ट्यूशन में दिव्या की नंगी चुदाई – हॉट देसी सेक्स स्टोरी

Tuition Mein Divya Ki Nangi Chudai – Hot Desi Sex Story

ट्यूशन पढ़ाने गया शंकर कभी सोच भी नहीं सकता था कि रूखी-सूखी दिव्या एक दिन उसे इतना उत्तेजित कर देगी। टेबल के नीचे पैरों का खेल, बिना पैंटी की स्कर्ट, बंधे हाथों के साथ तड़पाना और फिर पूरी नंगी होकर गोद में बैठकर नंगी चुदाई… पढ़िए यह बेहद गरम हिंदी सेक्स कहानी।

दोस्तों, मेरा नाम शंकर है। मैं वडोदरा का रहने वाला हूँ और उस वक्त मेरी उम्र 22 साल थी। मैं नया-नया वडोदरा आया था, यहाँ कोई जान-पहचान वाला नहीं था। ऑफिस के बाद अकेलापन इतना सताने लगा कि बोरियत से बचने के लिए मैंने सोचा – क्यों न ट्यूशन पढ़ाया जाए?

कुछ दिनों बाद मुझे एक होम ट्यूशन का ऑफर मिला। मैंने तुरंत हाँ कर दी। पढ़ाने वाली लड़की का नाम था दिव्या। वो बारहवीं में एक बार फेल हो चुकी थी, इसलिए उसके घरवालों ने ट्यूशन लगवाई। घर में कुल चार लोग थे – मम्मी-पापा, दादी और दिव्या। वो इकलौती संतान थी।

पहले दिन मैं उसके कमरे में गया। हम आमने-सामने टेबल पर बैठे। मैंने क्लास शुरू की, लेकिन दिव्या बहुत रूखे अंदाज़ में जवाब देती थी। पहला दिन तो ऐसे ही निकला। अगले दिन भी वही सूरतेहाल। मुझे समझ आ गया कि वो पढ़ना ही नहीं चाहती।

फिर मैंने थोड़ा फ्रैंक होने की कोशिश की। पढ़ाई के बीच इधर-उधर की बातें करने लगा। पहले तो उस पर कोई असर नहीं हुआ, लेकिन 3-4 दिन बाद वो खुद भी खुलने लगी। धीरे-धीरे बातें करने लगी, हँसने लगी, और पढ़ाई में भी मन लगाने लगी। एक महीना ऐसे ही बीत गया। घरवालों को मुझ पर पूरा भरोसा हो गया था। अब जब मैं आता, तो वो मुझे सीधे दिव्या के कमरे में भेज देते और बीच में कभी नहीं आते।

इससे हम दोनों और करीब आ गए। साथ बैठते तो पैर आपस में टच हो जाते। दिव्या कभी शिकायत नहीं करती, बल्कि मुस्कुरा देती। बातों-बातों में पता चला कि वो बचपन से गर्ल्स स्कूल में पढ़ी है, घरवाले उसे बाहर ज्यादा जाने नहीं देते। घर पर वो बहुत बोर होती है। इसी वजह से हम बहुत अच्छे दोस्त बन गए।

एक दिन मैं उसे फिजिक्स पढ़ा रहा था। उसका पढ़ने का मूड बिल्कुल नहीं था, लेकिन मैं ज़िद कर रहा था। तभी दिव्या ने मुझे छेड़ने के लिए अपने पैर से मेरे पैरों को सहलाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उसका पैर मेरी जाँघों तक पहुँच गया। मैंने उसका पैर रोका और कहा, “रुक, पढ़ाई करते हैं।”

दिव्या ने शरारती मुस्कान के साथ कहा, “तू गे तो नहीं है ना…?”

