जेठ जी का जानदार लंड मिला-1

मेरी रंडी चूत की प्यास नहीं बुझ रही थी क्योंकि मेरे शौहर दुबई में थे. एक दिन घर मेरे जेठ जी और मैं ही थे. उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और …

नमस्ते दोस्तो, मैं चुदाई की दीवानी शबनम हाजिर हूँ एक नई कहानी लेकर।

मेरी पिछली कहानी थी: मामा जी ने चुत चुदाई की होली खेली

फिर से मेरी चूत में खुजली हुई और मैंने अपने जेठ का लंड ले लिया. इसी घटना को कहानी के रूप में प्रस्तुत कर रही हूं.

मैं उम्मीद करती हूं कि आप भी इसका मजा लेंगे. मेरी रंडी चूत की प्यास की कहानी में मज़ा आया या नहीं, मुझे अपना फीडबैक जरूर भेजें. अभी फिलहाल कहानी पर चलते हैं.

तो दोस्तो, इस बार मैं अपने जेठ से चुद गई थी।

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बात तब की है जब मैं अपने ससुराल कोटा गई थी और मेरे शौहर अहमद दुबई में थे। ससुराल में मेरे साथ मेरे जेठ जेठानी थे।

मेरी जेठानी की डिलीवरी होने वाली थी और मेरे सास ससुर रिश्ते की शादी में शामिल होने गए थे तो अहमद ने मुझे जेठानी की देखभाल के लिए ससुराल में छोड़ दिया था।

उनकी डिलीवरी होने वाली थी। कुछ दिन बाद मेरी जेठानी को अस्पताल में भर्ती किया गया। उन्होंने अपनी अम्मी को बुलवा लिया था और उनकी अम्मी अस्पताल में रुक गई थी।

घर में मैं और जेठ जी ही रह गए थे। एक दिन मैं बाथरूम से नहा कर बाहर आई. मेरे जेठ सामने सिर्फ कच्छे में खड़े थे.

उन्हें सामने देखकर मैं एकदम सकपका गयी. मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि बाहर वो खड़े होंगे.

मैं सिर झुकाए उनकी बगल से जाने के लिए निकली, मगर उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया. मैंने हाथ छुड़ाने की भरपूर कोशिश की मगर मैं नाकाम रही.
उन्होंने कहा- बहू, आज तेरा गोरा सुन्दर जवान बदन देख कर मन पर काबू नहीं हो पा रहा है. चल कमरे में चल ना मेरे साथ?

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मेरे शौहर घर में नहीं थे और मेरे जिस्म में काम की ज्वाला जल रही थी. फिर भी मैंने लोक-लाज और संस्कारों से प्रेरित होकर मद्धम आवाज में उन्हें समझाने की कोशिश की- जेठ जी, ये पाप है और मेरे शौहर घर पर नहीं हैं. प्लीज मुझे छोड़ दो.

उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींचते हुए कहा- तू ऐसे मत शर्मा … मुझे पता है कि तू मेरी बात मानेगी.

इतना कहकर वो मेरे बहुत करीब आ गये और मेरे होंठों को होंठों से चूमने लगे.

फिर मैं भी मर्द का स्पर्श पाकर गर्म होने लगी और मैंने होंठ खोलकर उनका साथ देना शुरू कर दिया.

वो मेरे होंठों का रसपान करने लगे और फिर अपने हाथों से मेरे ब्लाउज़ के तीनों बटन खोल दिए. मैं चिल्ला भी नहीं सकती थी … क्योंकि सब यही समझते कि चुदने के बाद नाटक कर रही है.

मेरी स्थिति बहुत अजीब हो गयी थी. उनकी हथेलियां मेरे चूचों पर फिसलने लगी थीं. मेरे स्तन टाइट होने लगे थे.

फिर अपने बाएं हाथ से जेठ जी मेरे चूचे मसलने लगे और उनका दायां हाथ मेरे पेटीकोट के अन्दर घुस गया था.
अब मेरा दिल जोर जोर से धड़कने लगा.

