरी सहेलियां जब सेक्स की बातें किया करती तो मुझे ऐसा लगता था जैसे इसमें बहुत मजा आता है।
मैं भी मेरे फर्स्ट सेक्स के लिए तरसती रहती थी।

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First Sex Story With Uncle में आगे:

एक दिन मेरे पापा के पास मेरे पापा के दोस्त का फोन आया और मेरे पापा को उन्होंने अपने बेटे के जन्मदिन पार्टी में आने का बुलावा दिया।

पापा को उस दिन काम था इसलिए पापा ने मुझे और मेरे छोटे भाई को और मुझे गाड़ी में ड्राइवर के साथ बर्थडे पार्टी में भेज दिया।

मैं घर से जींस और टॉप में गई थी, मैंने दूसरी ब्लैक रंग की एकदम टाइट जींस पहनी थी जिसमें मेरी बड़ी सी गोल गोल गांड साफ साफ दिख रही थी।

वहाँ पर जब मैं और मेरा भाई पार्टी में पहुंचे तो खाना चल रहा था।

मैं वहां पर सबसे मिली लेकिन पापा के दोस्त मेरी ओर एक अलग ही नजर से देख रहे थे।
जिससे मुझे लगा शायद वो मुझे चोदने की नजर से देख रहे हों।
मैंने भी उन्हें लाइन देना शुरू कर दिया.
जब भी वो मेरी तरफ देखते, मैं भी उनकी आंखों में एकटक देखती।

उनके इस तरह से देखने के कारण मेरी चूत में एक अलग ही तरह की हलचल सी होती।
मेरा मन अब बस उनसे चुदाई का हो गया था लेकिन मैं अंदर से डर भी रही थी कि मैं अंकल का इतना बड़ा लंड कैसे अपनी छोटी सी चूत में लूंगी।

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जब वहां पर पार्टी खत्म हो गई और मैं टॉयलेट करने वाशरूम गई और बाहर निकली तो देखा कि अंकल बाहर ही खड़े थे.
तब अंकल मेरे पास आकर बोले- बेटी, तुम तो सायद संजीव की लड़की हो?
मैं बोली- हां अंकल।

इतना कहते ही अंकल ने मेरी बहुत टाइट कोली भर ली और बोले- बेटा, मुझे नहीं पता था कि तुम संजीव की लड़की हो.
और वो मुझसे सट गए।

ज्यादे टाइट गले मिलने के कारण अंकल की पैन्ट में लोड़ा खड़ा हुआ था जो मेरी जींस पर बिल्कुल सटा हुआ था, वो मुझे बिल्कुल मेरी चूत में धंसता हुआ सा महसूस हुआ।
अब मैं समझ गई थी कि अंकल मेरी चूत को चोदने की ताक में हैं।

अंकल ने 5 मिनट तक मेरी ऐसे ही कोली भरे रखी और बातें करते रहे।
फिर उन्होंने मुझे खुद से अलग कर दिया.

अंकल की इस तरह कोली भरने की वजह से मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया था।

तभी अंकल बोले- बेटा, आज रात तुम्हें यहीं रुकना है। मैं तुम्हारे पापा को बोल दूंगा.
इतना सुनकर मेरे चेहरे पर एक अलग ही तरह की मुस्कान आ गई थी।

फिर अंकल वहां से चले गए और मैं भी अपने भाई के पास एक अलग रूम में आकर लेट गई।

हम दोनों बहन भाई की आंख लग गई थी।

अचानक रात में मुझे महसूस हुआ कि कोई मुझसे सट कर लेटा हुआ है।
मैंने धीर से आंख खोलकर देखा तो मेरा भाई अपनी जगह पर सोया हुआ था और एक बड़ा सा आदमी मेरे चूतड़ों पर अपना लोड़ा सटाकर लेटा हुआ था।

मेरे दिल की धड़कन तेज हो गई थी।
वो मेरी जींस पर मेरी गांड के बिल्कुल बीच की दरार में अपने लंड को हल्का हल्का रगड़ रहा था।
लेकिन उसकी आहें भरने की आवाज से लग रहा था जैसे वो पापा का दोस्त हों।
मैं समझ गई की वही हैं.

मैंने भी कोई हलचल नहीं की और चुपचाप बस मजे लेने की सोची।
फिर अंकल ने मेरे कान के पास आकर धीमी आवाज में कहा- प्रियंका मैं तुम्हारा अंकल हूं।
उन्होंने कई बार यही बात कही पर मैं नहीं बोली.

