मेरे चाचा ने मेरी जवानी का पूरा मजा लिया- 4

Xxx गर्ल गांड चुदाई का मजा मेरे चाचा ने मेरी अनचुदी कुंवारी गांड मार कर तब लिया जब चाची भी बगल में सो रही थी. चाचा ने मेरी गांड जेल डालकर साफ़ की.

फ्रेंड्स, मैं आयुषी अवस्थी एक बार पुन: अपने सेक्स कहानी के माध्यम से आपकी कामवासना को शिखर पर ले जाने के लिए हाजिर हूँ.
कहने के पिछले भाग
मुझे चूत चुदाई में मजा आने लगा
में अब तक आपने पढ़ा था कि हम सब ऊटी जाने के लिए ट्रेन में थे. चाचा ने ऊपर वाली बर्थ पर मुझे चोद दिया था.

अब आगे Xxx Girl Gand Chudai Kahani:

हम सब अगले दिन ऊटी पहुंच गए.
हमने एक होटल में रूम बुक किया हुआ था. ज्यादातर बच्चे होने की वजह से एक बड़ा बेडरूम ही काफी था. होटल बहुत अच्छा था, नीचे रेस्टोरेंट थिएटर सब था.

हम सब कमरे में पहुंचे.
चाची ने पहले चेंज करने और फ्रेश होने का सोचा और वो वाशरूम चली गईं.

हम सब अपने फेवरेट काम में लग गए, टीवी ऑन हो गया और कार्टून चालू.

दो बेड लगे थे तो हम सब पूरे बेड पर उछल कूद कर रहे थे.

चाचा जी बोले- शांत होकर बैठकर देखो.
हम सब बैठ गए.

फिर उन्होंने पूछा- क्या खाओगे तुम सब?
सबने अपना अपना कुछ बोला.

चाचा जी बोले- पिज्जा कैसा रहेगा?
हम सब चिल्ला पड़े- हां हां.

चाचा जी ने रिसेप्शन पर कॉल लगाकर कहा- 2 पिज्जा और एक रॉयल स्टैग की बॉटल और साथ में आइस बकेट.

कुछ देर बाद चाची वाशरूम से आईं और चाचा अन्दर चले गए.
थोड़ी देर में रूम की घंटी बजी.

रूम सर्विस वाला सब सामान लेकर आया था.
हम सब बच्चे पिज्जा पर टूट पड़े.

चाचा जी बाहर आए.
चाची ने उनकी तरफ देखा और फिर दारू की बॉटल की तरफ.
फिर वो मुस्कुरा दीं.

उन दोनों ने भी पिज्जा का एक एक स्लाइस उठा कर खाने लगे और टीवी देखने लगे.
इतने में चाची बोलीं- कल से घूमना शुरू करते हैं. ट्रेन में बहुत थकान हो गई है इसलिए आज आराम कर लेते हैं.

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हम सब बच्चों का मुँह उतर गया.

इस पर चाचा जी बोले- अरे तुम लोग टेंशन नहीं लो, अभी हम सब आइसक्रीम खाएंगे और ढेर सारी मस्ती भी करेंगे.
चाची मुस्कुराकर बोलीं- पता नहीं कितनी एनर्जी है इनके पास?

चाचा चाची के कान में कुछ बोले.
जिस पर चाची ने मुस्कुराते हुए उनकी पीठ एक धौल जमाया और बोलीं- तुम चुप रहो.

फिर चाचा ने दारू की बॉटल उठाई और 2 पैग बनाए.
एक चाची को पकड़ा दिया और एक खुद पीने लगे.

मुझे नहीं पता था कि लड़कियां भी दारू पीती हैं. मैंने पहली बार किसी लड़की को दारू पीते देखा था.
फिर वो दोनों काफी देर तक पीते रहे और पिज्जा खाते रहे.

हम सारे बच्चे टीवी देख रहे थे.
फिर चाची बोलीं- अब मैं थोड़ी देर सोने जा रही हूँ, कोई चिल्लाना नहीं और शैतानी नहीं करना.

