दीदी की सबसे अच्छी दोस्त नेहा को घर पर चोदा अकेले में। गरम-गरम हिन्दी सेक्स स्टोरी जिसमें दीदी की गैरमौजूदगी में नेहा के नरम जिस्म को चूमते, चूसते और जोरदार चुदाई की पूरी डिटेल। सॉफ्ट, सेक्सी और सहमति वाली लंबी देसी चुदाई कहानी। पढ़िए और आनंद लीजिए।
Didi Ki Dost Ko Ghar Par Choda
दीदी का नाम रिया था। वो कॉलेज में फाइनल ईयर में थी। उसकी सबसे अच्छी दोस्त थी नेहा। नेहा लंबी, गोरी, घने काले बालों वाली लड़की थी। उसकी आँखें बड़ी-बड़ी और होंठ गुलाबी थे। फिगर इतना आकर्षक कि देखने वाला बार-बार नजर घुमाता। नेहा अक्सर हमारे घर आती थी। दीदी के साथ पढ़ाई, गप्पें और कभी-कभी रात को रुक भी जाती थी।
मेरा नाम आर्यन था। मैं २२ साल का था, इंजीनियरिंग का स्टूडेंट। घर पर अकेला रहता था ज्यादातर क्योंकि मम्मी-पापा अक्सर बाहर रहते थे। उस दिन दीदी सुबह ही अपनी क्लास के लिए निकल गई थी। उसने मुझे बताया था कि नेहा शाम को आएगी कुछ नोट्स लेने। मैंने हाँ में सिर हिला दिया। दिल में हल्की सी खुशी हुई। नेहा को देखकर हमेशा से ही मन में कुछ हलचल होती थी।
शाम के चार बजे का समय था। doorbell बजी। मैंने दरवाजा खोला। नेहा खड़ी थी। हल्की पीली सलवार सूट में। सूट का दुपट्टा थोड़ा सरक गया था जिससे उसकी नाजुक गर्दन और हल्का सा क्लैवेज दिख रहा था। बाल खुले हुए थे, हल्की सी मुस्कान चेहरे पर।
“आर्यन, दीदी है?” उसने पूछा, आवाज मीठी।
“नहीं, वो तो क्लास गई है। बोली थी तुम आओगी। अंदर आ जाओ,” मैंने कहा और दरवाजा चौड़ा किया।
वो अंदर आई। उसके कदमों की चप्पलों की आवाज घर में गूंजी। मैंने उसे सोफे पर बैठाया और पानी ला दिया। बातें शुरू हुईं। पहले तो दीदी के नोट्स की, फिर कॉलेज की, फिर फिल्मों की। नेहा हँसते हुए बात कर रही थी। उसकी हँसी में कुछ ऐसा जादू था कि मैं बार-बार उसकी आँखों में देख रहा था।
धीरे-धीरे बातें निजी होने लगीं। वो बोली, “आर्यन, तुम्हें गर्लफ्रेंड है क्या?”
मैंने शरमाते हुए कहा, “नहीं, अभी तक नहीं मिली।”
उसने मुस्कुराते हुए कहा, “अच्छा है। तुम अच्छे लड़के लगते हो।”
मौसम गरम था। एसी चला दिया मैंने। लेकिन कमरे में कुछ और ही गर्मी फैल रही थी। नेहा का दुपट्टा सरक गया। उसकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी। मैंने नजर हटाने की कोशिश की लेकिन नहीं हट रही थी। उसने मुझे देखा और हल्का सा मुस्कुराई। जैसे उसे पता था मैं क्या सोच रहा हूँ।
“पानी पी लो, गरम लग रहा है न?” उसने कहा और खुद उठकर फ्रिज से कोल्ड ड्रिंक निकालने लगी। झुकते वक्त उसकी कमर का घुमाव, कूल्हों की लहर… मैं सांस रोककर देख रहा था।
वो वापस आई और मेरे बगल में बैठ गई। अब दूरी बहुत कम थी। उसकी खुशबू – हल्की मीठी परफ्यूम – मेरे नथुनों में घुस रही थी।
“आर्यन… तुम मुझे देखते रहते हो न?” उसने धीरे से पूछा।
मेरा चेहरा लाल हो गया। “सॉरी… बस…”
“नहीं, बुरा नहीं लगता,” उसने कहा और अपनी उँगलियाँ मेरे हाथ पर रख दीं। नरम, गर्म स्पर्श।
उस पल में कुछ टूटा। मैंने धीरे से उसका हाथ पकड़ा और अपनी तरफ खींचा। वो बिना विरोध के मेरे सीने से लग गई। उसकी साँसें तेज हो गईं। मैंने उसकी ठोड़ी ऊपर उठाई और होंठों पर हल्का सा किस किया। वो आँखें बंद करके जवाब दे रही थी।
किस गहरा होता गया। उसकी जीभ मेरी जीभ से खेलने लगी। मीठा, नम, गर्म। मेरे हाथ उसकी पीठ पर फिर रहे थे। सूट की सिल्की कपड़े के ऊपर से उसकी कमर को सहलाते हुए। वो सिहर रही थी।
“आर्यन… धीरे,” उसने फुसफुसाया, लेकिन आवाज में विरोध नहीं था। बल्कि चाहत थी।
मैंने उसे गोद में उठा लिया और बेडरूम की तरफ ले गया। दरवाजा बंद किया। बिस्तर पर उसे लिटाया। नेहा की आँखें आधी बंद थीं। गाल लाल। होंठ भीगे हुए।