इससे पहले कि मैं उन्हें फिर से मना करती तब तक मेरी भरपूर जवानी की उठान उनकी हथेली में कैद होकर रह गयी थी.
वो मेरी छाती पर उभरे यौवन को स्पंज की तरह धीरे धीरे दबाने लगे।

मैं सिसकारियां लेने लगी- आह आह … ओह छोड़ दो … न न ना … जेठ जी … आह्ह प्लीज … दर्द हो रहा है जेठ जी।
उन्होंने मुझे बिस्तर पर गिरा दिया और मेरे ऊपर चढ़ गए और मेरे होंठों को चूमने-चाटने लगे।

वो मेरे पेट को सहलाते हुए बोले- शबनम, क्या चिकना बदन है मादरचोद!
वो मेरी पैंटी में हाथ डालकर मेरी चूत सहलाने लगे।

मेरी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया. जेठ जी की मोटी उंगली के चलने से मेरी चूत मचलने लगी थी.

मेरे स्तन बार बार ऊपर नीचे होने लगे थे. सांसें धौंकनी सी चलने लगी थीं. मुझ पर वासना सवार होने लगी थी. अब मुझे भी बहुत मजा आने लगा था.

अब मैं और तेज आवाज़ में सिसकार रही थी. थोड़ी देर बाद मैं काफी गर्म हो गई और अब खुद ही चुदने के लिए बेताब हो उठी.

मैंने उनसे कहा- जेठ जी अब सहन नहीं हो रहा है, मेरी प्यास बुझा दो ना!
वे बोले- तू चिंता मत कर बहनचोद, अभी तेरी प्यास बुझाता हूँ, जल्दी से नंगी हो जा मादरचोद!

जल्दी से मैंने उनका कहा मानते हुए साड़ी उतार दी और मैं ब्लाउज़ और पेटीकोट में आ गई।
मैंने अपने ही हाथों से अपने मम्मों को निचोड़ना शुरू कर दिया और सिसकारी लेने लगी- आहह … ओहहह … आह आह।

वे अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ने लगे।
जेठ जी का लंड भी उनके जैसा ही मस्त था. मेरे शौहर अहमद के लंड से ज्यादा लंबा और मोटा था.

उधर से अब मैं पेटीकोट में हाथ डालकर चूत को सहलाने लगी और बोली- आह्ह … जेठ जी क्या मस्त लंड है आपका. चोद दो ना इससे मेरी चूत को … आह्ह … इसका स्वाद दे दो मेरी भट्टी को।
कहते हुए मैंने अपना ब्लाउज़ और पेटीकोट भी उतार दिया और पूरी नंगी हो गई।

उनका लंड मेरी चूत को खोदने के लिए तैयार हो गया था।
मैंने लंड को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया और वे मम्मों को सहलाते हुए बोले- चूस छिनाल … चूस!

वे बेदर्दी से मम्मों को निचोड़ते हुए अपना लंड चुसवा रहे थे.
मैं उनके लंड को अपने चूचों के बीच में दबाकर रगड़ने लगी.
वो मेरे मुंह में उंगली डालकर चुसवाने लगे.
मुझे बहुत मजा आ रहा था.

फिर उन्होंने मुझे अपनी गोद में बिठा लिया और मेरे मम्में दबाने लगे।
उनका लंड मेरी चूत और गांड से रगड़ने लगा। मैं अपनी कमर हिलाने लगी और अपने पुट्ठों से लंड को सहलाने लगी।

उन्होंने मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया।

मैंने उनके मुंह में जीभ डाल दी। उन्होंने मम्मों को निचोड़ना शुरू कर दिया और मैं अंदर ही अंदर उनकी जीभ को चूसते हुए सिसकारियां लेने लगी- उम्म … हूं … हूंम्म … उम्म … मुच पूच … उम्म आह।

उन्होंने मम्मों को खूब दबाया और फिर उन्होंने मुझे गोद में लेकर बिस्तर पर गिरा दिया और मेरे ऊपर चढ़ गए।
उन्होंने मम्मों को दोनों हथेलियों में भींचकर निचोड़ना शुरू कर दिया और मैं जोर से सिसकारने लगी.

अब मेरी चूत को लंड से और दूरी बर्दाश्त नहीं हो रही थी. मैं नीचे से खुद ही अपनी चूत को उनके लंड पर रगड़ने लगी.
लंड को चूत का अहसास करवाने लगी कि जल्दी से जेठ जी मेरी चूत में लंड डालने के लिए मचल जायें.

मगर जेठ जी पूरे हरामी थे; जानबूझकर मेरी चूत को लंड के लिये प्यासी रख रहे थे.
मैं अब नहीं रुक सकती थी.

मेरी हालत देख वो मेरी चूत में तेजी से उंगली करने लगे.