वो चाचा की तरफ देख कर बोलीं- और तुम भी नहीं.
चाचा बोले- जी मैडम.

चाची ने कम्बल ओढ़ा और लेट गईं.

क्योंकि एसी फुल पर चल रहा था तो ठंड तो लग रही थी. वैसे भी ऊटी का मौसम ठंडा होता है.
चाचा जी भी बेड पर आ गए और उन्होंने भी कम्बल ओढ़ लिया.

मैं पहले से ही बैठी थी तो मुझे खींच कर अपने पास को करते हुए बोले- तुम कहां चुप चुप बैठी हो.

मैं उनके आगे उनके पैरों के बीच में बैठ गई और कम्बल ओढ़ लिया.
वो अपना हाफ वाला लोअर पहने थे इसलिए उनका लंड उनके लोअर के थोड़ा ऊपर होते ही एक तरफ से झांकने लगा.

उन्होंने मेरा हाथ अपने लंड पर रख दिया.
अब आगे मुझे पता चल चुका था कि क्या करना होता है.

मैं उनके लंड की मुट्ठी मारने लगी और मेरे पैंटी न पहने होने की वजह से उनका हाथ सीधे मेरी चूत पर आ गया.

वो मेरी चूत में धीरे धीरे उंगली कर रहे थे.

बहुत देर तक वो मेरी चूत में उंगली करते रहे और मैं उनके लंड की मालिश करती रही.
मुझे उत्तेजना काफी ज्यादा चढ़ गई थी और मुझे अपनी चूत में लंड की खासी जरूरत महसूस होने लगी थी.
बाकी बच्चे धीरे धीरे सोने लगे थे.

चाचा ने उन्हें भी कम्बल उढ़ाया और लाइट्स और टीवी ऑफ कर दिया.
फिर मुझे धीरे से उठाकर अपने लंड पर बैठा लिया. चाची दारू के नशे में थीं तो गहरी नींद में सो गई थीं.

दस मिनट तक चोदने के बाद वो मुझे बाथरूम ले गए और बैग से कुछ दो पाऊच जैसे निकाल कर लाए थे, जिसमें पानी जैसा कुछ था.

फिर उन्होंने बाथरूम बंद करके मुझसे कान में कहा- इससे तुम्हारी गांड थोड़ी साफ हो जाएगी, बाकी मैं अपनी सूसू से कर दूंगा.

उन्होंने उस पाऊच का पाइप मेरी गांड में डाला और पूरा पाऊच मेरी गांड में खाली कर दिया.
फिर मुझसे कहा- इसे अपनी गांड में 10 मिनट तक रहने दो. तब तक मेरे पास बैठो.

वो कमोड पर बैठकर मेरी चूत में उंगली करते रहे और अपने लंड में मुट्ठी मरवाते रहे.
फिर दस मिनट बाद उन्होंने मुझसे कहा- अब तुम पॉटी कर लो.

मैं जैसे ही बैठी और थोड़ा प्रेशर लगाया मेरी गांड एकदम खाली हो गई.
दूसरे पाऊच की जरूरत भी नहीं पड़ी.

फिर मैंने अपनी गांड धोई और चाचा के साथ बाहर आ गई.
सब गहरी नींद में सोए हुए थे.

चाचा ने अब मुझे गोद में बिठाकर अपना लंड मेरी चूत में डाला और अपनी उंगली पर वैसलीन लगाकर मेरी गांड में डालने की कोशिश करने लगे.
इस बार उनकी उंगली मेरी गांड में बड़ी आराम से जा रही थी और जब उनकी उंगली मेरी गांड में जा रही थी तो मुझे चूत से भी ज्यादा मजा आ रहा था.

फिर उन्होंने दो उंगलियां डालना शुरू किया. मुझे अब और मजा आ रहा था.
हां थोड़ा सा दर्द था, पर जितना चूत में हुआ था … उससे बहुत कम.

एक तरफ चाचा मेरी चूत को अपने मोटे लौड़े से चोद रहे थे और दूसरी तरफ उनकी उंगलियां मेरी गांड चोद रही थीं.

