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दोस्त की चालू बहन की चुत में मेरा लंड- 3

हॉट गर्ल पेनफुल सेक्स स्टोरी में पढ़ें कि जब मैंने अपने दोस्त की चुदक्कड़ बहन को अपने बड़े लंड से चोदा तो उसे बहुत दर्द हुआ. हम दोनों ने कैसे चुदाई के मजे लिए.

दोस्तो, मैं अगम आपको अपने दोस्त सार्थक की बहन उर्वशी की चुत चुदाई की कहानी सुना रहा था.
हॉट गर्ल पेनफुल सेक्स स्टोरी के पिछले भाग
मोटे लंड से चुदाई में हुआ दर्द
में अब तक आपने पढ़ा था कि मैं अपने दोस्त की बड़ी बहन उर्वशी की चुत चुदाई कर चुका था और हम दोनों चिपक कर निढाल पड़े थे.
मैं अब कुछ सोचने लगा था.

अब आगे हॉट गर्ल पेनफुल सेक्स स्टोरी:

मैं उर्वशी के ऊपर लेटा हुआ था और मेरा लंड उर्वशी की चूत में ही घुसा था.
उर्वशी ने मुझे कसके कमर पर से पकड़ा हुआ था और वो मेरी कमर और बालों में हाथ फिरा रही थी.

मैं सोच रहा था कि मुझे उर्वशी से ज्यादा प्रज्ञा पसंद थी और ये बात उर्वशी को भी पता थी.
मगर हाथ में उर्वशी आई थी तो पहले इसी को चोदना ठीक समझा.

लगभग 15 मिनट बाद मैं उर्वशी के ऊपर से उठा और उसकी चूत से अपना लंड बाहर निकाला.

हम दोनों यूं ही लेट गए.

पांच मिनट उर्वशी बोली- एक बार और करते हैं.
मैं उससे बोला- अभी ही तो राउंड कम्प्लीट किया है.

वो थोड़ी जिद करने लगी जबकि उसकी चूत में काफी दर्द भी हो रहा था. वो मानी नहीं और मुझसे बोली- मुझे पता है कि मैं तुमको पसंद नहीं हूँ.
मैंने चौंकते हुए कहा- नहीं ऐसा नहीं है.

वो बीच में ही बोली- तुमको प्रज्ञा ज्यादा पसंद है.
मैंने उससे कहा- नहीं, ऐसा कुछ नहीं है … मुझे तुम भी उतनी ही पसंद हो.

पर उर्वशी की बात सच भी थी.

फिर वो मुझसे बोली- तुम्हें कुछ दिखाती हूँ.
उसने अपना फ़ोन उठाया और मुझे उसमें पिक्स दिखाने लगी जिसमें उसने मुझे प्रज्ञा की और अपनी एक फोटो दिखाई.
ये फोटो बहुत मस्त थी … क्योंकि उस पिक में प्रज्ञा और उर्वशी दोनों सिर्फ बिकिनी में थीं.

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प्रज्ञा को यूं बिकनी में देख कर मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा था जो कि उर्वशी को महसूस होने लगा क्योंकि वो मेरी बराबर में ही लेटी थी.

इसके बाद उसने मुझे कुछ ऐसा दिखाया, जिससे मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और अबकी बार वो पहले से ज्यादा बड़ा लग रहा था.

उर्वशी ने मुझे प्रज्ञा की न्यूड यानि एकदम नंगी पिक दिखाई थी.
वो हंस कर मेरा लंड सहलाती हुई बोली- क्या बात है … प्रज्ञा को देखकर ये जनाब तो एकदम खड़े हो गए.

मैं अब उससे क्या बोलता … मैं बोला- चलो एक राउंड और करते हैं.

अबकी बार मुझे कुछ अलग ही फीलिंग्स आ रही थी पर मैंने इग्नोर करते हुए उर्वशी को अपने ऊपर ले लिया और उसकी चूत पर अपना लंड सैट करते हुए उसे अपने लंड पर बिठा दिया.