और फिर मैंने ऐसे नाटक किया जैसे मैं सो ही रही थी, अब जाग गयी हूँ।

अचानक अंकल ने मेरे मुंह पर हाथ रख लिया और बोले- बोलना मत! तुम्हारा भाई उठ जाएगा.
जिससे मैं चुप रह गई।

अंकल ने मेरा हाथ पकड़ा और अपने कच्छे पर रख दिया.
मैं हैरान थी कि अंकल ने सारे कपड़े निकाल रखे थे और वो सिर्फ अंडरवियर में थे।

मैंने एक दो बार हाथ हटाया लेकिन अंकल आज मुझे कहाँ छोड़ने वाले थे.
अंकल ने फिर तीसरी बार मेरा हाथ अपने अंडरवियर पर रख दिया.
अब मैंने भी हाथ नहीं हटाया जिससे अंकल समझ गए कि शायद मैं भी चुदाई करना चाहती हूँ।

अंकल ने तुरंत मेरे होटों को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगे.
मैं भी उनका साथ देने लगी और अपना हाथ अंकल के कच्छे में डालकर अंकल के लोड़े की टोपी को धीमे धीमे सहलाने लगी.

इससे अंकल में और ज्यादा हवस जाग गई और वो मेरी जीभ को चूसने लगे।
फिर उन्होंने मुझको खड़ी किया और मेरे पीछे आ गए जिससे उनका बड़ा और मोटा लंड मेरी जींस में घुसने को बेकरार हो रहा था।

अंकल ने झट से मेरा टॉप निकाल दिया और मेरी ब्रा के ऊपर से मेरी चूचियों को दबाने लगे. जिससे मुझे हल्का सा दर्द तो हो रहा था लेकिन मजा भी बहुत आ रहा था।

ऐसा करते करते अंकल ने एक हाथ से मेरी जींस का बटन खोला और मेरी जींस को नीचे कर दिया और मेरी जींस को निकालकर एक साइड रख दिया.

अब अंकल ने फिर से पीछे से मुझे बहुत टाइट पकड़ लिया और मेरी काले रंग की कच्छी के ऊपर से मेरी चूत पर हल्का हल्का हाथ फिराने लगे जिससे मुझे एक अलग ही तरह का मजा सा आ रहा था.

मैं सोच रही थी कि अभी इतना मजा आ रहा है तो चूत को अंकल के लोड़े से चुदवाने में कितना मजा आयेगा।

पीछे से अंकल का लोड़ा मेरी कच्छी में घुसकर मेरी गांड की दरार में और ज्यादा मजा दे रहा था।
अब अंकल ने मेरी कच्छी में हाथ डाला और मेरी चूत को मुट्ठी में भर लिया और हल्का सा दबाया जिससे मुझे लग रहा था जैसे बस सेक्स करने में ही मजा है।

अंकल ने फिर मुझे अपनी ओर घुमाया और मेरी चूत पर से कच्छी हटाकर अपना लोड़ा लगा दिया।
चूत पर लोड़ा लगने से ही मैं समझ चुकी थी कि उनका लंड बहुत लंबा और टाइट है।

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इतने अंधेरे में मैं बस चुपचाप मजा ले रही थी।
अंकल ने मेरी छोटी छोटी चूचियों को अपने मुख में भर लिया और पागलों की तरह चूसने लगे और नीचे मेरी चूत के दाने को मसलने लगे.

हम दोनों अंधेरे में बस मजा ले रहे थे.

थोड़ी देर तक मेरी चूचियों का रस पीने के बाद अंकल ने मेरे एक पैर को उठाया और अपने कंधे पर रख लिया और दूसरे पैर को बेड से नीचे जमीन पर रख दिया.
फिर खुद जमीन पर बैठ गए.

मैंने एक बार अपने भाई की तरफ देखा जो बस गहरी नींद में था।

अंकल ने मेरी चूत के दाने को अपने मुंह में लिया और उसे बुरी तरह चूसने लगे.
जिससे मैं अपने होश खो बैठी और बस चुपचाप मजे ले रही थी।

अंकल के ऐसे चूत के दाने को चूसने से मेरे शरीर का रोम रोम उठा खड़ा हुआ था.
मैंने अंकल के बालों को पकड़कर खुद भी उनके मुंह में अपनी चूत का दाना डालने लगी थी।

अंकल थोड़ी देर तक चूत को चूसने के बाद खड़े हुए और इसी पोजीशन में मुझे टाइट पकड़कर अपना लोड़ा मेरी चूत के दाने पर घिसने लगे.
और फिर थोड़ा थूक हाथ में लेकर मेरी चूत के छेद पर लगाया और मेरी चूत पर अपना लोड़ा घिसना शुरु कर दिया.

यारो, सच में मैं क्या बताऊं … उस टाइम जो फीलिंग आ रही थी, वो कभी सोचने में भी नहीं आई.

