दोस्त की छोटी बहन को चोदा- 1

सेक्सी गर्ल ओरल सेक्स कहानी मेरे दोस्त की छोटी बहन के साथ सेक्स की है. वो बहुत चुलबुली है. हमें साथ वक्त बिताने का मौक़ा मिला तो बात बन गयी.

दोस्तो, मेरा नाम कान्हा साहू है. मैं 28 वर्ष का हूँ और रायपुर छत्तीसगढ़ से हूँ.

मैं एक प्रोफेशनल फोटोग्राफर हूँ और ईवेन्ट प्लानर का काम करता हूँ.
मेरे पिताजी एक धनाढ्य जमींदार हैं और पैसे से किसी बात की कमी नहीं है.

Hot Girl Oral Sex Kahani उन दिनों की है, जब मेरे दोस्त के बहन की शादी होने वाली थी.

मेरे दोस्त का नाम राहुल है, वो कनाडा में एक साफ्टवेयर कम्पनी में काम करता था.
उसके परिवार में 5 लोग हैं. उसके पापा एक सरकारी इंजीनियर हैं और मां एक सरकारी टीचर हैं.
उसकी दो बहनें हैं और उन दोनों ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है.

मेरे दोस्त ने मुझे कनाडा से फोन किया और मुझसे शादी की सारी तैयारी करने के लिए बोला.
चूंकि उसे ज्यादा दिन की छुट्टी नहीं मिल पा रही थी इसलिए वो शादी के एक दिन पहले ही भारत आ पा रहा था.

करीब 5 साल से मैं उसके घर नहीं गया था.
एक शाम मैं अपने ऑफिस से सीधा उनके घर चला गया.

वहां जब मैं पहुंचा तो आंटी ने गेट खोला और मुझे अन्दर आने को बोला.

मैंने आंटी को प्रणाम किया और अन्दर आ गया.
अन्दर अंकल जी अपने ऑफिस का कुछ काम कर रहे थे.

मैंने अंकल जी को प्रणाम किया और सोफे में बैठ गया.
तभी आंटी ने मीनू को पानी लाने को बोली.

मीनू वही लड़की थी जिसकी शादी होने वाली थी.

जब मीनू पानी लेकर मेरे सामने आई तो मैं उसे देखता ही रह गया.
वो 38-30-40 के भरे पूरे गदराए शरीर की मालकिन थी और पूरी क़यामत लग रही थी.

मीनू ने मुझे देख कर हाय कहा और झुक कर पानी पकड़ा दिया.
उस समय मेरी नजरें उसके मस्त मम्मों पर पड़ीं तो लंड ने अपना कमीनपन दिखा दिया.

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उसने भी मेरी नजरों को ताड़ लिया और हल्के से मुस्कान देकर मुझसे दूर हो गई.

खैर … अब हम सभी शादी की तैयारी के बारे में बात करने लगे थे.
तभी किसी ने पीछे से मेरी आंखें अपने हाथों से बंद कर दीं.

ये पीहू थी, राहुल की छोटी बहन.
मैंने जब उसे देखा तो वो तो मीनू से भी ज्यादा बवाल थी.

जब उसने मुझे पीछे से पकड़ा था तो उसकी चूचियां मेरी पीठ में दब रही थीं.
मुझे उसकी चूचियों का मखमली अहसास बहुत अच्छा लग रहा था.

तभी आंटी ने पीहू को डांटते हुए कहा- इतनी बड़ी हो गई है, पर तेरा बचपना अभी तक नहीं गया है.

शादी की तैयारी को लेकर अंकल जी ने मुझसे कहा- तुम्हें ही सभी तैयारी करना है बेटा. मुझे ऑफिस के कुछ जरूरी काम के कारण छुट्टी नहीं मिल पा रही है. शादी के एक हफ्ते पहले की ही छुट्टी मिली है. तुमको अपनी आंटी के साथ मिल कर सभी तैयारी पूरी करना है. अब सब तुम्हारी ही जिम्मेदारी है.
तुम पैसों की चिंता मत करना, बस सब काम अच्छे से करना है.

ये कह कर अंकल जी ने 10 लाख का चैक मेरे हाथों में देकर कहा- कोई अच्छा सा मैरिज प्लेस बुक कर लो और बाक़ी की बुकिंग वगैरह भी देख लो.
मैंने हामी भरते हुए बाकी की बातें की और उनके घर से चला गया.

अगले दिन मैं सुबह उनके घर चला गया.
आंटी ने मुझे चाय नाश्ता कराया.

मैंने आंटी से कहा- आंटी, हमारे पास 20 दिन ही बचे हैं. हमें सबसे पहले मैरिज प्लेस बुक करना होगा.
आंटी ने पीहू को बुलाया और बोल दिया- तुम कान्हा के साथ जाओ और कोई अच्छा सा मैरिज प्लेस बुक कर लो.