उर्वशी ने अपने हाथ में मेरा लंड पकड़ा और धीरे धीरे नीचे होने लगी, जिससे उसकी चूत में मेरा लंड जाने लगा.

वैसे तो उसकी चूत काफी गीली थी, पर अब भी उसे दर्द हो रहा था.
ऐसे ही धीरे धीरे मेरा पूरा लंड उसकी चूत में चला गया.
उसे लंड पर बैठते नहीं बन रहा था क्योंकि उसे काफी दर्द हो रहा था. पर वो बता नहीं रही थी.

फिर जैसे ही मैंने नीचे से गांड उठाकर धक्के मारने शुरू किए तो वो ‘आअह्हह … अगम मैं मर गयी ईईई …’ चिल्लाने लगी.

मैंने रुक कर पूछा- क्या हुआ?
वो बोली- काफी दर्द हो रहा है.

मैं बोला- मैंने तो पहले ही कहा था … पर अब मैं कैसे शांत होऊं!
वो बोली- बाबू तुम उसकी टेंशन मत लो … मैं तुम्हारे लंड को शान्त कर देती हूँ.

इतना कहकर वो मेरे ऊपर से उठ कर अपना मुँह मेरे लंड की तरफ और अपनी चूत मेरी तरफ करके लेट गई.
मतलब वो 69 की पोजीशन में लेट गई थी.

अब मैं उसकी चूत में अपनी उंगली और अपनी जीभ फिरा रहा था और उर्वशी मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी.

ऐसे ही 5 मिनट बाद उर्वशी फिर अकड़ने लगी और झड़ गई.

वो दोबारा से उठी और मुझसे ऊपर मुंह के पास आने को कह कर चित लेट गई.
मैं उसके मुंह के पास लंड लेकर आ गया.

वो मेरे लंड को अच्छे से अपने मुँह में अन्दर तक भरने लगी.
मुझे बहुत मजा आ रहा था क्योंकि उर्वशी हर चीज में परफेक्ट थी.

वो मेरे लंड पर पहले अपनी जीभ फिराती और मेरे लौड़े को फिर से पूरा अपने मुँह में भरकर अच्छे से चूसने लगती.

कुछ देर बाद मुझसे रहा न गया तो मैंने उसका मुँह पकड़ा और अपने लंड को उसके हलक तक उतार दिया.
जिससे उसकी सांस घुट गई और वो गों गों करने लगी.

मैंने जब उसे छोड़ा तब उसकी सांस वापस आयी.

अब वो मेरे लंड को ऐसे ही अपने पूरे मुँह में अन्दर तक लेती और बाहर निकालती.
मगर इसमें मुझे ज्यादा मजा नहीं आ रहा था और उर्वशी को भी.

वो उठकर बोली- अब और नहीं रुका जाता … जो होगा देखा जाएगा. तुम लंड चुत में ही पेलो यार!

उसके जोश को देख कर मैं खुश हो गया.

मैं फिर से चित लेटा और वो मेरे ऊपर मेरे लंड पर बैठ गई; कामुक सिसकारियां भरते हुए एक बार से मेरे पूरे लंड को अपनी चूत में डाल लिया.

मैंने उसे धक्के लगाने शुरू किए, उसे दर्द भी काफी हो रहा था … पर वो दिखा नहीं रही थी.
जब मैं थोड़ा तेज धक्का मारता तो वो तेजी से चिल्ला देती.

पर मेरा इस पर ज्यादा ध्यान नहीं गया और मैं ऐसे ही धक्के मारते रहा.
वो ‘आह्ह उह्ह उम्म्ह …’ की आवाजें निकालती रही.

मैं उसके मम्मों को अपने हाथों में भरकर मसलने लगा.
उधर उर्वशी भी कभी अपने मम्मों पर हाथ फिराती, तो कभी मेरे सीने पर मम्मे रगड़ने लगती.