अब अंकल से भी और मुझसे भी नहीं रहा जा रहा था।
मैंने अंकल का मोटा तगड़ा लंड पकड़ा और उस पर अपना थूक लगाया जिससे वो गीला होकर मेरी चूत में घुस जाए।

अंकल से मैंने कहा- अब नहीं रहा जा रहा है अंकल! इसे मेरी चूत में डाल दीजिए!
इतना कहते ही अंकल ने अपना लंड मेरी छोटी सी चूत पर लगया और अंदर धकेल दिया.
मेरी हल्की सी चीख निकल गई।

अंकल ने मेरे होठों को अपने मुंह में दबा लिया और लंड को चूत के अंदर ही रखा.
करीब 5 मिनट तक अंकल मेरी चूत के दाने को सहलाते रहे और मेरे होठों को चूसते रहे और लंड अंदर चूत में बिना किसी हलचल के अंदर ही रखा।
जिससे वो बड़े लंड का दर्द खत्म हो गया था और अब मुझे दर्द में थोड़ा आराम मिला।

फिर अंकल ने हल्के हल्के धक्के मेरी चूत में लगाने शुरू किए.
अब भी मुझे दर्द हो रहा था लेकिन फर्स्ट सेक्स में मुझे मजा भी आ रहा था।

अंकल मेरी चूत के दाने को सहलाते रहे और धक्के लगाते रहे.
मैंने अपना सर अंकल की छाती पर लगा रखा था.

10 मिनट तक अंकल ने मुझको ऐसे ही चोदा और फिर मुझको बोले- बाथरूम में चलो।

अंकल मेरे आगे आगे और मैं अंकल के पीछे पीछे चल दी।
हम दोनों बिल्कुल नंगे थे।

अंकल ने बाथरूम में ले जा के बाथरूम का नाइट बल्ब जलाया और मेरी आंखों में देखा.
मुझे हल्की सी शर्म तो आ रही थी.
लेकिन मैं भी उनकी आंखों में लगातार देखती रही जिससे हम दोनों के अंदर एक अलग ही टाइप की हवस जाग रही थी।

अंकल ने बाथरूम में कमरे से लाकर एक चादर बिछाई और मुझे उस पर लेटा दिया.
अब मैं बस अंकल की आंखों में देख रही थी जिससे मेरी चूत में और ज्यादा हलचल हो रही थी।

अंकल ने अब बिना देर किए मेरी चूत के छेद पर अपना लोड़ा लगाया और पूरा लोड़ा मेरी चूत में अंदर घुसेड़ दिया और मेरे ऊपर आकर मेरी चूचियों का रस पीने लगे।
मुझे बहुत मजा आ रहा था।

मैं बस मजा ले रही थी और धीमी आवाज में आ आह ओह भरी सिसकारियां ले रही थी।

अंकल मेरी चूचियों को लगातार चूसते रहे और मुझको चोदते रहे.
उनका मोटा लंड मेरी छोटी सी चूत में जितना दर्द कर रहा था उससे ज्यादा मजा भी दे रहा था।

अब अंकल मेरे ऊपर से अचानक से हट गए और बोले- प्रियंका, मेरे लोड़े को हाथ से तेज़ तेज़ आगे पीछे करो जिससे मैं झड़ जाऊंगा.
मैं उठ कर बैठ गई और अंकल के लोड़े की टोपी को अपने हाथ से पकड़कर आगे पीछे करने लगी.

मैंने ऐसे ही लगातार 3 मिनट तक अंकल की मुठ मारी जिससे अंकल झड़ गए और एक साइड बैठ गए.

अंकल ने पूछा- क्या तुम्हारा हो गया?
मैंने कहा- अंकल, मेरा मन अभी तक नहीं भरा है.

शायद अंकल समझ गए कि मैं अभी तक नहीं झड़ी हूं.
इसलिए अंकल ने मुझे अपनी गोद में बैठाया और मेरी चूत में उंगली डालकर उसकी चुदाई अपनी उंगली से करने लगे.

इससे मुझे बहुत मजा आ रहा था और अंकल पागलों की तरह मेरी चूत को अपनी मोटी उंगली से चोदते रहे.

फिर 5 मिनट बाद मैं भी झड़ चुकी थी और जब मेरा स्पर्म छूटा तो मेरे पैर कांप गये. मैंने अपनी टांगों को बंद कर लिया.

अंकल बोले- हो गया तुम्हारा?
मैंने बोला- हां अंकल, मैं भी झड़ चुकी हूं।

इतना सुनकर अंकल ने स्माइल किया और मेरी कोली भर कर लेट गए।

अंकल ने मुझे उस रात एक बार और चोदा.
लेकिन इतना मजा मुझे आज तक नहीं आया जितना फर्स्ट सेक्स में उस रात अपनी छोटी चूत इतने बड़े लोड़े से चुदाने में आया था।

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