चाची नशे में एकदम धुत पड़ी थीं और उनका पति अपनी कमसिन भतीजी को चोदने में लगा था.

फिर चाचा ने मुझे घोड़ी बनाते हुए धीरे से कान में कहा- अब मैं तुम्हारी गांड का छेद साफ करने जा रहा हूँ. ऐसे ही रहना और कम्बल को मुँह में जोर से दबा लो ताकि तुम चीखो नहीं. क्योंकि इसमें भी शुरू शुरू में दर्द होगा. फिर 2-4 बार के बाद नहीं होगा.

मैंने ‘ठीक है …’ में सर हिलाया और घोड़ी बन गई.

चाचा ने ढेर सारी वैसलीन अपने लंड पर लगाई और ढेर सारी मेरी गांड के छेद में भर दी, गांड के आसपास भी लगाई और अपना लंड मेरी गांड के छेद पर टिका कर धक्का दे दिया.

उनके लंड का टोपा मेरी गांड में जाकर सैट हो गया.
और सच कहूं तो चूत के मुकाबले इसमें न के बराबर दर्द हुआ.

वैसे मुझे अब भी गांड में लेना ही ज्यादा पसंद है, शायद शुरू से ही ऐसा था.

उन्होंने एक और धक्का दिया, उनका लंड गांड के अन्दर जाकर कहीं टकराया.
शायद उनका लंड मेरी पूरी गांड भर चुका था. उससे बड़ा लंड शायद उस टाइम मेरी गांड में नहीं जा सकता था.

उन्होंने शुरूआत में धीरे धीरे मेरी गांड चोदना शुरू की, फिर उन्होंने अपनी स्पीड बढ़ा ली.
उनकी उंगलियां अब मेरी चूत में थीं और लंड मेरी गांड में घुसा हुआ था.

वो मुझे दबा कर चोद रहे थे और मुझसे कान में कह रहे थे कि अब तुम्हारे दोनों छेद मैं रोज साफ करूंगा.
मैंने उनसे धीरे पूछा- एक दिन मैंने देखा था कि आप चाची के छेद साफ कर रहे थे तो चाची आह आह की आवाज कर रही थीं. उनको बहुत दर्द हो रहा था क्या?

तो उन्होंने बोला- अरे नहीं पगली … वो तो जब उनको छेद साफ करवाते हुए बहुत ज्यादा अच्छा लगता है, तो उनके मुँह से ऐसी आवाजें निकलने लगती हैं.
मैंने कहा- मुझे भी अच्छा लगता है तो क्या मैं भी वैसे ही करूं?

वो बोले- हां, मगर जब हम अकेले होंगे, तब करना.
मैंने कहा- ठीक है.

फिर वो मेरी गांड में और जोर जोर से धक्के मारने लगे और कुछ देर बाद मेरी गांड में ही झड़ गए.

उन्होंने मुझे किस किया और बोले- तुम चुपचाप लेटी रहना और सोने का नाटक करती रहना, फिर तुम देखना मैं तुम्हारी चाची की सूसू और गांड कैसे साफ करता और वो क्या क्या करती हैं. फिर तुम भी वैसे ही किया करना.

मैंने खुश होकर कहा- ठीक है.
मैं चुपचाप आंख बंद करके लेट गई.

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चाचा ने चाची की चूचियों को पीछे से पकड़ लिया और उन्हें मसलने लगे.

चाची ने कुछ देर बाद अंगड़ाई ली और चाचा से धीरे से बोलीं- बच्चे हैं यार, जग जाएंगे.

चाचा अपना हाथ शायद उनकी चूत पर ले गए क्योंकि चाची की तुरंत एक मादक सी आह निकली.
फिर चाची चाचा को अपने ऊपर खींच कर उन्हें किस करने लगीं, चाचा ने उनका गाउन खोल दिया.

चाची के नर्म नर्म चूचे लटक रहे थे क्योंकि उनकी चूचियां बहुत बड़ी थीं.

चाचा ने झट उनकी एक चूची को पकड़ा और उसको मुँह में भर कर जोर जोर से चूसने लगे.
चाची की फिर से ‘आहह आहह …’ निकलने लगी.