मेरे साथ जाने के लिए पीहू तैयार होने चली गई.

कुछ देर बाद जब वो बाहर निकली तो क्या कमाल की आइटम लग रही थी.
हम दोनों घर से निकल आए.

जब मैं उसे साथ लेकर जा रहा था तो सब पीहू को ही घूर कर देख रहे थे.

पीहू ने जींस और टॉप पहना हुआ था.
उसकी भरी हुई चूचियां उसके टॉप से बाहर आने को मचल रही थीं.

हम दोनों ने एक एक करके सभी मैरिज प्लेस में जाकर बात की. सभी पहले से ही बुक हो चुके थे, कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए.

पीहू भी कुछ परेशान दिख रही थी.
फिर हम लोग एक और जगह के लिए निकल पड़े.

वो 15 किलोमीटर की दूरी पर नया रायपुर में था.
उधर सुनसान रोड पर सन्नाटा पसरा था.

अचानक से पीहू ने मुझसे जिप्सी रोकने को कहा.
मैंने वहीं साइड में गाड़ी को रोक दिया.

पीहू इधर उधर देखने लगी.
मेरे पूछने पर वो शर्माती हुई बोली- मुझे बहुत जोरों से बाथरूम लगी है.

मैंने कहा- बस 5 मिनट में हम वहां पहुंच जाएंगे, वहीं कर लेना.
मगर वो नहीं मानी और वहीं कुछ दूर जाकर पेशाब करने के लिए अपनी जींस नीचे खिसकाने लगी.

वो बहुत मुश्किल से अपनी टाइट जींस के बटन खोल पाई और वहीं मेरी तरफ पीठ करके मूतने बैठ गई.

जब वो बैठ रही थी तो उसकी चिकनी गांड और चूत देख कर मेरा भी लंड अपनी औकात में आने लगा.
मैं बस अपने लंड को दबाते हुए उसे समझाने लगा.

फिर जब वो उठ कर आने लगी, तो मैं उसी की तरफ देख रहा.
वो मुझे देखते ही शर्म से लाल हो गई.

फिर हम लोग उस मैरिज प्लेस में गए.
वहां अभी काम चल रहा था तो उन लोगों ने भी हमें मना कर दिया.

अब हम लोग निराश होकर वापस घर पहुंचे.
तब तक शाम हो गई थी.

मैंने सारी बात आंटी को बताई तो वो भी परेशान दिख रही थीं.

जब मैं घर आया तो मेरे पापा किसी से फोन पर बात कर रहे थे.
मैं अपने कमरे में चला गया.

तभी मम्मी ने मुझे बुलाया. मैं गया तो पापा से बातचीत हुई.

पापा ने मुझसे कहा कि रायपुर से 10 किलोमीटर की दूरी पर कुछ फार्म हाउस बिक रहे हैं, क्यों ना गांव की कुछ जमीन बेच कर एक फार्म खरीद लिया जाए. मैंने फार्म लेने की बातचीत तो लगभग तय कर रखी है, बस एक बार तुम और देख लो.

मैंने कुछ सोचा और हां कर दिया.
पापा ने कहा- तुम इतने परेशान क्यों लग रहे हो?

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मैंने बताया कि राहुल की बहन की शादी है और मैरिज प्लेस नहीं मिल रहा है सभी जगह पहले से बुक हैं.

पापा ने एकदम से कहा- अरे तो फार्म देख लेते हैं, उधर किसी भी डेकोरेटर से बात करके शादी के लिए रेडी करवा लेते हैं. जगह का तो कुछ लगेगा नहीं, बस डेकोरेशन का खर्चा आएगा और वो भी मैरिज प्लेस से कम खर्च में पड़ेगा.

ये सुनकर मुझे बड़ा अच्छा लगा और मैं पापा के साथ उस जगह को देखने को राजी हो गया.

सुबह हम सब लोग जगह देखने चले गए सभी को वो फार्म बहुत पसंद आया तो हम उसे खरीदने के लिए तैयार हो गए.

नेशनल हाइवे में होने के कारण रेट कुछ ज्यादा था, फिर भी हमने खरीद लिया.

उधर बाजू में एक बीस कमरों वाला घर भी बना था, जिसमें थोड़ी साफ़ सफाई की जरूरत थी. बाकी सोफे बेड आदि सब डेकोरेशन वाला लगा देता.

अब मैं शादी की जगह को लेकर चिंता मुक्त था.
जब इस टेंशन से मुक्ति मिली तो वापस पीहू की गदरायी जवानी सामने छाने लगी.