मेरी चूत पूरी पनियायी हुई थी. उनकी उंगली मेरी चूत को चोद रही थी और चूत से पच पच की आवाज हो रही थी.
मैं अब पागल हो गयी थी और गिड़गिड़ाने लगी- आह्ह .. ओह्ह … चोद दो … अब सहन नहीं हो रहा है … आह्ह प्लीज मुझे चोद दो जेठ जी!

उन्होंने मेरी टांगें फैलाईं और जाँघों पर चांटे मारने लगे। चांटे मार मार कर उन्होंने मेरी गोरी जांघों को लाल कर दिया और चूत को चूमने चाटने लगे।
अब वो मेरी चूत को जैसे खाने को हो रहे थे. इतनी शिद्दत से मैंने किसी मर्द को चूत चूसते हुए नहीं देखा था.

मैं बिस्तर पर फड़फड़ाने लगी। जेठ जी मेरी चूत का कोना कोना चाट रहे थे और मम्मों को निचोड़ रहे थे।

अहमद मेरी चूत को कभी नहीं चाटता था. अब मेरी सारी इच्छाएँ पूरी हो रही थीं. कुछ देर उन्होंने मेरी चूत को चाटा और खाया और फिर अपने लंड का सुपारा मेरी चूत पर रगड़ने लगे.

अब मेरी हालत बहुत खराब हो गयी थी. मुझे जेठ जी पर गुस्सा भी आने लगा था. इतनी देर से मैं लंड मांग रही थी और वो मेरी चूत को ऐसे ही तरसा रहे थे.

मैं हाथ जोड़कर मिन्नतें करती रही पर उन्होंने लंड को चूत में नहीं घुसाया। मैं चूत समेत उछलती रही पर वे नहीं माने और थोड़ी देर बाद मेरा बदन ऐंठने लगा और मैं बिना लंड से चुदे ही झड़ गयी.

अब मैं हांफने लगी और बोली- जेठ जी … आपने तो ऐसे ही मुझे झाड़ दिया. मुझे लंड से चुदना था।
उन्होंने मेरी गर्दन पकड़ी और मेरे गालों पर चांटे मारने लगे।

वे मुझे बिस्तर पर पटक कर बोले- अरे मादरचोद कुतिया, अभी तो चुदाई की शुरुआत हुई है, अब मेरे लंड को चूसने के लिए तैयार हो जा हरामजादी।

जेठ जी अपने मोटे लंड को धीरे धीरे सहला रहे थे. मैं जैसे ही उनके निकट पहुंची, उन्होंने बैठे बैठे ही मुझे अपनी गोदी में खींच लिया. मैं उनकी नंगी जांघ पर बैठ गयी.

इस बार मेरा मुँह उनकी तरफ था. वो फिर से मेरे होंठ चूसने लगे, मगर मैं उनका कड़क लंड चूसने के लिए मरी जा रही थी.
मैं उनकी गोद से उतर गयी और फर्श पर उकड़ू बैठ गयी. मैं उनके शांत चेहरे को कामवासना के वशीभूत होकर देखने लगी.

वो शायद मेरे मन की बात समझ गए.
उन्होंने मेरे सिर पर प्यार से हाथ फेरा और कहा- बहू, आगे बढ़ और अपनी इच्छा पूरी कर ले.

बस अनायास ही मेरे होंठ उत्तेजना और शर्म के मारे कांपने लगे और इसी कश्मकश में पता नहीं कब, मैंने उनके अंडे जैसे बड़े गुलाबी सुपारे को मुँह में ले लिया.

मेरा हाल उस कामुक कुतिया की तरह हो गया था जो सीज़न आने पर अपने छोटे साइज की परवाह न करते हुए खुद ही कुत्तों की कमर पर चढ़ने लगती है.

जैसे जैसे मेरी जीभ उनके लंड पर नाचती गयी वैसे वैसे उनका लंड और ज्यादा फूलकर एक मोटे तंदुरूस्त साढ़े सात इंच लम्बे लौड़े में तब्दील होता चला गया.
मैं उनके चहरे के हाव-भाव देख रही थी और वो मेरी जुल्फों से खेल रहे थे.

उन्होंने कामातुर होकर अपने सिर को सोफे पर टिका लिया था. उन्होंने अपनी दोनों मोटी जांघें फैला ली थीं. मैंने उनका मांसल लौड़ा पकड़ कर उठाया और उनके सुन्दर आंड चूमने शुरू कर दिए. जेठ जी भी मेरी ही तरह सी … सी … करने लगे.