इस बार चाची की आहह आहह ज्यादा लंबी और जोर से निकल रही थी.

शायद लंड को जहां पहुंचना था, वो पहुंच चुका था.
चाचा ने धक्के मारना शुरू कर दिया.

चाची आह आहह की आवाज़ के साथ मजे से लौड़ा खा रही थीं.
फिर चाचा नीचे आ गए और चाची ऊपर … अब चाची अपनी गांड उछाल उछाल कर लंड अपनी चूत के अन्दर बाहर कर रही थीं और चाचा उनकी चूचियां मसलने में लगे थे.

फिर दोनों बैठ गए और चाची अपनी गांड से और जोर से धक्के मारने लगीं.
चाचा अपनी तरफ से धक्के मार रहे थे.
कमरे में फच फच की आवाजें गूंजने लगी थीं.

फिर चाची घूम गईं और लंड अपनी गांड में लेकर उस पर ही बैठ गईं.
वो अपनी गांड गोल गोल घुमाने लगीं.
फिर जैसे चूत चुदवा रही थीं, वैसे ही गांड उठा उठा कर मरवाने लगीं.

ये कार्यक्रम बीस मिनट तक चलने के बाद चाचा चाची के ऊपर लेट गए और उनके एक मम्मे को दबा कर पीने लगे.
चाची उन्हें बड़े प्यार से देख रही थीं और ओने हाथ से अपना दूध उन्हें पिला रही थीं.

कुछ देर बाद चाचा सीधे लेट गए.
चाची उनका लंड हाथ में लेकर बोलीं- इसको बाहर क्यों निकालते हो तुम, मेरी चूत में ही पेले रहा करो.

ये कहकर चाची उठीं और चाचा का लंड अपने मुँह में भर कर जबरदस्त ब्लोजॉब देने लगीं.

वो चाचा का लंड आखिरी इंच तक अपने मुँह में घुसा ले रही थीं.
बहुत देर तक उन्होंने चाचा के लंड के हर एक इंच को चखा, उनके गोटे चूस कर गोटों से खेलीं, लंड से खेलीं, कभी वो अपने मुँह पर रगड़तीं तो कभी होंठों पर.

जबरदस्त ब्लोजॉब के बाद उन्हें उनकी मेहनत का फल मिल गया और चाचा जैसे ही झड़ने वाले थे, उन्होंने चाची के मुँह में रस डाल दिया.
चाची को जैसे अमृत मिल गया, वो लंड को अपने मुँह में डाल कर हाथ से इतनी सिर से हिलाने में लगी थीं कि मानो एक भी बूंद आज अन्दर नहीं रहने देंगी.

शायद चाचा चाची के इतने जबरदस्त ब्लोजॉब के चलते एक बार में दो बार झड़ गए थे.
फाइनली चाची उनका पूरा लंड अपने मुँह के अन्दर लेकर गईं और फिर से चूसते हुए उसे बाहर निकाल दिया.

फिर चाची लंड को किस करके मुस्कुराने लगीं.
चुदाई खत्म हुई तो चाची ने अपने कपड़े पहने और चाचा ने अपना लोअर.

चाची फ्रेश होने चली गईं.

चाचा मेरे कान बोले- मजा आया देख कर?
तो मैंने कहा- बहुत ज्यादा. ये मुझे रोज देखना है.

चाचा मेरे दूध मसलते हुए बोले- ठीक है. अच्छा ट्रेन में क्या क्या सीखा?
मैंने कहा- बहुत कुछ, वो मैं आपको बाद में दिखाऊंगी.

चाचा ने मेरी चूची दबाते हुए मुझे किस कर लिया.
अब मुझे अपनी चूची दबाने में भी मजा आने लगा था.

खैर रात हुई, सबने खाना खाया.
उसी बीच चाचा ने मौका ढूंढ कर रात में एक राउंड मुझे फिर से चोदा.