शाम को पीहू ने मुझे फोन किया और बोलने लगी- कल घर क्यों नहीं आए, अभी बहुत काम बाकी हैं.

मैंने भी मजा लेते हुए कहा- हां, अभी तो बहुत कुछ करना बाकी है, अभी तो कुछ किया ही नहीं है.
वो मेरी बात को समझ नहीं पाई और पूछने लगी- हां तो बताओ कि कल सुबह कितने बजे आओगे?

मैंने बोल दिया- एक दिन के लिए जरूरी काम से बाहर जा रहा हूँ. एक दिन बाद आऊंगा.
वो बोली- ऐसा लगता है कि तुमको शादी के इंतजाम की कोई चिंता ही नहीं है.

मैंने कहा- तुम ज्यादा परेशान मत रहो … सब हो जाएगा. मुझ पर भरोसा करना सीखो.
उसके बाद मैंने एक डेकोरेशन वाले से बात की.

चूंकि वो सब मेरे कार्यक्षेत्र का मामला था तो मुझे सारा इंतजाम करने में ज्यादा समय नहीं लगा.

एक दिन बाद जब मैं सब काम सैट करके राहुल के घर गया, तो उधर आंटी परेशान बैठी थीं और मेरा इन्तजार कर रही थीं.

आंटी ने कहा- अब सब कैसे होगा, मेरी तो कुछ समझ में ही नहीं आ रहा है.
मैंने पीहू को देख कर मुस्कुराते हुए कहा- मैंने जिस काम को करने का मन बना लिया, तो समझो मैं उसे पूरा करके ही रहता हूँ.

मैंने आंटी से सारी बात बताई और मैरिज प्लेस की टेंशन न करने का कहा.
फार्म की बात सुनकर सब लोग बड़े खुश हुए.

पीहू ने कहा- मुझे वो जगह देखनी है.
मैंने उससे कहा- हां तुम्हें ही उधर रहकर सारा इंतजाम करवाना होगा. जब तक मैं बाकी के भाग दौड़ के काम निपटा लूंगा.

वो राजी हो गई और उधर फ़ार्म हाउस में रहने के लिए उसने अपना मन बना लिया.

फिर मैंने खरीदारी की सारी लिस्ट बनवा ली और मैंने पीहू के साथ मिलकर पूरा काम निपटा लिया.

इस बीच मेरी और पीहू के बीच कुछ अंतरंगता गहरा गई.
उसकी हरकतों से साफ़ समझ आने लगा कि बंदी मेरे लौड़े के नीचे आने को मचल रही है.

वो जब भी मौका मिलता मेरे ऊपर चढ़ जाती और कुछ न कुछ हरकत कर देती.
मैं उससे कहता- मान जा साली नहीं तो मैं तेरे ऊपर चढ़ जाऊंगा.
वो हंस कर कह देती- तू क्या चढ़ेगा. चढ़ने वाले अलग ही दिख जाते हैं.

उसकी इन सब बातों से तय हो गया था कि वो मेरे साथ सेक्स करने को मर रही है.
मैं बस राहुल का ख्याल करके रुक जाता था.

संडे के दिन मैं सबको अपने नए फार्म हाउस में ले गया.
उन सबको वो जगह बहुत पसंद आई.

अंकल ने सजावट को लेकर खर्चा जानना चाहा, तो मैंने उनसे ही पूछा- आप किसी मैरिज प्लेस के लिए कितना खर्चा मान कर चल रहे थे?

अंकल ने कहा- मैंने दस लाख की चैक तो तुम्हें एडवांस के लिए दी ही थी बाकी और जो लगता … वो अलग से.
अंकल ने लगभग सोलह सत्रह लाख का एस्टीमेट बनाया था कि उतने में जगह हो जाएगी.

मैंने कहा- उतने में आपके यहां की शादी की जगह के अलावा खाने पीने का इंतजाम भी हो जाएगा और कुछ बच ही जाएगा.
अंकल बहुत खुश हुए.

उधर से हम सब वापस आ गए.

शाम को मुझे सजावट वाले को लेकर जाना था.
मैंने अंकल से कहा- मुझे अब फार्म हाउस में रह कर ही सारे इंतजाम करने होंगे. मैं हर समय इधर नहीं रह सकता हूँ क्योंकि मुझे बाहर के काम भी निपटाने होंगे तो पीहू को इधर ही रह कर काम काज देखने होंगे.

अंकल आंटी रेडी हो गए और पीहू तो पहले से ही मरी जा रही थी.
उसकी समझ में आ गया था कि अकेले में रहने को मिलेगा तो चुदाई का खेल भी खेला जा सकता है.
वो ही सब मैं भी सोच रहा था.

