शब्बो चाची की चुदाई हो गयी-2

हॉट XxX मेड सेक्स कहानी में पढ़ें कि एक अमीर जवान लड़के ने अपने घर की नौकरानी शब्बो चाची की चूत को कैसे चोदा? चुदाई से पहले ओरल सेक्स हुआ.

दोस्तो, शब्बो चाची की चुदाई की कहानी के पहले भाग
घरेलू कामवाली की वासना जगायी
में आपने पढ़ा था कि कैसे मालिश के बहाने शब्बो अपने मालिक के जवान हुए बेटे वीरू के लंड से चुदना चाहती थी।
वीरू भी अपने जवान लौड़े को उसकी गर्म चूत में उतारकर उसकी प्यास बुझाने के लिए मरा जा रहा था।
दोनों के जिस्म नंगे हो चुके थे और अब शब्बो चाची की नंगी चूत वीरू के सामने थी।

अब आगे Hot XxX Maid Sex Kahani:

शब्बो की गीली चूत पर वीरू ने जीभ रख दी और उसका कमाल दिखाने लगा।

वीरू की गर्म जीभ का अहसास शब्बो को पागल कर गया और वो जोर जोर से सिसकारने लगी- आअह ह्ह्ह मालिक … चाटो खा जाओ मुझे, आह्ह … उम्म म्मम … ह्म्म्म … बहुत मजा आ रहा है मालिक!

सिसकारते हुए वो वीरू को शाबाशी दे रही थी।

जैसे जैसे वीरू उसकी चूत चाट रहा था वैसे वैसे वो भी अपने हाथ से उसकी पीठ, सिर को सहला रही थी.

शब्बो की कामुक सिसकारियां वीरू को और उकसा रही थीं, उसका लौड़ा अब शब्बो की चूत में घुसने को बेताब था मगर शब्बो की गीली नंगी चूत से निकल रहा रस वीरू को उसकी चूत को लगातार चाटते रहने के लिए मजबूर कर रहा था।

उसने अपनी जबान को उसकी चूत के पूरे अंदर तक धकेल दिया और भूखे भेड़िये की तरह वो उसकी चूत का पानी पीने लगा.
शब्बो सिसकारने लगी।
उसकी आँखें बंद हो चुकी थीं, साँसें तेज चलने लगी थीं।

जो ख़ुशी उसको उसका शौहर ना दे सका वही सुख आज उसका छोटा मालिक दे रहा था.

शर्म लाज त्याग कर वो अपने नंगे जिस्म को किसी पराये मर्द के हवाले कर चुकी थी- अह्ह … उम्मम्म … याल्ला मालिक … आईई ईसीई ही चाटो बाबा, खा जाओ मेरी रंडी चूत को मालिक … कहते हुए वो खुद अपनी गांड ऊपर करके अपनी फुद्दी वीरू के मुँह पर दबा रही थी.

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वीरू ने अपने दोनों हाथों से शब्बो के चूचे जकड़ रखे थे और आटे की तरह उनको गूँथ रहा था।
चूचियों के चूचक उंगलियों में लेकर उनको मरोड़ रहा था।

उसकी जबान 4 इंच तक शब्बो चाची की भोसड़ी में घुसी जा रही थी.
शब्बो की भोसड़ी अपने आप खुलने लगी थी, उसकी चूत का दाना फूलकर मूंगफली के दाने जैसा उभर आया था।

वीरू जैसे ही उस दाने को मुँह में लेकर चूसता तो शब्बो बुरी तरह तड़प उठती थी।

कई सालों से शब्बो की भोसड़ी झड़ी नहीं थी, उसकी चूत के अंदर का पानी बरसों से बाहर आने को तड़प रहा था और आज वीरू के उस हमले ने उसकी चूत का पानी बाहर आने के लिए मजबूर कर दिया था।

चाची की गीली भोसड़ी देख के वीरू ने अपनी दो उँगलियाँ अंदर घुसा दीं और जोर जोर से उसकी चूत को उंगलियों से चोदने लगा.
शब्बो पागल हो उठी और कामुकता में सिसकारने लगी- याल्ला हहह मालिक मैं मर गयी … अम्म्मीईई … आह्ह!

