Bhai ko ladkiyon ki aadat dalne ke liye bahan bani randi
मम्मी-पापा के बाहर जाने पर अकेले घर में भाई-बहन का गंदा खेल शुरू हो गया। भाई की गे वाली आदत सुधारने के लिए बहन बनी रंडी, बहन ने अपनी टाइट चूत और गांड दी। पूरी रात चुदाई, चूसना, 69, गांड मारना… पढ़िए ये बेहद गरम इंसेस्ट सेक्स कहानी जो आपको झड़ा देगी!
मेरा नाम नेहा है, और मेरा बड़ा भाई विक्रम। हम दोनों की उम्र में सिर्फ तीन साल का फर्क है, इसलिए हम बचपन से ही बहुत क्लोज़ थे। हमारा घर भोपाल में है, मम्मी-पापा दोनों जॉब करते हैं और अक्सर बाहर टूर पर चले जाते हैं। उस बार भी वो एक हफ्ते के लिए दिल्ली गए थे, और घर पर सिर्फ हम दोनों थे।
पहले तो सब नॉर्मल था। दिन में मैं कॉलेज जाती, विक्रम अपनी जॉब से आता, हम साथ डिनर करते, मूवी देखते। लेकिन एक रात मैं उसके कमरे से गुजर रही थी तो दरवाजा थोड़ा खुला था। अंदर का नजारा देखकर मैं रुक गई। विक्रम बेड पर बैठा था, पैंट नीचे की हुई, और मेरी ब्रा हाथ में लेकर मुठ मार रहा था। उसका लंड पूरा खड़ा था – मोटा, लंबा, नसें उभरी हुईं। वो आँखें बंद करके सिसकारियाँ ले रहा था।
मैं चुपके से देखती रही। मुझे बुरा नहीं लगा, बल्कि अजीब सा एक्साइटमेंट हुआ। मैंने दरवाजा धीरे से बंद कर दिया और अपने कमरे में आ गई। उस रात मैं सो नहीं पाई। मुझे याद आया कि विक्रम पिछले कुछ महीनों से उदास रहता था। उसने मुझे बताया था कि उसे कोई गर्लफ्रेंड नहीं मिल रही, और फिर एक दिन रोते हुए कबूल किया था कि वो लड़कों की तरफ आकर्षित हो रहा है। मैंने उसे गले लगाया था और कहा था, “भाईया, टेंशन मत लो। सब ठीक हो जाएगा।”
अगले दिन सुबह मैंने उसे ब्रेकफास्ट टेबल पर पकड़ा। मैंने मुस्कुरा कर कहा, “भाईया, कल रात मैंने सब देख लिया।” वो पल भर में लाल हो गया, आँखें नीची कर लीं। मैंने उसका हाथ पकड़ा और बोली, “अरे, शर्मा मत। इस उम्र में ऐसा होता है। और वैसे भी… तेरी दीदी है मैं, कुछ नहीं बताऊंगी।”
वो फिर रोने लगा। मैंने उसे गले लगा लिया। उसका मजबूत सीना मेरे बूब्स से दब रहा था। मैंने उसके कानों में फुसफुसाया, “तूने कुछ गलत नहीं किया। बस… अगर मन कर रहा है तो कर ले।” उसने धीरे से कहा, “दीदी, मुझे कोई लड़की पसंद नहीं करती। मैं… मैं गे बन गया हूँ शायद।”
मेरा दिल दुखा। मैंने सोचा, अगर मैं उसकी मदद करूँ तो शायद वो ठीक हो जाए। मैंने उससे कहा, “भाईया, लड़कियाँ कॉन्फिडेंस पसंद करती हैं। तेरी बॉडी तो कमाल की है – जिम जाता है ना, मसल्स कितने स्ट्रॉंग हैं।” मैंने उसके बाजू को छुआ, दबाया। वो सरमा गया, लेकिन मुस्कुराया भी।
धीरे-धीरे हमारी बातें खुलने लगीं। मैं उसे टिप्स देने लगी – “लड़की की आँखों में देखकर बात करो, उसके बूब्स को मत घूरो, लेकिन कॉन्फिडेंट रहो।” वो मुझसे नजरें मिलाकर बात करने लगा। हम सेक्स टॉपिक पर खुलकर डिस्कस करने लगे। एक दिन उसने पूछा, “दीदी, तूने कभी सेक्स किया है?” मैंने हँसकर कहा, “हाँ, अपने एक्स के साथ। बहुत मजा आया था। लेकिन तू किसी को मत बताना।”
मैंने कई बार नोटिस किया कि वो मेरे क्लीवेज को देखता है जब मैं लो-नेक टॉप पहनती हूँ। मेरे टाइट जींस में मेरी गांड को घूरता है। मुझे अच्छा लगता था – कम से कम वो लड़की की बॉडी की तरफ आकर्षित हो रहा था।
फिर वो हफ्ता आया जब हम अकेले थे। एक रात मैं शॉर्ट नाइटी पहने उसके कमरे में गई। बोली, “भाईया, नींद नहीं आ रही। चल, कुछ हॉट मूवी देखते हैं। मेरा बहुत मन कर रहा है।” वो चौंका, लेकिन उसकी आँखों में चमक थी। “दीदी, सच में?” मैंने हँसकर कहा, “हाँ यार, हम इतने क्लोज़ हैं। एक-दूसरे से क्या छुपाना।”