मगर मुझे मलाई नहीं मिल रही थी तो मैंने चाचा के कान में कहा- मुझे आप मलाई क्यों नहीं देते?
वो बोले- अच्छा सुबह दूंगा.
मैंने कहा- ठीक है.

फिर हम सब सो गए.
अगले दिन हम लोग दिन भर ऊटी घूमे और कैंपिंग का सामान खरीदा.

फिर चाचा पास के ही छोटे सी आउटिंग के जंगल के गार्ड से बात कर आए कि हम लोग वहां कैंप लगा सकते हैं.
हम सब शाम को रूम में आए.

हमने अपना सारा कैंपिंग का सामान पैक किया और बाकी सामान रूम में छोड़ कर हम लोग कैंपिंग के लिए निकल गए.
शाम और ढल चुकी थी.

हमने दो कैंप लगाए.
हम सब बच्चों ने ढेर सारी लकड़ियां इकट्ठा की, फिर चाचा ने बोन फायर जलाया.

हम सब उसके आसपास बैठकर काफी देर तक अंताक्षरी खेलते रहे.
फिर हम सबने वहीं पर बैठ कर खाना खाया. खाने के बाद हम सब यहां वहां की बातें और खेलना कूदना करते रहे.

रात में 11 बजे चाचा जी ने कहा- चलो अब सोने का टाइम. सब लोग अपनी अपनी आइसक्रीम खत्म करो और अपने अपने कैंप में पहुंचो.
चाची और उनके दो बच्चे एक कैंप में चले गए.

मैं, मेरा भाई और चाची का छोटा बेटा, चाचा के साथ दूसरे में चले गए.

चाचा छोटे बेटे को सुलाने लगे.
कुछ देर में वो सो गया और भाई के दोस्त दूसरे कैंप में थे, तो वो भी तुरंत ही सो गया.

चाचा ने लाइट ऑफ कर दी और कैंप की चैन बंद कर ली. मुझे झट से अपनी गोद में उठा कर मेरी फ्रॉक निकाल कर फैंक दी.

क्योंकि मैंने पैंटी नहीं पहनी थी तो उन्होंने मुझे खड़ी किया और खुद बैठे रहे.
चाचा ने मेरी चूत में अपना मुँह घुसा दिया और अपनी जीभ से मेरी चूत खोलकर चाटने लगे.
मैंने धीरे से पूछा- चाचा जी, मैं अब वो आवाजें निकाल सकती हूँ.

वो बोले- हां, पर अभी धीरे से निकालना, अभी हो सकता है कि तेरी चाची जागी हुई हों.

चाचा मेरी चूत चाटने लगे और मैं आआह आआह उम्मम्म की आवाजें निकालने लगी क्योंकि मुझे चूत चटवाने में बहुत मजा आ रहा था.

फिर उन्होंने मुझे अपनी गोद में बिठाया और जोर जोर से किस करने लगे.
मैं भी उन्हें किस करने लगी.

वो मेरी चूचियां मसल रहे थे और मेरे निप्पल मींज रहे थे.
फिर वो मेरी चूत में उंगली डाल कर अन्दर बाहर करने लगे.
कुछ बार वो यही काम गांड में उंगली डाल कर करने लगे.

तभी मैंने पूछा- चाची, सूसू को चूत क्यों कह रही थीं?
वो बोले- वो उनकी सूसू का नाम है, तुम चाहो तो तुम भी रख लो.

मैंने कहा- तो मेरी सूसू का नाम भी चूत और आपकी सूसू का क्या नाम है?
वो बोले- लंड.

इतना कहते ही उन्होंने मुझे लिटाया और खुद मेरे ऊपर आकर अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया.

मेरी टाइट चूत के पूरे मजे चाचा जी सफाई के नाम पर ले रहे थे, पर अब मुझे भी मजा आ रहा था.
सफाई कहो या चुदाई, मुझे खूब मजे आ रहे थे.
अब तो चाचा का लंड छोड़ कर मेरा घर जाने का बिल्कुल मन नहीं था.

दस मिनट चोदने के बाद चाचा उठे, मुझे अपनी गोद में उठा कर उल्टा कर दिया और मेरी चूत चाटने लगे.
उनका लंड मेरे मुँह के सामने था तो मैंने उनका लंड पकड़ा और चूसने लगी.