इतने में ही शब्बो ने वीरू का मुँह अपनी चूत पर जोर देकर दबाया, अपनी जाँघों से उसका सिर दबाते हुए शब्बो मूतने लगी.
बरसों से जमा किया हुआ यौवन रस शब्बो ने अपने मालिक के मुँह पर बहा दिया.

आँखें बंद करके वो उस परमसुख का आनंद ले रही थी; उसकी सांसें तेज चलने से उसकी चूचियाँ भी ऊपर नीचे हो रही थीं और वीरू भी मजे से चाची की चूत का पानी चाट रहा था.

धीरे धीरे वीरू के सिर पर दबी शब्बो की जाँघों ने अपनी पकड़ ढ़ीली कर दी और जैसे ही वीरू उसकी गिरफ्त से बाहर निकला उसने अपनी चाची को देखकर कहा- क्यों शब्बो, अकेले अकेले मजे ले रही है रंडी? चल उठ छिनाल … मेरा लौड़ा क्या तेरी अम्मी चूसेगी बहन की लौड़ी?

शब्बो भी झट से उठकर कुतिया बन गयी और सामने बैठे वीरू का लौड़ा अपने मुँह में ले लिया।
पहली बार वो किसी मर्द का लौड़ा चूस रही थी।
उसके शौहर को ये सब पसंद नहीं था और उसकी छोटी लुल्ली देखकर शब्बो का मन भी नहीं हुआ कभी लंड को चूसने के लिए.

मगर वीरू के बड़े लौड़े को देख कर उसके मुँह से और चूत से पानी का नल चालू हो गया था।
शब्बो ने बस एक बार अपने भाई का और अपने शौहर का लौड़ा देखा था, जो ख़तना किया हुआ थे.

वीरू का लौड़ा बिना ख़तने का था, उसके सुपारे के ऊपर चमड़ी अभी भी बरक़रार थी।
उस चमड़ी को पीछे खींचते हुए उसने वीरू के लौड़े का सुपाड़ा बाहर निकाला और उस पर चूमते हुए बोली- आज तो आपका लौड़ा पूरा निचोड़ लूंगी मालिक, आज से रोज आपसे रंडी बनकर चुदूंगी!

शब्बो ने जैसे ही उसका लौड़ा मुँह में लिया तो वीरू ने भी शब्बो के बाल पकड़ कर उसका मुँह लौड़े पर दबा दिया, अपना पूरा लौड़ा उसने शब्बो के हलक तक घुसा दिया और नीचे से कमर उठाकर वो शब्बो के मुँह को चोदने लगा.

अचानक घुसे लौड़े से शब्बो की सांस अटकने लगी और आंखों में पानी आने लगा।

मगर शब्बो पर कोई रहम ना दिखाते हुए वीरू ने उसका मुँह चोदना चालू किया और बोला- ले मादरचोद, चूस फिर मेरा लौड़ा छिनाल, इतने दिन से बदन दिखा कर मेरे लौड़े में आग लगा दी थी तूने … रंडी की औलाद … ले कुतिया, चूस तेरे यार का लौड़ा!

शब्बो के मुँह की लार से वीरू का लौड़ा भीगने लगा।
सुपारे से निकलता बून्द बून्द पानी शब्बो के मुँह में गिरकर उसे मर्दानगी का स्वाद चखा रहा था.