उनकी बंद आंखों से लग रहा था कि वो बहुत आनंदित महसूस कर रहे हैं. हम दोनों बेफिक्र होकर सेक्स के मजे ले रहे थे.
उनका सिर्फ एक तिहाई लौड़ा ही मेरे मुँह में समा पा रहा था।

वे बोले- वाह हरामजादी वाह … क्या बात है, साली तू तो काफी मजेदार तरीके से लंड चाटती है, अहमद को तो मजा आता होगा बहुत!
मैं लंड को हाथ से रगड़ते हुए बोली- अरे जेठ जी, उनका लंड तो आपके लंड से आधा भी नहीं है. और जब भी मैं उनका लंड चाटती हूं तो वे जल्दी झड़ जाते हैं।

जेठ जी बोले- तू चिंता मत कर मादरचोद कुतिया, मैं जल्दी नहीं झडूंगा, तू तो जी भरकर लंड चाटती रह!
मैंने लंड को चाटना शुरू कर दिया। फिर मैं लंड को मुँह में लेने लगी।
लंड काफी मोटा था. मैंने पूरा मुँह खोला और लंड को मुंह में डालने लगी।

वो बोले- शबनम … आह्ह … रंडी … कोशिश कर … हराम की जनी … साली!
मेरा मुँह फटा जा रहा था परंतु मैंने आधे से ज्यादा लंड को मुंह में डाल लिया था।
फिर मैंने धीरे धीरे लंड को चूसना शुरू कर दिया।

जेठ जी बोले- शबनम, मादरचोद कुतिया, पूरा लंड मुँह में डाल!
मैंने लंड मुँह से निकाला और बोली- प्लीज जेठ जी, लंड काफी मोटा और लंबा है, मुँह में पूरा नहीं घुस पायेगा!

वे बोले- अरे मादरचोद रांड, अभी मैं तेरे मुँह में पूरा लंड डालता हूँ, तू देखती जा।
उन्होंने मुझे बिस्तर पर पीठ के बल गिरा दिया और मेरे सिर को बिस्तर से नीचे लटका दिया।

मैंने मुंह खोला और वो लंड मेरे मुँह में सरकाने लगे।
लंड मेरे मुँह में समाता जा रहा था और मेरा मुँह फटा जा रहा था।
मैं बिस्तर पर फड़फड़ाने लगी लेकिन उन्होंने मम्मों को पकड़कर मुझे दबोचा हुआ था और मैं बेबस हो गई थी।

मेरे देखते देखते उनका लंड मेरे मुँह में गले तक पूरा घुस गया और उनके अंडे मेरे माथे से चिपक गए।
मैं अपने हाथ पांव पटक रही थी लेकिन उन्होंने मुझे दबोच कर रखा था।

मेरी सांस रुकने लगी और मेरी आँखों में आँसू आ गए।

थोड़ी देर बाद उन्होंने मेरे मुँह से लंड निकाला और बोले- कैसा लगा मादरचोद?
मैं अपने आँसू पौंछ कर बोली- बाप रे … आपने तो मेरी जान निकाल दी।

वे बोले- अरे मादरचोद रांड, अभी तेरी जान नहीं निकलेगी।
मैं लंड को चूसने चाटने लगी और वह मेरे मम्मों को निचोड़ने लगे। मैं उनकी गांड चाटने लगी और उनके अंडे चूसने लगी।

फिर मैं कुतिया बन गई और उनके लंड को चूसने चाटने लगी।
वो मेरे मुँह में लंड रगड़ने लगे.
उन्होंने रफ्तार बढ़ा दी और वो तेजी से मेरे मुंह को चोदने लगे.

मेरी सांस फिर से रुकने लगी.
उनका लौड़ा तेजी से मेरे मुंह के अंदर बाहर हो रहा था.

थोड़ी देर बाद वो एकदम से थमते चले गये और मेरा मुँह उनके वीर्य से भर गया।
वे बोले- वाह हरामजादी … वाह क्या बात है, चल अब पूरा माल गटक जा मादरचोद!