हालांकि मेरे दिमाग में सब कुछ इतना जल्दी हो जाएगा, वैसा नहीं था.

फार्म हाउस के बाजू में भी एक 20 रूम का बहुत बड़ा बंगला था और वो खाली था. उधर बारात को रोकने की सभी सुविधाएं थीं.
मैंने वो बात कर रखी थी.

उस बंगले में साफ़ सफाई आदि की बात करके मैंने उसे बहुत कम पैसों में हासिल कर लिया था.

अंकल ने ये जाना तो भला वो कैसे मना कर सकते थे.
मैं अब फार्म हाउस में ही रहने लगा था साथ में वहां काम करने वाले कुछ बन्दों को भी रख लिया था.

जब शादी के 5 दिन ही बाकी रह गए थे तो मैं पीहू को अपने साथ फार्म हाउस ले गया.
वहां पर डेकोरेशन के काम चल रहे थे.
रात में भी वहां काम चल रहा था तो सभी के खाने पीने का इंतजाम भी था.

पीहू दिन में उधर रूकती थी और रात में घर आ जाती थी.
उसके साथ मेरी मस्ती बढ़ती ही जा रही थी.

उस दिन काम निपटाते निपटाते रात के 11 बज गए थे, समय का पता ही नहीं चला था.
पीहू घर जाने के लिए बोल रही थी.

हम दोनों लोग गाड़ी के पास गए तो गाड़ी का एक टायर पंचर पड़ा था, स्टेपनी भी खराब थी.
मैंने अंकल को फोन पर बता दिया- हम दोनों यहीं रुक रहे हैं, अभी भी काम चल रहे हैं और गाड़ी भी खराब है.

अंकल ने ओके कह दिया.
पीहू बहुत थक गई थी, उसे नींद आ रही थी तो मैं उसे अपने कमरे में ले गया.

वो मेरा रूम देख कर बहुत खुश हो गई.
एकदम से मेरे बेड में वो जैसे ही बैठी एकदम से उछल गई.
वो बेड एयर बेड था.

उसे एयर बेड पर अपनी गांड उचकाने में काफी मजा आ रहा था.
मुझे उसके उछलते हुए चूचे देखने में मस्त लग रहा था तो मैं भी उसे उछलते हुए देखता रहा.

फिर मैंने अपने कपड़े बदले और लेट गया.

मैंने पीहू को सो जाने के लिए बोला तो उसने थोड़ी देर में सोने का कह दिया.
रात के एक बजे मुझे पीहू ने उठाया और बोलने लगी- बिजली चली गई है, मुझे ऐसी गर्मी में नींद नहीं आ रही है.

मैंने देखा तो पाया कि बिजली खराब हो गई थी और जनरेटर भी काम नहीं कर रहा था.
मैंने उससे बोल दिया कि तुम्हें जैसे सोना है, सो जाओ. फिलहाल कुछ नहीं हो सकता है.

वो चुप होकर लेट गई और मैं सो गया. एक घंटे बाद पीहू ने अपना एक पैर मेरे ऊपर रख दिया और सोने लगी.
जब मैंने जाग कर पीहू को देखा तो मुझे 440 वोल्ट का झटका लगा.

वो सिर्फ ब्रा पैंटी में थी. उसे गर्मी लग रही थी तो उसने अपने कपड़े उतार दिए थे.
मैंने कुछ पल देखा और लंड की पुरजोर मांग पर तय कर लिया कि आज लौंडिया का काम उठा देना चाहिए. साली खुद से अधनंगी पड़ी है तो पक्के में चुदने का मूड बनाई होगी.

मैंने धीरे से उसकी ब्रा का हुक खोल दिया.
अब उसके 38 साइज़ के दूध मेरे सामने खुल गए थे.
मैंने धीरे से एक दूध को अपने मुँह में लेकर चूसना चालू कर दिया और दूसरे हाथ से उसकी पैंटी के ऊपर से चूत मसलने लगा.

थोड़ी देर में ही वो कसमसाने लगी और गांड उठाती हुई झड़ गई.
मैंने पैंटी के अन्दर हाथ डाल कर देखा तो पूरी सफाचट चूत थी.

मैंने इससे और आगे जाने के बारे में नहीं सोचा और लंड हिलाने का मजा लेते हुए रस झाड़ कर सो गया.

दोस्तो, सेक्स कहानी के अगले भाग में मैं आपको पीहू की चुदाई की कहानी लिखूँगा व आपको ये भी बताऊंगा कि दोस्त की गर्लफ्रेंड भी मेरे लंड से चुदने को कैसे मचली.

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सेक्सी गर्ल ओरल सेक्स कहानी का अगला भाग: हॉट गर्ल Xxx हिंदी कहानी