कुछ देर अपना लौड़ा अपनी कामवाली रांड शबाना चाची के मुँह में घुसाकर चोदने के बाद वीरू ने उसको बिस्तर पर लिटाया और अपनी गांड लेकर उसके मुँह पर बैठ गया।

पोर्न देख देखकर वीरू को भी अपनी गांड रंडी से चटवाने का मन होता था तो उसने अपनी शब्बो को इस काम के लिए चुन लिया.
जवान लौड़े की खुशबू और मर्द के पसीने से शब्बो जैसी औरत बाजारू रांड बन चुकी थी।

वीरू के लौड़े को हाथ से हिलाते हुए उसने अपनी ज़बान बाहर निकाली और वीरू की गांड को चाटने लगी.
अब दोनों एक दूसरे से विपरीत दिशा में होने के कारण वीरू को फिर से शब्बो चाची की चूत पीने का मन हुआ।

उसने इस बार अपनी 3 उँगलियाँ एक साथ उसकी फुद्दी में घुसा दीं और चिल्लाकर बोला- आअह चाची … चाट माँ की लौड़ी, खा जा मेरी गांड बहनचोद, घुसा तेरी जीभ मेरी गांड में चाची!

कहते हुए उसने अपनी गांड शब्बो चाची के मुँह पर रगड़ना चालू की और दूसरी ओर वो अपनी रंडी शब्बो चाची की चूत अपनी उंगलियों से खोलने लगा था.

शब्बो कभी वीरू की गांड तो कभी उसके टट्टे चाटती, तो कभी उसका लौड़ा मुँह में लेकर जुबान से चूसने लगती।
उसने अपने आप को वीरू की गांड के नीचे की रांड समझ लिया था।

उसके जवान लौड़े से अपनी चूत चुदवाने के लिए वो किसी भी हद तक जाने को तैयार थी- आह्ह्हह मालिक धीरे रगड़ो … फट जायेगी तेरी चाची की चूत वीरू बाबा … म्म्म्म … क्या मस्त लौड़ा है आपका, आज तो पूरा लौड़ा घुसाकर चोदो मुझे!

शब्बो तो जैसे पागल होकर उस जवान छोकरे की गांड और लौड़ा चूस रही थी, उसको चुदाई का खुला न्यौता दे रही थी.

वीरू ने भी अपनी इस रंडी शब्बो चाची को अपनी गांड के नीचे दबाकर बड़े मज़े लिए।

मगर अब उसका लौड़ा फूलकर गुस्सैल सांड की तरह उसको देख रहा था, लौड़े की हर एक नस फूल चुकी थी।
शब्बो के चूसने से वीरू के लंड का सुपाड़ा लाल हो चुका था और रंडी शबाना चाची की लार से उसका काला लौड़ा चमक रहा था.

अब वीरू ने एक बार फिर से अपना लौड़ा शब्बो के मुँह में डाला और जोर जोर से उसका मुँह चोदने लगा।
2-3 मिनट तक उसने शब्बो का गला फाड़ कर अपना लौड़ा बाहर निकाला और शब्बो को बोला- सुन मेरी रंडी, आजा अब मेरे लौड़े के सामने, टाँगें फैलाकर भीख मांग मेरे लौड़े के लिए छिनाल।

शब्बो ने ख़ुशी ख़ुशी अपने आपको वीरू के सामने पेश किया, दोनों टाँगें उठाकर उसने अपना काला भोसड़ा उसके सामने रखते हुए कहा- जी मेरे मालिक, मेरे आका, आ जाओ … चोदो मुझे मेरे सरताज़ … रंडी बना दो मुझे … रखैल बना लो अपनी … वीरू बाबा मैं भीख मांगती हूं आपसे … इस 2 कौड़ी की छिनाल रंडी को अपना लौड़ा दे दो!

भाई ने बहन की चूत मारी

शब्बो अब उस नौजवान वीरू के लौड़े को देखकर कुछ देर से डर भी रही थी।
इतना बड़ा लौड़ा उसने अपनी जिंदगी में नहीं देखा था और यहाँ तो वीरू का खूंखार लौड़ा उसकी फुद्दी में घुसने के लिए तैयार बैठा था.