हम उसके बेड पर लेट गए, लैपटॉप ऑन किया। ब्लू फिल्म स्टार्ट हुई। स्क्रीन पर लड़की लंड चूस रही थी। मैंने देखा, विक्रम की पैंट में उभार हो रहा था। मैं भी गर्म हो रही थी – मेरी पैंटी गीली हो चुकी थी। मैंने धीरे से अपना पैर उसके पैर पर रख दिया। वो काँपा।
फिल्म में सेक्स सीन आया। विक्रम ने धीरे से कहा, “दीदी, मैंने कभी रियल चूत नहीं देखी।” मैंने शरारत से उसकी तरफ देखा, “देखना चाहता है?” वो साँस रोककर बोला, “कैसे?” मैंने उसके गाल पर किस किया और बोली, “मैं दिखाऊँगी… लेकिन तू भी अपना लंड दिखाएगा।”
मैं उसके ऊपर चढ़ गई। मेरे बूब्स उसके चेहरे के सामने थे। मैंने उसकी टी-शर्ट ऊपर की, उसके सीने पर किस किया। उसने मेरी नाइटी ऊपर की और मेरे बूब्स दबाने लगा। “दीदी… कितने सॉफ्ट हैं…” मैंने उसकी पैंट खोली। उसका लंड बाहर आया – 7 इंच का, मोटा, टॉप पर प्रीकम चमक रहा था। मैंने उसे हाथ में लिया, ऊपर-नीचे किया। वो सिसकारी ले रहा था।
फिर मैं खड़ी हुई, नाइटी उतारी। अब मैं सिर्फ पैंटी में थी। उसने पैंटी नीचे खींची। मेरी क्लीन शेव्ड चूत उसके सामने थी – गुलाबी, गीली। वो घुटनों पर बैठ गया। पहले उँगलियों से छुआ, फिर मुँह लगा दिया। उसकी जीभ मेरी क्लिट पर घूम रही थी। मैंने उसके सिर को पकड़कर दबाया। “आह्ह्ह भाईया… चाटो… और अंदर डालो जीभ…” वो पागल हो गया। मेरी चूत चाटता रहा, गांड भी मसलता रहा। मैं काँप रही थी।
हम बेड पर गिर गए। मैंने उसका लंड मुँह में लिया। पूरा गला तक। वो मेरी चूत में दो उँगलियाँ डाल रहा था। फिर हम 69 में आ गए। मैं उसके ऊपर, मेरी चूत उसके मुँह पर। वो चूत और गांड दोनों चाट रहा था। कभी गांड में जीभ डालता, कभी उंगली। मैं उसका लंड चूस रही थी – बॉल्स तक। हम दोनों के मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थीं।
मैं अब बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। मैं ऊपर उठी, उसका लंड पकड़ा और अपनी चूत पर रखा। धीरे-धीरे बैठ गई। “आआह्ह्ह… भाईया… कितना मोटा है… फाड़ देगा…” पूरा अंदर गया। मैं ऊपर-नीचे होने लगी। मेरे बूब्स उछल रहे थे। वो नीचे से धक्के मार रहा था। “दीदी… कितनी टाइट है तेरी चूत…” मैं तेज हो गई। मेरा पहला ऑर्गेज़म आया – मैं चीखी, काँपी, उस पर गिर गई।
लेकिन वो अभी नहीं झड़ा था। मैंने लंड निकाला, अपनी गांड की तरफ किया। पहले सिर अंदर गया, दर्द हुआ। मैंने कहा, “धीरे भाईया…” उसने धीरे-धीरे अंदर किया। जब पूरा अंदर गया तो मजा आने लगा। मैंने कहा, “अब तेज…” वो तेज हो गया। फिर उसने मुझे डॉगी स्टाइल में किया। मेरी गांड ऊपर, उसने एक जोरदार ठोक दिया। “आह्ह्ह… मारो भाईया… जोर से…” कमरे में चाप-चाप की आवाजें गूँज रही थीं।
फिर उसकी स्पीड और तेज हुई। उसने मेरी कमर पकड़ी और बोला, “दीदी… झड़ रहा हूँ…” उसका गरम माल मेरी गांड में छूट गया। इतना सारा कि बाहर बहने लगा। वो मेरे ऊपर गिर गया। हम दोनों पसीने से तर थे। उसने मेरी गर्दन पर किस किया और बोला, “दीदी… थैंक यू… जिंदगी का बेस्ट सेक्स।”
मैंने मुस्कुरा कर कहा, “अब से जब मन करे, मेरी चूत और गांड मारना। तुझे किसी लड़के की जरूरत नहीं।”
उस हफ्ते हमने कई बार किया। सुबह उठते ही किचन में, शावर में, सोफे पर। हर बार नया पोजीशन। धीरे-धीरे विक्रम पूरी तरह बदल गया। उसका लड़कों वाला क्रेविंग खत्म हो गया। वो अब बाहर कॉन्फिडेंट होकर लड़कियों से बात करता था। लेकिन घर आकर अपनी दीदी को चोदता था।
हमारा रिश्ता और गहरा हो गया – प्यार, सेक्स और एक राज़ जो सिर्फ हमारा था। आज भी जब मम्मी-पापा बाहर जाते हैं, हम वो पुराने दिन याद करते हैं… और फिर से वही गरम रातें शुरू हो जाती हैं।