कुछ पांच मिनट तक चाटने चूसने के बाद उन्होंने मुझे वैसे ही गोद में उठाया और खड़े खड़े चोदने लगे.
मैं उनके गले में हाथ डाले हुई लटकी थी और कमर में टांगें फंसाए हुई थी.

वो मेरी कमर और गांड पकड़ कर मुझे आगे पीछे करके मेरी चूत में अपना लंड घचाघच पेल रहे थे.
उनका लंड मेरी चूत के आखिर तक जा रहा था.

फिर वो बोले- चलो बाहर चलते हैं.
मैंने कहा- चाचा जी, बहुत अंधेरा है.
वो बोले- मैं हूँ ना … तुम क्यों डर रही हो?

मुझे दोबारा से अपनी गोद में उठाकर चोदते हुए टेंट से बाहर निकल गए.

वो टेंट से लगभग 400 मीटर दूर जाकर बोले- अब तुम यहां जैसी चाहो, जितनी चाहो और जितनी जोर से चाहो, आवाजें निकाल सकती हो.

मैंने खुश होकर उन्हें किस किया.
अब उनके धक्के और जोर से हो रहे थे.

मैं चिल्ला रही थी- आआहह आआह चाचा जी और जोर से साफ करिए.
चाचा ने मुझे अब घोड़ी बनाया और लंड को गांड में घुसा दिया.

मैं चीख पड़ी- आआह्ह … मैं मर गई.
चाचा ने कुछ नहीं सुना, वो धक्के मारने में लगे हुए थे.

कुछ देर बाद मुझे फिर से मजा आने लगा.
फिर चाचा ने मेरी एक टांग उठाई.
मैं पेड़ पकड़कर खड़ी हुई और चाचा मुझे चोदने लगे.

कुछ देर बाद उन्होंने मुझे अपनी तरफ घुमाया और मेरे मम्मे पीने लगे और मम्मे पीते हुए ही उन्होंने मुझे उठाया और लंड मेरी चूत में फिर से भर दिया.
वो मुझे बहुत जोर जोर से चोद रहे थे और मैं यही सब चिल्लाने में लगी थी- आआह आह आआह चाचा … आज मेरी चूत की अच्छे से सफाई कर दीजिए. पूरा अन्दर तक पेल दीजिए अपना लंड.

फिर उन्होंने मुझे घुटनों पर बैठने को कहा और अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया.

अब जैसे चाची ब्लोजॉब दे रही थीं, मैंने भी वैसे ही चाचा का लंड मुँह में रख कर जोर जोर से हिलाना शुरू कर दिया.
चाचा ने मेरा मुँह अपनी मलाई से भर दिया और बिल्कुल चाची की तरह मैं उनके लंड रस की एक एक बूंद चूस गई.

चुदाई के बाद हम दोनों कैंप में आ गए.
तीस मिनट बाद चाचा ने मेरी गांड में थूक लगाया और अपना लंड फिर से मेरी गांड में घुसा दिया.

कुछ देर लेट कर चुदने के बाद मैं उनके ऊपर बैठ गई और अपनी गांड उठा उठा कर चुदवाने लगी.
चाचा को Xxx गर्ल गांड चुदाई में मजा आ रहा था. उन्हें फ्री का सेक्स मिल रहा था. वो एकदम नई चूत का भोग लगा रहे थे जिसका लंड पूजन भी उन्होंने ही किया था.

चाचा ने कैंप में मुझे 5 बार चोदा. मेरी चूत एकदम सूज गई थी.

फिर अगली सुबह और उसके आगे क्या हुआ, वो मैं अगली कहानी में बताती हूँ.
मुझे [email protected] पर मेल करो, बताओ कि यह Xxx गर्ल गांड चुदाई कहानी कैसी लगी?
तब तक अपना आइटम हिलाते रहें.

Xxx गर्ल गांड चुदाई कहानी का अगला भाग: फॅमिली में खुली Xxx चुदाई का मजा