भले ही शब्बो उस लौड़े को नाप नहीं पायी मगर अंदाजा लगाकर उसने कहा- वीरू बाबा, 7-8 इंच का तो होगा न आपका?
वीरू उसको देख कर बोला- क्यों चाची … डर गयी क्या इतना बड़ा देख कर? लगता है तेरे शौहर की लुल्ली तेरे इस भोसड़े को शांत नहीं कर पायी?

शब्बो ने हँसते हुए कहा- उस हिजड़े की बात ना करो मालिक, मादरचोद दिन रात दारू पीकर ना जाने कहां गांड मरवाता है भोसड़ी का!

वीरू ने शब्बो के दोनों पैर अपने कंधे पर ऱख दिए और अपना पूरा भार शब्बो के ऊपर लादते हुए बोला- ले रंडी … रख मेरा लौड़ा तेरे भोसड़े पर छिनाल!

ये सुन शब्बो ने अपने हाथ से उसका गर्मा गर्म लौड़ा पकड़ा और अपने फ़टे हुए भोसड़े पर रखा।
इतनी देर से वीरू ने उसकी चूत अपनी जीभ और उंगलियों से अच्छे से गीली करके खोल दी थी।

अब बारी थी इस बंद पड़े हुए गोदाम में फिर से माल भरने की!

उसने शब्बो के दोनों पपीते हाथों में लेकर मसल दिया और अपने होंठ उसके होंठों पर रख कर उसको पूरी तरह अपने काबू में कर लिया।
शब्बो भी किस करने में आँखे बंद करके लेती और तभी उसकी चूत का ख़ून हो गया.

चाची को अपने गिरफ्त में ले वीरू ने एक जोरदार झटका दिया और सरसराता हुआ उसका लौड़ा शब्बो की बंद पड़ी भोसड़ी को चीरता हुआ उसकी बच्चेदानी को चूमने लगा.

दर्द, पीड़ा, जलन ऐसे अनेकों भाव शब्बो के मुँह पर उमड़ने लगे।
होंठों को वीरू ने बंद करके रखा था।

टाँगें तो पहले ही उसके कंधे पर अटक चुकी थीं और शब्बो चाची किसी सिर कटी मुर्गी की तरह वीरू के लौड़े के नीचे तड़पने लगी.

“ह्म्म्म … उम्मम्म … हुम्म्म …” ऐसी दबी दबी आवाज से वो वीरू को रोकने की कोशिश करने लगी।
उसकी आँखों से निकलता पानी तकिये को गीला करने लगा मगर इस बात का कोई असर वीरू पर नहीं हुआ.

वीरू ने फिर से अपना लौड़ा सुपारे तक बाहर निकाला और उसी ताकत से उसने और एक वार शब्बो के भोसड़े के अंदर किया।
इस बार उसने बिना रुके 5-6 वार किये।

शब्बो तड़प रही थी।
वो अपने आप को छुड़वाने की कोशिश कर रही थी मगर उस जवान छोकरे ने उसकी माँ चोद कर रख दी.

वीरू उसको किसी बाजारू धन्धेवाली रंडी की तरह चोदे जा रहा था।

पोर्न देख देखकर उसको औरत की चुदाई की कला मिल चुकी थी और उस ‘ऑनलाइन ट्रेनिंग’ से मिली सीख उसको यहाँ पर काम आ रही थी.
शब्बो चाची दर्द से बिलख रही थी।

वीरू का लौड़ा चाची की फुद्दी की हर एक दीवार को रगड़ रगड़ कर मजे ले रहा था और शब्बो का बदन अब धीरे धीरे उन झटकों से खिलने लगा था.