मैंने अपनी थोड़ी सी स्पीड बढ़ाई और उर्वशी को तेजी से ठोकने लगा.

इससे कुछ ही देर में मेरा पानी निकल गया और तभी उर्वशी भी झड़ गई और मेरे ऊपर लेट गई.

हमको तब पता भी नहीं लगा कि कब नींद आ गई और हम दोनों यूं ही सो गए.

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लगभग एक घंटे बाद उर्वशी का फ़ोन बजा और वो मेरे ऊपर से उठी.
पर उसे अब काफी ज्यादा दर्द हो रहा था.

उस वक़्त लगभग 2 बजे थे. उर्वशी ने फ़ोन उठाया तो उसकी मम्मी का फ़ोन था.

उर्वशी बात करने लगी पर उसे दर्द होने की वजह से अच्छे से नहीं बोल पा रही थी.
उसकी मम्मी ने पूछ लिया- क्या हुआ तेरी आवाज में दर्द क्यों है?

उसने अपनी मम्मी से कहा- अरे यूं ही जरा फिसल गई थी.
उसकी मम्मी ने चौंक कर पूछा- क्या हुआ?

मैं वहीं बैठा सभी बातें सुन रहा था क्योंकि फ़ोन स्पीकर पर था. तब उर्वशी ने बताया कि बाथरूम से निकल कर बाहर आ ही रही थी कि मेरा पैर फिसल गया.

उसकी मम्मी बोलीं कि ज्यादा चोट लगी है क्या?
उर्वशी ने कहा- अभी पता नहीं, पर पैर में लगी है.

उसकी मम्मी का फोन कट हुआ तो सार्थक का मेरे पास कॉल आ गया कि मैं घर चला जाऊं.

मैंने ऐसे ही पूछा- क्या हुआ?
तो वो बोला कि उर्वशी गिर गई है.

मैंने उससे पूछा कि तू कहां है?
वो बोला- यार हम सब आगरा आए हुए हैं, बस उर्वशी ही घर पर है. तू उसे डॉक्टर के यहां ले जा और हम कल ही आ जाएंगे.
मैंने उससे ओके कहा.

उसे क्या पता कि मैं तो उसके घर ही बैठा हूँ.

5 मिनट बाद उर्वशी की मम्मी का कॉल आया, तब उन्होंने पहले उर्वशी से बात की.
फिर उर्वशी ने बताया कि अगम आया हुआ है … तो उन्होंने मुझसे बात की.

सार्थक की मम्मीं मुझसे बोलीं- बेटा, तू उर्वशी को डॉक्टर के यहां ले जा.
मैंने कहा- हां आंटी हम दोनों वहीं जा रहे हैं.
फिर आंटी बोलीं- क्या आज तू हमारे घर पर ही रुक जाएगा?
मैंने कहा- हां आंटी मैं सब देख लूंगा .. जो बेस्ट होगा, मैं वही करूंगा. मैं आपको बाद में कॉल करता हूँ आंटी, अभी डॉक्टर के पास ही जा रहा हूँ.

फिर आंटी ने कॉल कट कर दी और बस मेरे उर्वशी के घर पर रुकने का भी इंतजाम हो गया.

जब कॉल कट हुई, तो उर्वशी ने मुझे एकदम से किस कर दिया.
वो बोली- हम दोनों कितने कमीने हैं न … हमने कितनी आसानी से झूठ बोल दिया.
इस बात पर मैं भी हंसा और बोला- चलो अब नहा लेते हैं.
उर्वशी बोली- ओके चलो शॉवर का मजा लेते हैं.

वो मेरी तरफ आंख मार कर उठी और जैसे ही उसने एक कदम आगे रखा, वो लड़खड़ाने लगी.
मैंने उसे एकदम पीछे से पकड़ा और उसे बेड पर बिठा दिया.

उससे पूछा- क्या हुआ?
वो बोली- यार, मेरी चुत में बहुत ज्यादा दर्द है.