मैं उसके ऊपर झुका। फिर से किस। इस बार गला, कान के नीचे, कंधे। उसने मेरे बालों में उँगलियाँ फेरीं। मैंने धीरे से उसका दुपट्टा हटाया। सूट की कुर्ती के बटन खोलने लगा। एक-एक करके। उसकी गोरी छाती सामने आई। हल्के गुलाबी ब्रा में छुपे हुए निप्पल्स ऊपर उठे हुए थे।
“बहुत सुंदर हो तुम,” मैंने कहा।
Fucked sister’s friend at home
उसने शरमाकर मुस्कुराया और मेरी शर्ट खींचकर उतार दी। मेरे सीने पर हाथ फेरा। नाखून हल्के से खरोंचते हुए। अच्छा लग रहा था।
मैंने ब्रा का हुक खोला। दो नरम, गोल, भरे हुए स्तन बाहर आ गए। गुलाबी निप्पल्स। मैंने एक को मुंह में ले लिया। चूसने लगा, जीभ से घुमाते हुए। नेहा कराह उठी। “आह… आर्यन…”
दूसरे स्तन को हाथ से दबाते हुए, मसलते हुए। वो मेरी पीठ पर नाखून गड़ाए जा रही थी। उसकी कमर उठ-उठकर मुझसे सट रही थी।
मैंने नीचे जाकर कुर्ती पूरी उतार दी। सलवार का नाड़ा खोला। वो खुद ही उठकर मुझे मदद कर रही थी। पैंटी में अब वो लगभग नंगी थी। गोरी जांघें, चिकनी त्वचा। पैंटी पर हल्का गीला निशान।
मैंने अपनी पैंट उतारी। मेरा लंड पहले से ही पूरा खड़ा था। नेहा ने उसे देखा और अपनी होंठ चाटे।
“धीरे करना,” उसने कहा, लेकिन आँखों में उत्सुकता थी।
मैं उसके पैरों के बीच आ गया। पहले तो उँगलियों से उसकी पैंटी के ऊपर से सहलाया। वो सिहर गई। फिर पैंटी उतार दी। उसकी चूत बिल्कुल साफ, गुलाबी, और पहले से ही भीगी हुई थी। मैंने उँगली घुमाई। वो कराह रही थी।
“आर्यन… अंदर आना… मैं तैयार हूँ,” उसने कहा, आवाज भारी।
मैंने कंडोम पहना (सुरक्षा के लिए) और धीरे से अपनी नोक उसकी चूत के मुंह पर रखी। धीरे-धीरे दबाया। वो आँखें बंद करके सांस रोके हुए थी। अंदर घुसते ही गर्मी, नमी, और तंगी का अहसास हुआ। नेहा ने अपनी टाँगें मेरी कमर पर लपेट लीं।
धीरे-धीरे धक्के लगाने लगा। वो मेरे साथ लय में हिल रही थी। स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे। मैंने एक हाथ से उन्हें दबाया, दूसरे से उसके कूल्हे पकड़े। रफ्तार बढ़ाई। कमरे में चूत-चूत की आवाज और हमारी सांसों की ध्वनि गूंज रही थी।
“और जोर से… हाँ… ऐसे ही,” वो फुसफुसा रही थी।
मैंने उसे चारों खाने चित कर दिया। पीछे से घुसा। उसकी कमर पकड़कर जोर-जोर से ठोके लगा रहा था। उसके बालों को खींचा हल्का-हल्का। वो आनंद से चीख रही थी, लेकिन दर्द नहीं, सिर्फ मस्ती।
फिर वो ऊपर आ गई। मेरे ऊपर बैठकर खुद हिलने लगी। उसके स्तन मेरे चेहरे के सामने थे। मैं उन्हें चूस रहा था। वो तेज-तेज ऊपर-नीचे हो रही थी। उसकी चूत मेरे लंड को पूरी तरह निचोड़ रही थी।
“मैं आने वाली हूँ… आर्यन!” उसने कहा।
मैंने भी रफ्तार बढ़ा दी। दोनों एक साथ चरम पर पहुँचे। वो काँप उठी। मैंने अंदर ही भर दिया (कंडोम के अंदर)।
हम दोनों थककर लेट गए। उसका सिर मेरी छाती पर। मैं उसके बालों में उँगलियाँ फेर रहा था।
“ये बहुत अच्छा लगा,” उसने धीरे से कहा।
“मुझे भी। तुम बहुत खूबसूरत हो, नेहा,” मैंने उसके माथे पर किस किया।
रात भर हम ऐसे ही लिपटे रहे। फिर से एक दौर हुआ। इस बार और ज्यादा देर तक। मैंने उसे शावर के नीचे भी चोदा। पानी के नीचे उसके नंगे शरीर पर हाथ फेरते हुए, पीछे से घुसते हुए। वो दीवार का सहारा लेकर कराह रही थी।
सुबह होने तक हम कई बार एक-दूसरे के हो चुके थे।
अगले दिन दीदी जब आई तो नेहा सामान्य सी बात कर रही थी। लेकिन जब भी मेरी तरफ देखती, उसकी आँखों में वो चमक होती।
कई बार बाद में भी, जब दीदी नहीं होती, नेहा आ जाती। हम दोनों का ये राज़ बन गया। घर पर, उसकी चूत को चोदने का, उसे खुश करने का।
ये रिश्ता महीनों तक चला। दीदी को कभी शक नहीं हुआ। नेहा और मैं दोनों जानते थे कि ये सिर्फ शारीरिक आकर्षण नहीं, बल्कि एक खूबसूरत, सेक्सी, और गहरा कनेक्शन था। घर की दीवारें आज भी उन रातों की सिसकियों और आहों को याद करती हैं।