कुछ देर के बाद वीरू ने अपने होंठ शब्बो के पपीतों के ऊपर लाये तो शब्बो को बोलने का मौका मिला।
अपनी उखड़ी हुई सांस से शब्बो चाची बोली- आआ आह्ह साले बहनचोद … ह्म्म तेरी माँ की चूत समझकर चोद रहा है क्या कुत्ते? आह्ह … ह्ह अम्म्मीईई … फाड़ कर रख दी तूने कुत्ते, प्लीज धीरे चोद यार … जलन हो रही है।

शब्बो के मुँह से गाली सुनकर वीरू को बड़ा गुस्सा आया तो उसने शब्बो के मुँह पर थप्पड़ मारते हुए कहा- हां कुतिया तेरी माँ की चूत समझकर चोद रहा हूं छिनाल … मादरचोद … तेरे घर की औरतें आती हैं हमारे पास चुदवाने … रंडी साली। एक दिन तेरे सामने तेरे बेटी को चोदूंगा!

वीरू अब गुस्से में आकर शब्बो को पूरी ताकत से चोदने लगा।

धीरे धीरे उसके लौड़े ने अपना रास्ता बना लिया था और शब्बो रांड की फुद्दी भी उस लौड़े से दोस्ती करके अपना पानी उस पर छिड़क रही थी.

उसके मम्में निचोड़ते हुए वो शब्बो के चूचक दांतों से काट रहा था, उनको उंगलियों से मरोड़ मरोड़ कर उनको सुजा रहा था और शब्बो चुपचाप अपनी टाँगें फैलाकर उसकी बेटी के उम्र के लड़के के साथ अपनी इज्जत लुटा रही थी.

शब्बो को जैसे जैसे मजा आने लगा तो उसकी कराहने की आवाज अब सिसकारियों में बदल चुकी थी।
खुद अपनी गांड ऊपर उठाकर वो वीरू का लौड़ा अपने भोसड़े में ले रही थी।

आज तक उसके शौहर की लुल्ली से इतना मजा उसको नहीं मिला जितना ये जवान छोकरा उसको दे रहा था.
वो बड़बड़ाने लगी- आअह ह्म्मम मालिक … चोदो … और चोद दो। मेरे लाल, फाड़ दे तेरी शब्बो चाची की चूत … अम्म्म मर गई … अल्लाह्ह ऐसे बोलती हुई वो खुद अब वीरू को अपनी ओर खींच रही थी.

उसके नाख़ून वीरू की पीठ पर गड़ चुके थे।

चूत से निकलता पानी उसके लौड़े को गीला कर रहा था और वीरू का जवान बदन शबाना की बरसों पुरानी हवस मिटा रहा था.
लगभग 15 मिनट तक बिना रुके, बिना थके वीरू ने शब्बो की बंद पड़ी पुरानी हवेली को खोलकर उसके खजाने की तह तक अपना लौड़ा घुसाया था।

चाची की चूत की तंग गलियां वीरू के लौड़े को ऐसे जकड़ रही थीं मानो उनको बड़े साल के बाद कोई अपना मिला हो. शब्बो का पूरा बदन वीरू के नीचे हिल रहा था।

वीरू अब उसको आजाद करके अपने घुटनों के बल बैठा था तो शब्बो की हिलती हुई चूचियां देख कर उसको और भी मजा आ रहा था.

21 साल की उम्र में भी उसका लौड़ा इतना मोटा और लम्बा हो चुका था जो आज अपनी कामवाली शब्बो चाची की चूत को भोसड़ा बनाने पर तुला था.

शब्बो की हिलती हुई चूचियों पर सटासट थप्पड़ मारते हुए वो बोला- क्यों मेरे लौड़े की पालतू कुतिया … अब बता किसकी माँ चुद रही है छिनाल? ले खा ले मेरा लौड़ा शब्बो रंडी!

इधर शब्बो की चूचियां लाल हो रही थीं मगर उसको इस बात की कोई चिंता नहीं थी, उसको तो बस बरसों से अपने पुराने भोसड़े में लगी खुजली मिटाने वाला मर्द मिल गया था और उसका हर ज़ुल्म सरआंखों पर रख कर वो वीरू के लौड़े के नीचे चुद रही थी.