मैंने उससे कहा कि मुझे क्यों नहीं बताया?
वो बोली- उससे तुम्हारा मजा ख़राब हो जाता.
मैं उससे ग़ुस्से में बोला- मजा जाए भाड़ में. पहले शरीर का ख्याल रखना जरूरी है.

उसकी बात से मुझे अब समझ आया कि उस समय लंड पर चुत घुसाते हुए उसने ऐसा क्यों बोला था कि अब जो होगा देखा जाएगा.

मैंने उससे कहा- तुम यहीं रुको, मैं आता हूँ.

मैं रसोई में गया और उसके लिए गर्म पानी लाया और एक कपड़ा ले आया.

मैंने उससे कहा- अब तुम लेट जाओ.

वो लेट गई.
मैं गर्म पानी से उसकी चूत की सिकाई करने लगा और उसे एक पेनकिलर भी दी.

लगभग 30 मिनट की सिकाई के बाद उसे आराम मिला और वो उठ गई.

उसने मुझे किस करके ‘आई लव यू …’ बोला और कहा कि तुमको मेरी कितनी फ़िक्र है … इतनी तो मेरे बॉयफ्रेंड को भी नहीं है.

मैंने उसे थैंक्स कहा और उसे गोदी में उठा कर बाथरूम में आ गया.
हम वहीं एक साथ नहाये और बाहर आ गए.

मैंने सार्थक के कपड़े पहने और उर्वशी ने अपने.

तभी आंटी का फिर से फ़ोन आया- क्या बताया डॉक्टर ने?
उर्वशी ने कहा- एक दिन का बेड रेस्ट का बोला है.

उन्होंने मुझसे बात की और कहा- तू आज घर पर ही रहियो … और उर्वशी को कुछ भी जरूरत हो, वो उसे दे देना.
मैंने आंटी को ओके बोला और कहा- आप मेरी मम्मी को फ़ोन कर दो कि मैं आज यहीं रुकूंगा.
वो बोलीं- हां, मैं उन्हें फोन कर रही हूँ.

कुछ देर बाद मेरी मम्मी का भी फ़ोन आया कि तू आज वहीं दीदी के पास रूक जाना.
मैं इस पर मन में हंसा और ओके कहकर कॉल कट कर दी.

अब उर्वशी भी हंस कर बोली- अपनी उर्वशी दीदी के पास रुकोगे या उर्वशी डार्लिंग के पास!
तब मैंने कहा- जिसके पास आप मुझे रोकना चाहो.

वो फिर थोड़ा बन कर बोली कि अब तो मेरी मम्मी ने भी बोल दिया है कि मुझे जो चाहिए, वो तुम दे देना.
मैंने पूछा कि हां तो बताइए मैडम, क्या चाहिए आपको!
वो बोली- बस तुम.

फिर हमने एक दूसरे को किस किया और अपने लिए खाना आर्डर करने लगे.

अब हम दोनों बाहर तो जा नहीं सकते थे, अगर कोई देख लेता तो क्या बोलता.

थोड़ी देर बाद हमारा आर्डर आ गया.
चॉकलेट शेक और पिज़्ज़ा मंगाया था.

अपना लंच फिनिश करने के बाद हम दोनों ने अपने अपने कपड़े उतार दिए.

फिर हम दोनों ने एक दूसरे के बाल साफ़ करना शुरू किए. मैंने उर्वशी की चूत और उसने मेरे लंड के बाल साफ़ कर दिए.

अब हम दोनों बेड पर बैठ गए और बराबर में बैठ कर बातें करने लगे.

उस समय उर्वशी मुझको अपनी लाइफ के बारे में बताने लगी.

मैंने उससे उसके बॉयफ्रेंड के बारे में पूछा, तो वो बोली- मैं तो अपने बॉयफ्रेंड चेंज करती रहती हूँ. कोई भी ज्यादा टाइम तक नहीं रुकता. जब मैं उससे बोर हो जाती हूँ और वो मेरा खर्चा करना कम कर देता है, तो मैं उसको छोड़ देती हूँ. मेरा 3 साल से ऐसा ही चल रहा है.