मैं चौंका, “क्या कहा? आज तो बहुत मस्ती सूझ रही है तुझे।”

वो हँसकर बोली, “तू नपुंसक है… एक लड़की तुझे छू रही है और तू मना कर रहा है।”

अब तक मैंने उसे कभी गंदी नज़र से नहीं देखा था। वो हमेशा सलवार-सूट में आती थी, लेकिन उस दिन टी-शर्ट और स्कर्ट में थी। उसके 34B साइज़ के बूब्स टी-शर्ट में इतने टाइट थे कि नज़र हटाना मुश्किल था।

मैंने भी हार नहीं मानी। टेबल के नीचे अपने पैर से उसके पैर सहलाने लगा। दिव्या ने पैर और फैला दिए। मेरे पैर उसकी सॉफ्ट, मुलायम जाँघों तक पहुँच गए – रेशम जैसे। मैं उसकी जाँघों पर धीरे-धीरे उँगलियाँ फेरने लगा।

दिव्या ने आहिस्ता से कहा, “क्या हुआ… डर लग रहा है? या बस जाँघें तक ही? लोग कहते हैं कि आगे तो जन्नत है…”

मैंने पैर और आगे बढ़ाया। हैरानी हुई – उसने पैंटी नहीं पहनी थी। मेरी उँगलियाँ उसकी चिकनी, गर्म चूत को छू गईं। मुझे झटका लगा, मैंने पैर पीछे खींच लिया। लेकिन दिव्या ने मेरा पैर पकड़ लिया, हाथों से सहलाया और फिर धीरे से अपनी चूत पर रख दिया।

मेरा लंड इस वक्त पत्थर जैसा हो चुका था। मैं हल्के-हल्के उसकी चूत सहला रहा था। उसके चेहरे पर कामुक मुस्कान थी। मेरी उँगलियाँ उसकी चूत के होंठों पर रगड़ रही थीं। दिव्या ने भी अपना पैर मेरे लंड पर रख दिया और धीरे-धीरे दबाने लगी। मुझसे अब रहा नहीं जा रहा था। मैं कुर्सी से उठकर उसकी तरफ बढ़ा।

दिव्या ने फुसफुसाया, “नहीं… रुक जाओ। कोई आ गया तो…? प्लीज़… बस इतना ही…”

मैंने बेचैनी से कहा, “यार प्लीज़… मुझे तेरी चूत देखनी है।”

वो हँसी, “पागल मत बनो, मुसीबत हो जाएगी।”

मैंने उसकी चूत को ज़ोर से रगड़ना शुरू कर दिया। वो तेज़-तेज़ साँसें लेने लगी।

“आह्ह… आह्ह… आराम से प्लीज़…”

फिर बोली, “ठीक है… लेकिन एक शर्त है। पहले तेरे हाथ बाँधने होंगे।”

मैं हैरान, “क्या? क्यों? बिना हाथ के क्या मज़ा?”

दिव्या ने शरारत भरी नज़रों से कहा, “मुझे पता है… जैसे ही मैं चूत दिखाऊँगी, तू फिंगरिंग करेगा, और भी बहुत कुछ। अगर कोई आ गया तो…? मैं रिस्क नहीं ले सकती।”

मैंने सोचा – मौका हाथ लगा है, छोड़ना नहीं चाहिए। हाँ कर दी। वो उठी, अलमारी से अपना दुपट्टा लिया और मेरे हाथ कुर्सी से पीछे बाँध दिए।

मुस्कुराते हुए बोली, “हाँ तो मास्टर साहब… क्या देखना है आपको?”

मैंने काँपती आवाज़ में कहा, “उस जन्नत को… जो तूने छुपा रखा है।”

दिव्या मेरे सामने सेक्सी पोज़ देने लगी। उसने स्कर्ट को जाँघों तक ऊपर उठाया और टेबल पर बैठ गई। उसकी जाँघें दूध जैसी गोरी और चिकनी थीं। फिर वो मेरी गोद में आकर बैठ गई। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा था और उसकी चूत से टकरा रहा था। वो हल्के-हल्के अपनी चूत मेरे लंड पर रगड़ रही थी।

मैंने कहा, “ये क्या कर रही है…?”

वो फुसफुसाई, “वेट डार्लिंग… हर पल को एंजॉय करो…”

फिर उसने मेरी गर्दन पर किस करना शुरू किया। 5-6 किस के बाद अपने होंठ मेरे होंठों के करीब लाई।

“वॉना किस मी… फकर…?”