इस घमासान ठुकाई में अब शब्बो की चूत अपना पानी त्यागने को उतावली हो रही थी।
वो खुद अपनी गांड ऊपर उठाकर वो वीरू के लौड़े को अपने भोसड़े में पूरा अंदर तक लेकर चुदवा रही थी।

उसकी सिसकारियाँ इतनी कामुक थीं कि कोई भी सुन लेता तो उसका लौड़ा झट से खड़ा हो जाता.

शब्बो के बाल बिखरे हुए थे, उसकी चूचियों पर चूसने के, काटने के निशान बन गए थे।

चूत का हाल तो पूछो ही मत साहब … अब तो बस खून आना बाकी रह गया था.

एक हाथ से वीरू शब्बो की चूचियां पीट रहा था तो दूसरे हाथ से उसकी फुद्दी का दाना रगड़ रगड़ कर उसे और लाल लिए जा रहा था।

लौड़े का हर वार इतना फुर्तीला था कि उसके लौड़े का सुपारा शब्बो की बच्चेदानी को ‘हाय-हेल्लो’ करके बाहर आ रहा था.

चुदने से पहले ही एक बार शब्बो की चूत का पानी निकल चुका था।

मगर वीरू के मोठे लौड़े की ठुकाई से फिर से शबाना की चूत अपना रस निकालने को बेताब थी- आअहह मालिक और जोर जोर से पेलो, फाड़ दो मेरी चूत … हऊऊम्म … अम्मीईईईई … फट गयी मेरी चूत!
कहते हुए शब्बो और जोर जोर से अपनी गांड उठाने लगी.

वीरू ने शब्बो चाची की कमर पकड़ी और वो भी अपना लौड़ा धुंआधार सलीक़े से शब्बो की भोसड़ी में अंदर बाहर करने लगा।
उस आखिरी 20-25 धक्कों ने शबाना की फुद्दी को फिर से घायल कर दिया- याआआ याल्ला हहह …. मैं गयीईई ईईईई … ईईई … मालिक … बचा।
पुकार लगाते हुए शबाना उस जवान छोकरे के लौड़े पर मूतने लगी.

कुछ देर वीरू ने अपना लौड़ा पूरा बच्चेदानी तक घुसाकर रखा ताकि शब्बो उसकी चूत के झड़ने का मजा ले सके।
मगर अब उसको शब्बो की गांड याद आने लगी।

फिर उसने एक ही झटके में अपना लौड़ा उसकी फटकर फ़ैल चुकी चूत से बाहर निकाला और बोला- चल चाची, कुतिया बन जा अब मेरे सामने रंडी, आज तेरी इस फूली हुई गांड का भी मजा लेने दे।

गांड चुदाई के नाम से ही शब्बो को पसीना आने लगा और उसने डरते हुए वीरू से कहा- मालिक, चूत जितनी मर्जी चोद लो मगर गांड में मत करो. सुना है बहुत दर्द होता है … और वैसे भी हमारे में इसकी इजाजत नहीं है मालिक!

वीरू को इस बात से कोई मतलब नहीं था कि शब्बो क्या चाहती है।

तो उसने गुस्से से शबाना के बाल खींचे और उसको बिस्तर से नीचे खींचते हुए कहा- तेरी माँ का भोसड़ा … 2 कौड़ी की रांड … अब तू मुझे मना करेगी? चल कुतिया बन जा रंडी … आज तो जो चाहे हो जाए … तेरी इस गदरायी गांड को चोदना है मुझे … समझी?

शब्बो ने बहुत मना किया मगर वीरू के सिर पर तो जैसे खून सवार था।
जिस लंड को लेकर उसने अपनी चूत की सदियों पुरानी प्यास बुझाई है अब उसी लंड के गांड में जाने के डर से उसकी गीली चूत भी जैसे सूखने लगी थी।

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