फिर मैंने उससे उसकी सेक्स लाइफ के बारे में पूछा, तो वो बोली कि यार अब तुमसे क्या छुपाना … मैं पिछले 3 सालों से सेक्स कर रही हूँ. मेरा हर हफ्ते का संडे फिक्स है … क्योंकि संडे को कोई घर पर नहीं रहता, मम्मी की किटी पार्टी होती है … और प्रज्ञा अपनी फ्रेंड के यहां जाती है. सार्थक पापा के साथ रहता है. तो या तो मैं अपने बॉयफ्रेंड को घर पर बुला लेती हूँ या हम कहीं होटल में चले जाते हैं. पर यार कसम से मुझे जितना मजा आज तुम्हारे साथ आया, पहले कभी नहीं आया. आज से मैं तुम्हारी सेक्स डॉल हूँ. तुम्हारा जब भी मन करे, तुम मेरे साथ कुछ भी कर सकते हो.
मैं बोला- सच्ची!
तो वो आंख मारती हुई बोली- मुच्ची.

फिर मैंने उससे पूछा- ये बताओ आप तो इतनी बार सेक्स कर चुकी हो, तो आज आपको इतना दर्द क्यों हुआ!

तब उसने बताया- एक तो अभी मेरे पीरियड अभी नहीं हुए हैं … और दूसरा कारण, अभी जो भी बॉयफ्रेंड बने हैं, मैं बस उनसे पैसों के लिए सेक्स करती हूँ.

मैं आपको बता दूं कि उर्वशी की फैमिली वैसे तो बहुत अमीर है, लेकिन वो उर्वशी को ज्यादा रुपया नहीं देते हैं.

उर्वशी आगे बोली- मैं अपने आपको शान्त करने के लिए एक क्रीम भी लायी हूँ, जिसे पुसी पर लगाने से वो और टाइट हो जाती है. जिससे मुझे उनके 5 या 5.5 इंच के पेनिस से ही मजा आने लगता है. इससे मेरी आग भी शांत हो जाती है और उन लड़कों को भी मजा आ जाता है. वो मुझ पर खर्चा करते हैं. मगर आठ इंच का लंड चुत में सुनामी ला देता है बाबू … ये तो तुमको मानना ही पड़ेगा.

ये कह कर उर्वशी हंस पड़ी.

मैंने उससे कहा- यार, आपका अच्छा सिस्टम है.
वो बोली- कोई बात नहीं जान, मैं तुम्हारा भी कुछ देखती हूँ … कुछ जिससे तुम्हारी भी रुपए की प्रॉब्लम कम हो जाए.

मैं उसकी तरफ देखने लगा कि ये किस तरह से मेरी मनी प्रॉब्लम को दूर करेगी.

उसने मुझसे कहा कि तुमको जब भी पैसों की जरूरत हो, मुझसे मांग लिया करो … मैं दे दूंगी.
मैंने कहा- आपसे कैसे?

वो बोली- तो क्या हुआ … अब देखो मुझे जब पैसों की जरूरत होती है तब कुछ पैसे तो चुपचाप अल्मारी से निकाल लेती हूँ … क्योंकि घरवालों को मेरा ज्यादा खर्चा करना पसंद नहीं है. या मैं अपने बॉयफ्रेंड्स से ले लेती हूँ. तुम मुझे अपनी गर्लफ्रेंड समझ कर मुझसे पैसे ले लेना.

मैंने कुछ सोचा, तो वो बोली कि ज्यादा मत सोचो और शांति से वो करो, जैसा मैं बोलती हूँ. नहीं तो बस देख लियो.

मैंने भी उसे ओके बोला और बस फिर हम लेट गए.

इससे आगे की सेक्स कहानी बाद में लिखूंगा.

आपको मेरी हॉट गर्ल पेनफुल सेक्स स्टोरी कैसी लगी, आप मुझको मेल करके जरूर बताइए.
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