मैं पूरा वीर्य गटक गई और उनके लंड को प्यार से चाटने लगी.
चाटने के बाद मैं बोली- वाह जेठ जी … क्या गर्मा गर्म वीर्य था. मजा आ गया।

वे मेरे बालों को सहलाते हुए बोले- शबनम, अभी तो शुरूआत है मादरचोद, अभी तो तुझे और मजे करने हैं. अभी तूने वीर्य को चखा है मादरचोद, अब मेरा पेशाब का स्वाद चख ले कुतिया।

मैं बोली- हाँ जेठ जी, मुझे आपके पेशाब का स्वाद भी चखना है. जल्दी से मुझे पेशाब पिलाओ।
उन्होंने मेरे मुँह में लंड डाल दिया और पेशाब करने लगे।

वे बोले- पी साली कुतिया, पूरा माल गटक जा मादरचोद रांड।
मैं पूरा पेशाब पी गई और बोली- वाह जेठ जी … क्या गर्मागर्म पेशाब था मजा आ गया।

जेठ जी बोले- शबनम मादरचोद … अब तुझे चोदूंगा हरामजादी।
मैं बोली- जेठ जी थोड़ी देर रुक जाइये, मैं आपको एक प्रोग्राम दिखाती हूँ।

वे बोले- तू क्या करेगी?
मैं उठी और नंगी ही उनके सामने नाचने लगी।
वो बोले- ओह्ह तू मुजरा भी करती है!! ठीक है, नाच मेरी जान।

नाचते हुए ही मैंने तेल की शीशी उठा ली और अपने बदन पर लगाने लगी.
थोड़ी देर बाद मेरा बदन तेल में भीग गया था और चमक रहा था.

फिर मैंने अपने मम्मों को मसलना शुरू कर दिया। मैं खुद ही अपनी चूत में उंगली डालती और चूस लेती।
मैंने देखा कि उनका लंड तैयार हो गया था।

मैं बिस्तर पर गयी और उनके लंड को अपने मम्मों के बीच में दबा कर रगड़ने लगी।
मैंने अपने मम्मों से उनके बदन की मालिश कर दी।

वे बोले- वाह शबनम … मज़ा आ गया मादरचोद, अब तेरी जवानी को चखना है हरामजादी।
उन्होंने उठ कर मुझे दबोच लिया और मेरे होंठों को कसकर चूमने लगे।

उनके हाथ मेरी चूत को सहलाने लगे और मैं गर्म हो गई और सिसकारी लेने लगी- इस्स … आह्ह … जेठ जी … अबकी बार मुझे इतनी प्यासी मत करना, जल्दी से अपना लंड मेरी चूत में डाल दो और इसकी प्यास बुझा दो.

वो बोले- हां मादरचोद, अब तू चुदने के लिए तैयार हो जा. तेरी चूत बहुत देर से फड़फड़ा रही है. मैं जानता हूं कि ये लंड लिये बिना शांत नहीं होगी. इसलिए अब मैं तेरी चूत पर अपने लौड़े की चोट करने जा रहा हूं.

वो नंगे ही मेरे ऊपर चढ़ गए और अपने घुटनों से उन्होंने मेरी जांघें चौड़ी कर दीं।
फिर उन्होंने अपना लंड मेरी चूत पर रखा और कहा- शबनम, बहनचोद! लंड घुसवाने के लिए तैयार हो जा रंडी।

मैं बोली- जेठ जी प्लीज धीरे धीरे घुसाना. मैं आपकी बहू हूँ।
जेठ जी लंड का धक्का देने लगे. मेरी छोटी सी गर्म प्यासी चूत पर जैसे ही जेठ जी ने अपना मोटा सुपारा रखा, मेरी चूत फैलती चली गयी.

मुझे ऐसा लगा कि कुछ मोटी सी चीज मेरी चूत को फाड़ती हुई अंदर सरकती जा रही है और मेरे पूरे बदन में बेचैनी सी फैल गयी. उनका सुपारा मेरी चूत में प्रवेश कर चुका था.

आपको मेरी चुदाई की मेरी रंडी चूत की प्यास कहानी पसंद आ रही होगी. तो मुझे मैसेज या कमेंट्स में जरूर लिखें. Antarvasna Audio Story सुन कर मजा आया या नहीं?

अगले भाग में मैं बताऊंगी कि कैसे मैंने जेठ जी का लंड लिया और हम दोनों को कैसा मजा आया.
मेरा ईमेल आईडी है
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मेरी रंडी चूत की प्यास की कहानी का अगला भाग: भाभी की गांड चुदाई

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