हम दोनों एक-दूसरे की गर्म साँसें महसूस कर रहे थे। उसके बूब्स मेरे सीने से दब रहे थे।

मैंने कहा, “तू होश में तो है ना…?”

दिव्या ने मेरी गर्दन पकड़ी और अपने होंठ मेरे होंठों से बिल्कुल सटा दिए। मैं जितना आगे बढ़ता, वो उतना पीछे हट जाती।

मैं बेचैन होकर बोला, “ये क्या… तू मुझे तड़पा रही है। अब कोई नहीं आएगा ना?”

वो हँसी, “तड़पने से आग और भड़कती है जानू…”

आखिरकार मैंने होंठ आगे किए, उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए। हम लंबा, गहरा किस करने लगे। कभी मैं उसके होंठ चूसता, कभी वो मेरे। वो पूरी तरह गरम हो चुकी थी। लंबी स्मूच के बाद हम अलग हुए।

मैंने पूछा, “घरवालों की परवाह नहीं है तुझे?”

दिव्या हँस पड़ी, “अरे मूर्ख… आज मम्मी-पापा कंपनी के फंक्शन में गए हैं। घर में सिर्फ दादी और मैं हूँ। दादी नीचे हैं और सीढ़ियाँ नहीं चढ़ सकतीं। तो आज मैं पूरी तेरी हूँ…”

मैंने कहा, “साली… फिर हाथ क्यों बाँधे?”

वो शरारत से बोली, “ताकि तू मेरा गुलाम बना रहे…”

“यार प्लीज़ हाथ खोल दे…”

“बहुत बोलता है…” कहकर उसने अपना बूब टी-शर्ट के ऊपर से मेरे मुँह पर दबा दिया। मैंने टी-शर्ट के ऊपर से ही उसके बूब्स चूसने शुरू कर दिए। उसकी निप्पल्स कड़ी हो गई थीं।

अब मैंने देर न की और कहा, “नंगा हो जा।”

पहले तो उसने मना किया, फिर उठकर बाहर चली गई। मैंने आवाज़ लगाई, “दिव्या…?” कोई जवाब नहीं। मुझे लगा शायद गुस्सा हो गई। मैं इंतज़ार करने लगा।

कुछ देर बाद जब वो वापस आई… तो पूरी नंगी। मेरे सामने नंगी खड़ी होकर मुस्कुराई और फिर मेरी गोद में बैठ गई।

“मास्टर जी, पढ़ाना…”

मेरा लंड लोहे जैसा हो चुका था। मैंने फिर रिक्वेस्ट की, “हाथ खोल दे।”

इस बार उसने मेरे हाथ खोल दिए। मैंने फटाफट पैंट उतारी, उसे गोद में उठाया। दिव्या ने मेरा लंड हाथ में लिया, मसलने लगी। फिर मुँह में लेकर चूसने लगी। मैंने भी उसकी चूत चाटनी शुरू कर दी। उसकी चूत पूरी तरह गीली थी, स्वाद अमृत जैसा।

अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था। मैंने कहा, “अब चुदाई शुरू करें?”

दिव्या ने मेरा लंड पकड़ा और अपनी चूत पर रगड़ने लगी। मैंने एक ज़ोर का झटका दिया – मेरा पूरा लंड उसकी टाइट, गर्म चूत में समा गया। वो सिसकारी भरी, लेकिन आँखों में सिर्फ चाहत थी।

मैंने धीरे-धीरे धक्के मारना शुरू किया। वो भी कमर उचकाकर साथ दे रही थी। हम ब्लू फिल्म स्टाइल में चुदाई कर रहे थे। वो बार-बार आहें भर रही थी, नाखून मेरी पीठ पर गड़ा रही थी। करीब 20 मिनट बाद मैं झड़ गया।

कान में फुसफुसाई, “शंकर… चुदाई में इतना मज़ा आता है, मुझे पता ही नहीं था। अब रोज़ सिर्फ ट्यूशन नहीं… चुदाई की ट्यूशन भी देना।”

हम दोनों हाँफते हुए एक-दूसरे से लिपटे रहे। उस दिन के बाद हमारी ट्यूशन क्लासेस का मतलब ही बदल गया था।